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राना लिधौरी

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*ग़ज़ल-रुला देते हैं*इस तरह लोग मोहब्बत में दगा देते हैं।दिल को तड़पाते है और रुला देते हैं।।वोट की खातिर गधों को भी मना लेते हैं।जीत के बाद ही जनता को भुला देते हैं।।वो तो हैवां हैं जो इंसां की मदद क

*बुंदेली दोहा बिषय- गुदना*गुदनारी गुदना गुदे,गोरी के ही गाल।गोला गरे बना रई,गोरी भई गुलाल।।***16-5-2022*© राजीव नामदेव "राना लिधौरी" टीकमगढ़*           संपादक- "आकांक्षा"

ग़ज़ल- याद आने लगे है-मुझे वो बहुत याद आने लगे है।वो सपनों में आकर सताने लगे है।।मुहब्बत थी जिनको बहुत हमसे कल तक।वो अब दूर रहकर सताने लगे है।।निकट तो अभी वो नहीं आते मेरे।मगर ख़त मुझे अब लिखाने लगे ह

राना का नज़राना (ग़ज़ल संग्रह)ग़ज़लकार- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'सन्-2022 मूल्य-50 पेज-62अनुक्रमणिका-1- बहुत दिन गुजर गये2-ज़िन्दगी साकार है3- ये असर देखा-4- मुलाकात होगी-5-क्या दिया आपने-6-आप क्यों-

*पिरामिड कविता-*


लो

माह

कातिक

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