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पिता स्वरुप (ऋग्वेद- प्रथम मण्डल- प्रथम सूक्त अर्थात अग्नि सूक्त-नवम् श्लोक)

5 अक्टूबर 2023

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स नः पितेव सूनवेऽग्ने सूपायनो भव । सचस्वा नः स्वस्तये॥

हे गार्हपत्य अग्ने ! जिस प्रकार पुत्र को पिता (बिना बाधा के) सहज ही प्राप्त होता है, उसी प्रकार आप भी (हम यजमानों के लिये) बाधारहित होकर सुखपूर्वक प्राप्त हों। आप हमारे कल्याण के लिये हमारे निकट रहें॥

मेरे अनुसार इस श्लोक में अग्नि अर्थात की उपमा एक पिता से की गई है।  ईश्वर के समक्ष एक पुत्र के जैसे समर्पित होने का भाव अद्भुत है।  हे ईश्वर जिस प्रकार एक पिता अपने पुत्र को सर्वथा सुलभ होता हैं वैसे ही आप मुझे सुलभ हो।  जिस प्रकार पिता अपने पुत्र को सदैव सद्गुण युक्त और सत्कर्मों हेतु प्रेरित करने हेतु प्रयास करता है ठीक उसी प्रकार हे ईश्वर आप हमारे कल्याण को सदैव हमारे निकट रहें।  आपकी शिक्षा और पालन पोषण बिलकुल ऐसा हो जिस एक पिता का होता है।

हे जगतपिता, रहो साथ हमारे

जैसे हो तुम पिता हमारे,

पितृ-सदृश्य ही कल्याण करो तुम,

हर पल, हर दिन साथ रहो तुम,

सद्गुणों से हों ओत-प्रोत हम,

सत्कर्मों की राह चलें हम,

उँगली पकड़ो पिता के जैसे,

कहो भला फिर भटकें कैसे,

मैं प्यासा यदि तुम पनघट हो,

तुम हरपल यदि मेरे निकट हो।

(c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"

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रचनाएँ
अस्तित्व (स्व:अन्वेषण)
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अपने अस्तित्व की खोज में एक कदम बढ़ने का आनंद
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हे अग्नि तुम सत्य वाहक हो ( ऋग्वेद- प्रथम मण्डल- प्रथम सूक्त अर्थात अग्नि सूक्त - चतुर्थ श्लोक )

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सत्कर्मों के उत्प्रेरक ( ऋग्वेद- प्रथम मण्डल- प्रथम सूक्त अर्थात अग्नि सूक्त - पंचम श्लोक )

30 सितम्बर 2023
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विराट अन्तर्यामी ईश्वर (ऋग्वेद- प्रथम मण्डल- प्रथम सूक्त अर्थात अग्नि सूक्त-षष्टम श्लोक)

1 अक्टूबर 2023
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यदङ्ग दाशुषे त्वमग्ने भद्रं करिष्यसि । तवेत्तत्सत्यमङ्गिरः॥ हे अग्निदेव ! आप यज्ञ करने वाले यजमान का धन, आवास, संतान एवं पशुओं की समृद्धि करके जो भी कल्याण करते हैं, वह भविष्य में किये जाने व

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ईश्वर साक्षी है - अग्नि साक्षी है (ऋग्वेद- प्रथम मण्डल- प्रथम सूक्त अर्थात अग्नि सूक्त-सप्तम श्लोक)

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सत्य स्वरुप (ऋग्वेद- प्रथम मण्डल- प्रथम सूक्त अर्थात अग्नि सूक्त-अष्टम श्लोक)

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पिता स्वरुप (ऋग्वेद- प्रथम मण्डल- प्रथम सूक्त अर्थात अग्नि सूक्त-नवम् श्लोक)

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15 अक्टूबर 2023
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4 नवम्बर 2023
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वायवा याहि दर्शतेमे सोमा अरंकृताः । तेषां पाहि श्रुधी हवम् ।  हे प्रियदर्शी वायुदेव ! हमारी प्रार्थना को सुनकर आप यज्ञस्थल पर आयें। आपके निमित्त सोमरस प्रस्तुत है, इसका पान करें।  हे वायुद

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वायु देव की स्तुति ( ऋग्वेद- प्रथम मण्डल- द्वितीय सूक्त - द्वितीय श्लोक )

4 नवम्बर 2023
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वायु देव की वाणी की प्रशंसा ( ऋग्वेद- प्रथम मण्डल- द्वितीय सूक्त - तृतीय श्लोक )

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इंद्र देव और वायु देव का यज्ञ पर आमंत्रण (ऋग्वेद- प्रथम मण्डल- द्वितीय सूक्त - पञ्चम श्लोक)

4 नवम्बर 2023
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आओ पधारो देव (ऋग्वेद- प्रथम मण्डल- द्वितीय सूक्त - षष्ठम श्लोक)

7 नवम्बर 2023
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प्रकृति नियंता शत्रु हन्ता (ऋग्वेद- प्रथम मण्डल- द्वितीय सूक्त - सप्तम श्लोक)

7 नवम्बर 2023
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"  मित्रं हुवे पूतदक्षं वरुणं च रिशादसम् । धियं घृताचीं साधन्ता ।  " घृत के समान प्राणप्रद वृष्टि-सम्पन्न कराने वाले मित्र और वरुण देवों का हम आवाहन करते हैं। मित्र हमें बलशाली बनायें तथा वरुणदेव

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सत्य यज्ञ (ऋग्वेद- प्रथम मण्डल- द्वितीय सूक्त - अष्टम श्लोक)

7 नवम्बर 2023
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मित्रावरुण (ऋग्वेद- प्रथम मण्डल- द्वितीय सूक्त - नवम श्लोक)

7 नवम्बर 2023
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"  कवीनोमित्रावरुणा तुविजाता उरुक्षया । दक्षं दधाते अपसम् । "   अनेक कर्मों को सम्पन्न कराने वाले विवेकशील तथा अनेक स्थलों में निवास करने वाले मित्रावरुण हमारी क्षमताओं और कार्यों को पुष्

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मेरी काव्य पंक्तियों में ऋग्वेद के प्रथम मण्डल का द्वितीय सूक्त

7 नवम्बर 2023
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हे वायुदेव तुम सुन्दर मन तुम सुन्दर मन, तुम सुन्दर तन सुनो प्रार्थना, हम करें हवन इस यज्ञ हेतु है अभिनन्दन । भाव भरे घट रखे  सोमरस तुम लाते बसंत, तुम लाते पावस प्रेम भरा ये  निमंत्रण

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देवों के चिकित्सक अश्वनी कुमार द्वय ( ऋग्वेद- प्रथम मण्डल- तृतीय सूक्त - प्रथम श्लोक )

24 दिसम्बर 2023
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" अश्विना यज्वरीरिषो द्रवत्पाणी शुभस्पती ।  पुरुभुजा चनस्यतम् । "   "  हे विशालबाहो ! शुभ कर्मपालक, द्रुतगति से कार्य सम्पन्न करने वाले अश्विनीकुमारो ! हमारे द्वारा समर्पित हविष्यान्नों से आप

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