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सरफिरा लेखक सनातनी

सरफिरा लेखक सनातनी

4 अध्याय
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नमस्कार,, यहां एक पुस्तक केवल शब्दो को दर्शाती। किन्तु हमे ये देखना है कि पुस्तक के अंदर है क्या और समझना है हर एक कविता को। सच तो ये है हमारे जीवन को आधा बदल देती हैं ये किताब। जैसे धर्म के लिए शस्त्र उठना चाहिए वैसे ही इतिहास और रिश्तों को जानने के लिए अच्छी अच्छी किताब पढ़नी चाहिए। मैने किताब मेे लिखा है जो अपनी मां को छोड़ देते हैं जो पिता से नाता तोड देते है वे कौन होते है वे कौन होते है। एक एक कविता के अंदर मां होगी पिता होगा सच मानो तो हमारे समझ आएगा मात पिता एक अनमोल खजाना है। इतिहास से जुड़ी बाते आप को पढ़ने के लिए मिलेगी। जिस को हम भूल रहे हैं चाहे वो इतिहास हो या परिवार वो हमारे लिए अपराध के लायक है। जिन महान पुरषों ने अपना बलिदान दिया जिन को जेलों मेे मार दिया गया आज हम भूल चुके हैं वो इतिहास वो बाते मेरी किताब आप सब को ये बताएगी। धन्य है वे माए जिन के बेटो ने बलिदान दिया धन्य है वे पिता जिस ने अपने दोनो कंधों को सीमा पर भेज दिया। ये सरफिरा लेखक सनातनी केवल नाम ही नहीं है ये एक सत्य की और लेे जाने वाली पुस्तक है। सरफिरा लेखक सनातनी ✍️🙏  

sarfira lekhak sanatani

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पुस्तक के भाग

1

कोई मुझे मेरे बाबू जी के घर छोड़ दो

3 अगस्त 2022
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कोई मुझे मेरे बाबू जी के घर छोड़ दोजो घर मेरी मां के लिए बनाया थाजिसमें हम भाई-बहन ने छोटा सा सपना सजाया था। उस घर की बुनियाद से हमें जोड़ दोकोई मुझे मेरे बाबूजी के घर छोड़ दो। उस घर की दीवा

2

जिंदगी कम सी लगी मुझे

3 अगस्त 2022
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जिंदगी यूं ही कम सी लगी मुझेमां के बिना थम सी लगी मुझे। जिंदगी में अकेला नहीं था कभीमां बिन जिंदगी गम सी लगी मुझे। लगी मुझे जिंदगी डूबते तिनके की तरहमेरे सर का सहारा रूठ गया मुझ से।&n

3

मिट्टी को गांव कहते है

3 अगस्त 2022
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मैं उस मिट्टी में पला हूं जिस मिट्टी को गांव कहते हैंघनघोर बादल जब छा जातेछोटे बच्चे उसे शाम कहते हैंबारिश में बनाकर कागज का खिलौनाजिसे हम नदी की नाव कहते हैं!!हम बड़े हुवे वो मिट्टी छूट गईकागज क

4

मेरी कलम

6 अगस्त 2022
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मेरी कलम आज उदास लगने लगी हैपिता का दर्द लिखते लिखते रोने लगी हैरोने लगी है मा की हर पुरानी बात परमा की बिंदी पिता का कुर्ता लिखते लिखते रोने लगी है। 🍂मेरी कलम के अंदरपिता के कर्ज की सहाई हैकैसे ना ल

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