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नमक बेईमानी का

22 नवम्बर 2018

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अरोड़ा साहब का कपड़ों के इंपोर्ट और एक्सपोर्ट का दिल्ली में बहुत बड़ा कारोबार था। अक्सर वो चीन के व्यापारियों से संपर्क करके उनसे कपड़ों के एक्सपोर्ट का आर्डर लेते, फिर अपनी फैक्ट्री में कपड़ों को बनवा कर चीन भेज देते। इस काम में अरोड़ा साहब को बहुत मुनाफा होता था। उनकी इंपोर्ट और एक्सपोर्ट डिपार्टमेंट में बहुत बड़ी पहुंच थी। अरोड़ा साहब इस बात का बराबर ख्याल रखते कि दिवाली या नए वर्ष के समय एक्सपोर्ट डिपार्टमेंट के सरकारी कर्मचारियों के पास बख्शीश समय पर पहुंच जाए। ये अरोड़ा साहब की दिलदारी का ही प्रभाव था कि उनके एक कॉल के आते ही सरकारी कर्मचारी उनकी फाइल को आगे बढ़ा देते थे। इस कारण से अरोड़ा साहब अपने बिजनेस में काफी आगे निकल गए। उनके आगे बढ़ने में कुछ विश्वस्त कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा योगदान था। उनका मैनेजर नीरज और क्लर्क सुभाष उनके प्रति बहुत ही वफादार थे। अरोड़ा साहब भी अपने मैनेजर नीरज और अपने क्लर्क सुभाष पर बहुत विश्वास करते थे।


यह बात जगजाहिर है कि जब भी कोई व्यापारी अपने व्यापार में आगे बढ़ना चाहता है कुछ गैर कानूनी तरीकों का इस्तेमाल करना पड़ता है। अरोड़ा साहब की प्रगति से यह बात तो बिल्कुल साफ थी कि अरोड़ा साहब भी कुछ गैर कानूनी तौर तरीकों का इस्तेमाल करते थे। इंपोर्ट एक्सपोर्ट डिपार्टमेंट में इस बात का बराबर ध्यान रखा जाता था कि किसी एक व्यापारी की धाक न चले। सरकार की तरफ से इस बात का दिशा निर्देश दिया जाता था कि सारे व्यापारियों को बराबर का मौका मिले। इधर अरोड़ा साहब अपनी पहुंच का इस्तेमाल अपनी सारी फाइलों को आगे बढ़ाने में बराबर कर रहे थे। जब भी उनकी एक फाइल आगे बढ़ जाती तो अपनी बाकी और फाइलों को अपनी आगे बढ़ी हुई फाइल के साथ लगवा देते। इस तरीके से एक ही बार में बहुत सारा काम करवा लेते।


अपनी इस तरह की क्रिया-पद्धति का इस्तेमाल करते हुए और अरोड़ा साहब ने अपने बिजनेस को बहुत ज्यादा फैला लिया। इसका नतीजा यह हुआ कि कपड़ों के व्यवसाय में उनके जितने भी प्रतिस्पर्धी थे उनको अरोड़ा साहब से जलन होने लगी। अरोड़ा साहब के प्रतिस्पर्धीयों ने एक्सपोर्ट इम्पोर्ट डिपार्टमेंट में कंप्लेंट कर दिया। अरोड़ा साहब के प्रतिस्पर्धीयों ने यह तर्क दिया कि एक बार में 10-12 फाइलें इकट्ठे आगे कराकर अरोड़ा साहब गैरकानूनी काम कर रहे हैं। साहब के लिए मुश्किल की घड़ी आ गई। किसी ने अरोड़ा साहब को बताया कि कोई एक सरकारी नोटिफिकेशन है जिसके हिसाब से यदि कोई संबंधित फाइलें हैं तो उन सारी संबंधित फाइलों को इकट्ठे लगाया जा सकता है। लेकिन मुश्किल बात यह थी कि वह नोटिफिकेशन लगभग 15 साल पहले आई थी।वो कब आई थी इसका पता लगाना मुश्किल था। अरोड़ा साहब के लिए उस नोटिफिकेशन का मिलना बहुत जरूरी था, लेकिन ये काम था बहुत कठिन। खैर इस काम को किसी भी हाल में होना ही था। अरोड़ा साहब को नीरज और सुभाष पर बहुत भरोसा था। उन्होंने अपने इस काम के लिए अपने मैनेजर नीरज और अपने क्लर्क सुभाष को लगाया। अरोड़ा साहब ने उन दोनों को काफी हिदायत दी यह बात किसी को भी मालूम नहीं चलनी चाहिए।


ये नीरज और सुभाष के लिए भी परीक्षा की घड़ी थी। सवाल ये था कि काम की शुरुआत कैसे की जाए? वह नोटिफिकेशन जो कि लगभग 15 साल पहले आया था, उसके बारे में तहकीकात कैसे की जाए? उन दोनों ने दिमाग लगाया। सबसे पहले रिकॉर्ड रूम जाकर जितनी फाइलें सरकारी डिपार्टमेंट में थी , उसकी तहकीकात शुरू करनी चाहिए। नीरज में जाकर रिकॉर्ड रूम के इंचार्ज से उस नोटिफिकेशन के बारे में पूछा। रिकॉर्ड रूम के इंचार्ज ने कहा कि तकरीबन 7 साल पहले की सारी फाइलें और नोटिफिकेशन यहां से हटा दी जाती हैं। रिकॉर्ड रूम के इंचार्ज अहमद ने कहा कि आप जाकर फाइलिंग डिपार्टमेंट में पता कीजिए वहां पर हो सकता है कि आप तो कोई जानकारी मिल सके।


नीरज के पास कोई और उपाय नहीं था। वह फाइलिंग डिपार्टमेंट में गया। वहां जाने पर पता चला कि फाइलिंग डिपार्टमेंट का इंचार्ज अभी तक आया नहीं है। तकरीबन दिन के 11:30 बज गए थे और उस समय भी फाइलिंग डिपार्टमेंट का इंचार्ज नहीं आया था। सुभाष ने कहा; साहब इस डिपार्टमेंट का हाल भी हमारे ऑफिस के महेश जैसा है। नीरज भी हंसने लगा। उसके ऑफिस में महेश कभी भी 11:00 बजे से पहले नहीं आता था। नीरज ने खिसियाती हुई हंसी में कहा ; भाई महेश जैसे आदमी केवल हमारे ऑफिस में ही नहीं बल्कि हर जगह है। कामचोर लोगों की कोई कमी नहीं है। खैर अब काम आगे कैसे किया जाए?


