shabd-logo

छंद

hindi articles, stories and books related to chhan


छन्द- वाचिक विमोहा (मापनीयुक्त मात्रिक) मापनी - २१२ २१२"विमोहा छंद मुक्तक"दृश्य में सार हैआप बीमार हैं पूछता कौन क्या कान बेकार है॥-१ आँख बोले नहीं मौन देखे नहीं पाँव जाए कहाँ सार सूझे नहीं॥-२ वेदना साथ है. आयना सार है। दाग दागी नहीं- देखती आँख है॥-३ देख ये बाढ़ है। चेत आष

शिल्प विधान --चौपाई गुरु लघु (१६ ३=१९) अंत में यतिछंद – तमाल” (सम मात्रिक )गोकुल गलियाँ मोहन खेलें रास। बंसी बाजे मधुवन कोकिल वास॥ दूर नगर बरसाना राधे गाँव।कुंज गली में तुलसी श्यामा छाँव॥-१नाचें गाएं झूमत ग्वाला बाल। दधि-मुख लेपन फोरत हाँडी लाल॥ सखियाँ गागर लेके निकली रा

@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@घोर मंहगाई के इस दौर में , जान इन्सान की सस्ती है |जिसने जितना ठगा किसी को, उसकी उतनी हस्ती है ||पर न हिम्मत हार ओ नेक इन्सान नसीब इसे मान कर ,भ्रष्टाचार के भँवर में भी, नहीं डूबती ईमान की कश्ती है ||@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@

किताब पढ़िए

लेख पढ़िए