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राम

hindi articles, stories and books related to raam


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मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला,पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा,सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।।१। प्यास तुझे तो, विश्व तपाकर पूर्ण निकालूँगा हाला,एक पाँव से साकी बनकर नाचूँगा लेकर प्याला,जीवन की मधुता तो तेरे ऊपर कब का वार चु

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निर्वाचन क्षेत्र -बापतला (SC) (आंध्र प्रदेश)दल का नाम -तेलुगू देशम पार्टी (ते.दे.पा.)ईमेल -malyadri[DOT]sriram[AT]sansad[DOT]nic[DOT]inmalaydri[AT]gmail[DOT]comजन्म की तारीख -10/07/1954उच्चतम योग्यता -स्‍नातकोत्तरशैक्षिक और व्यावसायिक योग्यता -एम.ए. (अर्थशास्‍त्र) श्री वैंकटेश्‍वर विश्‍वविद्यालय

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राम मंदिर v/s बाबरी मस्जिद

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मित्रो आपने आजतक बहुत से साधू ,संतो से राम कथा सुनी होगी ! लेकिन शायद ही कोई ऐसा साधू ,संत होगा जिसने आपको ये बताया हो की राम कथा मे आज के भारत की सभी गंभीर से गंभीर समस्याओ का समाधान छिपा है ! राजीव भाई ने बहुत से साधू – संतो से पूछा कि मुझे ये बताएं कि प्रभु श्री राम ने

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New Delhi: आजकल सोशल मीडिया पर इस विशालकाय धनुष की तस्वीर काफी वायरल हो रही है। इस तस्वीर को आपने भी कई बार सोशल साइट पर देखा होगा।दुनिया भर में वायरल हो रही इस तस्वीर के जरिए दावा किया जा रहा है कि ये खुदाई में मिला भगवान राम का धनुष है। इस तस्वीर से पूरी दुनिया में खलब

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गंगा जमुना संस्कृति का समन्वय करने वाला ये देश जिसके गौरव का लोहा समूचा विश्व प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मानता चला आ रहा है| ये देश सूफियों और हिन्दू धर्म गुरुओं की कर्म भूमि रहा है ये देश उन महा पुरुषों की धरोहर है,जिन्होंने इसे अ

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रावण के महिमामंडन का खंडन आजकल सोशल मिडिया पर एक चलन बहुत तेजी से चल पड़ा है , रावण के बखान..!! वो एक प्रकांड पंडित था जी....उसने माता सीता को कभी छुआ नहीं जी....अपनी बहन के अपमान के लिये पूरा कुल दाव पर लगा दिया जी.....!!!मेरे कुछ मित्र ब्राह्मण होने के कारण

बजरंगबली भला तेरी महिमा कहो किसने न जग गायी।शरण आया जो तेरी हर मुश्किलों से निजात पायी।।राम नाम महिमा अमित,अपार तूने ही फैलायी।शिव रूप छोड़,हनुमान बन भक्ति सबको सिखायी।।अष्ट-सिद्धि,नव-निधि प्राप्त कर  जग हित लगायी।हर घडी राम-राम बस यही एक अलख जगायी।।समस्त कामना से दूर तूने बस राम उर लौ लगायी।याद दिला

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जो इंसानियत को मारे, घर-घर लहू बहाये। वो किसने 'राम' समझे, किसने 'खुदा' बनाये।। ये आतिश नवा से लोग ही, मातम फ़रोश हैं, चैन-ओ-अमन का ये वतन, फिर से न डगमगाये। घोला ज़हर किसी ने या, गलती निज़ाम की, गुनहगार इस वतन के, यूँ ही न पूजे जायें। उन्हें खून की हर बूंद का, कैसे हिसाब दें, जो आँसुऔ की कीमत, अबत

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