सुभाष ने नीरज को सलाह दी कि फाइलिंग डिपार्टमेंट के किसी और क्लर्क से बातचीत की जाए। उन दोनों के पास कोई और उपाय नहीं था। वह दोनों फाइलिंग डिपार्टमेंट में दूसरे क्लर्क के पास गए और अपनी समस्या के बारे में बताया। उस क्लर्क ने कहा कि आप जो भी समस्या लेकर आए हैं उसका समाधान तो फाइलिंग डिपार्टमेंट में नहीं है। आपको लिस्टिंग डिपार्टमेंट में जाना चाहिए।


नीरज और सुभाष के सामने आशा की किरणें क्षीण होती जा रही थी। वह दोनों लिस्टिंग डिपार्टमेंट में गए। वहां पर जाकर तकरीबन 15 साल पहले आए नोटिफिकेशन के बारे में पूछताछ की। वहां पर उन लोगों को यह ज्ञात हुआ कि रिकॉर्ड डिपार्टमेंट में ही आदिल नाम का बहुत पुराना मुलाजिम रहता है। वह आदिल ही उनकी सहायता कर सकता है।


दोनों वापस फिर रिकॉर्ड रूम में गए। उस रिकॉर्ड रूम में फाइलों के ढेर के पीछे आदिल मिला। आदिल से उन लोगों ने तकरीबन 15 साल पहले नोटिफिकेशन के बारे में पूछा। आदिल ने कहा कि वह यहां पर लगभग 12 साल से है। इस कारण से वह उन फाइलों के बारे में तो नहीं बता सकता है। हाँ इतना तो जरूर बता सकता है कि वह फाइलें लिस्टिंग ब्रांच में ही हो सकती है। आदिल ने बताया कि लिस्टिंग ब्रांच में ही इंटरनेट का नया ब्रांच खुला है। इंटरनेट ब्रांच में जितनी भी बंद हो चुकी फ़ाइलें हैं ,उनका साइबर रिकॉर्ड मौजूद है।


दोनों के सामने आशा की किरणें दिखाई पड़ने लगी। दोनों जाकर लिस्टिंग ब्रांच के साइबर सेल के बारे में तहकीकात करने लगे। साइबर सेल का ब्रांच दूसरी बिल्डिंग में था। सुभाष को रास्ता पता था। सुभाष के पीछे पीछे नीरज चलने लगा। वहां पर जाकर गेटकीपर ने बताया कि साइबर सेल तीसरी मंजिल पर है। नीरज जाकर तीसरी मंजिल पर साइबर सेल के बारे में पता किया, वहां पर ज्ञात हुआ कि वह दूसरी मंजिल पर है। नीरज और सुभाष काफी चिढ़ गए थे। खैर जब दोनों दूसरी मंजिल पर गए और साइबर सेल के बारे में तहकीकात की तो वहां पर एक महिला कर्मचारी मिली। उस महिला ने दुपट्टे नहीं डाल रखे थे। उसके कपड़ों के नीचे से उसका सारा बदन दिख रहा था।उस महिला कर्मचारी ने नीरज और सुभाष को बताया कि तीसरी मंजिल पर ही पिछले साइड में छोटा सा साइबर सेल खुला है आप वहां जाकर तहकीकात कर सकते हैं। नीरज और सुभाष को ऐसा लगने लगा था कि शायद उन्हें वह नोटिफिकेशन मिल नहीं पाएगा। उस पर से उस महिला कर्मचारी की निर्लज्जता ने दोनों को और परेशान कर दिया। पता नहीं क्यों इन सरकारी डिपार्टमेंट में कोड ऑफ ड्रेस नहीं हैं। इस तरह तो मर्दों के ध्यान काम पर क्या खाक लगेगा? वो तो इन मैडम लोगों को निहारने में हीं लगे रहेंगे। सुभाष भी खिन्न हो चुका था। उसने खीजते हुए कहा, हम इतनी कोशिश कर रहें हैं फिर भी कुछ पता नहीं चल पा रहा है। किस तरह का डिपार्टमेंट है ये?किसी को ठीक से पता हीं नहीं है नोटिफिकेशन के बारे में? सारे के सारे लोगों का ध्यान तो बदन दिखाने और बदन निहारने में हीं लगा हुआ है। काम पे ध्यान क्या खाक लगेगा। पता नहीं किसी को नोटिफिकेशन के बारे जानकारी है भी या नहीं ? हताश हुए सुभाष को ढांढस बढ़ाते हुए नीरज ने कहा, कोई बात नहीं, हमारे हाथ में तो कर्म ही हैं। हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश ही कर सकते हैं। इतनी कोशिश कर ली, तो चल के बाहर ऊपर भी देख लेते हैं।


जब नीरज और सुभाष तीसरी मंजिल की पिछली साइड में गए तो वहाँ दरवाजे बंद मिले। निराशा के बादल दोनों के सामने छाने लगे। दोनों लौट हीं रहे थे कि सुभाष के जान पहचान का कोई दूसरा क्लर्क मिला ।उसने बताया कि अभी 3 दिन पहले यह डिपार्टमेंट यहां से हटकर छठी मंजिल पर चला गया है। आप दोनों को वहां जाना पड़ेगा।


नीरज और सुभाष काफी थक गए थे। दोनों ने नीचे आकर गर्म गरम चाय पी फिर छठी मंजिल पर गए। छथि मंजिल पे एक छोटा सा कमरा था और उस कमरे में एक पुरुष और 2 महिला कर्मचारी मिले। नीरज ने उनसे नोटिफिकेशन के बारे में पूछा तो उन लोगों ने बताया आप बिल्कुल ठीक जगह आए हैं ।लेकिन यहाँ पे सारे के सारे रिकॉर्ड हैं कहां? सारी फाइलों को लाइब्रेरी भेज दिया है।


इतनी ज्यादा दौड़ धूप से नीरज और सुभाष परेशान हो चुके थे। उन्होंने नीचे आकर फिर गरमा गरम चाय पी, समोसा खाया, और पहुंच गए लाइब्रेरी में ।वहाँ पे दोनों नोटिफिकेशन के बारे में पता कर पता करने लगे। जब लाइब्रेरियन से नोटिफिकेशन के बारे में पूछा तो वहां बताया गया कि जितने भी पुराने नोटिफिकेशन है उसका प्रिंट आउट अब यहां से हटा दिया गया है और वो सारे के सारे प्रिंट आउट नई ब्रांच के कंप्यूटर सेल में मिलेंगे।


