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ख्याल

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ख्याल होगा। प्याज के दाम दोबारा बढ़े थे। पांच रुपए में एक यसे आंसू झरे थे। तभी निम्न लिखित रचना कल्पना में आयी थी। पढ़ें।एक कवि नेसम्पादक को अकेला पायाइधर-उधर देखाकिसी को ईर्द-गिर्द न पाझट कक्ष मेें घुस आयासम्पादक ने सर उठायाअवांछित तत्व को सामने देखबुरा सा मुंह बनाया

तेरी खूबसूरती ने क्या कमाल कर दिया,इश्क के ख्यालात से माला माल कर दिया. गरीब तो वो है जिन्हे इल्म ए इश्क नहीं, हमने तो खूबसूरती पे क़सीदा लिख दिया. शाम होते ही मैं शमा को बुझा देता हूँ.ख्वाबों के ल

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तुम ख्वाबों से निकलकर ख्यालों में गुजरती हो कहीं!तब रूह को छू जाती हैं बरबस यादें तेरी,जल उठते है माहताब दिल के अंधियारे में कहीं,महक उठती है ख्यालों से सूनी सी ये तन्हाई,मद्धम सुरों में उभरता आलाप एक सुरमई।तुम ख्वाबों से निकलकर ख्यालों में गुजरती हो कहीं!मन पूछने लगता है पता खुद से खुद का ही,भूल सा

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