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सफला एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022

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सफला एकादशी का महत्त्व:

धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे जनार्दन! मैंने मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी अर्थात मोक्षदा एकादशी का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप कृपा करके मुझे पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के विषय में भी बतलाइये। इस एकादशी का क्या नाम है तथा इसके व्रत का क्या विधान है? इसकी विधि क्या है? इसका व्रत करने से किस फल की प्राप्ति होती है? कृपया यह सब विधानपूर्वक कहिए।

भगवान श्रीकृष्ण बोले: पौष माह के कृष्ण पक्ष मे आने वाली इस एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी के देवता श्रीनारायण हैं। विधिपूर्वक इस व्रत को करना चाहिए। जिस प्रकार नागों में शेषनाग, पक्षियों में गरुड़, सब ग्रहों में चंद्रमा, यज्ञों में अश्वमेध और देवताओं में भगवान विष्णु श्रेष्ठ हैं, उसी तरह सब व्रतों में एकादशी का व्रत श्रेष्ठ है। जो मनुष्य सदैव एकादशी का व्रत करते हैं, वे मुझे परम प्रिय हैं। इसका माहात्म्य मैं तुमसे कहता हूँ, ध्यानपूर्वक सुनो।

भक्तवत्सल भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे कि धर्मराज, मैं तुम्हारे स्नेह के कारण तुमसे कहता हूँ कि एकादशी व्रत के अतिरिक्त मैं अधिक से अधिक दक्षिणा पाने वाले यज्ञ से भी प्रसन्न नहीं होता हूँ। अत: इसे अत्यंत भक्ति और श्रद्धा से युक्त होकर करें। हे राजन! द्वादशीयुक्त पौष कृष्ण एकादशी का माहात्म्य तुम एकाग्रचित्त होकर सुनो।

सफला एकादशी व्रत कथा!

चम्पावती नगरी में एक महिष्मान नाम का राजा राज्य करता था। उसके चार पुत्र थे। उन सबमें लुम्पक नाम वाला बड़ा राजपुत्र महापापी था। वह पापी सदा परस्त्री और वेश्यागमन तथा दूसरे बुरे कामों में अपने पिता का धन नष्ट किया करता था। सदैव ही देवता, बाह्मण, वैष्णवों की निंदा किया करता था। जब राजा को अपने बड़े पुत्र के ऐसे कुकर्मों का पता चला तो उन्होंने उसे अपने राज्य से निकाल दिया। तब वह विचारने लगा कि कहाँ जाऊँ? क्या करूँ?

अंत में उसने चोरी करने का निश्चय किया। दिन में वह वन में रहता और रात्रि को अपने पिता की नगरी में चोरी करता तथा प्रजा को तंग करने और उन्हें मारने का कुकर्म करता। कुछ समय पश्चात सारी नगरी भयभीत हो गई। वह वन में रहकर पशु आदि को मारकर खाने लगा। नागरिक और राज्य के कर्मचारी उसे पकड़ लेते किंतु राजा के भय से छोड़ देते।

वन में एक अतिप्राचीन विशाल पीपल का वृक्ष था। लोग उसकी भगवान के समान पूजा करते थे। उसी वृक्ष के नीचे वह महापापी लुम्पक रहा करता था। इस वन को लोग देवताओं की क्रीड़ास्थली मानते थे। कुछ समय पश्चात पौष कृष्ण पक्ष की दशमी के दिन वह वस्त्रहीन होने के कारण शीत के चलते सारी रात्रि सो नहीं सका। उसके हाथ-पैर अकड़ गए।

सूर्योदय होते-होते वह मूर्छित हो गया। दूसरे दिन एकादशी को मध्याह्न के समय सूर्य की गर्मी पाकर उसकी मूर्छा दूर हुई। गिरता-पड़ता वह भोजन की तलाश में निकला। पशुओं को मारने में वह समर्थ नहीं था अत: पेड़ों के नीचे गिर हुए फल उठाकर वापस उसी पीपल वृक्ष के नीचे आ गया। उस समय तक भगवान सूर्य अस्त हो चुके थे।