नीरज और सुभाष दोनो को गुस्सा आने लगा। पता नहीं ये किसने अरोड़ा साहब को नोटिफिकेशन के बारे में बता दिया। नोटिफिकेशन तो जैसे सुरसा का मुँह हो गया था। खत्म होने का नाम हीं नहीं ले रहा था। इधर इतनी दौड़ धूप से परेशान सुभाष ने कहा, अब रहने देते है, कल कोशिश करेंगे। नीरज ने झिड़क कर कहा, नहीं चलो अभी। सुभाष आराम करने लगा।नीरज ने कहा, इतने दिनों से तुम यहाँ आते जाते हो, कोई जान पहचान भी नहीं है क्या? तिस पर सुभाष ने कहा रोज का आना जाना तो आपका भी यहाँ लगा रहता है। आप हीं जान पहचान निकाल लो ना।उसपर से आपकी तरह मुझे सैलरी भी तो समय पर नहीं मिलती।दिया तो उतना हीं जलेगा जितना की उसमे तेल पड़ा हो।


आपसी नोक झोंक और ऊपर नीचे करते हुए दोनी काफी थक चुके थे। धीरे-धीरे चलते हुए लाइब्रेरी के सेकंड फ्लोर पर पहुंचे और वहां पर जाकर उन लोगों ने उस नोटिफिकेशन के बारे में पूछताछ की। वहां पर उन्हें बताया गया कि यहां पर तकरीबन 40 साल से पहले की सारी नोटिफिकेशन की डिजिटल कॉपी मौजूद है। उसने नीरज को वहां पर एक कंप्यूटर के सामने बैठा दिया और कहा कि वह इन नोटिफिकेशन की छानबीन कर सकता है।


नीरज के साथ वहां पर सुभाष भी बैठ गया। पर कंप्यूटर सेल के इंचार्ज ने सुभाष को वहां पर बैठने से मना कर दिया। उसने कहा कि यहां पर केवल नीरज बैठ सकता है यहां पर क्लर्क नहीं बैठ सकते। नीरज के सामने बहुत बड़ी समस्या थी। उन 40 साल के सारी फाइलों, नोटिफिकेशन में से एक नोटिफिकेशन को निकालना। यानी कि लगभग 600-700 फाइलों में से किसी एक फाइल में पड़े एक नोटिफिकेशन को पढ़ना। यह कैसे हो?


नीरज ने हिम्मत नहीं हारी और उसने अपना दिमाग लगाया। उसे यह बताया गया था कि तकरीबन 15 साल पहले की फाइलों में इस तरह की नोटिफिकेशन आई थी। नीरज 10 साल पहले की फाइलों को पढ़ना शुरू किया। और तकरीबन 3 साल पीछे जाते हीं उसको वह नोटिफिकेशन मिल गया। मेहनत तो काफी करनी पड़ी पर इस बात से दोनों को बहुत खुशी हुई कि उनकी मेहनत सफल हुई।


नीरज ने तुरंत हीं उस नोटिफिकेशन की कॉपी ली और अपने मोबाइल से उसका फोटो खींच लिया। जैसे ही नीरज उस नोटिफिकेशन को अपने व्हाट्सएप से अरोड़ा साहब के मोबाइल पर भेजना चाहा, सुभाष ने उसे ऐसा करने से रोक लिया। सुभाष ने कहा कि यह बात काफी गुप्त है। यदि व्हाट्सएप पर किसी और ने देख लिया तो समस्या खड़ी हो सकती है। नीरज ने सुभाष की बात मान ली।


सुभाष ने अरोड़ा साहब के मोबाइल पर फोन किया तो उस फोन को अरोड़ा साहब के सेक्रेटरी दीपक ने रिसीव किया। सुभाष ने दीपक से कहा कि एक बहुत ही जरूरी मैसेज है ,अरोडा साहब को बताना है। दीपक ने पूछा क्या है मैसेज? सुभाष ने मैसेज बताने से मना कर दिया। सुभाष को इस समय अपने आप पर काफी अभिमान आ रहा था। दरअसल दीपक साहब का सेक्रेटरी था और इस बात का उसे हमेशा घमंड रहता था कि जितनी भी गुप्त बातें थीं वो उन सारी बातों को वह जानता था। कितनी हीं बार उसने सुभाष को झिड़क दिया था।। लेकिन इस बार पाशा सुभाष के हाथ में था। दीपक बार-बार पूछ रहा था सुभाष से , लेकिन सुभाष ने कहा जाकर साहब से कहो कि वह नोटिफिकेशन मिल गया है। दीपक को ये बात समझ में नहीं आ रही थी कि आखिर में वह कौन सा नोटिफिकेशन है जिसके बारे में सुभाष को पता है और उसे पता नहीं है? सेक्रेटरी और क्लर्क के बीच जंग चल रहा था। जंग में हमेशा जीतने का आदि रहा सेक्रेटरी इस अनपेक्षित हार से परेशान और दुखी हो चला। इधर हमेशा पराजित होने वाला क्लर्क जीत के इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था। अंत में जीत सुभाष की हुई। दीपक ने सुभाष की बात को और अरोड़ा साहब तक पहुंचा दिया।


अब पाशा सुभाष के हाथों में थी। उसने नीरज से कहा कि आप यह मत बताइएगा कि कंप्यूटर से नोटिफिकेशन को निकाला है । सुभाष ने नीरज से कहा कि आप यह बता दीजिएगा कि उस नोटिफिकेशन को सुभाष ने बहुत सारी फाइलों को छानबीन करके पैसा खिला कर निकाला है। दरअसल इस मौके का इस्तेमाल सुभाष कुछ पैसे कमाने के लिए करना चाह रहा था। नीरज बहुत ही ईमानदार आदमी था। उसने ऐसा करने से मना कर दिया।नीरज ने कहा कि यदि अरोड़ा साहब पूछेंगे कि फाइलें उसने कैसे निकाली है तो वह इस बात को बता देगा कि कंप्यूटर से निकाली है। यदि यह नहीं पूछा कि किस तरह से नोटिफिकेशन निकाला गया है तो वह अपनी तरफ से बताएगा नहीं।


