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कैसी रिटायरमेंट

1 मार्च 2023

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जिंदगी की उधेड़बुन में कब ऐसा मुकाम आ जाता है जब समय हमें बताता है - रुक जाओ, अपनी गति को धीमी कर लो, बस अब बहुत हो गया थोड़ी सांस ले लो और आराम करो। तब कहीं जाकर हम राहत की सांस लेते हैं और अपने आप को समझाते हैं " हां, बहुत कर लिया। ना जाने इस जीवन संघर्ष के चलते उम्र कब बीत गई यह एहसास भी नहीं होता।
हम सभी अपने जीवन में अपने-अपने कार्यों में इस कदर व्यस्त हो जाते हैं कि, एक समय ऐसा भी आता है, जब हमारा शरीर हमारा साथ देना छोड़ने लगता है। काम करने में सांस फूलने लगती है। तब कहीं जाकर हमें पता चलता है कि, अब शरीर में पहले जैसी स्फूर्ति नहीं रही । सारी जिम्मेदारियां बखूबी निभाने के बाद अब उम्र के इस पड़ाव में हम अपने जीवन का खूब आनंद लेना चाहते हैं और यह उम्र हर चिंता, हर परेशानी, हर जिम्मेदारी से रिटायरमेंट ले लेने की होती है।
परंतु हर बार रिटायरमेंट लेने के लिए उम्र का तकाजा काफी नहीं कभी-कभी हमें अपने फर्ज के चलते अपने सपनों से रिटायरमेंट लेनी पड़ती है। वह सपने जिनको पूरा करने के लिए ना जाने हमने कितने ही रातें जागते हुए बिताई थीं। अपने सपनों से भी अधिक प्रिय हमारे जिगर के टुकड़े, उनकी अच्छी परवरिश, अच्छे भविष्य के लिए, हमें कई बार अपनी इच्छाओं की आहुति दे अपने सपनों को अपनी पलकों के पीछे छुपा, चेहरे पर मुस्कुराहट का भाव लिए अपने हर ख्वाब, हर अरमान से रिटायरमेंट लेनी पड़ती है।
जी हां, ग्रहणी होना मां होना कोई साधारण बात नहीं है।यह काम दिन-रात निरंतर, 24 घंटे, बिना रुके, बिना थके, पूर्ण समर्पण भाव से निरंतर चलता रहता है। एक ग्रहणी, एक मां की रिटायरमेंट तो केवल गंगाजल की आखरी बूंदों के साथ ही होती है।
उसके पके हुए बाल, चेहरे की ढ़़लती हुई रौनक, हाथों की मुरझाई हुई झुर्रियां सब उसे समझा रहे होते हैं कि बस तुम्हारा कर्तव्य पूरा हो चुका, अब रिटायरमेंट का समय आ गया है। लेकिन एक ग्रहणी एक मां का हृदय अपने परिवार के प्रति अपने कर्तव्य से रिटायरमेंट लेने के लिए कभी नहीं मानता। फिरचाहे उसका शरीर उसका साथ दे ना दे, पर मन की प्रबल इच्छा, अपने पति, अपने परिवार, अपने कलेजे की ठंडक, अपने बच्चों के लिए वह अपनी अंतिम सांस तक बिना किसी शिकायत के केवल दो मीठे बोल की अपेक्षा रखते हुए सदैव अपने कर्तव्य पर तत्पर रहती है।
'रिटायरमेंट' जैसा शब्द तो आम लोगों के लिए है । लेकिन ग्रहणी और मां के शब्दकोश में इस शब्द का कोई वजूद ही नहीं होता। क्योंकि उसका निश्चल प्रेम कभी उसे अपने पद से नीचे उतरने ही नहीं देता। और वह बिना रुके, बिना थके, निरंतर अपने कर्तव्य मार्ग पर आखरी सांस तक चलती रहती है।

