shabd-logo

सरहदपार वाला प्यार

3 नवम्बर 2018

263 बार देखा गया 263

सरहदपार वाला प्यार


गुलज़ार साहब ने क्या ख़ूब लिखा है...

आँखों को वीसा नहीं लगता,
सपनो की सरहद नहीं होती...

मेरी यह कहानी भी कुछ ऐसी ही है, इन पंक्तियों के जैसी, जिसे किसी वीसा या पासपोर्ट की ज़रूरत नहीं है आपके दिल तक पहुंचने के लिए. बस यूँ ही ख़्वाबों के ज़रिये आपकी आँखों में और आँखों के रास्ते एक सफ़र तय करकर पहुंच जायगी आपके दिल तक.

तो चलिए आगे बढ़ते हैं कहानी पर...

विराज किसी शहर के किसी कोने में रहता था, अगर हम ये जान भी ले वो किस शहर, किस गली, किस मोहल्ले में रहता है, उससे इस कहानी में कोई ख़ास अंतर नहीं पड़ेगा. इसलिए इसे ऐसा ही रहने देते हैं. पर इतना ज़रूर बताना चाहूँगा विराज उन लोगों के खानदान से है जिन्हें १९४७ के बटवारे के वक़्त अपनी मर्ज़ी या फिर जबरदस्ती हज़ारों रोते-बिलखते लोगों के साथ ट्रेनों में जानवरों की तरह भरकर अपनी मिट्टी से दूर कर दिया गया था. उस दिन कुछ लकीरें खींचीं थी जमीनों पर, जिसमें से कुछ लकीरें वक़्त की धूल की तरह मिट गई थी, पर कुछ लकीरों के निशान आज भी इस पार हो या उस पार लाखों लोगों के दिलों एक पुराने ज़ख्म की तरह रह-रह कर रिसती रहती हैं.

विराज के परदादा भी उसी बटवारे में अपना सब कुछ छोड़कर किसी शहर में आ बसे. सालों लग गए थे उन्हें अपनी बिखरी ज़िंदगी के टुकड़े एक-एक करके फिर से एक उम्दा तस्वीर बनाने में. यह तस्वीर पहले जितनी ख़ूबसूरत या संजीदा तो नहीं थी मगर ज़िन्दगी का हर रंग इसमें बड़े ही सलिखे से उकेरा गया था. और हर रंग की अपनी एक अहमियत थी और हर रंग अपने साथ कुछ यादें समेटे हुए था.

विराज की ज़िंदगी भी कई रंगों से रंगी हुई थी. इसमें हल्के नीले दोस्ती के रंग थे. मीलों तक फैली हरियाली के जैसे हरे-भरे रंग परिवार के साथ बिताये लम्हों के थे. बस कुछ किसी खुशनुमा शाम की तरह चारों तरफ फैले हल्के गुलाबी रंगों की कमी थी उसकी ज़िंदगी में. और वो पल उसका इंतज़ार बड़ी ही बेसब्री से कर रहे थे.

विराज ने अभी-अभी कॉमर्स में ग्रेजुएशन पूरा किया था और किसी फॉरेन यूनिवर्सिटी से एमबीए करने के ख्व़ाब को आँखों में सजाये कई एंट्रेंस एग्जाम में अपनी किस्मत आजमाने का सोच रहा था. उन्हीं एग्जामस की तैयारी के लिए उसने कई कोचिंग क्लासेस ज्वाइन की हुई थी. उन्हीं में से एक थी इंग्लिश क्लास, कुल मिलाकर ३० स्टूडेंट्स ही थे क्लास में और उसमें से भी २५ लड़के और सिर्फ़ ५ लड़कियां. और मानों उन पांच लड़कियों में भी सिर्फ़ एक ही लड़की जो देखने में बला की ख़ूबसूरत हो तो किसी का भी ध्यान उसकी तरफ़ जाना लाज़मी था.

