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परिवार+रविवार

13 अक्टूबर 2022

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रविवार... ?
रविवार के सुखद पलों का आनन्द ले रहे हैं न।
कैसा मौसम है आपके शहर- गाँव का।
बरसात के क्या समाचार हैं।
यहाँ केकड़ी में तो आज धूप खिली हुई है।
गर्मी तो लग रही है लेकिन खिली हुई धूप अच्छी लग रही है।
आज आप लोगों से ज्यादा बात नहीं करूंगी।
आप सब आज परिवार के साथ व्यस्त रहिए।
मित्रों से मिलने मिलाने में कहीं घूमने जाने में समय बितायें। अपने पूरे सप्ताह के पैंडिंग पड़े काम निपटायें।
टीवी पर अपने मनपसंद कार्यक्रम देखें और प्रसन्नचित्त रहिए।
अरे अरे! जरा एक मिनट मेरी बात सुन लीजिए और जरा ध्यान दीजिए कि... अपने मूल्यवान समय में से पांच सात मिनट "सुखद सलोना रविवार" को अवश्य दें क्यों क्या विचार है आपका
चलिए फिर नमस्कार और एक सुखद दिन के लिए बहुत बहुत शुभकामना...
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रचनाएँ
माँ की ममता
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कहानी हर घर की, माँ तो माँ होती है
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परिवार+रविवार

13 अक्टूबर 2022
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रविवार... ?रविवार के सुखद पलों का आनन्द ले रहे हैं न।कैसा मौसम है आपके शहर- गाँव का।बरसात के क्या समाचार हैं।यहाँ केकड़ी में तो आज धूप खिली हुई है।गर्मी तो लग रही है लेकिन खिली हुई धूप अच्छी लग रही है

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माँ

13 अक्टूबर 2022
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घर पहुँचते ही बेशक माँ से ......कुछ काम ना हो लेकिन.....हमारा पहला सवाल यही .....होता है माँ किधर है और......माँ के दिखाई देते ही.....दिल को सुकून मिल जाता है.....

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माँ की दुआ

13 अक्टूबर 2022
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माँ की दुआ...बहारों के मौसम में भी दिल में पतझड़ है,किसी ने हमें दुआएं दी तो कहीं सिर्फ तोहमतें मिली,झोली मेरी खाली थी,जिसने जो प्यार से दिया उसको हमने सर झुका के लिया,जिंदगी का सफ़र अब तो बहुत काट लि

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माँ का प्यार

13 अक्टूबर 2022
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कभी गुस्सा तो कभी प्यार दिखलाती है,कभी डांट तो कभी दुलार बस यही तो है,मां का प्यार सीने मै दर्द कितने हो,कभी बता नहीं पाती सहन कर लेती,हर मुश्किल पर परिवार पर आंच नहीं आने देती,पेट ख़ाली भी हो तो चहरे

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माँ

14 मई 2023
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माँ : जिसके बिना हमारा अस्तित्व नहींमाँ एक मिश्री घुला शब्द है जिसकी व्याख्या नहीं हो सकती । वह एक ऐसी शख्सियत है जो हर कीमत पर संतान का साथ देती है। स्नेह और देखभाल का इससे बड़ा दूसरा उदाहरण देखने मे

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माँ की ममता

15 मई 2023
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माँशाम के साढे़ छह..... पौने सात बजे का समय रहा होगा। एक अनीश नाम का लड़का, दुकान पर आता है, गांव का रहने वाला था, वह चतुर व चालाक था।उसका बातें करने का तरीका गांव वालों की तरह का था, परन्तु बहुत ठहरा

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