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साप्ताहिक_प्रतियोगिता

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डायरी दिनांक १९/०४/२०२२ शाम के छह बजकर पांच मिनट हो रहे हैं ।   जैसे जैसे गर्मी बढ रही है, ठंडी वस्तुओं की खपत बढ रही है। इस बार नीबू के दाम आसमान पर चढ़ रहे हैं। मजेदार बात है कि बाजार में हर व

मद से लहराते क़दमों कोअनजान सी किसी डगर परमोड़ा था तुमनेजिस दिन ,सागर की गहराई कोदर्द की उठती लहरों सेतौला था हमने उस दिन

श्री वसुदेव वसुदेव का देशाटन— राजा समुद्रविजय ने अपने आठों भाइयों का विवाह कर दिया था, मात्र वसुदेव अविवाहित थे। कामदेव के रूप से सुन्दर वसुदेव बालक्रीड़ा से युक्त हो शौर्यपुर नगरी में इच्छानुसार

(१) कौरव-पाण्डव कुरुवंश परम्परा— कुरुजांगल देश के हस्तिनापुर नगर में परम्परागत कुरुवंशियों का राज्य चला आ रहा था। उन्हीं में शान्तनु नाम के राजा हुए। उनकी ‘‘सबकी’’ नाम की रानी से पाराशर नाम का पुत्र

प्रस्तुत है भीष्म पितामह, कुरुवंश के आदरणीय वरिष्ठ महापुरुष। आइए सुनते हैं, इन्हीं की भाषा में, कि ये क्या कहते हैं:   श्री नेमिनाथ भगवान के शासन में हमारा राजवंश फला-फूला।   अरे ! उनका ही परिवार

‘महा’ अर्थात् विशाल और ‘भारत’ अर्थात् भरत के वंशज। इन्हीं भरतवंशीओं के पराक्रम एवं यशो गाथाओं के कारण यह हिन्दवी साम्राज्य भारत के नाम से विख्यात हुआ । महाभारत अर्थात्  महान, श्रेष्ठतम, सर्वोत्तम भारत

यौवन के शिखर तक पहुँचते हुए मेरा रूप, गुण, चातुर्य और सौन्दर्य सोलह कलाओं सा खिल चुका था। मेरे पिता अंधकवृष्णि आदि बड़े मेरे विवाह के लिए चिन्तित थे, कि मेरे योग्य कुमार कौन होगा? पिता ने ज्येष्ठ पुत्र

महाभारत का इतिहास तो भारतवर्ष का चिर-कालीन इतिहास है। अन्य इतिहास तो बदलते रहे हैं, लेकिन यह महाभारत का इतिहास नहीं बदला, इसीलिए रामायण और महाभारत की समीक्षा अन्य काव्य कृतियों की समीक्षा से अलग की जा

कौरव कुल में पहला गर्भ मेरी माता गान्धारी को रहा, किन्तु मैं इतना पापी था कि तीस माह तक प्रसव नहीं हुआ। मेरी माता ने प्रसव हेतु अनेक प्रयास किए, किन्तु सभी प्रयास निष्फल रहे। इतना ही नहीं, मेरे गर्भका

मैं युधिष्ठिर पांच पाण्डवों और सौ कौरवों का सबसे ज्येष्ठ भ्राता हूँ। पुत्र के लक्षण पालणे में दिखाई दे जाते हैं। मेरा परिवार पुण्यशाली था और ऐसे परिवार में मेरे जैसे गुणवान का जन्म हुआ, मानो दूध में श

महाभारत के पात्रों में नेत्रदीपक पात्रों के रूप में विपुल प्रेरणा देने वाले पात्रों के रूप में पहले श्रीकृष्ण आते हैं, तो लगभग उनकी बराबरी में मेरा नंबर लगता है। बहुत सारी चीजों में मैं अर्जुन से भी ब

द्रोणाचार्य की पाठशाला में अलग-अलग राजकुमारों ने युद्धकला आदि अनेक प्रकार की विद्याएँ प्राप्त की थी। अमुक्त और करमुक्त ऐसे शस्त्रों की कला सभी राजकुमारों ने सीखी थी। भीम और दुर्योधन गदा युद्ध में प्रव

मैं कृष्ण हूँ। मैं महाभारत के युद्ध का महासूत्रधार था, रामायण के राम की तरह ही उस समय मैंने सबसे सफल योद्धा के रूप में काम किया। परंतु मुझे पता था कि सेना को एक अच्छे योद्धा की नहीं पर अच्छे मार्गदर्श

मैं कृष्ण   मेरी माता देवकी मुझसे पहले हुए छः पुत्रों को दुलार करने का सौभाग्य प्राप्त नहीं कर सकी थी। उसकी अदम्य इच्छा जानकर मैंने देव-साधना की, और इससे देवकी को आठवाँ पुत्र प्राप्त हुआ, जिसका नाम

ताड़ासन: जानिए ताडासन करने का तरीका और फायदेव्यस्त जीवनशैली के चलते कई बार हम शरीर पर ठीक तरह से ध्यान नहीं दे पाते हैं। परिणामस्वरूप, शरीर का छोटी-बड़ी शारीरिक समस्याओं की चपेट में आने का जोखिम बढ़ ज

जब छोटी थी मैं, घर घर खेला करती थी मैं।   आँखों में काजल लगा कर,   माथे पर बड़ी सी बिन्दी। गहरी गहरी लगा के लिपस्टिक, पाउडर पोत लेती थी मैं। मम्मी की चुनरी को, साड़ी की तरह लपेट कर

बचपन में सोचते थे, हम बड़े कब होऐंगे। तब हमें नहीं पता था, जीवन झमेले की। उलझन में उलझ कर, सिर पकड़कर रोऐंगे। बड़े होकर कुछ बड़ा करेंगे, सबसे आगे हम रहेंगे। जो चाहेंगे हासिल होगा, सपने सच पूरे होऐंगे।

उधार की ये जिंदगी, मिली है कुछ दिनों के लिए। काटो नहीं रो रो कर, जी लो खुद के लिए। गम तो हर तरफ, छाए हैं बादलों की तरह। उनकी बारिश में, भीगो खुद के लिए। ना दिखाओ जख्मों को, रो रो कर दूसरों को। मुस्कुर

भाग - 3          अब अक्सर ही सुमित रिया से चैटिंग करने लगा। उसे रिया के मैसेज का इंतजार रहता था । जैसे ही मैसेज आता था उसका तुरंत रिप्लाई देता था।  बार-बार उसकी डीपी

        एक राजा था। राजा बहुत दयालु और पराक्रमी था। लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी। इस बात से बहुत दुःखी रहता था। प्रजा में भी दुःख व्याप्त था।       &

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