नीरज ने शक की निगाहों से सुभाष की तरफ देखा।सुभाष को नीरज का उड़की शक की निगाहों देखना गवारा न लगा। सुभाष ने कहा कि अरोड़ा साहब भी तो उसे हर महीने की सैलरी बराबर समय पर नहीं देते। वह अपनी काम को पूरी ईमानदारी से करता है। ऐसा कोई काम नहीं करता है जिससे अरोड़ा साहब को नुकसान पहुंचे। फिर भी यदि वह बीमार पड़ता है तो अरोड़ा साहब उसके पैसे काट लेते हैं। हॉस्पिटल में जाने पर यदि ऑफिस नहीं आता है तो उस दिन की पगार उसे काट ली जाती है। यहां तक कि उसके जितने भी ओवरटाइम के पैसे हैं ,जितने भी बोनस के पैसे हैं उन पैसों को मांगने पर भी एक बार में वह पैसे नहीं मिलते। नीरज बाबू आपको तो पैसे समय पर मिल जाते हैं। आपका तो पैसा छुट्टी लेने पर नहीं कटता। यदि उसकी ईमानदारी के साथ भी बेईमानी की जा रही है तो वह भी वैसी बेईमानी क्यों न करें। वैसे भी उसकी बेईमानी से अरोड़ा साहब को तो कोई नुकसान नहीं पहुँचता, अलबत्ता उसे फायदा जरूर हो जाता है। नीरज चाह कर भी सुभाष को यह नहीं बता पाया कि उसके भी बोनस के पैसे समय पर नहीं मिलते।


नीरज ने कहा कि यदि कोई लोमड़ी की तरह व्यवहार कर रहा है तो इसका मतलब यह तो नहीं कि तुम भी लोमड़ी की तरह ही व्यवहार करने लगो। नीरज ने सुभाष से पूछा, क्या तुमने साधु और बिच्छू की कहानी नहीं सुनी है? नीरज बोलता गया। उसने सुभाष को कहानी याद दिलाई। एक साधु था। वह तालाब में सुबह सुबह स्नान करने गया हुआ था। वहां पर उसने एक बिच्छू को देखा। उस तालाब में वह बिच्छू डूब कर मरने वाला था। साधु बार बार अपने हथेली में बिच्छू को लाकर किनारे पर डालने की कोशिश करता, और बिच्छू बार बार साधु को डंक मारता।साधु का स्वभाव था बिच्छू को बचाना और बिच्छू का स्वभाव था साधु को काटना।


गिद्ध सड़े गले मांस को खाकर जिंदा रहता है। पर गिद्ध के सड़े गले मांस के खाने के हंस का स्वभाव तो नहीं बदलता। कौए को लाख मिठाई खिला दो, पर वो काँव काँव हीं करेगा। कौए को देखकर तोता तो राम नाम जपना तो नहीं छोड़ता। माना कि अरोड़ा साहब तुम्हारे साथ बेईमानी करते हैं, न्याय नहीं करते पर इसका मतलब ये तो नहीं कि तुम भी उनके साथ बेईमानी करने लगो। अरोड़ा साहब के स्वभाव में हीं बेईमानी है। वो व्यवसायी है, व्यापार केवल ईमानदारी के भरोसे चलता भी नहीं। तुम तो अपने स्वभाव में रहो।


राम और रावण दोनों को दुनिया याद रखती है। राम अपने स्वभाव के कारण जाने जाते हैं और रावण अपने कर्मों के कारण। दुर्योधन के रास्ते को युद्धिष्ठिर ने कभी नहीं अपनाया। इसी तरीके से तुम भी अपने रास्ते से मत चूको। माना कि अरोड़ा साहब समय पर पैसे नहीं देते, पर पूरे पैसे दे तो देते हैं। यदि छुट्टी के पैसे काटते हैं तो उनसे बात करो। इन सारी बातों को मन मे क्यों रखते हो?


सुभाष ने कहा कि मुझे यह सारी बातें समझ में नहीं आती है। पढ़ा लिखा आदमी नहीं हूं। मैं तो सिर्फ इतना जानता हूं कि मेरी ईमानदारी के साथ बेईमानी की जाती है। तो फिर मैं अरोड़ा साहब साथ में थोड़ी सी बेईमानी क्यों न करूं? प्रभु श्रीराम समुद्र के किनारे 3 दिन तक याचना करते रहे, आखिर में जब उन्होंने धनुष ताना तभी समुद्र उनके आगे झुका।


याद कीजिए पांडवों ने भीष्म पितामह, गुरु द्रोणाचार्य, कर्ण, दुर्योधन आदि का वध कैसे किया?यहाँ तक कि राम ने भी बाली का शिकार छिप कर हीं किया था।सियार के सामने कोई हनुमान चालीसा का पाठ करता है क्या? भैंस के आगे बीन बजाने से क्या फायदा? यदि कोई जंगल के कानून से चलता है तो उसको जंगल के कानून हीं समझ आते है। कोई अच्छा है इसका मतलब ये नहीं कि वो कमजोर है।


नीरज ने कहा कि सच्चाई के रास्ते पर चलने के लिए असीम ताकत चाहिए होती है।यदि तुम किसी की बेईमानी से प्रभावित होते हो इसका कुल मतलब इतना हीं है कि तुम कमजोर हो। होना ये चाहिए कि तुम्हारी अच्छाई का असर बेईमानों पे हो।तुमने गौतम बुद्ध और अंगुलिमाल की कहानी नहीं सुनी क्या?गौतम बुद्ध के प्रभाव में आकर अंगुलिमाल कैसे बौद्ध भिक्षु बन गया?नारद मुनि के कारण डाकू रत्नाकर महाकवि वाल्मीकि बन गया।यदि तुममे पहाड़ की ऊंचाई पर चढ़ने का सामर्थ्य नहीं है तो इसमें पहाड़ की चोटी क्या दोष? कोई ना कोई तो पहाड़ की चोटी पर चढ़ता हीं है। यदि स्वयं में सामर्थ्य नहीं है तो कम से कम रास्ते की महत्ता का अपमान तो मत करो।


खैर तुम तो मानोगे नहीं।तुमको जो करना है करो। मेरी तो स्वभाव में बेईमानी है ही नहीं।भाई मैं तो सुबह सुबह उठकर रोज ध्यान करता हूं। ध्यान में ईश्वर से यह प्रार्थना करता हूं कि जिन सिद्धांतों का पालन मेरे पिता ने किया है , उन सिद्धांतों और आदर्शों पर मैं टिका रहूं। और एक बात और है, मैं चाह कर भी बेईमानी नहीं कर सकता। नीरज ने वह नोटिफिकेशन सुभाष के हाथ में पकड़ा दिया और वहां से चल दिया।अरोड़ा साहब अपनी करनी का फल भुगतेंगे और तुम अपनी करनी का। मैं तो अपने रास्ते इसलिए चलता हूँ कि मुझे सुकून मिलता है और इससे मेरा दिल हल्का रहता है।


