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चीन और हिंदुस्तान- नेहरू/ प्रेमचंद

6 नवम्बर 2021

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हम लिख चुके हैं कि शुरू में मेसोपोटैमिया, मिस्र और भूमध्‍य सागर के छोटे-से टापू क्रीट में सभ्यता शुरू हुई और फैली। उसी जमाने में चीन और हिंदुस्तान में भी ऊँचे दरजे की सभ्यता शुरू हुई अपने ढंग से फैली।

दूसरी जगहों की तरह चीन में भी लोग बड़ी नदियों की घाटियों में आबाद हुए। यह उस जाति के लोग थे जिन्हें मंगोल कहते हैं। वे पीतल के खूबसूरत बर्तन बनाते थे और कुछ दिनों बाद लोहे के बर्तन भी बनाने लगे। उन्होंने नहरें और अच्छी-अच्छी इमारतें बनाईं, और लिखने का एक नया ढंग निकाला। यह लिखावट हिंदी, उर्दू या अंग्रेजी से बिल्कुल नहीं मिलती। यह एक किस्म की तस्वीरदार लिखावट थी। हर एक शब्द और कभी-कभी छोटे-छोटे जुमलों की भी तस्वीर होती थी। पुराने जमाने में मिस्र, क्रीट और बाबुल में भी तस्वीरदार लिखावट होती थी। उसे अब चित्रलिपि कहते हैं। तुमने यह लिखावट अजायबघर की बाज किताबों में देखी होगी। मिस्र और पश्चिम के मुल्कों में यह लिखावट सिर्फ बहुत पुरानी इमारतों में पाई जाती है। उन मुल्कों में भी इस लिखावट का बहुत दिनों से रिवाज नहीं रहा। लेकिन चीन में अब भी एक किस्‍म की तस्वीरदार लिखावट मौजूद है और ऊपर से नीचे को लिखी जाती है। अंग्रेजी या हिंदी की तरह बाएँ से दाईं तरफ या उर्दू की तरह दाहिनी से बाईं तरफ नहीं।

हिंदुस्तान में बहुत-सी पुराने जमाने की इमारतों के खंडहर शायद अभी तक जमीन में नीचे दबे पड़े हैं। जब तक उन्हें कोई खोद न निकाले तब तक हमें उनका पता नहीं चलता। लेकिन उत्तर में बाज बहुत पुराने खंडहरों की खुदाई हो चुकी है। यह तो हमें मालूम ही है कि बहुत पुराने जमाने में जब आर्य लोग हिंदुस्तान में आए तो यहाँ द्रविड़ जाति के लोग रहते थे। और उनकी सभ्यता भी ऊँचे दरजे की थी। वे दूसरे मुल्कवालों के साथ व्यापार करते थे। वे अपनी बनाई हुई बहुत-सी चीजें मेसोपोटैमिया और मिस्र में भेजा करते थे। समुद्री रास्ते से वे खासकर चावल और मसाले और साखू की इमारती लकड़ियाँ भी भेजा करते थे। कहा जाता है कि मैसोपोटैमिया के 'उर' नामी शहर के बहुत से पुराने महल दक्षिणी हिंदुस्तान से आई हुई साखू की लकड़ी के बने हुए थे। यह भी कहा जाता है कि सोना, मोती, हाथीदाँत, मोर और बंदर हिंदुस्तान से पश्चिम के मुल्कों को भेजे जाते थे। इससे मालूम होता है कि उस जमाने में हिंदुस्तान और दूसरे मुल्कों में बहुत व्यापार होता था। व्यापार तभी बढ़ता है जब लोग सभ्य होते हैं।

उस जमाने में हिंदुस्तान और चीन में छोटी-छोटी रियासतें या राज्य थे। इनमें से किसी मुल्क में भी एक राज्य न था। हर एक छोटा शहर, जिसमें कुछ गॉंव और खेत होते थे, एक अलग राज्य होता था। ये शहरी रियासतें कहलाती हैं। उस पुराने जमाने में भी इनमें से बहुत-सी रियासतों में पंचायती राज्य था। बादशाह न थे, राज्य का इंतजाम करने के लिए चुन हुए आदमियों की एक पंचायत होती थी। फिर भी बाज रियासतों में राजा का राज्य था। गोकि इन शहरी रियासतों की सरकारें अलग होती थी, लेकिन कभी-कभी वे एक दूसरे की मदद किया करती थीं, कभी-कभी एक बड़ी रियासत कई छोटी रियासतों की अगुआ बन जाती थी।

चीन में कुछ ही दिनों बाद इन छोटी-छोटी रियासतों की जगह एक बहुत बड़ा राज्य हो गया। इसी राज्य के जमाने में चीन की बड़ी दीवार बनाई गई थी। तुमने इस बड़ी दीवार का हाल पढ़ा है। वह कितनी अजीबोगरीब चीज है। वह समुद्र के किनारे से ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों तक बनाई गई थी, ताकि मंगोल जाति के लोग चीन में घुस कर न आ सकें। यह दीवार चौदह सौ मील लंबी, बीस से तीस फुट तक ऊँची और पच्चीस फुट चौड़ी है। थोड़ी-थोड़ी दूर पर किले और बुर्ज हैं। अगर ऐसी दीवार हिंदुस्तान में बने तो वह उत्तर में लाहौर से लेकर दक्षिण में मद्रास तक चली जाएगी। वह दीवार अब भी मौजूद है और अगर तुम चीन जाओ तो उसे देख सकती हो।