क्लास के सभी लड़के उसी एक लड़की को ही देखते और हर कोई उसी से बात करने का ख्व़ाब देखता. पर ख़्वाब तो सिर्फ़ ख्व़ाब होते हैं, कुछ पूरे तो कुछ अधूरे. वैसे एक अधूरे ख्व़ाब के जैसा ही था क्लास की सबसे खूबसूरत लड़की जिया से बात करना या उससे मुलाकात करना. जिया बेहद ही संजीदा किस्म की लड़की थी, ना ज्यादा किसी के साथ घुलना-मिलना, ना किसी से बातें करना और ना ही किसी के साथ बाहर पार्टीज में जाना.

क्लास के हर लड़के की तरह विराज भी उसके आकषर्ण से अछुता ना रहा, उसे भी जिया के चेहरे में वही हसीं तस्वीर नज़र आई जो हर युवा अपनी पहली गर्लफ्रेंड के लिए अपने दिल में बनाकर रखता है. वो जिया के प्रति एक अजीब सा आकर्षण और लगाव महसूस करता जिसे वो चाहकर भी इगनोर नहीं कर पाता. उसने कई बार जिया से बात करने की कोशिश की मगर जब भी वो जिया के सामने होता तो शब्द या तो उसके हलक में ही अटककर रह जाते या फिर वो बिना कुछ बोले ही वापस लौट आता. ऐसा एक बार नहीं कई बार हुआ और हर बार नतीजा यही होता. मगर एक दिन ऐसा आया जिसके बारें में विराज ने कभी सोचा नहीं था. उस दिन विराज हमेशा की तरह क्लास के बाद अपनी बाइक पर बैठकर कुछ दोस्तों से बातें कर रहा था तभी एक मधुर आवाज़ ने विराज और उसके दोस्तों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.

Excuse-me...

जिया का इतना कहना था की सारे लड़के पलटकर उसे ही देखने लगे. मानों सब पूछ रहे हों, मोहतरमा आप किसके बात करना चाहती हैं. सभी के चेहरों के सवालों को पढ़ते हुए और अपने शब्दों को सिर्फ़ विराज की तरफ केन्द्रित करते हुए जिया ने बोला.

Viraj can you please come with me for a minute...

विराज तो मानों यह सुनकर बर्फ़ की तरह जम गया था उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था. जिया जिससे वो बात करना चाहता था, जिसके उसने ना जाने कितने ख़्वाब देख डाले थे वो आज उसे उसके नाम से बुला रही है. विराज उसी तरह जिया को देखता रहा जब तक वापस जिया की आवाज़ ने उसका ध्यान नहीं तोड़ दिया.

Viraj... Viraj

विराज अपने आपको थोड़ा संभालते हुए जिया की और बढ़ता है और उससे पूछता है.

Yes Jiya how can I help you!

जिया थोडा सकुचाते हुए बोलती है.

Can I borrow, notes of yesterdays class from you?

यह सुनकर विराज को लगा मानों जैसे, यही वो वक़्त है जब जिया से दोस्ती की शुरुआत की जा सकती है. इसलिए उसने ज्यादा सोचे बिना अपने बेग से नोटबुक निकालकर जिया को दे दी इसी उम्मीद के साथ की अबसे उसका और जिया की दोस्ती का सिलसिला शुरू हो जायेगा. जिया, विराज से नोटबुक लेकर और उसे थैंक्स कहकर वहां से चली गई. विराज इसी बात से बहुत ख़ुश था के आज नोट्स के बहाने ही सही जिया ने उससे बात तो की. आज वो क्लास से घर अपने चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान लिए निकला. पूरे रास्ते वो यही सोच रहा था के वो आगे जिया से क्या कहेगा, उससे क्या-क्या पूछेगा, उसे अपने बारे में क्या-क्या बताएगा. यह सब सोचते-सोचते दिन कब बीत गया, विराज को यह अहसास ही नहीं हुआ. पर अगले दिन जब वो क्लास पहुंचा उसे जिया कहीं नज़र नहीं आई. उसने उसे सभी जगह देखा मगर वो उसे कहीं नहीं मिली. जो नोट्स उसने जिया को दिए थे वो भी जिया की एक दोस्त वापस लौटा गई. विराज ने जिया की दोस्त से उसके बारे में पता करने की कोशिश की तो पता चला जिया कुछ दिनों के लिए अपनी छुट्टियों में इस शहर में आई थी और अब छुट्टियाँ पूरी होते ही वापस लौट गई है.