सुभाष ने कहा , आपकी बात सही है, लेकिन आदर्शों से दुनिया नहीं चलती। मेरे बाबूजी गांव से आये थे। उन्हें हॉस्पिटल दिखाने के लिए चार दिन की छुट्टी ली थी। अरोड़ा साहब ने पैसे काट लिए।बोनस के पैसे भी नहीं दे रहे हैं। हालांकि पैसे पूरे दे देते हैं, पर समय पर नहीं मिलने पर क्या फायदा। इन आदर्शों के भरोसे दवाई कहाँ से लाऊं? मैं तो ठहरा गँवार आदमी। आपकी तरह पढा लिखा नहीं। मुझे तो बस इतना पता है कि जिस मरीज को जैसी बीमारी हो, उसे वैसी हीं दवा दिया जाना चाहिए। जंगल के कानून से जीने वाले व्यक्ति भक्ति के पाठ से कभी नहीं सुधरते। ईमानदारी कभी भी बेइमानी का इलाज नहीं हो सकती। बेईमानी तो बेईमानी से हीं पछाड़ खा सकती है।


नीरज ने सुभाष की फिर समझाने की कोशिश की। उसने कहा कि बेईमानी को ठीक करने का ठेका उसने अपने सर पर क्यों उठा रखा है। बेईमानों को सजा देने का काम तो ईश्वर का है। तुमको दिखाई नहीं पड़ता, अरोड़ा साहब को बी.पी. है, मधुमेह है, थाइरॉयड की बीमारी है? मसाला खा नहीं सकते, मीठा खा नहीं सकते, तितापन, खट्टापन ,धूल धक्कड़ से एलर्जी है उनको। दूध , दही से परहेज करना पड़ता है।ये सारी बेईमानियां उनके शरीर से निकल रही है। तुम्हें दिखाई नहीं पड़ती क्या?


सुभाष ने कहा कि चलिए मान लिया कि अरोड़ा साहब को अपनी करनी का फल मिल रहा है, पर इससे उसको क्या फायदा हुआ? अरोड़ा साहब के बी.पी., मधुमेह या थाइरॉयड , एलर्जी होने से उसके पिता का इलाज तो संभव नहीं हो पा रहा है ना? और यदि बेईमानी की सजा उसे मिलती है तो उसे कोई अफसोस नहीं होगा। कम से कम उसके पिता का इलाज तो संभव हो पायेगा। नीरज को समझ आ गया कि भैंस के आगे बीन बजाने से कोई फायदा होने वाला नहीं।


तकरीबन आधे घंटे बाद अरोड़ा साहब वहां पर आए। सुभाष और नीरज दोनों की प्रसंशा खुले दिल से करने लगे। जब नीरज ने अरोड़ा साहब को उस नोटिफिकेशन को दिखाना चाहा , साहब ने कहा कि नोटिफिकेशन सुभाष ने व्हाट्सएप से पहले ही भेज दिया है। अरोड़ा साहब ने सुभाष को बुलाकर कहा, जितने पैसे खर्च हुए हैं, जाकर दीपक से ले लेना। नीरज चुप चाप देखता रहा।सुभाष ने 5000/- रुपये नोटिफिकेशन के खर्चे के नाम पर ले लिए। उन रुपयों से उसने अपने बीमार पिता के लिए दवाईयाँ खरीदी और गाँव भेज दिया। बेईमानी के नमक का हक अदा हो चुका था।



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अरोड़ा साहब का कपड़ों के इंपोर्ट और एक्सपोर्ट का दिल्ली में बहुत बड़ा कारोबार था। अक्सर वो चीन के व्यापारियों से संपर्क करके उनसे कपड़ों के एक्सपोर्ट का आर्डर लेते, फिर अपनी फैक्ट्री में कपड़ों को बनवा कर चीन भेज देते। इस काम में अरोड़ा साहब को बहुत मुनाफा होता था। उनकी इंप

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कविता बहती है

22 नवम्बर 2018
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कविता तो केवल व्यथा नहीं,निष्ठुर, दारुण कोई कथा नहीं,या कवि शामिल थोड़ा इसमें,या तू भी थोड़ा, वृथा नहीं।सच है कवि बहता कविता में,बहती ज्यों धारा सरिता में,पर जल प

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मैंने देखा था एक सपना

6 दिसम्बर 2018
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मैं और ब्रह्मांड

8 दिसम्बर 2018
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मेरी ये कविता ईश्वर की विशालता और उसके असीमित प्रकृति को समर्पित है। मुझे आश्चर्य होता है कि मैं इतने बड़े ब्रह्मांड का हिस्सा हूँ।ये ब्रह्मांड इतना बड़ा है कि सबसे नजदीक के तारे के पास भी जाने में वर्षों लग जाते है। इस कविता के माध्यम से मैंने इस ब्रह्मांड के यात्रा की परिकल्पना की है। आइये मेरे

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हिप हिप हुर्रे

13 दिसम्बर 2018
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पिछले एकघंटे से उसके हाथ मोबाइल पर जमे हुए थे। पबजी गेममें उसकी शिकारी निगाहें दुश्मनों को बड़ी मुश्तैदी से साफ कर रहीं थी। तकरीबन आधेघंटे की मशक्कत के बाद वो जोर जोर से चिल्लाने लगा। हुर्रे, हुर्रे, हिप हिप हुर्रे। आखिकार लेबल 30 पार कर हीं लिया। डेढ़ घंटे की जद्दोजहद के

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पाँच रूपये

1 जनवरी 2019
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बात लगभग अस्सी के दशक की है . जितने में आजकल एक कप आइसक्रीम मिलता है , उतने में उनदिनों एक किलो चावल मिल जाया करता था. अंगिरस 6 ठी कक्षा का विद्यार्थी था. उसके पिताजी पोस्ट ऑफिस में एक सरकारी मुलाजिम थे. साईकिल से पोस्ट ऑफिस जाते थे. गाँव में उनको संपन्न लोगो में नहीं , त

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चप्पल वाला दुध

16 जनवरी 2019
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रमेश को बहुत आश्चर्य हुआ।मोन उसके हाथ में चप्पल पकड़ा रहा था। रमेश ने लेने से मना किया तो मोनू रोने लगा। रमेश के मामा ने समझाया, भाई हाथ में पकड़ लो, वरना मोनू दुध नहीं पियेगा। रमेश ने चप्पल हाथ में ले लिया। फिर मोनू एक एक करके मामा , फिर मामी के हाथ में चप्पल पकड़ाते गया। ज

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जीवन ऊर्जा

13 फरवरी 2019
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जीवन ऊर्जा तो एक हीं है, ये तुमपे कैसे खर्च करो।या जीवन में अर्थ भरो या,यूँ हीं इसको व्यर्थ करो।तुम मन में रखो हीन भाव,और ईक्क्षित औरों पे प्रभाव,भागो बंगला गाड़ी पीछे ,कभी ओहदा कुर्सी के नीचे,जीवन को खाली व्यर्थ करो, जीवन ऊर्जा तो एक हीं है,ये तुमपे कैसे खर्च करो।या म

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राष्ट्र का नेता कैसा हो?

