हमारी बहन 9 साल की थी और हम 4 साल के होंगे। बहन की सहेली के घर ट्रेन में बैठकर चले गए उसकी छोटी बहन को खिलाने। फिर वह हमकों रेल में बिठाने आई। हम घर वापस आ गए जो शहर में था। जब मम्मी को दूसरे दिन पता चला तो मम्मी ने हमको डाटा। जब हम कुछ समझदार हुए तो सहेलियों के घर भी चले जाते थे। एक दिन हम सहेली के घर चले गए और उसके घर से अपने घर वापस आने लगे तो घर का रास्ता भूल गए। क्योंकि वहां पर हम पहले कभी नहीं गये थे। वहां एक भिश्ती नाली में पानी डाल रहा था। उसी से रास्ता पूछा। उसी ने हमको हाथ घुमाकर उँगली से रास्ता बता दिया। गली को पार करते ही हम सड़क पर आ गए यह सड़क हम पहचानते थे जो हमारे घर को जाती थी और सीधे भागते हुए घर आ गये।
तब हम तीसरी कक्षा में थे। हमारे स्कूल में जामुन का पेड़ था। बरसात में हम जल्दी जाकर जामुन बीनते थे। और लड़कियां भी जामुन बीनती थी। हम नीचे मुँह करके जामुन बीन रहे थे कि अचानक मेरी नाक पर एक साबुत ईट आकर लगी और मुँह भन्ना गया। तभी उस लड़की ने (जिसने ईंट मारी थी) मेरे मुँह में बड़ा सा एक जामुन रख दिया। और मेरे गले में हाथ डालकर अपने साथ ले गयी। जब हम तीसरी क्लास में पढ़ते थे उस समय हमें रस्सी कूदना बहुत अच्छा लगता था। हम अपनी चारपाई (खटिया) से रस्सी निकाल कर ले जाते थे। कभी कभी कपड़े सूखाने की रस्सी ले जाते थे। मम्मी चारपाई कसती थी फिर भी वो ढीली हो जाती थी। एक दिन जब कोई रस्सी नहीं मिली तो कुँए से पानी खीचने वाली मोटी रस्सी काटकर बस्ते में छूपाकर ले गये। जब हम स्कूल में रस्सी कूदे तो वह रस्सी हमारे छोटे छोटे पैरो में लग गई। और पैर की उँगली की खाल उतर गई। और खून निकल आया। फिर बड़ी क्लास की लड़कियां हमे टीचर जी के पास ले गई। टीचर जी ने उस पर दवाई लगाकर पट्टी बांध दी। शाम को हमारे बस्ते में से रस्सी निकली। फिर हमको डॉट पड़ी।
हमारी मम्मी दशहरे पर गद्दे रजाई भरवाती थी । रात को हम बिस्तर में मुँह ढककर आलू के पराठे खाते जाते थे और रजाई के डोरों में उँगली फसा-फसाकर डोरे तोड़ते जाते थे। फिर सुबह जब मम्मी रजाई तय करती तब हमको डॉट पड़ती।
गर्मियों में क्लास पेड़ के नीचे लगती थी। पेड़ पर लोहे के गार्डर का घंटा बंधा था। हम घण्टे के नीचे ही बैठे थे। टीचर जी ने हमसे प्रश्न पूछा। जैसे ही हम खड़े हुए हमारा सिर घण्टे से जोर से जा लगा। और हमने जोर से सिर दवा लिया। थोड़ी देर बाद जब हमने हाथ हटाया तो हमारी हथेली पर खून लगा था और हम अपनी लाल हथेली को देखकर मुस्करा दिए। पास बैठी लड़की ने टीचर को बता दिया। उन्होंने कहा खून को देखकर हँस रही है और नोकरानी के साथ घर भेज दिया।
हाई स्कूल की बात है नवम्बर के महीने में स्कूलों की रैली होती थी और खेलों का अभ्यास कराया जाता था। एक लड़की ने भाला फेका। हम उसके सामने से सिर झुका कर निकल गए और भाला हमारे ऊपर से निकल गया। इस तरह भाला हमारे सिर में लगने से बच गया।