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दसवा सीन

26 अप्रैल 2023

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बात करते-करते ड्राइवर कहता है” रात ज्यादा होती जा रही है घर चलना है” तभी अजय घड़ी देखता कहता है “हाँ बच्चों रात ज्यादा हो रही आप लोगों अपने घर चले जाओ मेरा क्या है मैं तो यहां बैठा रहूंगा”अजय कहता है “आप यहां बैठे रहोगे और हमारे जाने के बाद फिर से आत्महत्या करने की कोशिश करोगे” अजय कहता है इसके अलावा मेरे पास कोई चारा भी तो नहीं है मैं कहां जाऊं क्या करूंगा अपनी कैसे व्यतीत करूंगा”. सोचने के बाद अजय कहता है “मैं पिता की तलाश के लिए यहां बैठता हूं अपने पिता को याद करता हूं हो सकता है मेरे पिताजी ने ही आपको भेजा हो आप के रूप में इसलिए आज से आप मेरे पिता हो आप मेरे घर चलो वहीं पर रहना मेरा ख्याल रखना मेरे बेटे का भी ख्याल रखना और रोज मुझे डांटना मुझे मेरे पिता के जाने का एहसास ना हो और मैं और मेरी पत्नी और बेटा आपका भी ख्याल रखेगा और आपको आपका बेटा मिल जाएगा मुझे मेरे पिता मिल जाएंगे.” इतना सुनते ही ड्राइवर खुश होकर कहता हैं “अरे वाह इस तरह से एक दूसरे के सहारा बन कर जीवन भी कट जाएगा और अच्छा भी लगेगा और जीवन का यही आधार एक दूसरे के पूरक बनकर जिंदगी को जीना” शांत हो जाता है और चुप हो जाता है खड़ा हो जाता है और कहता है नही बेटा आप दोनों अपने घर जाओ आपने मुझे अपने पिता का दर्जा दिया यहीं मेरे लिए बहुत है हमेशा यादगार बना रहेगा . जिद करने लगा. तभी राजा की पत्नी का फोन आ जाता है राजा अपनी पत्नी का फोन उठाकर से बातचीत करने लगता है और पूरी घटना बता देता यह सुनकर की पत्नी बहुत खुश हो जाती है और कहती है जल्दी से बाबूजी को कर ले आओ हमारा परिवार पूरा हो जाएगा. राजा और उसकी पत्नी की बात सुनकर अजय और वह राजा का हाथ पकड़ लेता है चलो बेटा घर पर बहु इंतजार कर रही है राजा खुश हो जाता है और बाबूजी का हाथ पकड़ता है और चलने लगता है ड्राइवर दौड़कर की ओर जाने लगता है कार स्टार्ट करता है तीनों बैठते हैं कार जंगल से बाहर की ओर जाने लगती है.
मीनू द्विवेदी वैदेही

मीनू द्विवेदी वैदेही

बहुत ही सुन्दर एवं मार्मिक कहानी पढ़ने के दौरान जिज्ञासा बनी रही👌👌 आप मेरी कहानी प्रतिउतर और प्यार का प्रतिशोध पर अपनी समीक्षा जरूर दें 🙏🙏

26 फरवरी 2024

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रचनाएँ
आधुनिकता (पिता जरूरत या बेकार)
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एक पिता अपने जीवन के सब सुनहरे पलो को छोड़ देता हैं अपने बच्चों को कामयाब बनता हैं और पिता की कीमत उससे पूछो जिसके पिता नहीं हैं
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पहला सीन

25 अप्रैल 2023
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अजय अपनी पत्नी के साथ बैठा हैं और उसके तीनों लड़के खेल रहें हैं. अजय अखवार पढ़ रहा हैं तभी अजय की पत्नी सरिता आ जाती हैं और चाय साथ लाती हैं &

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दूसरा सीन

25 अप्रैल 2023
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अजय बैंक में बैठा हैं और बैंक मैनेजर का इंतजार कर रहा हैं और कुछ सोच रहा हैं &nbsp

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तीसरा सीन

25 अप्रैल 2023
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अजय का लोन हो जाता है और अजय अपना मकान बनवा लेता है और उसके बच्चे बड़े हो गए हैं और बच्चे पढ़ लिख कर नौकरियों पर चढ़ गए हैं आज है उनकी शादी भी कर देता है सरिता का देहांत हो जाता है अजय बहुत दुखी

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चौथा सीन

25 अप्रैल 2023
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अजय अकेला बैठा है और बहुत दुखी हो रहा है अपने मन की बात किससे कहें अपनी अपनी पत्नी को बार-बार याद कर रहा है और आजकल की आधुनिक बच्चों को देख रहा है कि एक पिता ने अपना पूरा जीवन अपने बच्चों के लिए

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पाँचवा सीन

25 अप्रैल 2023
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अजय जंगल में पहाड़ के पास जाकर बैठ जाता है वहां बेड का सोचने लगता है कि आज मेरे जीवन का आखरी दिन है और इस संसार से विदाई ले लूंगा क्योंकि ऐसे जीवन किसी मतलब का नहीं है जिसमें उसकी औलाद उसे अपने घर में

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छठवा सीन

26 अप्रैल 2023
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अजय बैठ कर सोच रहा है तभी वहां पर एक कार रूकती है कार में से 28 साल की उम्र का एक लड़का जो शक्ल से बिजनेस में लग रहा है उतरता है और कार का दरवाजा खोलकर उसका ड्राइवर बाहर आ जाता है लड़का ड्राइवर से इशा

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सातवा सीन

26 अप्रैल 2023
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अजय शांत बैठा है फिर अचानक उठता है अजय पहाड़ की ओर जाने लगता है सोचता अब मैं आत्महत्या कर लेता हूं और अपनी जीवन से छुटकारा पा लेता हूं क्योंकि मेरा जीवन सबके लिए बेकार है और संहिता कुछ देर में मैं तुम

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आठवॉ सीन

26 अप्रैल 2023
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अजय की कहानी सुनकर ड्राइवर राजा की आंखों में आंसू आ जाते हैं राजा कहता हैं “सच में आपके बच्चों ने आपके साथ गलत किया है ऐसे बच्चों को नहीं करना चाहिए अपने पिता को इतना परेशान नहीं करना चाहिए “ ड्राइवर

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नौवा सीन

26 अप्रैल 2023
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बोलना शुरू करता कहता है “बाबूजी जब मैं छोटा था मेरी मां का देहांत हो गया मेरे पिता ने मां और बाप दोनों की जिम्मेदारी निभाई और मुझे हर प्रकार की सुविधाएं दी रात दिन मेहनत करके मेरे लिए कमाया और मुझे ला

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दसवा सीन

26 अप्रैल 2023
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बात करते-करते ड्राइवर कहता है” रात ज्यादा होती जा रही है घर चलना है” तभी अजय घड़ी देखता कहता है “हाँ बच्चों रात ज्यादा हो रही आप लोगों अपने घर चले जाओ मेरा क्या है मैं तो यहां बैठा रहूंगा”अजय कहता है

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