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सो सतगुरु जो नाम दिवाना

12 मार्च 2022

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रविन्द्र सिंह पंवार की अन्य किताबें

Singh 1234

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परमार्थी बानी जो की भेद भरी है, उसकी इतनी गहरी, बारीक, सटीक लेकिन सरल व्याख्या किसी विद्वान के बस की बात नही है। यह अवश्य ही लेखक के सतगुर की दया है। इसे बार बार पड़ने को दिल करता है

2 अप्रैल 2022

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रचनाएँ
संत गोविंद साहिब
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यह पुस्तक अयोध्या के विख्यात संत गोविन्द साहिब की जीवनी और उपदेश से सम्बंधित है l पुस्तक में गोविन्द साहिब द्वारा रचित पदों की सरल ब्याख्या एवं अन्य संतों की वाणी से तुलनात्मक अध्ययन समाहित किया गया है l
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समर्पण

29 मार्च 2022
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जिसने जगत की घोर दलदल से उठाया, जिसने सबल सहारा देकर जगाया,  जो हर सांस में अपनी उपस्थिति का एहसास देता है, ऐसे मेरे सतगुरु ‘हजूर’ के चरणों में... ****  बलिहारी सतगुरु एक अपना ।। खुलो कपाट दरस द

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प्रस्तावना

12 मार्च 2022
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अयोध्या की पावन धरती पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी का अवतरण हुआ था । इस भू-क्षेत्र में अनेक महापुरुषों ने जन्म लिया है अथवा इस क्षेत्र को भक्ति साधना के लिए चुना है । हम सब जानते हैं कि अयोध्

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जीवन परिचय

12 मार्च 2022
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पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के विशाल भू-क्षेत्र में गोविन्द साहिब एक प्रख्यात पूर्ण संत के रूप में जाने जाते हैं । गोविन्द साहिब का जन्म अगहन मास, शुक्ल पक्ष की दसवीं, दिन मंगलवार संबत 1785 तदनुसार

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उपदेश

12 मार्च 2022
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प्रभु परमेश्वर संतजन हमें यही समझाते आए हैं कि यह सृष्टि अपने आप पैदा नहीं हुई । सूर्य, चन्द्रमा, पृथ्वी और अनेक ग्रह और उपग्रह और इनकी गतिविधियाँ चल रही हैं । असंख्य जीवों का जन्म लेना और मरना, हवा

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चोला में अजब तमासा है

12 मार्च 2022
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सभी संत-महात्माओं ने इस मनुष्य शरीर की महिमा की है । वेद-पुराणों में मानव शरीर को नर नारायणी देह कहा है जबकि गुरु साहिबान ने इसे ‘हर मंदिर’ कहा है । बाइबिल में इस शरीर को ‘जीवित खुदा का मंदिर’ कह कर स

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सो सतगुरु जो नाम दिवाना

12 मार्च 2022
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परमपिता परमात्मा को किसी ने देखा नहीं है । वह निराकार, अरंग, अरूप और अदृष्ट है । संसार सागर में भटकते हुए जीव की कोई सामर्थ्य नहीं है कि उस प्रभु को जान सके । जब से जीव परमात्मा से अलग होकर इस दुखी दु

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चेतावनी

15 मार्च 2022
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संत-महात्माओं की वाणी में ‘चेतावनी’ एक प्रमुख विषय है । जीव जन्मों-जन्मों से माया के हाथ में ठीक उसी प्रकार नाच रहा है जिस प्रकार मदारी के हाथ में बन्दर नाचता है । संसार के जीव अपनी मृत्यु को भूलकर शक

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शीश पर पैजनियां बाजै

15 मार्च 2022
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सभी पूर्ण संतों ने नाम या शब्द की बहुत महिमा की है । साधारणत: लिखे जाने वाले अक्षर या मुख से उच्चारण किए जाने वाले अक्षरों को ‘शब्द’ समझा जाता है । ‘उच्चारण किए जाने वाले शब्द’, लिखे या पढ़े जाने वाले

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किले का विजेता

15 मार्च 2022
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बहुत से संतों ने इस शरीर को एक किला या नगर कहा है । शरीर रुपी किले का मालिक या बादशाह आत्मा है लेकिन इस किले पर मन रुपी व़जीर का अधिपत्य है । हमारी आत्मा युगों-युगों से मन के अधीन होकर गुलामी की जंजीर

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सहज समाधि

15 मार्च 2022
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संतमत के अनुसार सहज एक अत्यंत निर्मल आध्यात्मिक अवस्था है जिसमें आत्मा मन-माया के बंधनों से मुक्त होकर, त्रिकुटी की सीमा को पार करके अपने मूल स्वरुप में आ जाती है । जब साधक सतगुरु के उपदेशानुसार निरंत

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विरह और प्रेम

15 मार्च 2022
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विरह और प्रेम परमार्थ का मेरुदंड है । जबतक जीव के अन्दर प्रभु परमेश्वर के लिए सच्ची विरह और तड़प पैदा नहीं होती तब तक उसका प्रभु के साथ मिलना असंभव है । यहाँ एक समस्या है- जीव करोड़ों युगों से मन-माया क

