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मन रे !अपना कहाँ ठिकाना है!!!

14 अक्टूबर 2019

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मन रे,अपना कहाँ ठिकाना है?

ना संसारी, ना बैरागी, जल सम बहते जाना है,

बादल जैसे संग पवन के,यहाँ वहाँ उड़ जाना है !

जोगी जैसे अलख जगाते, नई राह मुड़ जाना है !

नहीं घरौंदा, ना ही डेरा, धूनी नहीं रमाना है !

मन रे,अपना कहाँ ठिकाना है?


मोहित होकर रह निर्मोही, निद्रित होकर भी जागृत!

चुन असार से सार मना रे, विष को पीकर बन अमृत !

काहे सोचे, कौन हमारा,कच्चा ताना बाना है!

टूटा तार, बिखर गई वीणा,फिर भी तुझको गाना है!!!

मन रे,अपना कहाँ ठिकाना है?


सपनों की इस नगरी में, कब तक भटकेगा दर दर ?

स्वप्न को सत्य समझकर रह जाएगा यहीं उलझकर!

निकल जाल से, क्रूर काल से तुझको आँख मिलाना है!

नाटक खत्म हुआ तो भ्रम का परदा भी गिर जाना है!

मन रे,अपना कहाँ ठिकाना है?



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रेणु

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मोहित होकर रह निर्मोही, निद्रित होकर भी जागृत! चुन असार से सार मना रे, विष को पीकर बन अमृत ! काहे सोचे, कौन हमारा,कच्चा ताना बाना है! टूटा तार, बिखर गई वीणा,फिर भी तुझको गाना है!!! मन रे,अपना कहाँ ठिकाना है? वैराग्य भाव जागृत करती भावपूर्ण रचना

18 अक्टूबर 2019

Shashi Gupta

Shashi Gupta

जीवन दर्शन

17 अक्टूबर 2019

रवीन्द्र  सिंह  यादव

रवीन्द्र सिंह यादव

<i><B> आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में गुरुवार 17 अक्टूबर 2019 को साझा की गयी है.........<a href=http://halchalwith5links.blogspot.in/> पाँच लिंकों का आनन्द पर </a>आप भी आइएगा....धन्यवाद! </B></i>

16 अक्टूबर 2019

आलोक सिन्हा

आलोक सिन्हा

यह एक और सरस व् सराहनीय रचना है आपकी | बस ऐसे ही लिखती रहिये | बहुत बहुत शुभ कामनाएं |

15 अक्टूबर 2019

कुसुम कोठारी

कुसुम कोठारी

परिंदों सी है उडान पाहुना है मन इत उत डोलत फिरे लाखों करो जतन मन बावरे को कैसे . बहुत सुंदर सृजन मीना जी एक एक भाव सटीक और सार्थक। सुंदर सरस काव्य।

15 अक्टूबर 2019

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प्रार्थना

21 सितम्बर 2019
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मेरे जीवन का पल-पलप्रभु तेरा पूजन हो जाए,श्वास-श्वास में मधुर नामभौंरे-सा गुंजन हो जाए।जब भी नयन खुलें तो देखूँतेरी मोहिनी मूरत को,मेरा मन हो अमराईतू कोकिल-कूजन हो जाए।जग में मिले भुजंग अनगिनतउनके दंशो की क्या गिनती?वह दुःख भी अच्छा है

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मानव, तुम्हारा धर्म क्या है ?

21 सितम्बर 2019
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धर्म चिड़िया का,खुशी के गीत गाना !धर्म नदिया का,तृषा सबकी बुझाना ।धर्म दीपक का,हवाओं से ना डरना !धर्म चंदा का,सभी का ताप हरना ।।किंतु हे मानव !तुम्हारा धर्म क्या है ?धर्म तारों का,तिमिर में जगमगाना !धर्म बाती का,स्वयं जल,तम मिटाना ।धर्म वृक्षों का,जुड़े रहना मृदा से !धर्म फूलों का,सुरभि अपनी लुटाना ।

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दो नयन अपनी भाषा में जो कह गए

26 सितम्बर 2019
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नेत्र भर आए और होंठ हँसते रहे,प्रेम अभिनय से तुमको,कहाँ छ्ल सका?दो नयन अपनी

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दर्द का रिश्ता

12 अक्टूबर 2019
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दर्द का रिश्ता दिल से है,और दिल का रिश्ता है तुमसे !बरसों से भूला बिसरा,इक चेहरा मिलता है तुमसे !यूँ तो पीड़ाओं में मुझको,मुस्काने की आदत है ।काँटों से बिंधकर फूलों को,चुन लाने की आदत है ।पर मन के आँगन, गुलमोहरशायद खिलता है तुमसे !बरसों

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आई, दिवाली आई !

