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**तेइस नंबर **

4 अक्टूबर 2021

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बात उन दिनों की है ज़ब अलका कॉलेज में बीएससी फाइनल ईयर की स्टूडेंट थी। पढ़ने में तो अलका हमेशा नंबर वन ही रहती थी... मगर क्लास में उसका नंबर 23 ही था।क्योंकि क्लास में कुल 46स्टूडेंट थे। जिनमें संयोग की बात ये थी..की लड़के और लड़कियां सभी बराबर में थे यानि 23 -23। अलका लम्बी चौड़ी होने की वजह से क्लास में सबसे लास्ट में बैठती थी।सब लड़कियों में उसका नंबर 23 वाँ ही आता था।प्रोफेसर बगैरह उसे तेइस नंबर बाली लड़की भी बुलाया करते थे।
एक बार जूलॉजी के प्रोफेसर नें एक दूसरे से परिचय कराने के लिये सभी लड़के लड़कियों से कहा तुम सभी लोग इस साल के बाद अलग अलग हो जाओगे। अलग होने से पहले मैं चाहता हूँ सभी लड़के लड़कियां अपनी अपनी जोड़ी बना लें और एक दूसरे को अपना अपना परिचय दें ताकि आपसी हिचक खुले तथा एक दूसरे के बारे में जानकारी भी हो। फिर थोड़ा रुककर.... मुस्कराते हुए बोले.... वैसे भी इस क्लास में ऊपर वाले नें ही सबकी जोड़ियां बना कर भेजी है.... बराबर जोड़ियां बनेगी।क्योंकि लड़के लड़कियां बराबर बराबर थे।
सारी क्लास खिलखिलाकर हँस पड़ी। और अपनी अपनी जोड़ियां बनाने में लग गईं।ज्यादा समय नहीं लगा क्योंकि जो जैसा बैठा था उसी क्रम में सभी...एक लड़का... फिर एक लड़की... एक लड़का.. फिर एक लड़की...करके बैठ गये।अलका और नितिन दोनों सबसे लास्ट यानि तेइस नंबर पर बैठे।एक दूसरे को आमने सामने पाकर दोनों... घबरा गयेऔर असहज हो उठे ।  उन दोनों के बारे में सभी पहले से ही जानते थे। अलका उसको...गधा और नितिन... खड़ूस...के नाम से एक दूसरे को सम्बोधित करते थे।अतः सभी तिरछी निगाहों से मजे भी ले रहे थे । सभी एक दूसरे को अपना अपना परिचय करानें में लग गये।मगर अलका और नितिन को तो जैसे सांप सूंघ गया था । गले से आवाज ही नहीं निकल रही थी। अलका पढ़ाई में नंबर वन और नितिन सबसे लास्ट।
ये कैसा संयोग..?अलका सोच रही थी.. कहाँ फंसा दिया ऊपर वाले नें....?यूँ तो नितिन देखने में लम्बा,चौड़ा ,खूबसूरत ही था... पर अलका के लिये तो एकदम विपरीत था।उसने कभी उसको उस नज़रिये से देखा ही नहीं था।कभी कभी वो अपनी सहेलियों से भी उसका मज़ाक उड़ाया करती थी... जिससे इसकी शादी होगी वो दूसरे दिन ही छोड़ के भाग जायेगी... क्योंकि भगवान  नें दिमाग़...... और  फिर खिलखिलाकर हँस पड़ती थी।
इसी सोच विचार में 10मिनट कब निकल गये पता ही नहीं चला। प्रोफेसर साहब की आवाज नें दोनों को चौका दिया.... चलो एक एक करके सभी बताओ किसने किसके बारे में कितनी जानकारी ली है? अलका और नितिन तो जैसे....साइलेंट मोड... पर चले गये।एक दूसरे का परिचय तो दूर.. आँख उठा के भी नहीं देखा था एक दूसरे को।.... परिचय होते होते नंबर यहाँ भी आ पहुंचा था । प्रोफेसर साहब को दोनों के चेहरे देखते ही हँसी छूटगईं थी और बोले चलो भाई....क्लास की सबसे खास जोड़ी को नंबर आ गया  यानि..23..। अब तुम लोग बताओ क्या जाना...तुम दोनों नें एक दूसरे के बारे में।