यह सुनकर तो जैसे विराज का दिल ही टूट गया, उसने कितना कुछ सोचा था, कल से लेकर आज तक कितने ख्व़ाब अपनी आँखों में सजा डाले थे. कितना कुछ था जो वो जिया से बांटना चाहता था. कितना कुछ था जो वो सुनना चाहता था, कहना चाहता था. पर सबकुछ एक ही पल में रेत की तरह हाथों से फिसल गया. विराज ने एडमिन ऑफिस से जिया के बारे में पता लगाना चाहा पर वहां से उसे कुछ ख़ास जानकारी नहीं मिली और ना ही उसकी किसी दोस्त को उसके बारे में कुछ पता था.

जिया जैसे उसके लिए एक पहेली बन गई थी जिसे सुलझाने की जी-तोड़ कोशिश कर रहा था मगर सफलता उसके हाथ नहीं लग पा रही थी. जिया के जाने के बाद कुछ दिनों तक विराज उसके ख्यालों में ही डूबा रहा. ना उसे कुछ अच्छा लगता, ना किसी काम में मन लगता, हर वक़्त वो जिया के बारे में ही सोचता रहता. पर वो कहते हैं कुछ ख्व़ाब जहन में एक अमिट छाप छोड़ जाते हैं, जिया को पाना भी एक ऐसा ही ख़वाब था जो विराज के जहन में अपनी एक अमिट छाप छोड़कर कहीं दूर चला गया था.

कुछ दिन लगे विराज को संभलकर अपनी routine life में लौटकर अपना ध्यान MBA की तैयारी में लगाने में, पर वो संभल ही गया. कभी-कभार ज़रूर जिया की याद उसके मन के आसमान पर किसी बादल की तरह छा जाती, मगर वो किसी तरह अपने मन को संभाल लेता. इसी तरह वक़्त बीतता गया और विराज ने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई और एग्जाम में लगा दिया ताकि जिया की याद उसे कभी भूले से भी वे आये. पर वो कहते हैं ना आप किसी चीज़ से जितना दूर भागने की कोशिश करते हैं वो उतना ही आपके करीब आ जाता है, ऐसा ही कुछ हुआ विराज के साथ.

उस दिन विराज एग्जाम देकर घर जल्दी लौट आया था और काफी दिनों बाद आज उसने फेसबुक पर login किया था. कई सारे notification और friend request थे, विराज ने एक-एक करके सारे notification और friend request check किये, ज्यादा कुछ ख़ास नहीं था updates में. सिर्फ़ वही दोस्तों के यहाँ-वहां के photos और फालतू के jokes जिसमें विराज को कोई ख़ासी दिलचस्पी नहीं थी इसलिये विराज ने फेसबुक से लॉगआउट करना ही सही समझा.

वो फेसबुक से लॉगआउट करने ही जा रहा था के अचानक उसकी नज़र एक फ्रेंड रिक्वेस्ट पर पड़ी. वो फ्रेंड रिक्वेस्ट किसी और की नहीं जिया की थी जो आज से कुछ एक महीने पहले भेजी गई थी. विराज ने ज्यादा कुछ सोचे बिना ही फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली और फ़ौरन जिया को मेसेज में ‘Hi’ लिखकर सेंड कर दिया. और उसकी उम्मीद से कहीं जल्दी जिया का ‘hi’ में रिप्लाई भी आ गया. विराज ने बातों को आगे बढ़ाते हुए लिखा...

how are you... यार तुम तो उस दिन के बाद से गायब ही हो गई?

विराज ने question mark वाले इमोटिकॉन के साथ लिखकर भेजा.

हाँ यार, घर पर कुछ जरूरी काम आ गया था इसलिए वापस आना पड़ा, किसी से भी नहीं मिल पाई. तुम्हे थैंक्स भी नहीं बोल पाई...

उसने सैड वाले इमोटिकॉन के साथ लिखकर भेजा.

तो आज बोल दो... विराज ने स्माइली के साथ लिखकर भेजा.

thank you very much for your help - उसका जवाब आया.

‘You are most welcome’

विराज ने फिर से एक स्माइली के साथ सेंड कर दिया.