13 अक्टूबर 2019
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आई दिवाली फिर से आई,शुरू हो गई साफ सफाई,आई दिवाली आई !साफ सफाई सीमित घर तक,रस्तों पर कचरे का जमघट,बाजारों की फीकी रौनक,मिली नहीं है अब तक बोनस,कैसे बने मिठाई !आई दिवाली आई !हुआ दिवाली महँगा सौदा,पनप रहा ईर्ष्या का पौधा,पहले सा ना वह अपनापन,हुआ दिखावे का अब प्रचलन,खत्म

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जब शरद आए

13 अक्टूबर 2019
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ताल-तलैया खिलें कमल-कमलिनीमुदित मन किलोल करें हंस-हंसिनी!कुसुम-कुसुम मधुलोभी मधुकर मँडराए,सुमनों से सजे सृष्टि,जब शरद आए!!!गेंदा-गुलाब फूलें, चंपा-चमेली,मस्त पवन वृक्षों संग,करती अठखेली!वनदेवी रूप नए, क्षण-क्षण दिखलाए,सुमनों से सजे सृष्

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मन रे !अपना कहाँ ठिकाना है!!!

14 अक्टूबर 2019
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मन रे,अपना कहाँ ठिकाना है?ना संसारी, ना बैरागी, जल सम बहते जाना है,बादल जैसे

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कहता होगा चाँद

17 अक्टूबर 2019
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जब बात मेरी तेरे कानों में कहता होगा चाँदइस दुनिया के कितने ताने, सहता होगा चाँद...कभी साथ में हमने-तुमने उसको जी भर देखा थाआज साथ में हमको, देखा करता होगा चाँद...यही सोचकर

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एक दीप

19 अक्टूबर 2019
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एक दीप, मन के मंदिर में,कटुता द्वेष मिटाने को !एक दीप, घर के मंदिर मेंभक्ति सुधारस पाने को !वृंदा सी शुचिता पाने को,एक दीप, तुलसी चौरे पर !भटके राही घर लाने को,एक दीप, अंधियारे पथ पर !दीपक एक, स्नेह का जागेवंचित आत्माओं की खातिर !जागे दीपक, सजग सत्य काटूटी आस्थाओं की खातिर !एक दीप, घर की देहरी पर,खु

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साँझ - बेला

22 अक्टूबर 2019
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साँझ - बेलाविदा ले रहा दिनकरपंछी सब लौटे घर,तरूवर पर अब उनकामेेला है !दीप जले हैं घर - घरतुलसी चौरे, मंदिर,अंजुरि भर सुख का येखेला है !रात की रानी खिलीकौन आया इस गली,संध्या की कातर-सीबेला है !मिल रहे प्रकाश औ

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प्रेरणा

23 अक्टूबर 2019
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चिड़िया प्रेरणास्कूल का पहला दिन । नया सत्र,नए विद्यार्थी।कक्षा में प्रवेश करते ही लगभग पचास खिले फूलों से चेहरों ने उत्सुकता भरी आँखों और प

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आती रहेगी दीवाली, जाती रहेगी दीवाली....

25 अक्टूबर 2019
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दीपावली जब से नजदीक आती जा रही है, मन अजीब सा हो रहा है। स्कूल आते जाते समय राह में बनती इमारतों/ घरों का काम करते मजदूर नजर आते हैं। ईंट रेत गारा ढोकर अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करनेवाले मजदूर मजदूरनियों को देखकर यही विचार आता है - कैसी होती होगी इन

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कहो ना, कौनसे सुर में गाऊँ ?

29 अक्टूबर 2019
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कहो ना, कौनसे सुर में गाऊँ ?जिससे पहुँचे भाव हृदय तक,मैं वह गीत कहाँ से लाऊँ ?इस जग के ताने-बाने मेंअपना नाता बुना ना जाएना जाने तुम कहाँ, कहाँ मैंमार्ग अचीन्हा, चुना ना जाए !बिन संबोधन, बिन बंधन मैं स्नेहपाश बँध जाऊँ !कहो ना, कौनसे सुर में गाऊँ ?नियति-नटी के अभिनय से

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गीत उगाए हैं

12 नवम्बर 2019
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मन की बंजर भूमि पर,कुछ बाग लगाए हैं !मैंने दर्द को बोकर,अपने गीत उगाए हैं !!!रिश्ते-नातों का विष पीकर,नीलकंठ से शब्द हुए !स्वार्थ-लोभ इतना चीखे किस्नेह-प्रेम निःशब्द हुए !आँधी से लड़कर प्राणों के,दीप जलाए हैं !!!मैंने दर्द को बोकर अपने....अपनेपन की कीमत देनी,होती है अब अपनों को !नैनों में आने को, रिश

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एकाकी मुझ को रहने दो

23 नवम्बर 2019
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एकाकी मुझको रहने दो.-----------------------------पलकों के अब तोड़ किनारे,पीड़ा की सरिता बहने दो,विचलित मन है, घायल अंतर,एकाकी मुझको रहने दो।।शांत दिखे ऊपर से सागर,गहराई में कितनी हलचल !मधुर हास्य के पर्दे में है,मेरा हृदय व्यथा से व्याकुलमौन मर्म को छू लेता है,कुछ ना कहकर सब कहने दो !एकाकी मुझको रहने

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मौन दुआएँ अमर रहेंगी !

9 फरवरी 2020
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श्वासों की आयु है सीमितये नयन भी बुझ ही जाएँगे !उर में संचित मधुबोलों केसंग्रह भी चुक ही जाएँगे !संग्रह भी च

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