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सुख-दुःख का चक्र

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सब मिट्टी से पैदा होकर उसी में मिल जाता है। राजा हो या रंक सबका अंत एक-सा होता है।। काम बिगड़ते देर नहीं बनते देर लगती है। मृत्यु गलतियों पर नकाब डाल देती है।। कभी के दिन तो कभी रात बड़ी होती है

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