वृक्ष के नीचे फल रखकर कहने लगा- हे भगवन! अब आपके ही अर्पण है ये फल। आप ही तृप्त हो जाइए। उस रात्रि को दु:ख के कारण रात्रि को भी नींद नहीं आई।

उसके इस उपवास और जागरण से भगवान अत्यंत प्रसन्न हो गए और उसके सारे पाप नष्ट हो गए। दूसरे दिन प्रात: एक ‍अतिसुंदर घोड़ा अनेक सुंदर वस्तुअओं से सजा हुआ उसके सामने आकर खड़ा हो गया।

उसी समय आकाशवाणी हुई कि हे राजपुत्र! श्रीनारायण की कृपा से तेरे पाप नष्ट हो गए हैं। अब तू अपने पिता के पास जाकर राज्य प्राप्त कर। ऐसी वाणी सुनकर वह अत्यंत प्रसन्न हुआ और दिव्य वस्त्र धारण करके भगवान आपकी जय हो! कहकर अपने पिता के पास गया। उसके पिता ने प्रसन्न होकर उसे समस्त राज्य का भार सौंप दिया और स्वयं वन के रास्ते चल दिए।

अब लुम्पक शास्त्रानुसार राज्य करने लगा। उसके स्त्री, पुत्र आदि सारा कुटुम्ब भगवान नारायण का परम भक्त हो गया। वृद्ध होने पर वह भी अपने पुत्र को राज्य का भार सौंपकर वन में तपस्या करने चला गया और अंत समय में वैकुंठ को प्राप्त हुआ।

अत: जो मनुष्य इस परम पवित्र सफला एकादशी का व्रत करता है उसे अंत में मुक्ति मिलती है। जो नहीं करते वे पूँछ और सींगों से रहित पशुओं के समान हैं। इस सफला एकादशी के माहात्म्य को पढ़ने से अथवा श्रवण करने से मनुष्य को अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है।

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रचनाएँ
व्रत कथाओं का संकलन
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यह संसार, यह शरीर, सुख-दुख सब परिवर्तनशील हैं। इस कारण मानव को व्रत और वेदांत दोनों की आवश्यकता होती है और होती रहेगी। व्रत और वेदांत हर परिस्थिति में मानव का संबल बनते हैं। आपने पढ़ा कि-वर्ष में २४ एकादशी व्रत होता है और २४ प्रदोष व्रत होता है। जिनमे की अलग-अलग दिन पड़ने वाले प्रदोष को वार के उस नाम से जाना जाता है, इन व्रतों में एकादशी व्रत भगवान विष्णु को तो प्रदोष व्रत शिवजी को समर्पित है। इसी प्रकार सप्ताह के सात दिन में सात व्रत होती है|
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श्री महालक्ष्मी व्रत कथा

10 मई 2022
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महालक्ष्मी देवी धन और समृद्धि की देवी हैं। इसलिए, धनी और समृद्ध जीवन की कामना करने वाले भक्तों द्वारा लगातार सोलह दिनों तक उनकी पूजा की जाती है। इस व्रत से जुड़ी एक किंवदंती के अनुसार, पांडव राजा युधि

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श्री गणेश जी की व्रत कथा

10 मई 2022
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श्री गणेश जी परम पूजिये हैं। ऐसा कहा जाता है कि किसी भी कार्य से पहले या पूजा विधि शुरू करने से पहले श्री गणेश की पूजा करना महत्वपूर्ण है, और कई लाभ लाता है। साथ ही जब कोई गणेश जी का व्रत रखता है तो श

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करवा चौथ की पौराणिक व्रत कथा

10 मई 2022
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करवा चौथ एक बहुत ही प्रसिद्ध व्रत है। यह न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में हिंदू परंपरा का पालन करने वाली महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। करवा चौथ एक बहुत ही प्रसिद्ध व्रत है। यह न केवल भारत में बल