बातों का जो सिलसिला उस दिन शुरू हुआ वो वहीं नहीं रुका. अब हर रोज दोनों घंटों बातें करते. जिस दिन जिया से बात नहीं होती विराज को कुछ भी अच्छा नहीं लगता. लगभग यही हाल जिया का था, उसका भी दिन विराज से बात किये बगैर पूरा नहीं होता. वो जल्दी-जल्दी सारे काम और पढ़ाई पूरी कर फेसबुक पर लॉगइन कर विराज के ऑनलाइन आने का बड़ी बेसब्री से इंतज़ार करती. फिर वो उससे अपने पूरे दिन की हर छोटी से छोटी बात शेयर करती.

कभी-कभार उससे रूठ जाती और विराज के लाख़ मनाने पर ही मानती. एक अजीब सा रूहानी रिश्ता धीरे-धीरे पनप गया था दोनों के बीच, जिससे वो दोनों ही बेख़बर थे. विराज तो पहले से ही जिया को पसंद करता था और अब उसे लगने लगा था जिया भी उसे पसंद करने लगी है और उसकी यह सोच काफी हद तक सही भी थी. क्यूंकि जिया के दिल में भी वही अहसास थे, वही मीठी-मीठी मुस्कराहट हमेशा उसके चेहरे पर फैली रहती और वही अजीब सी बैचेनी.

दोनों अब तक लगभग एक दूसरे के बारे में सब कुछ जान चुके थे फिर भी ऐसा कुछ था जो अब भी बाकी था. एक ऐसा सच जो शायद उन दोनों के रूहानी रिश्ते की नीवं हिला या फिर रिश्ते को ही ख़तम कर सकता था. जिया इस बात को बहुत अच्छे से जानती थी इसलिए उसने मन बना लिया था विराज को सबकुछ बताने का. उस पूरे दिन वो बहुत बेचैन रही, एक अजीब सी घबराहट के बादल उसके मन के आसमान पर छाए हुए थे. मन यही बात को सोच कर डर रहा था के विराज क्या सोचेगा, क्या को वो मुझसे हमेशा के लिए बात करना बंद कर देगा और ऐसे कई सवाल. इन्हीं सब सवालों और ख़्यालों में उलझे-उलझे कब दिन बीत गया उसे पता ही नहीं चला और दिन का वो समय आ गया जिसका जिया हर रोज बेसब्री से इंतज़ार करती थी.

उसने अपने ख़यालों पर अंकुश लगाते हुए और जितना सहज हो सकती थी, उतना सहज होते हुए अपने ID पर लॉगइन किया. उसके लॉगइन करते ही विराज का मेसेज आया...

‘Hello जिया’

जिया ने भी Hello में रिप्लाई कर दिया.

फिर काफी देर तक विराज का कोई मेसेज नहीं आया, तो उसने सोचा शायद विराज आज किसी काम में बिजी है इसलिए मेसेज नहीं कर रहा है. जिया ने तुरंत एक मेसेज टाइप करके सेंड कर दिया. जिसमे लिखा था...

अगर तुम आज बिजी हो तो हम कल बात करते हैं - पर उसकी उम्मीद से कहीं जल्दी विराज का रिप्लाई आया.

‘अरे नहीं यार बिजी नहीं हूँ बात कर सकते हैं, वो माँ ने कुछ मदद के लिए बुला लिया था. अब फ्री हूँ’

‘अब बताओ कैसा था तुम्हारा दिन’

जिया थोड़ा सोचने के बाद‘अच्छा था’, तुम्हारा कैसा रहा

‘ठीक था’

बस ठीक था... जिया ने उत्सुकता के साथ पूछा

‘हाँ यार दिन भर तो कोचिंग में निकल गया, बहुत लम्बा दिन था, फिर घर का काम. अब कहीं जाकर थोडा फ्री हुआ हूँ’

विराज ने अपनी दिनचर्या थोड़े विस्तार से बताई

‘तुम बोलो क्या बात करनी थी, कुछ बोल रही थी ना’ – विराज ने उत्सुकता से पूछा

इस सवाल ने जैसे जिया को एक गहरी सोच में डाल दिया, उसके दिमाग में सवालों की झड़ी लग गई थी, एक के बाद सवाल उसके दिमाग में चल रहे थे... जिसका ज़वाब जिया खोजने की कोशिश कर रहा थी. पर उसे कोई जवाब नज़र ही नहीं आ रहा था और इसी पशोपेश में उसने काफी देर तक विराज को रिप्लाई नहीं किया.

