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🎂प्रश्न बड़ा है मस्त दोस्तो.....🎂

8 जनवरी 2022

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प्रश्न बड़ा है मस्त दोस्तो......पर है बड़ा कसैला,
रायता कैसे फैला?..........कहो ना कैसे फैला?
रायता कैसे फैला? .................................
सवल इंडिया के अनुयाई.......वायुयान से लाए,
घर में बुला बुला हमने...........गोरे गले लगाए।
अपना दोष नहीं है बस....मजदूरों की है गलती,
ना जाते घर, मर जाते क्या?. बीमारी ना पलती,
भूख, प्यास, हठधर्मी, से ..को-रोना धोना फ़ैला,
रायता ऐसे फैला? ..........हां जी हां ऐसे फैला?
रायता कैसे फैला? .................................
मरकजकी हरकतथी यासब माल विदेशी आया,
टोपी दुश्मन थी या फिरवो झूला जिसे झुलाया?
सरहद में बिन आएही जो गटक गया लालों को,
देख सका ना देश ज़िगर पर माताके छालों को।
बढ़ा कुहासा झूठ सत्य का चश्मा हो गया मैला।
रायता ऐसे फैला? .........हां जी हां ऐसे फैला?
रायता कैसे फैला? .................................
पालपोस के बड़ा किए ..फिर धर्म कर्म करवाए,
पोल खुले की खातिर कितने  पत्ते साफ कराए।
संत हुआ बेसंत धर्म से .....मालिश मस्त कराए,
ठाकुर जीकी माया फिर भी केस साफ करवाए।
हुआ वायरल सेट नेट पे....... रास रचाता छैला,
रायता ऐसे फैला? .........हां जी हां ऐसे फैला?
रायता कैसे फैला? .................................
भ्रष्टों के जमघट में देखो .....एक कलंदर आया,
झूठ पलीता फोड़ फोड़ के खूबहि नाच नचाया।
भारत बट की जड़ें खोदकर ....पत्ते सींच रहा है,
छत विकास के पिछवाड़े से .तख्ते खींच रहा है।
बन पवित्रतम छवी गढ़े पर काम करे सब मैला।
रायता ऐसे फैला? .........हां जी हां ऐसे फैला?
रायता कैसे फैला? .................................
परनाले की शक्ल लिए.बहती विकास की गंगा,
होकर विकसित आमआदमी हुआ जाएहै नंगा।
हुयी नौकरी खत्म चाकरी .जीवन भर करनी है,
सरकारी दामादों की ....जेबें मिल कर भरनी है।
सच कहना मुश्किल है,यारो है ही बड़ा विषैला।
रायता ऐसे फैला? .........हां जी हां ऐसे फैला?
रायता कैसे फैला? .................................
संवादों के बिगड़े क्रम में .....भाषा मारती जाए,
शिक्षा के ढांचे की अंतिम.कील उखड़ती जाए।
आतिश ही आतिश है दिलमें नयनों में खंजर है,
सुलग रहा मानस पीछे ...रक्ताभ त्रस्त मंज़र है।
आई हकीकत सड़कों पे तो फटा झूट का थैला,
रायता ऐसे फैला? .........हां जी हां ऐसे फैला?
रायता कैसे फैला? .................................
# नवाब आतिश बदायूंनी। 02.08.2020.
कविता रावत

कविता रावत

विदेशों से बीमारी के डर से जो स्वदेश लौटे उन अमीरों की लापरवाही और उनका बड़े बड़ों का साथ मिल जाना गरीबों के लिए अभिशाप बन गया कोरोना में ... बहुत अच्छी चिंतनशील, जागरूक करती रचना

8 जनवरी 2022

ATISH

ATISH

1 अप्रैल 2022

आभार बहन।

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रचनाएँ
💐वेदनाओं की वीथिका💐
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हिंदी के प्रथम काव्य संग्रह को आप सभी सुधि पाठकों के मध्य रखते हुए आग्रह करना चाहूंगा कि काश! हमारे इस प्रयास में हमारे हमसफर हो सकें- चलो तह को जी लें फज़ीहत से पहले। शव-ए-ग़म तो पी लें नसीहत से पहले।। वो शहर-ए-चरागाँ ..वो जोश-ए-तमन्ना। कई जांनशीं थे ......तेरे ख़त से पहले।। @ नवाब आतिश।
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हम देख रहे हैं........होने तक,

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@ मैं सच्चा हूं ये मैंने कब कहा था, तुम ऐसा सोचते हो...... ये गलत है।मैं तो बस झूठ में.... जिंदा हूं शायद,यकीनन मैं नहीं हूं ....जाने कब का।वो पहला दिन जो... मैंने झूठ बोला,मैं उस दिन ज़िन्

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भाई, सांवरे, .......मैं तोरी वावरिया,कैसा, नाच नचाए,..तोरी बांसुरिया। भई...मैं तोकू ध्याऊं, तोपे वारी वारी जाऊं,सपनों में देखूं तोकू ,...गरवा लगाऊं,श्याम सलोने, .........राधा के सोहने,आओ ना कान्हा....

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🎂प्रश्न बड़ा है मस्त दोस्तो.....🎂

8 जनवरी 2022
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