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अहोई अष्टमी व्रत कथा

10 मई 2022
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अहोई अष्टमी उत्तर भारत में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। अहोई अष्टमी के दिन ज्यादातर माताएं अपने बच्चों की भलाई के लिए एक दिन का उपवास रखती हैं। करवा चौथ के चार दिन बाद अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है।

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भाई दूज की कथा

10 मई 2022
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कहानी 1 भाई दूज को लेकर एक पौराणिक कथा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य देव और उनकी पत्नी संग्या को संतान की प्राप्ति हुई, पुत्र का नाम यम और पुत्री का नाम यमुना था। सन्न्या भगवान सूर्यदेव की तपस्य

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होलिका और प्रहलाद की व्रत कथा

10 मई 2022
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हिरण्यकश्यप और उसकी पत्नी कयाधु के पुत्र प्रहलाद का जन्म और पालन-पोषण ऋषि नारद के मार्गदर्शन में हुआ था, जब हिरण्यकशिपु अमरता प्राप्त करने के लिए भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करने में व्यस्त था। प्रहलाद

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सोमवार व्रत कथा

10 मई 2022
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ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति भगवान शिव को समर्पित है और सोमवार का व्रत रखता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आज तक लोग सोमवार का व्रत रखते हैं और इसी के साथ इस कथा को सुनते हैं। एक कस्बे में ए

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श्री सत्यनारायण कथा (प्रथम अध्याय)

10 मई 2022
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एक समय की बात है नैषिरण्य तीर्थ में शौनिकादि, अठ्ठासी हजार ऋषियों ने श्री सूतजी से पूछा हे प्रभु! इस कलियुग में वेद विद्या रहित मनुष्यों को प्रभु भक्ति किस प्रकार मिल सकती है? तथा उनका उद्धार कैसे होग

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श्री सत्यनारायण कथा (द्वितीय अध्याय)

10 मई 2022
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सूत जी बोले: हे ऋषियों ! जिसने पहले समय में इस व्रत को किया था उसका इतिहास कहता हूँ, ध्यान से सुनो! सुंदर काशीपुरी नगरी में एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण रहता था। भूख प्यास से परेशान वह धरती पर घूमता रहता

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श्री सत्यनारायण कथा (तृतीय अध्याय)

10 मई 2022
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सूतजी बोले: हे श्रेष्ठ मुनियों, अब आगे की कथा कहता हूँ। पहले समय में उल्कामुख नाम का एक बुद्धिमान राजा था। वह सत्यवक्ता और जितेन्द्रिय था। प्रतिदिन देव स्थानों पर जाता और निर्धनों को धन देकर उनके कष्ट

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श्री सत्यनारायण कथा (चतुर्थ अध्याय)

10 मई 2022
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सूतजी बोले: वैश्य ने मंगलाचार कर अपनी यात्रा आरंभ की और अपने नगर की ओर चल दिए। उनके थोड़ी दूर जाने पर एक दण्डी वेशधारी श्रीसत्यनारायण ने उनसे पूछा: हे साधु तेरी नाव में क्या है? अभिवाणी वणिक हंसता हुआ

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श्री सत्यनारायण कथा (पंचम अध्याय)

10 मई 2022
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सूतजी बोले: हे ऋषियों ! मैं और भी एक कथा सुनाता हूँ, उसे भी ध्यानपूर्वक सुनो! प्रजापालन में लीन तुंगध्वज नाम का एक राजा था। उसने भी भगवान का प्रसाद त्याग कर बहुत ही दुख सान किया। एक बार वन में जाकर वन

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मंगलवार व्रत कथा

10 मई 2022
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ऋषिनगर में केशवदत्त ब्राह्मण अपनी पत्नी अंजलि के साथ रहता था। केशवदत्त के घर में धन-संपत्ति की कोई कमी नहीं थी। नगर में सभी केशवदत्त का सम्मान करते थे, लेकिन केशवदत्त संतान नहीं होने से बहुत चिंतित रह