इतनी देर में विराज कई बार चैट पर मेसेज सेंड कर चुका था...

थोड़ी देर जिया कुछ सोचती है और फिर विराज को रिप्लाई करती है...

अच्छा सुनो विराज... एक बात बोलूं

हाँ बोलो

सोचो अगर में किसी दूसरे शहर, दूसरे देश से हूँ तो

तो क्या हुआ?

मतलब तुम्हे कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा इससे?

हाँ नहीं पड़ेगा

चलो एक बात और बताओ अगर मैं किसी और धर्म से हुई तो

उससे कुछ फ़र्क पड़ता है क्या?

वैसे पड़ना तो नहीं चाहिए, पर पड़ भी सकता है, depend करता है धर्म कौन सा है

मैं इसका क्या मतलब समझूँ, फ़र्क पड़ता है या नहीं पड़ता?

हूँ, हूँ

अब इसका क्या मतलब हुआ?

मतलब है नहीं पड़ता शायद !

शायद, शब्द को पढ़कर जिया को थोडा गुस्सा आ जाता है और वो गुस्से वाला emoji सेंड कर देती है. जिसे पढ़कर विराज भी एक हँसता हुआ emoji भेज देती है. जिससे देखकर जिया को और भी ज्यादा गुस्सा आता है तो वो जिया इस बार चार पांच गुस्से वाले emoji सेंड करती है. जिसे देखकर विराज रिप्लाई करता है.

अरे बाबा मज़ाक़ कर रहा था, मेरे लिए धर्म, जात, शहर, देश इस सभी चीज़ों कोई मायने नहीं...

और वैसे भी ये सारी चीज़ें सिर्फ़ और सिर्फ़ लोगों को अलग करते हैं, या फिर उन्हें एक दूसरे का दुश्मन बनाती हैं...

वैसे मैं तुम्हे बता दूं, मुझे जिस चीज़ से फ़र्क पड़ता हैं वो है फीलिंग्स...

वही तो हैं जो दो अजनबियों को जोड़ती है, उन्हें करीब लाती है और एक बनाती है...

विराज का ये जवाब सुनकर जिया बहुत खुश हो जाती है और झट से स्माइली सेंड करती है और साथ में लिखती है...

विराज मुझे तुम्हे एक बात बतानी है?

विराज झूटमूट का गुस्सा दिखाते हुए टाइप करता है...

अरे यार बोलो ना, जब से एक बात बतानी है बोल रही हो!

मैं ना

हाँ तुम ना

मैं ना

आगे भी तो बोलो

मैं पाकिस्तान से हूँ...

वो जैसे ही ये लिखकर सेंड करती है और काफ़ी देर तक विराज के रिप्लाई का जवाब करती है. जब फिर भी कोई रिप्लाई नहीं आता तो वो चैट हिस्ट्री चेक करती है. तो उसे पता चलता है वो मैसेज विराज तक पंहुचा ही नहीं.

और विराज भी काफ़ी देर से ऑफलाइन नज़र आ रहा है. उसे समझ ही नहीं आता क्या करे, क्या न करे. इस तरह विराज के बगेर जवाब दिए ऑफलाइन चले जाने से वो बेहद परेशान हो जाती है. बार बार चैट खोलकर देखती है, विराज की प्रोफाइल को विजिट करती है इसी उम्मीद से के कहीं विराज वापस ऑनलाइन तो नहीं आया. और ऐसे ही समय बीतता जाता है और वो वही चेयर पर सो जाती है इसी उम्मीद से के विराज ऑनलाइन आये...

