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गोलगप्पे - द अनटोल्ड लवस्टोरी (भाग-१)

Dhalendra Das Manikpuri

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ये उन दिनों की बात है, जब हम अपने स्कूलों के हायर कक्षाओं यानि 9 वीं कक्षा में क़दम रखे थे । मैं अपने गांव से लगभग 8 किमी. दूर एक शिशु मंदिर में आगे की पढ़ाई करने गया । और ये जो मेरी स्टोरी है.... नहीं नहीं.... उनकी जो स्टोरी है वो कक्षा 10 वीं से शुरू हुई । लड़के का पूरा बचपन तो उसी स्कूल में बीता पर वो लड़की तो यहां लगभग 12 किमी. दूर से आई थी । पर वो यहां कैसे आई वो बहुत ही हंसी से भरपूर और मजेदार है, जो इस कहानी में एक टर्निंग प्वाइंट है । तो कहानी की शुरुआत में है, कि लड़की का जो भाई था उस स्कूल का टापर था, और उनकी बहन यानि ये जो मैडम थी वो मिडिल क्लास । अब इनके जो परिवार वाले थे, वो इसे वहीं भेजने की ज़िद में अड़ गए कि तुम सिर्फ़ वहीं पढ़ोगी और कहीं नहीं पर मैडम ने भी ज़िद पकड़ ली थी कि मैं वहां पढुंगी ही नहीं चाहे आप लोग कुछ भी कर लो । अब इसने घर वालों को बोला- कि ना तो मैं खाऊंगी ना पीऊंगी और ना ही वहां पढुंगी । पर घर वाले मानने ही वाले नहीं थे । अब फैमिली वालों ने एक ही स्वर में कहा दिया- बेटा ! तू खाना छोड़ या पीना छोड़, जाएगी तो वहीं ही😂🤣😆। अब मजबूर इंसान क्या करें.... आख़िर यहीं आकर पढ़ना पड़ा । अब शुरू होती है लवस्टोरी... अब 10 वीं में प्रवेश हुआ । कुछ समय बीता और नज़रों में मुलाक़ातें शुरू हो गयी । लड़का ठहरा कामर्स का बंदा और मैडम ठहरी साइंस...अब कार्निया से मैनेजमेंट शुरू हुआ । लड़का साइंस के क्लास में आकर बैठता और बार-बार उस लड़की को देखता । वो एकदम परेशान हो गई थी और अपने सहेलियों से आखिर पूछ लिया- वो कुत्ता मुझे ऐसा क्यों देखता है । जवाब मिला- उसकी तो नज़रें ही वैसी है । एक उसकी सहेली ने बताया कि उसकी एक GF भी है, फिर तो उसके शक्ल में 12 बज गए थे ( कहते हैं कामर्स वाले अक्सर चाकलेटी होते हैं ) अब होना था दोनों का प्रपोजल । इसके लिए एक दिन दोनों स्कूल के तीसरे मंज़िल के छत पर गए । अब दोनों समझ नहीं रहे थे कि किसको क्या बोलें, एकदम से, बोलना तो चाहते थे पर बोल नहीं पा रहे थे क्योंकि छत पर और बहुत से लैला-मजनू और बहुत लोग मौज़ूद थे । पर लड़की ने फ़र्स्ट इंप्रेशन में प्रपोज💓🌷🥰किया । और.... लड़का एकदम शर्मा ही गया, उसके मुंह से कुछ निकल ही नहीं रहा था । 

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