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पहलू में बैठूँ ज़रा

14 मार्च 2022

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ए हीरे की कनी सुनों,
मेरी ज़ुबाँ पर ठहरे सवाल का सुमधुर स्वाद थोड़ा चख लो, 
सुनों क्या इज़ाज़त है पहलू में बैठूँ ज़रा,
तुम्हारी बिल्लौरी सी चमकती आँखों का रंग देखना चाहता हूँ।
धड़कन की धुन पर बजती तान सुनों, तुम्हारे होठों पर सज रहे नुक्ता पर
प्रीत का नग्मा लिखना चाहता हूँ। 
नाचीज़ की ख़्वाहिश पर गौर करो ए नाज़नीन, हर एक अदा पर अपना सबकुछ वार कर तुम्हारी मासूमियत का
दीवाना बनना चाहता हूँ। 
मौसम जो बैठा है आशिकाना आलम का,
इश्क की बारिश में नहाते नाचती चाहत की बौछारों से तुम्हें छेड़ कर, 
हसीन सी कोई ख़ता करना चाहता हूँ।
सुना है आग है तुम्हारी त्वचा की परतों में, 
रत्ती भर छूकर रोम-रोम अपना जलाना चाहता हूँ। 
नज़र ए करम हो इस आशिक पर मेहरबाँ 
मेहबूब की मोहब्बत में मिटकर 
खुद फ़ना होना चाहता हूँ। 
#भावु
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रचनाएँ
"शृंगार रस"
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प्यार इश्क मोहब्बत की परिभाषा
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पहलू में बैठूँ ज़रा

14 मार्च 2022
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ए हीरे की कनी सुनों,मेरी ज़ुबाँ पर ठहरे सवाल का सुमधुर स्वाद थोड़ा चख लो, सुनों क्या इज़ाज़त है पहलू में बैठूँ ज़रा,तुम्हारी बिल्लौरी सी चमकती आँखों का रंग देखना चाहता हूँ।धड़कन की धुन पर बजती तान

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