29 अप्रैल 2019
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राष्ट्र का नेता कैसा हो?जो रहें लिप्त घोटालों में,जिनके चित बसे सवालों में,जिह्वा नित रसे बवालों में,दंगा झगड़ों का क्रेता हो?क्या राष्ट्र का नेता ऐसा हो?राष्ट्र का नेता कैसा हो?जन गण का जिसको ध्यान नहीं,दुख दीनों का संज्ञान नहीं,निज थाती का अभिज्ञान नहीं,अज्ञान हृदय में सेता हो,क्या राष्ट्र का नेता

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राह प्रभु की

14 मई 2019
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कितना सरल है,सच?कितना कठिन है,सच कहना।कितना सरल है,प्रेम?कितना कठिन है,प्यार करना।कितनी सरल है,दोस्ती,कितना मुश्किल है,दोस्त बने रहना।कितनी मुश्किल है,दुश्मनी?कितना सरल है,दुश्मनी निभाना।कितना कठिन है,पर निंदा,कितना सरल है,औरों पे हँसना।कितना कठिन है,अहम भाव,कितना सरल है,

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डिजिटल भी और सिंगल भी

18 मई 2019
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पबजी गेममें उसकी शिकारी निगाहें दुश्मनों को बड़ी मुश्तैदी से साफ कर रहीं थी। तकरीबन आधेघंटे की मशक्कत के बाद वो जोर जोर से चिल्लाने लगा। हुर्रे, हुर्रे, हिप हिप हुर्रे। आखिकार लेबल 30 पार कर हीं लिया। डेढ़ घंटे की जद्दोजहद के बाद उसने पबजी गेम का 30 वां लेबल पार कर लिया था

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चांडाल

21 मई 2019
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ये एक नकारात्मक व्यक्ति के बारे में एक नकारात्मक कविता है। इस कविता में ये दर्शाया गया है कि कैसे एक व्यक्ति अपनी नकारात्मक प्रवृत्ति के कारण अपने आस पास एक नकारात्मकता का माहौल पैदा कर देते हैं। इस कविता को पढ़ कर यदि एक भी व्यक्ति अपनी नकारात्मकता से बाहर निकलने की कोशिश भी करता है, तो कवि अपने प्

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न्यूटन का अपराध

22 जुलाई 2019
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न्यूटन का अपराधअर्जुन अपने 5 भाइयों के साथ मुजफ्फपुर में रहता था। उसके पिता सरकारी मुलाजिम थे । गुजर बसर लायक बामुश्किल कमा पाते थे।अक्सर खाने पीने के लिए अन्य भाइयों के साथ उसको छीना झपटी करनी पड़ती थी। मन लायक भरपुर खाना यदा कदा हीं नसीब होता था। गर्मी की छुट्टियों में

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एक से पचास

6 अगस्त 2019
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एक दो तीन चार पाँच छे सात,गिनती ये मेरी प्रभु सुनो जग्गनाथ।आठ नौ दस ग्यारह बारह तेरह,तेरा हो हाथ छूटे जन्मों का घेरा।चौदह पंद्रह सोलह सत्रह अठारह उन्नीस,हार भी ना मेरा प्रभु ना हीं मेरी जीत।बीस इक्कीस बाइस तेईस चौबीस पच्चीस,हरो दुख सारे प्रभु तू हीं मन मीत।छब्बीस सताईस अ

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सागर के दर्शन जैसा

10 अगस्त 2019
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तुम कहते वो सुन लेता,तुम सुनते वो कह लेता।बस जाता प्रभु दिल मे तेरे,गर तू कोई वजह देता।पर तूने कुछ कहा नही,तेरा मन भागे इतर कहीं।मिलने को हरक्षण वो तत्पर,पर तुमने ही सुना नहीं।तुम उधर हाथ फैलाते पल को,आपदा तेरे वर लेता।तुम अगर आस जगाते क्षण वो,विपदा सारे हर लेता।पर तूने क

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खा जाओ इसको तल के

24 अगस्त 2019
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शैतानियों के बल पे,दिखाओ बच्चों चल के,ये देश जो हमारा, खा जाओ इसको तल के।किताब की जो पाठे तुझको पढ़ाई जाती,जीवन में सारी बातें कुछ काम हीं ना आती।गिरोगे हर कदम तुम सीखोगे सच जो कहना,मक्कारी सोना चांदी और झूठ हीं है गहना।जो भी रहा है सीधा जीता है गल ही गल के,चापलूस हीं चल

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बाजार

27 अप्रैल 2020
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झूठ हीं फैलाना कि,सच हीं में यकीनन,कैसी कैसी बारीकियाँ बाजार के साथ।औकात पे नजर हैं जज्बात बेअसर हैं ,शतरंजी चाल बाजियाँ करार के साथ।दास्ताने क़ुसूर दिखा के क्या मिलेगा,छिप जातें गुनाह हर अखबार के साथ।नसीहत-ए-बाजार में आँसू बावक्त आज,दाम हर दुआ की बीमार के साथ।दाग जो हैं

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अभिलाष

26 दिसम्बर 2020
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जीवन के मधु प्यास हमारे, छिपे किधर प्रभु पास हमारे?सब कहते तुम व्याप्त मही हो,पर मुझको क्यों प्राप्त नहीं हो?नाना शोध करता रहता हूँ, फिर भी विस्मय में रहता हूँ,इस जीवन को तुम धरते हो, इस सृष्टि को तुम रचते हो।कहते कण कण में बसते हो,फिर क्यों मन बुद्धि हरते हो ?सक्त हुआ मन निरासक्त पे,अभिव

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नया साल 2021

31 दिसम्बर 2020
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अंधकार का जो साया था, तिमिर घनेरा जो छाया था,निज निलयों में बंद पड़े थे,रोशन दीपक मंद पड़े थे।निज श्वांस पे पहरा जारी, अंदर हीं रहना लाचारी ,साल विगत था अत्याचारी,दुख के हीं तो थे अधिकारी।निराशा के बादल फल कर,रखते सबको घर के अंदर,जाने कौन लोक से आए, घन घ

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सचमुच सब सरकार खा गई

9 जनवरी 2021
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राशन भाषण का आश्वासन देकर कर बेगार खा गई।रोजी रोटी लक्कड़ झक्कड़ खप्पड़ सब सरकार खा गई। देश हमारा है खतरे में, कह जंजीर लगाती है।बचे हुए थे अब तक जितने, हौले से अधिकार खा गई।खो खो के घर बार जब अपना , जनता जोर

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कैसे हो जाति और धर्म का नाश?