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रचनाएँ
आलेख
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यह किताब दैनिक विषयों की समालोचनात्मक समीक्षा का संग्रह है। इस किताब में आप विभिन्न विषयों पर सुंदर आलेख पढ़ सकते हैं।
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6 सितम्बर 2022
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आज के आधुनिक युग में समय से भी अधिक बलवान सोशल मीडिया प्रतीत होता है। आज हम घंटों या कहें तो दिनों की दूरी सोशल मीडिया की एक व्हाट्सएप कॉल व वीडियो कॉल से क्षण भर में तय कर सकते हैं, इसीलिए यह कहना गल

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इच्छा शक्ति….. क्या आप इच्छा शक्ति को मानते हैं? क्या आपको विश्वास है कि हमारी इच्छाओं में भी शक्ति होती है?जी हां ! इच्छा शक्ति….मुझे तो पूर्ण विश्वास है, की इच्छा में अतुल्य शक्ति होती है। वह कहते ह

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2070 की दुनिया

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शिक्षक

13 अक्टूबर 2022
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सकारात्मक और नकारात्मक सोच

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दूरस्थ शिक्षा और शिक्षक

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मेरी यादगार दिवाली

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अक्सर बच्चे अपने बड़ों से सीखते हैं। चाहे उन्हें कुछ सिखाया जाए या फिर नहीं पर अपने आसपास होती घटनाओं व बातों पर उनका ध्यान हमेशा रहता है और जाने अनजाने में हम उन्हें बहुत कुछ सिखा देते हैं।दीपावली का

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देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह और कुछ चमत्कारिक उपाय जो आपका जीवन बदल देंगे

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देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाहहिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। साल भर कुल 24 एकादशियां आती हैं जिसमें से कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की देवोत्थान एकादशी का विशेष महत्व होता है। एकादशी व

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वैसे तो हमारा मोहल्ला शांत व सुकून वाला था। हमारे घर के पास ही चार घर छोड़कर असलम चाचा रहते थे। उनकी बेटी शबनम मेरी बहुत अच्छी सहेली थी। वे अक्सर हमारे घर आती जाती थी, खासतौर पर मंगलवार को ।जब भी मेरी

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चुनाव शब्द से हम सब भली भांति वाकिफ हैं। हमारे देश में अलग-अलग स्तरों पर अलग-अलग चुनाव होते हैं जिसमें से एमसीडी यानी कि मुंसिपल कॉरपोरेशन डिवीजन का चुनाव अपना ही महत्व रखता है।भारत की राजधानी दिल्ली

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होलिका दहन

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होलीका दहन हिंदू धर्म के एक प्रमुख त्योहार है, जो भारत में हर साल फाल्गुन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस दिन लोग होली का त्योहार मनाते हैं और रंगों से खेलते हैं।होली का दहन भारत के विभिन्न हिस्सों

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होली एक प्रसिद्ध हिंदू त्योहार है जो भारत में हर साल फाल्गुन माह के पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस त्योहार को रंगों का त्योहार भी कहते हैं क्योंकि इस दिन लोग एक दूसरे पर रंग फेंकते हैं और मिठाई खाते है

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यादें बचपन की

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आज याद आ रहा है ना जाने मुझे क्यों वह आंगन, वह हरे भरे खेतों में दौड़ना, वह कच्चे आमों की सुगंध, वह तितलियों के संग भागना, वो करनी सहेलियों से चिढ़हन, वह भाई के साथ पंजा लड़ाना, उसके जीत जाने पर करनी

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आईपीएल से जुड़े विवाद

1 अप्रैल 2023
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आईपीएल और आईपीएल से जुड़े विवाद,कहां तक है यह सत्य जनाब,मैच फिक्सिंग की धांधलेबाजियां,लूट ले गए वह सारे खिताब..धूल में मिले जो बैठे थे बन हमारे सरो ताज,उठे जब सबके चेहरों से नकाब,खुल गए सारे ढके हुए र

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