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बृहस्पतिवार की व्रत कथा

10 मई 2022
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॥ अथ श्री बृहस्पतिवार व्रत कथा ॥ भारतवर्ष में एक प्रतापी और दानी राजा राज्य करता था। वह नित्य गरीबों और ब्राह्मणों की सहायता करता था। यह बात उसकी रानी को अच्छी नहीं लगती थी, वह न ही गरीबों को दान देत

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साईं बाबा व्रत कथा

10 मई 2022
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एक बार की बात है। कोकिला नाम की एक महिला अपने पति महेश भाई के साथ गुजरात के एक शहर में रहती थी। वे दोनों एक-दूसरे के साथ प्रेम भाव से रहते थे। लेकिन उसके पति का स्वभाव बहुत ही झगड़ालू था। वही कोकिला ब

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संतोषी माता व्रत कथा

10 मई 2022
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एक बुढ़िया थी, उसके सात बेटे थे। 6 कमाने वाले थे जबकि एक निक्कमा था। बुढ़िया छहों बेटों की रसोई बनाती, भोजन कराती और उनसे जो कुछ जूठन बचती वह सातवें को दे देती। एक दिन वह पत्नी से बोला- देखो मेरी माँ क

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रविवार की व्रत कथा

10 मई 2022
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प्राचीन काल में एक बुढ़िया रहती थी। वह नियमित रूप से रविवार का व्रत करती। रविवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर बुढ़िया स्नानादि से निवृत्त होकर आंगन को गोबर से लीपकर स्वच्छ करती, उसके बाद सूर्य भगवान की

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तुलसी विवाह की पौराणिक कथा

10 मई 2022
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हिंदू धर्म में तुलसी पूजन का बड़ा महत्त्व है। ऐसा माना जाता है की तुलसी में साक्षात लक्ष्मी जी का निवास है। महिलायें तुलसी विवाह भी करती हैं जो की कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी को होती है। ऐसी मान्यता

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सकट चौथ की व्रत कथा

10 मई 2022
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आज सकट चौथ का व्रत मनाया जाता है। आज शाम को गणेश जी की पूजा होती है और गणेश जी की कथा सुनी जाती है। आप आज के व्रत की कोई भी प्रचलित कथा सुन एवं पढ़ सकते हैं। सकट चौथ के व्रत में शंकर भगवान और गणेश जी क

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सुन्दरकाण्ड श्री रामचरित मानस

10 मई 2022
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॥श्लोक॥ शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं। ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्॥ रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं। वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम्॥१॥

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तिल चौथ की व्रत कथा

10 मई 2022
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एक शहर में देवरानी - जेठानी रहती थी। जेठानी अमीर थी और वहीँ देवरानी गरीब थी। देवरानी गणेश जी की भक्त थी। देवरानी का पति जंगल से लकड़ी काट कर बेचता था और अक्सर बीमार ही रहता था। देवरानी, जेठानी के घर का

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वट सावित्री व्रत कथा

10 मई 2022
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यह विवाहित हिंदू महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण पालन है, व्रत ज्येष्ठ के महीने में या तो पुरीना या अमावस्या पर मनाया जाता है। उपवास 'त्रयोदशी' (13 वेंदिन) से शुरू होता है और पूर्णि माया अमावस्या पर समाप

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बुधवार व्रत कथा

10 मई 2022
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पौराणिक कथा के अनुसार, मधुसूदन नाम का एक व्यक्ति समतापुर नगर में रहता था. उसका विवाह पास के ही बलरामपुर की संगीता से हुआ था. वह सुंदर और सुशील थी. एक दिन मधुसूदन अपनी पत्नी को साथ लाने के लिए अपने ससु

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कामदा एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022
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कामदा एकादशी यह व्रत रखने से पाप और कष्ट मिटते हैं. भगवान श्री विष्णु की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं. जो लोग व्रत रखते हैं, उनको कामदा एकादशी व्रत कथा का पाठ