19 जनवरी 2021
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मैंने एक छोटी सी कहानी पढ़ी है । एक किसान था । उसके चार बेटे थे । समय आने पर उसने अपनी जमीन को चार बेटों में बाँट दिया । उसने अपने चार बेटों को एक बराबर जमीं प्रदान की थी । सोचा था चारो बेटे शांति से रहेंगे। एक आदमी बहुधा जैसा सोचता है , वैसा होता नहीं है। चारो बेटे एक स

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ईश्वर का प्रमाण

25 जनवरी 2021
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मानव ईश्वर को पूरी दुनिया में ढूँढता फिरता है । ईश्वर का प्रमाण चाहता है, पर प्रमाण मिल नहीं पाता। ये ठीक वैसे हीं है जैसे कि मछली सागर का प्रमाण मांगे, पंछी आकाश का और दिया रोशनी का प्रकाश का। दरअसल मछली के लिए सागर का प्रमाण पाना बड़ा मुश्

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मंजिल का अवसान नहीं

30 जनवरी 2021
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एक व्यक्ति के जीवन में उसकी ईक्क्षानुसार घटनाएँ प्रतिफलित नहीं होती , बल्कि घटनाओं को प्रतिफलित करने के लिए प्रयास करने पड़ते हैं। समयानुसार झुकना पड़ता है । परिस्थिति के अनुसार ढ़लना पड़ता है । उपाय के रास्ते अक्सर दृष्टिकोण के परिवर्तित होने पर दृष्टिगोचित होने लगते हैं।

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आदमी का आदमी होना बड़ा दुश्वार है

13 फरवरी 2021
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सत्य का पालन करना श्रेयकर है। घमंडी होना, गुस्सा करना, दूसरे को नीचा दिखाना , ईर्ष्या करना आदि को निंदनीय माना गया है। जबकि चापलूसी करना , आत्मप्रशंसा में मुग्ध रहना आदि को घृणित कहा जाता है। लेकिन जीवन में इन आदर्शों का पालन कितने लोग कर पाते हैं? कितने लोग ईमानदार, शां

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क्या रखा है नाम में

15 फरवरी 2021
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अपने प्रसिद्ध लेखन में , जिसका नाम है रोमियो और जूलियट, विश्व प्रसिद्ध कवि विलियम शेक्सपियर का एक प्रसिद्ध वक्तव्य दिया है,: - "यदि गुलाब को किसी और नाम से पुकारे तो भी वो उतना हीं मीठा सुगंध देगा जितना कि गुलाब के नाम से पुकारने पर देता है" इस कथन की प्रासंगिकता आज भी

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दशरथ मांझी : प्रेम की अद्भुत मिसाल

13 मार्च 2021
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प्रेम के प्रतीक के रूप में ताजमहल की मिसाल पूरी दुनिया में दी जाती है । मिस्र के पिरामिड , चीन की दिवाल, पीसा की झुकी हुई मीनार इत्यादि के साथ ताजमहल को भी दुनिया के सात अजूबों में से एक माना जाता है । सफेद संगमरमर के पत्थर से बनी हुई ये अद्भुत कृति भारत के उत्तर प्रदेश

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अंतर्द्वन्द्व

19 मार्च 2021
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जीवन यापन के लिए बहुधा व्यक्ति को वो सब कुछ करना पड़ता है , जिसे उसकी आत्मा सही नहीं समझती, सही नहीं मानती । फिर भी भौतिक प्रगति की दौड़ में स्वयं के विरुद्ध अनैतिक कार्य करते हुए आर्थिक प्रगति प्राप्त करने हेतु अनेक प्रयत्न करता है और भौतिक समृद्धि प्राप्त भी कर लेता है ,

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आक्सी

27 मार्च 2021
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तुम आते हीं रहो देर से हम रोज हीं बतातें है,चलो चलो हम अपनी अपनी आदतें दुहराते हैं।लेट लतीफी तुझे प्रियकर नहीं समय पर आते हो,मैं राही हूँ सही समय का नाहक हीं खिसियाते हो।तुम कहते हो नित दिन नित दिन ये क्या ज्ञान बताता हूँ?नही समय पर तुम आते हो कह क्यों शोर मचाता हूँ?जाओ ज

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पश्चाताप

3 अप्रैल 2021
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तुम कहते हो करूँ पश्चताप,कि जीवन के प्रति रहा आकर्षित ,अनगिनत वासनाओं से आसक्ति की ,मन के पीछे भागा , कभी तन के पीछे भागा ,कभी कम की चिंता तो कभी धन की भक्ति की। करूँ पश्चाताप कि शक्ति के पीछे रहा आसक्त ,कभी अनिरा से दूरी , कभी मदिरा की मज़बूरी ,कभी लोभ कभी भोग तो कभी म

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दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-1

18 अप्रैल 2021
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जब सत्ता का नशा किसी व्यक्ति छा जाता है तब उसे ऐसा लगने लगता है कि वो सौरमंडल के सूर्य की तरह पूरे विश्व का केंद्र है और पूरी दुनिया उसी के चारो ओर ठीक वैसे हीं चक्कर लगा रही है जैसे कि सौर मंडल के ग्रह जैसे कि पृथ्वी, मांगल, शुक्र, शनि इत्यादि सूर्य का चक्कर लगाते हैं। न

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दुर्योधन कब मिट पाया:[भाग-2]

26 अप्रैल 2021
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महाभारत के शुरू होने से पहले जब कृष्ण शांति का प्रस्ताव लेकर दुर्योधन के पास आये तो दुर्योधन ने अपने सैनिकों से उनको बन्दी बनाकर कारागृह में डालने का आदेश दिया। जिस कृष्ण से देवाधिपति इंद्र देव भी हार गए थे। जिनसे युद्ध करने की हिम्मत देव, गंधर्व और यक्ष भी जुटा नहीं पाते थे, उन श्रीकृष्ण को कैद मे

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जरा दिल को थाम के

30 अप्रैल 2021
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कोरोना बीमारी की दूसरी लहर ने पूरे देश मे कहर बरपाने के साथ साथ भातीय तंत्र की विफलता को जग जाहिर कर दिया है। चाहे केंद्र सरकार हो या की राज्य सरकारें, सारी की सारी एक दूसरे के उपर दोषरोपण में व्यस्त है। जनता की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण चुनाव प्रचार हो गया है। दवाई, टीका, बेड आदि की कमी पूरे देश मे

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कोरोना से हार चुके क्या ईश्वर से ये कहे बेचारे?

