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साप्ताहिक_प्रतियोगिता

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शहरों में कहां मिलता है वो सुकून जो गांव में था,

ए अजनबी क्यों तुम नहीं

लगते अनजान
जब से तुम्हे देखा आंखो में
सजा ख्वाबों का



कबसे दरवाजे की बेल बज रही थी.........

"ह

कहानी के सारे अधिकार लेखिका के अधीन है..... 



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हाय हाय कौन सा कर्म किया।


एक बार एक किसान ने अपने पडोसी को भला बुरा कह दिया, पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक

अपने बेजान जज़्बातों में तेरा अहसास खोजते हैं,

हम तेरे साथ गुजारा वक्त लम्हा लम्हा समेटते हैं।</

कभी अदायें, कभी जफायें, कभी सुरूर, कभी गुरूर,

कभी इकरार, कभी इनकार, कभी बेरुखी, कभी प्यार,

सब लोग हँसते हैं  मुझ पर
ऐ सफलता!!

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