Suneel Goyal की अन्य किताबें

1

सप्रेम – तेरा प्यारा सा ख़्वाब

23 अप्रैल 2017
0
1
0

एक ख्वाब मिला था किसी मोड़ परलिए एक पैगाम.थी एक पल की उसकी हस्तीऔर किया था एक पल सलाम.कर रहा था गुज़ारिश मुझसे मिलने की फिर एक बारजब रात हो खामोश और हर लम्हा हो तन्हा.मैने कहा भाई अब क्या काम है तेरा, क्यूँ मिलना है तुझे.तो मुस्कुरा कर बोला…सिर्फ़ इतना बताना है…शहर की इस दौड़ में भटक गया है तू,अजीबो

2

वो पुराना घर…

7 मई 2017
0
2
2

गली के कोने पर जो खंडहर नुमा मकान हैकिसी वक़्त बसेरा था कुछ ख़्वाबों का.कुछ ख़्वाब तड़के-तड़के उठना जाने किस उधेड़बुन में लग जाते.कभी इधर भागते, कभी उधर दौड़तेकभी उपर वाले कमरे में कुछ काग़ज़ात तलाशते.कभी

3

मिट्टी के सपने.

9 मई 2017
0
4
1

सुबह के तकरीबन ६ बज रहे थे. मौसम में थोड़ी नमी थी और हवा भी हलके हलके बह रही थी. गाँव की एक छोटी सी झोपडी के एक कोने में मिट्टी के बिछोने पर शुभा दुनिया से बेख़बर मिट्टी के सपनों में खोई हुई थी. शुभा कहने क

4

पर्चा

14 मई 2017
0
1
1

घंटी बजते ही जा बैठे सबअपनी - अपनी जगह परकोई पेन्सिल छील रहा हैतो कोई शर्ट की बाँह मेंकुछ छुपाने की कोशिशमें लगा हुआ हैना जाने कब मास्टर जी ले आए पर्चाऔर थमा दिया कपकपाते हाथों मेंडरते डरते देखा तो पता चलाजो पड़ा था वो तो आया ही नहीं.

5

चुन्नू

18 जून 2017
0
1
1

वो मुस्कुराता चेहरा, कई सारे ख्व़ाब, कई ख़्वाहिशें, कई हसरतें और कई अरमान. कैसा हो अगर उन सभी ख्वाहिशों और अरमानों को कुछ चुनिंदा लम्हे ज़ज्बे और होंसलों के रंगों से उस मुस्कुराते चेहरे पर बसी दो प्यारी आँखों में भर दे. कैसा हो अगर सिर्फ एक पल उसकी सारी दुनिया बदल दे. कैसा

6

भर ले तू ऊँची उड़ान

26 अगस्त 2017
0
2
3

नहीं ख़्वाबों पर कोई बंदिशें,न वक़्त के साथ कोई बढ़ती रंजिशेंदे होसलों को नई पहचान,भर ले तू ऊँची उड़ान.कुछ नए ख़्वाब इन आँखों में बसा ले,जरा उम्मीदों वाला सुरमा लगा लेकसकर ज़िंदगी की कमानभर ले तू ऊँची उड़ान.आकाश है खुला पड़ा,समंदर तेरे क़दमों में पड़ापक्के इरादों से हासिल कर नए

7

भूतिया स्टेशन

28 अगस्त 2017
0
1
0

विशेष हमेशा की तरह इस बार भी ऑफिस की तरफ से एक टूर पर था. वैसे तो उसके लिए टूर पर जाना कोई नई बात नहीं थी फिर भी इस बार उसे एक अजीब सी ख़ुशी हो रही थी. शायद इसलिए क्यूँकी इस बार टूर पर और कहीं नहीं उसे उसके अपने शहर जाना था. हमेशा की तरह उसने रिजर्वेशन सेकंड AC में किया हुआ था. स्टेशन वो टाइम पर पहुं

8

सरहदपार वाला प्यार

3 नवम्बर 2018
0
0
0

सरहदपार वालाप्यारगुलज़ारसाहब ने क्या ख़ूब लिखा है... आँखों कोवीसा नहीं लगता,सपनो की सरहद नहीं होती...मेरी यहकहानी भी कुछ ऐसी ही है, इन पंक्तियों के जैसी, जिसे किसी वीसा या पासपोर्ट कीज़रूरत नहीं है आपके दिल तक पहुंचने के लिए. बस यूँ ही ख़्व

9

मजदूर

11 जून 2020
0
0
0

वो मजदूर है, मज़बूर नहीं.

---

किताब पढ़िए

लेख पढ़िए