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चंचरीक

15 मार्च 2022
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यह प्रेम और विरह का ही विस्तार है । ‘चंचरीक’ शब्द का अर्थ है भ्रमर या भौंरा । भ्रमर फूलों से मकरंद चूसने का शौक़ीन होता है, वह कमल के फूल में बैठकर उसके मकरंद का रसास्वादन करता रहता है । संध्या होने पर

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पहाड़ा

15 मार्च 2022
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अनेक संतों ने जन-साधारण के लिए अपना उपदेश सरल और सुपाठ्य बनाने के लिए कभी महीनों (बारहमाहा या बारहमासी), कभी तिथियों, कभी वर्णमाला, कभी गिनती और कभी पहाड़े के माध्यम को अपनाया है । इन सभी माध्यमों का क

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ज्ञान तोप

16 मार्च 2022
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गोविन्द साहिब ने ‘ज्ञानतोप’ शीर्षक के तहत कुछ छंदों, दोहों, छप्पय पदों और कुंडलियों की रचना की है । ज्ञान तोप से भाव है – ‘आध्यात्मिक ज्ञान की तोप’ । ऐसा सन्देश जिसके माध्यम से संतमत के गूढ़ रहस्यों को

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सत्य-सागर

16 मार्च 2022
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गोविन्द साहिब ने ‘सत्य सागर’ शीर्षक के अंतर्गत अनेक दोहों और छप्पय की रचना की है । इस प्रसंग में आपने सत्य क्या है?, सत्य की खोज, सत्य की खोज का माध्यम और सत्य की पहचान पर विस्तृत उपदेश दिया है । सार

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अलिफनामा

16 मार्च 2022
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अन्य अनेक संतों की भांति गोविन्द साहिब ने ‘अलिफनामा’ की रचना की है ।संतों ने कभी महीनों, कभी दिनों, कभी वर्णमाला के अक्षरों को माध्यम बना कर उपदेश दिया है । अलिफनामा में उर्दू भाषा के अक्षरों को माध्य

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हिंडोलना

16 मार्च 2022
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हिंडोलना का शाब्दिक अर्थ है ‘झूला’ । अक्सर सावन के महीने और बसंत ऋतु में झूला झूलने का प्रचलन है । लम्बी रस्सी से बंधे हुए झूले पर बैठकर लोग ऊंचाई तक हवा में झूल कर रोमांच का अनुभव करते हैं । अक्सर कि

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विजय दशमी

16 मार्च 2022
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हिन्दू समाज में ‘विजया दशमी’ तिथि का बहुत बड़ा महत्व है । अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को दशहरा उत्सव मनाया जाता है ।यह एक विजय दिवस के रूप में मनाया जाने वाला त्यौहार है । कहा जाता है कि इ

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आरती

16 मार्च 2022
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संसार के लोग कई प्रकार से ज्योति जलाकर आरती करते हैं । आरती का समाज में बड़ा महत्व है । किसी भी शुभ कार्य में, घरों और धर्मस्थानों में संध्याकाल में तथा पवित्र माने जाने वाली नदियों की भी आरती उतारी जा

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होरी

16 मार्च 2022
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होली रंगों का त्यौहार है । लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं तथा हर्ष और उल्लास के साथ गले मिलकर प्रेम का इज़हार करते हैं । अनेक संत-महात्माओं ने होली को आधार बनाकर वाणी की रचना की है जिनमें बाहर के रंगों

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बसन्त

17 मार्च 2022
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बसंत का मौसम बड़ा सुहावना होता है तथा इसको सभी मौसमों में अच्छा माना जाता है । पेड़ों के पुराने पत्ते झड़ जाते हैं और उनमें नई कोपलें निकल आती हैं । हर तरफ विभिन्न प्रकार के फूलों की बहार होती है । गर्मी

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विविध वाणी

17 मार्च 2022
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उपरोक्त सभी प्रसंगों में अनेक विषयों पर हम गोविन्द साहिब की वाणी पर विचार करके आए हैं । आपने बहुत से फुटकल शब्दों, साखियों, छप्पय और सवैयों की भी रचना की है जिनको किसी विषय से सम्बद्ध नहीं किया है ।इस

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कुछ चयनित साखियाँ (दोहे)

17 मार्च 2022
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कला दिखावै अमित प्रभु, भला मचा मैदान । जय गोविन्द गुरु ज्ञान को, को करि सकै बयान ।।                                                                           (साखी-6) अगम अगोचर पंथ है, पहुंचे विररा

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उपसंहार

17 मार्च 2022
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यदि गोविन्द साहिब की समग्र वाणी और उपदेश पर विचार किया जाए तो सिद्ध होता है कि आप गुरु नानकदेव जी, कबीर साहिब, गुरु रविदास जी, दादू साहिब आदि अनेक महापुरुषों की भाँति नामभक्ति द्वारा सुरत-शब्द की साधन

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