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मधुकोश

Jitendra Kumar sahu

6 अध्याय
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जिस प्रकार से मधुमक्खियाँ फूलो का रस चूसकर मधुकोश का निर्माण करती है उसी प्रकार जीवन के विभिन्न पहलुओं के रस का निचोड़ इस काव्य-संग्रह में है। हम जो है वही हम प्रक्षेपण करते है उसी का रंग संसार में भरते है। हमारा होना हमारी आन्तरिक परिणाम का कारण है इस तहखाने की सफाई होनी चाहिए। 

madhukosh

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बहुत खूबसूरत सृजन

पुस्तक के भाग

1

हम हिन्द हिन्दी हमारी जान

13 सितम्बर 2023
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समाहित जिसमे संसार और भारत की शान हम हिन्द हिन्दी हमारी जान। बड़ी मीठी प्यारी हमारी भाषा कितने सितारे जन्मे महान हम हिन्द हिन्दी हमारी जान । सभी कलाओ का पहचान कराती भारत की राष्

2

हाय रे हाय हाय हिन्दी

14 सितम्बर 2023
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मस्तक मध्य चमकती गर्व से हमारा मान रखती भारत की राष्ट्रभाषा हिन्दी। दुनिया में इतिहास रचा हिन्दी हाय रे हाय हाय हिन्दी,जैसे हो माथे की बिन्दी। मेरे भावो की अभियक्ति माँ की तरह पोषण करती

3

बेटी

24 सितम्बर 2023
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कदम से कदम मिलाती बेटियां । सबका साथ निभाती बेटियां । माँ का हाथ बटाती बेटियां। छोटे को नहलाती बेटियां। संग संग शाला जाती बेटियां। टीचर जी को भाती बेटियां। शिक्षा दीप जलाती बेटियां। कुल रोश

4

"तुम,तुम हो मै,मै हूँ "

22 अक्टूबर 2023
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तुम, तुम हो मै,मै हूँ । हम दोनो एक दूसरे पर हावी हो नही सकते तुमसे अच्छा कर नही सकता मुझसे अच्छा हो नही सकता तुम्हारी कोई कापी नही और न मेरी कोई कापी है तुम,तुम हो मै,मै हूँ । दोनो वि

5

असम्भव से संभव तक का सफर आसान न था

23 अक्टूबर 2023
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असम्भव से सम्भव तक का सफर आसान न था । प्रजा की रक्षा और अपने ही लोगो से लड़ना, रंक से राजा तक का सफ़र आसान न था ।  असम्भव---------------------------------------। भूखा रहकर कठिन परिश्रम किए,

6

दर्पण

1 दिसम्बर 2023
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किसकी कमी जो मै लिखूंगा कौन सी गाठ पड़ गया जो कलम की स्याही बनकर उतर रहा है । अपूर्णता का भाव या अतीत का दमन जो नासूर बनकर उभरता तराजू सन्तुलन में नही किसी एक तरफ झुका रहता था बाजार में

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