3 मई 2021
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कोरोना महामारी के हाथों भारत में अनगिनत मौतें हो रही हैं। सत्ता पक्ष कौए की तरह अपनी शक्ति बढ़ाने के लालच में चुनाव पे चुनाव कराता जा रहा है तो विपक्ष गिद्ध की तरह मृतकों की गिनती करने में हीं लगा हुआ है। इन कौओं और गिद्धों की प्रवृत्ति वाले लोगों के बीच मजदूर और श्रमिक प

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दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-3

19 मई 2021
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रामायण में जिक्र आता है कि रावण के साथ युद्ध शुरू होने से पहले प्रभु श्रीराम ने उसके पास अपना दूत भेजा ताकि शांति स्थापित हो सके। प्रभु श्री राम ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उन्हें ज्ञात था कि युद्ध विध्वंश हीं लाता है । वो जान रहे थे कि युद्ध में अनगिनत मानवों , वानरों , राक्षसों की जान जाने वाली थी ।

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दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-4

23 मई 2021
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जिस प्रकार अंगद ने रावण के पास जाकर अपने स्वामी मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम चन्द्र के संधि का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था , ठीक वैसे हीं भगवान श्रीकृष्ण भी महाभारत युद्ध शुरू होने से पहले कौरव कुमार दुर्योधन के पास पांडवों की तरफ से शांति प्रस्ताव लेकर गए थे। एक दूत के रूप में अंगद और श्रीकृष्ण की भू

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आओ ऐसे दीप जलाओ

4 नवम्बर 2021
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<p>इस दीवाली सबके हृदय में दया , शांति, करुणा और क्षमा का उदय हो, क्रोध और ईर्ष्या का नाश हो और प्रे

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वक्त का मारा हुआ

7 नवम्बर 2021
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<p><br></p> <figure><img src="https://shabd.s3.us-east-2.amazonaws.com/articles/611d425242f7ed561c89

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विगत साल

2 जनवरी 2022
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जग हारा अंतक जीत गया आमोद  मोद मधुगीत गया,थे तन्हा तन्हा रात दिन  वक्त  शोकाकुल  व्यतीत गया।कुछ राष्ट्र   बड़े जो  बनते थे दीनों  पर तनकर  रहते थे ,उनकी मर्यादा अनुशासित वो अहमभाव ..

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अफसोस शहीदों का

27 मार्च 2022
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चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राज गुरु, सुखदेव, बटुकेश्वर दत्त, खुदी राम बोस, मंगल पांडे इत्यादि अनगिनत वीरों ने स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में हंसते हंसते अपनी जान को कुर्बान कर दिया। परंतु ये देश

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क्या क्या काम कराओगे तुम

3 अप्रैल 2022
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मर्यादा पालन करने की शिक्षा लेनी हो तो प्रभु श्रीराम से बेहतर कोई उदाहरण नहीं हो सकता। कौन सी ऐसी मर्यादा थी जिसका पालन उन्होंने नहीं किया ? जनहित को उन्होंने हमेशा निज हित सर्वदा उपर रखा। परंतु

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साँप की हँसी कैसी होती

10 अप्रैल 2022
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जब देश के किसी हिस्से में हिंसा की आग भड़की हो , अपने हीं देश के वासी अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गए हो  और जब अपने हीं देश मे पराये बन गए इन बंजारों की बात की जाए तो क्या किसी व्यक्ति के लिए ये हँ

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क्यों सत अंतस दृश्य नहीं

15 अप्रैल 2022
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सृष्टि के कण कण में व्याप्त होने के बावजूद परम तत्व, ईश्वर  या सत , आप उसे जिस भी नाम से पुकार लें, एक मानव की अंतर दृष्टि में क्यों नहीं आता? सुख की अनुभूति प्रदान करने की सम्भावना से परिपूर्ण हो

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किस राह के हो अनुरागी

25 अप्रैल 2022
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ईश्वर किसी एक धर्म , किसी एक पंथ या किसी एक मार्ग का गुलाम नहीं। अपने धर्म को सर्वश्रेष्ठ मानने से ज्यादा अप्रासंगिक मान्यता कोई और हो हीं नहीं सकती । परम तत्व को किसी एक धर्म या पंथ में बाँधने की कोश

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अखबार ए खास

8 मई 2022
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समाज की बेहतरी की दिशा में आप कोई कार्य करें ना करे परन्तु कार्य करने के प्रयासों का प्रचार जरुर करें। आपके झूठे वादों , भ्रमात्मक वायदों , आपके प्रयासों की रिपोर्टिंग अखबार में होनी चाहिए। समस्

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मेरे गाँव में होने लगा है शामिल थोड़ा शहर [प्रथम भाग】

22 मई 2022
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इस सृष्टि में कोई भी वस्तु बिना कीमत के नहीं आती, विकास भी नहीं। अभी कुछ दिन पहले एक पारिवारिक उत्सव में शरीक होने के लिए गाँव गया था। सोचा था शहर की दौड़ धूप वाली जिंदगी से दूर एक शांति भरे माहौ

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मेरे गांव में होने लगा है शामिल थोड़ा शहर:भाग:2

5 जून 2022
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हाल फिलहाल में मेरे द्वारा की गई मेरे गाँव की यात्रा के दौरान मेने जो बदलाहट अपने गाँव की फिजा में देखी , उसका काव्यात्मक वर्णन मेने अपनी कविता "मेरे गाँव में होने लगा है शामिल थोड़ा शहर" क

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वर्तमान से वक्त बचा लो तुम निज के निर्माण में [तृतीय भाग ]

10 जुलाई 2022
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प्रतिकूल परिस्थितियों के लिए संसार को कोसना सर्वथा व्यर्थ है। संसार ना तो किसी का दुश्मन है और ना हीं किसी का मित्र। संसार का आपके प्रति अनुकूल या प्रतिकूल बने रहना बिल्कुल आप पर निर्भर करता है। महत्व

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वर्तमान से वक्त बचा लो [पंचम भाग ]

28 अगस्त 2022
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विवाद अक्सर वहीं होता है, जहां ज्ञान नहीं अपितु अज्ञान का वास होता है। जहाँ ज्ञान की प्रत्यक्ष अनुभूति  होती है, वहाँ  वाद, विवाद या  का प्रतिवाद क्या स्थान ?  आदमी के हाथों में  वर्तमान समय के अल

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