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पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022
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पुत्रदा एकादशी का महत्त्व: श्री युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! मैंने श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप मुझे श्रावण शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? व्रत करने की विध

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षटतिला एकादशी की व्रत कथा

11 मई 2022
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पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार नारद जी ने भगवान विष्णु से षटतिला एकादशी की कथा और उसके महत्व के बारे में बताने का निवेदन किया. तब श्रीहरि विष्णु ने उनको षटतिला एकादशी की कथा सुनाई, जिससे इस व्रत के महत

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जया एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022
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जया एकादशी व्रत आज है. माघ शुक्ल एकादशी को जया एकादशी व्रत रखा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु  की पूजा करते हैं और जया एकादशी व्रत कथा का श्रवण करते हैं. इस व्रत कथा के श्रवण से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त

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विजया एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022
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विजया एकादशी का व्रत आज 26 फरवरी दिन शनिवार को है. इस व्रत को करने से विजय की प्राप्ति होती है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और व्रत कथा का श्रवण किया जाता है. इस व्रत कथा के श्रवण करने या पढ़

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विजया एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022
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विजया एकादशी का व्रत आज 26 फरवरी दिन शनिवार को है. इस व्रत को करने से विजय की प्राप्ति होती है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और व्रत कथा का श्रवण किया जाता है. इस व्रत कथा के श्रवण करने या पढ़

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आमलकी एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022
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आमलकी एकादशी का व्रत हर वर्ष फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को होता है। इस वर्ष आमलकी एकादशी  इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे भगवान विष्णु जी की पूजा विधि विधान से की जाती है। दिन भर व्रत रखा ज

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पापमोचनी एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022
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पापमोचनी एकादशी व्रत  पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पापमोचनी एकादशी का व्रत रखा जाता है. इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा करते हैं और पापमोचनी एकादशी व्रत कथा का पाठ क

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कामदा एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022
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कामदा एकादशी व्रत विधि :-  आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली कामदा एकादशी की पूजा विधि इस प्रकार है: इस दिन स्नान से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें और भगवान की पूजा करें।  एकादशी व्रत के एक दिन

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वरुथिनी एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022
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यह व्रत वरुथिनी एकादशी के नाम से प्रसिद्ध है. इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा करने से कष्ट एवं दुख दूर होते हैं और स्वर्ग की प्राप्ति होती है. जिन पर भगवान विष्णु की कृपा होती है, उनको मृत्यु के ब

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मोहिनी एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022
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मोहिनी एकादशी को लेकर एक और कथा प्रचलित :-  पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार की बात है प्रभु श्री राम जी ने महर्षि वशिष्ठ से कहा हे गुरुश्रेष्ठ! मैंने जनक नंदिनी सीता जी के वियोग में बहुत कष्ट भोगे है

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अपरा एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022
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हिंदी पंचाग के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के प्रत्येक ग्यारहवीं तिथि को एकाशी कहते हैं। एक वर्ष में कुल 24 एकादशी पड़ते हैं। वहीं, मलमास होने पर इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। एकादशी के दिन भगवान विष्

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पाण्डव निर्जला एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022
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जीवन मंत्र :-  निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का मात्र धार्मिक महत्त्व ही नहीं है। ये व्रत मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के

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योगिनी एकादशी व्रत

11 मई 2022
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योगिनी एकादशी  प्रत्येक वर्ष आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। योगिनी एकादशी व्रत को करने से 88 हजार ब्राह्राणों को भोजन करने के बराबर का फल मिलता है इसलिए इस व्रत का अपना विशेष म

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देवशयनी एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022
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देवशयनी एकादशी का महत्त्व: ब्रह्म वैवर्त पुराण में देवशयनी एकादशी के विशेष माहात्म्य का वर्णन किया गया है। इस व्रत से प्राणी की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। यह एकादशी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की ए

