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ये दुनिया अपनी लीजे

डॉ. आशा चौधरी

9 अध्याय
14 लोगों ने खरीदा
12 पाठक
15 नवम्बर 2022 को पूर्ण की गई
ISBN : 978-93-94582-81-1
ये पुस्तक यहां भी उपलब्ध है Amazon Flipkart

एक ही कॉलोनी में अपने-अपने परिवारों के दायरे में सीमित रहने वाले दो युवा बाहर किसी अनजान शहर में दोस्तों की तरह मिलते हैं और कहा है किसी शायर ने-‘‘एक मंजिल राही दो फिर प्यार न कैसे हो ?‘‘ इसी एक मंजिल की ओर दोनों के कदम उन्हें ले चलते हैं, धन-दौलत के अभिमान, परिवार की मान-मर्यादा की अकड़ व गुमान उनके इन साथ-साथ चलते कदमों को न रोक पाऐ क्योंकि उन कदमों के नीचे वास्तविकता, जिम्मेदारी भरी आपसी समझ, मानवीयता, धैर्य व बुद्धि की ठोस जमीन जो थी। ये यूं ही बैठे ठाले लिखी गई एक रोमांटिक उपन्यास है जिसमें नायक-नायिका के बीच आर्थिक फासले हैं जिन्हें वे कोई फासले नहीं मानते। सोच तथा मानसिकता प्रेममय व खरी हो तो फिर कोई सामाजिक, जातिगत व आर्थिक बंधन दो प्रेमियों को मिलने से नहीं रोक सकते। हालांकि घर-परिवार में अनेक बाधाऐं आज के खुले माहौल में भी उनका रास्ता रोकने में लगी रहती हैं लेकिन मजबूत मनोबल, ईमानदार प्रयास व निर्बाध इच्छाशक्ति के सहारे वे अपनी नैया आप खेने में सक्षम लगते हैं। वे अपनी नई ही दुनिया बसाने जा रहे हैं कि जिसमें किराऐ की हंसी व उधार की मुस्कानें न हों, जिसमें नजरों में सहमापन व मन में धुकधुकी न हो। जिसमें कोई अपने टूटे आईनों से आपको आईना दिखाने वाला न हो। आप इस स्वस्थ मानसिकता व सहज स्नेह के भाव से रहने योग्य हो जाओ तो ही आपका उनकी इस दुनिया में स्वागत होगा !  

ye duniya apni lije

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मेरा अनुभव इस किताब को पढ़ने का काफी अच्छा रहा | समाज के बंधन , खुद की खुशियों का मूल्य और अपने अंतर्मन की बात जैसे कई पहलुओं से लेखक ने मेरा मन अपनी पुस्तक की तरफ खींचे रखा | इसलिए मेरा अन्य सभी पाठकों से अनुरोध की इस पुस्तक को पढ़िए और अपना अनुभव हम सबके साथ व्यक्त कीजिये |


बेहतरीन किताब। बहुत ही सुंदर भावनात्मक कहानी है। जरूर पढ़ें।

पुस्तक के भाग

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ये दुनिया अपनी लीजे

7 नवम्बर 2022
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ये दुनिया अपनी लीजे ‘‘एक दूजे को समर्पित प्रेमकथा डॉ आशा चौधरी asha.chaudhary100@gmail.com 7987798613 भूमिकाः आज के समय में धन के पीछे दौड़ रही है इस जगत की इंसानी जमात। लेकिन ये जरूरी तो नहीं

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ये दुनिया अपनी लीजे

8 नवम्बर 2022
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तो वे जाने कहां से कहां पहुंच जाऐं ! दूर्वा फटाफट सीढ़ियां उतरती थी लगभग दौड़ती सी। उसने देखा रोड साइड पार्थ अपनी बाइक स्टार्ट कर रहा था उसे आती देख कर। ‘आइ एम सो सॉरी।’ कहती थी वह जिस पर वह मुस्कुरा

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ये दुनिया अपनी लीजे

9 नवम्बर 2022
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2- मगर समय तो किसी के लिये रूकता-ठहरता नहीं। उनकी आपस में बढ़ती जा रही मुलाकातें खुद उन्हें हैरत में डाले देती थीं कि कैसे आखिर कैसे अपने-अपने काम करते हुए भी वे अपने व्यस्त समय में से मेल-मुलाकात का

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ये दुनिया अपनी लीजे

9 नवम्बर 2022
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3- ‘क्या तू सचमुच दीक्षा लेना चाहती थी ?’ पूछती थी चंद्रा सीरियस हो कर उस एक दिन। क्योंकि उसे तो लगता था कि लड़कियों का इस प्रकार दीक्षा ले कर घर छोड़ना अक्सर उन्हीं परिवारों में दिखता है जो धर्म के न

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ये दुनिया अपनी लीजे

10 नवम्बर 2022
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4- जब पार्थ घर पहुंचा तो सबसे पहले मां को देखने भागा-भागा गया था उनके कमरे में। मगर वे तो अच्छी भली थीं, एकदम स्वस्थ। फिर क्यों बुलाया गया था उसे उनकी बीमारी की झूठी खबर दे कर ? उसने तो दूर्वा को यूं

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ये दुनिया अपनी लीजे

11 नवम्बर 2022
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5- ‘जब संहति दी की वहां निभ नहीं रही तो ऐसा कब तक चलेगा ? घर ले आते हैं अपन।‘ एक दिन पार्थ ने कह क्या दिया था तो मानो तूफान ही आ गया था घर में। ब्याह के बाद बेटी कैसे लाई जाऐगी घर में वापस ? पिता तो

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ये दुनिया अपनी लीजे

12 नवम्बर 2022
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6- जब छोटी बहन को समझाने से कोई बात न बनी तो उसने उसके साध्वी बनने को ले कर अपने सारे रिश्तेदारों के सामने विद्रोह जता दिया जिसकी भी माता-पिता को कोई उमीद न थी। उनकी नजर में तो अब पार्थ एक बेवकूफ युव

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ये दुनिया अपनी लीजे

13 नवम्बर 2022
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8- कभी-कभी ऐसा क्यों होता है कि हम किसी को उसके जाने के बाद ही समझ पाते हैं ? पार्थ को पिता का इस तरह वसीयत करना एक तरफ बेहद अजब तो दूसरी तरफ बेहद तसल्ली भरा भी लग रहा था। वो तो सोचे बैठा था कि संपत्

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ये दुनिया अपनी लीजे

13 नवम्बर 2022
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9- वो अन्यमनस्क सा मां के कमरे में उनके सिरहाने बैठा हुआ सोचता था। क्यों आखिरअपने जीवन में वो इतनी उलझनों से घिर गया था ? क्यों वे तमाम उलझनें सुलझने में नहीं आती थीं ? मां ने उठ कर उसका हाथ पकड़ अपन

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