दोनों मूर्ति की तरह हैड डाउन की मुद्रा में खड़े हो गये।
बोलने को कुछ था ही नहीं। प्रोफेसर साहब नें चुटकी ली.. सारा परिचय अंदर ही अंदर हो गया क्या...? हम लोगों के लिये कुछ बचा या नहीं...? सारी क्लास जोर से हँस पड़ी।
अलका और नितिन जमीन कुदरने में लग गए। अचानक बजी इंटरवल की घंटी नें वापस सबको अपनी अपनी जगह में  स्थगित कर दिया था। अलका और नितिन के मजे लिये जाने लगे थे। अलका की सहेलियाँ तेरी जोड़ी तो" रब नें बना दी जोड़ी" लग रही थी।और नितिन के दोस्त "न जाने मेरे दिल को क्या हो गया..."गाने लगे थे। मगर  अब अलका और नितिन की 10 मिनट की मुलाक़ात का लम्बा परिचय ...  बिन बोले शुरू होने जा रहा था।  आये दिन दोनों एक दूसरे को छिप छिप कर देखने लगे थे।दोनों ज़ब भी टकराते नज़र तो नीची रहती... मगर असर ऊँचा हो रहा था। दोनों समझ नहीं पा रहे थे... ये क्या हो गया? जिस दिन क्लास में कोई एक नहीं आता दोनों एक दूसरे का इंतजार करते नज़र आते और न आने की वजह ढूढ़ने की कोशिश करते। मगर मुँह से एक दूसरे से कुछ भी नहीं बोलते। अलका को उसकी पढ़ाई की कमजोरी अब उतनी बुरी  नहीं लगती थी और नितिन को भी उसका नंबर वन पर रहना बुरा नहीं लगता था। वो सोचने लगा था हम लोग कहीं न कहीं तो एक हैं तभी ऊपरवाले 23नंबर की जोड़ी बनाई है।
फाइनल एग्जाम आने वाले थे। अलका को डर था की कहीं नितिन फेल न हो जाये और नितिन को डर था की उसकी वजह से कहीं अलका पीछे न रह जाये। क्योंकि दिल के तारों की आवाज कही न कहीं टकरा रही थी।
एक्सस्म हॉल में दोनों का नंबर अगल बगल ही था। अलका नितिन की मदद करने की पूरी कोशिश कर रही थी ।
नितिन को  भी उसकी मदद करना अच्छा लग रहा था पर उसे लग रहा था कुछ ही दिनों में वो एक दूसरे से अलग हो जायेंगे और फिर कभी नहीं मिलेंगे ।  दोनों के मिलने के आसार कम ही दिखाई दे रहे थे क्योंकि दोनों की जात पात व समाज अलग थी। किसी में भी पहल करने की दम नहीं थी।अतः अंदर ही अंदर दोनों दुखी हो रहे थे।
एग्जाम के बाद दोनों अलग अलग हो गये थे ।
मगर न तो अलका नितिन को भूल पा रही थी और न ही नितिन अलका को। इधर घर में अलका के पापा नें ग्रेजुएट होते ही अलका के संबंध की बातचीत शुरू कर दी थी। और उधर नितिन अलका को पाने के पूरे प्रयास में जुट गया था।एक दिन अलका ज़ब अपने बगीचे में तुलसी को जल चढ़ा रही थी तो उसकी नज़र घर के बाहर बाइक पर बैठे नितिन पर गईं।उसका हाथ स्वाभाविक तरीके से खुशी के मारे " हाय "की मुद्रा में उठ गया । उधर नितिन ने भी अपना हाथ ऊपर उठा दिया था। ऐसा करते वक़्त अलका की दीदी रेखा ने देख लिया था । मगर वो चुप थी।
शाम को ज़ब अलका के पापा आये तो अलका की दीदी को एक लड़के की फोटो बताते हुए बोले देखो रेखा ये रिश्ता आया है अपनी अलका के लिये। अलका को दिखा देना। अगर पसन्द हो तो आगे बात बड़ाई जाये। अलका तो वहाँ से भाग गई थी। मगर अलका  की दीदी ने फोटो हाथ में ले ली थी । वो अलका के कमरे में गईं और पूछने लगी तुझे शादी नहीं करनी क्या? क्यों भाग आई वहाँ से?