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कामिका एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022
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महाभारतकाल में एक समय में कुंतीपुत्र धर्मराज युधिष्ठिर ने श्री कृष्ण ने कहा, “हे भगवन, कृपा करके मुझे श्रावण कृष्ण एकादशी का नाम और महत्व बताइए। श्रीकृष्ण ने कहा कि हे युधिष्ठिर! इस एकादशी की कथा एक स

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श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022
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मान्यता है कि इस एकादशी व्रत के पुण्य प्रभाव से संतान सुख की प्राप्ति का वरदान प्राप्त होता है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को श्रावण पुत्र

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अजा एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022
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अजा एकादशी का महत्त्व: अर्जुन ने कहा: हे पुण्डरिकाक्ष! मैंने श्रावण शुक्ल एकादशी अर्थात पुत्रदा एकादशी का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप कृपा करके मुझे भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के विषय में भी

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परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा

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पद्मा एकादशी या 'परिवर्तनी एकादशी' भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहा जाता है। यह लक्ष्मी का परम आह्लादकारी व्रत है। इस दिन आषाढ़ मास से शेष शैय्या पर निद्रामग्न भगवान विष्णु शयन करते हुए करवट

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इंदिरा एकादशी की व्रत कथा

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पितृ पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत अधिक महत्व होता है। इस पावन दिन भगवान विष्णु की विधि- विधान से पूजा- अर्चना की.. पितृ पक्ष में पड़ने वाली ए

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पापांकुशा एकादशी व्रत कथा

11 मई 2022
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पापांकुशा एकादशी का महत्त्व: अर्जुन कहने लगे कि हे जगदीश्वर! मैंने आश्विन कृष्ण एकादशी अर्थात इंदिरा एकादशी का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप कृपा करके मुझे आश्विन/क्वार माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के वि

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रमा एकादशी व्रत कथा

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रमा एकादशी कब मनाई जाती हैं उत्तरी भारत के कैलेंडर के अनुसार रमा एकादशी कार्तिक माह में आती है, जबकि तमिल कैलेंडर में ये पुरातास्सी महीने में आती है. आंध्रप्रदेश, कर्नाटका, गुजरात एवं महाराष्ट्र में

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देवोत्थान / प्रबोधिनी एकादशी व्रत कथा

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देवोत्थान एकादशी का महत्त्व: धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! मैंने कार्तिक कृष्ण एकादशी अर्थात रमा एकादशी का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप कृपा करके मुझे कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के व

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उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा

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उत्पन्ना एकादशी का महत्त्व: धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! मैंने कार्तिक शुक्ल एकादशी अर्थात प्रबोधिनी एकादशी का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप कृपा करके मुझे मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एका

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मोक्षदा एकादशी व्रत कथा

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मोक्षदा एकादशी का महत्त्व: धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! मैंने मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी अर्थात उत्पन्ना एकादशी का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप कृपा करके मुझे मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एक

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सफला एकादशी व्रत कथा

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सफला एकादशी का महत्त्व: धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे जनार्दन! मैंने मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी अर्थात मोक्षदा एकादशी का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप कृपा करके मुझे पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के व

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पहला प्रदोष व्रत,

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हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। हर माह दो प्रदोष व्रत पड़ते हैं। एक शुक्ल पक्ष में और दूसरा कृष्ण पक्ष में। इस व्रत का नाम प्रदोष माना गया है।  हिंदू पंचां

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शनिवार पहला प्रदोष व्रत कथा

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हर महीने में प्रदोष व्रत दो बार आता है. एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में. साल के पहले महीने जनवरी में इस बार पहला प्रदोष व्रत  है. इसलिये इसे शन‍ि प्रदोष भी कहा जाता है. प्रदोष व्रत के दिन भगवान

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सोम प्रदोष व्रत

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भगवान विष्णु की पूजा के लिए जिस तरह एकादशी को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, उसी प्रकार भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष का विशेष महत्व है। इसमें भी सोमवार को पड़ने वाला प्रदोष श्रेष्ठ माना जाता है।

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