.कोई और तेरी नज़र में हो ती बता।
मुझे तो ये लड़का बहुत पसन्द है।अलका पीछे मुड़ी और अपना हाथ दीदी के हाथ रखती हुई बोली...दीदी मैं अपने दिल की बात आपसे कहना चाहती हूँ फिर आप और पापा जो उचित समझें करें।दीदी बोली तू कहीं प्यार व्यार के चक्कर में तो नहीं पड़ गईं.? अलका बोली दी ऐसा ही कुछ समझ लो।
आपको याद है... मैं आपको एक लड़के के बारे में बताया करती थी...नंबर एक का गधा। दीदी जोर से हँस पड़ी और बोली.. वो नितिन...। क्या कह  रही है तू? दीदी ने मजे लिये।..हाँ दी वही। अलका ने जबाब दिया। मगर पापा से कहने की हिम्मत तो मुझमें नहीं है। क्योंकि पापा इसके लिये कभी तैयार नहीं होंगेऔर कहीं और शादी करके मैं खुश नहीं रहूंगी। अब सब कुछ आपके हाथ में है। दी बोली तुझे क्या लगता मुझे तेरे और नितिन के बारे में पता नहीं है?  अलका चौंक कर दी को देखने लगी।...नितिन को कई बार मैंने घर के बाहर खड़ा देखा है.। मगर मैंने उसे कभी भी आमर्यादित होते नहीं देखा। मुझे भी उसकी ये खूबी बहुत अच्छी लगी।मैं तभीतुम्हारे और नितिन के बारे में सब समझ गईं थी। मैंने पापा से भी इस बारे में बात की थी। पापा ने उस समय तो कोई जबाब नहीं दिया था। पर ज़ब नितिन के पापा... अपने पापा के पास तेरा हाथ मांगने आये तो पापा मुझसे पूंछने आये थे। मैंने पापा से हाँ कहने के लिये कह दिया था। और मेरे हाथ में जो फोटो है  नितिन की ही  है। अलका ख़ुशी के मारे चीख उठी और हाथ से फोटो छीन ली ।ये क्या कह रही हो दी?हाँ अलका...नितिन भी तेरे लिये जिद पर अड़ा हुआ है इसीलिए अपने पापा को और नितिन के पापा को ये फैसला लेना पड़ा। अलका ने दी को गले लगा लिया औरअपने पापा के लिये भी प्यार उमड़ आया।बोली मगर ये कैसे संभव हुआ? मैं तो अपनी लव स्टोरी को आज यहीं खत्म करने जा रही थी। जिसको मैं जीरो समझ रही थी वो तो हीरो निकला।
रेखा ने बताया...मैं  पापा के साथ नितिन के घर गईं थी। नितिन के पापा और नितिन बहुत ही सुलझे हुए लोग हैं। कह रहे थे बच्चों की खुशियाँ ही हमारी खुशियाँ है इनको दुखी करके हम लोग भी खुश नहीं रह पाएंगे। आपकी बेटी हमारे घर में बेटी की तरह ही रहेगी। हमारे बेटा पढ़ाई में कमजोर हैं मगर संस्कारों में नहीं।  अच्छे से रखेगा आपकी बेटी को। समाज और जात पात के चक्कर में हमें अपने बच्चों की खुशियों की बलि नहीं चढ़ाना चाहिए। उनकी ये बात पापा के दिल को छू गईं और हम दोनों ने वहीं हामी भर दी। अलका ख़ुशी से उछल पड़ी।  आखिर बिन मांगे मुराद जो पूरी हो रही थी... वो भी इतनी आसानी से। उसने तो सुना था जिसको चाहो..वो कभी नहीं मिलता औरअगर मिलता भी है तो जान हथेली पर रखना पड़ता है। पर उसको उसका पहला प्यार इतनी आसानी से मिलने जा रहा था। वो अपने आप को सौभाग्य शाली समझ रही थी।
अलका के दिल में अब नितिन और उसके परिवार वालों के लिये और ज्यादा श्रद्धा बढ़ गईं थी।संयोग कि बात एक और रही कि दोनों कि शादी भी 23जनवरी क़ी फिक्स हुई। दोनों आश्चर्य चिकित थे?और सोच रहे थे वाकई हमारी जोड़ी रब क़ी बनाई हुई जोड़ी ही है। अलका और नितिन हमेशा के लिये स्नेहिल परिणय सूत्र में बंध गये थे औरअलका हमेशा के लिये दुल्हन बनकर नितिन के घर  की लक्ष्मी बन गईं थी।
अब ज़ब कभी अलका नाराज होती है तो नितिन उसे" तेइस नंबर लड़की" कहकर ही बुलाते हैं और दोनों अपनी नाराजगी दूर कर कॉलेज के दिनों में खो जाते हैं।
@Vineetakrishna


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