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रचनाएँ
पिता के पत्र पुत्री के नाम- जवाहरलाल नेहरू
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आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसमें अपनी एकलौती बेटी इंदिरा नेहरू का जिक्र किया था। जिसका सारांश इस प्रकार है- एक खत एकाएक खत्म हो जाता है। गर्मी का मौसम खत्म होता है और इंदिरा पहाड़ से उतर आई। फिर ऐसे खत लिखने का मौका मुझे नहीं मिला। उसके बाद के साल वह पहाड़ नहीं गई और दो साल बाद 1630 में मुझे नैनी की जो पहाड़ नहीं है, यात्रा करनी पड़ी। नैनी जेल में कुछ और पत्र मैंने इंदिरा को लिखे लेकिन वे भी अधूरे रह गए और भौर छोड़ दिया गया। ये नए खत इस किताब में शामिल नहीं है।
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पिता के पत्र पुत्री के नाम

2 अक्टूबर 2021
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<p><br></p> <figure><img src="https://shabd.s3.us-east-2.amazonaws.com/articles/61580f00a9e73b20b620

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संसार पुस्तक है- नेहरू/ प्रेमचंद

26 अक्टूबर 2021
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<p>जब तुम मेरे साथ रहती हो तो अकसर मुझसे बहुत-सी बातें पूछा करती हो और मैं उनका जवाब देने की कोशिश क

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शुरू का इतिहास कैसे लिखा गया - जवाहरलाल नेहरू

26 अक्टूबर 2021
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<p>अपने पहले पन्‍ने में मैंने तुम्हें बताया था कि हमें संसार की किताब से ही दुनिया के शुरू का हाल मा

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जमीन कैसे बनी - जवाहरलाल नेहरू

27 अक्टूबर 2021
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<p>तुम जानती हो कि जमीन सूरज के चारों तरफ घूमती है और चाँद जमीन के चारों तरफ घूमता है। शायद तुम्हें

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जानवर कब पैदा हुए - जवाहरलाल नेहरू

27 अक्टूबर 2021
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<p>हम बतला चुके हैं कि शुरू में छोटे-छोटे समुद्री जानवर और पानी में होनेवाले पौधे दुनिया की जानदार च

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आदमी कब पैदा हुआ- नेहरू/ प्रेमचंद

28 अक्टूबर 2021
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<p>मैंने तुम्हें पिछले खत में बतलाया था कि पहले दुनिया में बहुत नीचे दरजे के जानवर पैदा हुए और धीरे-

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शुरू के आदमी- नेहरू/ प्रेमचंद

28 अक्टूबर 2021
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<p>मैंने अपने पिछले खत में लिखा था कि आदमी और जानवर में सिर्फ अक्ल का फर्क है। अक्ल ने आदमी को उन बड

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तरह- तरह की कौमें क्योंकर बनीं- नेहरू/ प्रेमचंद

29 अक्टूबर 2021
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<p>अपने पिछले खत में मैंने नए पत्थर-युग के आदमियों का जिक्र किया था जो खासकर झीलों के बीच में मकानों

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आदमियों की कौमें और जबानें- नेहरू/ प्रेमचंद

29 अक्टूबर 2021
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<p>हम यह नहीं कह सकते कि दुनिया के किस हिस्से में पहले-पहल आदमी पैदा हुए। न हमें यही मालूम है कि शुर

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जबानों का आपस में रिश्ता- नेहरू/ प्रेमचंद

29 अक्टूबर 2021
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<p>हम बतला चुके हैं कि आर्य बहुत-से मुल्कों में फैल गए और जो कुछ भी उनकी जबान थी उसे अपने साथ लेते ग

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सभ्यता क्या है?- नेहरू/ प्रेमचंद

30 अक्टूबर 2021
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<p>मैं आज तुम्हें पुराने जमाने की सभ्यता का कुछ हाल बताता हूँ। लेकिन इसके पहले हमें यह समझ लेना चाहि

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जातियों का बनना- नेहरू/ प्रेमचंद

30 अक्टूबर 2021
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<p>मैंने पिछले खतों में तुम्हें बतलाया है कि शुरू में जब आदमी पैदा हुआ तो वह बहुत कुछ जानवरों से मिल

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मजहब की शुरुआत और काम का बंटवारा- नेहरू/ प्रेमचंद

30 अक्टूबर 2021
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<p>पिछले खत में मैंने तुम्हें बतलाया था कि पुराने जमाने में आदमी हर एक चीज से डरता था और खयाल करता थ

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खेती से पैदा हुई तब्दीलियां- नेहरू/ प्रेमचंद

1 नवम्बर 2021
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<p>अपने पिछले खत में मैंने कामों के अलग-अलग किए जाने का कुछ हाल बतलाया था। बिल्कुल शुरू में जब आदमी

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खानदान का सरगना कैसे बना- नेहरू/ प्रेमचंद

1 नवम्बर 2021
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<p>मुझे भय है कि मेरे खत कुछ पेचीदा होते जा रहे हैं। लेकिन अब जिंदगी भी तो पेचीदा हो गई है। पुराने ज

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सरगना का इख्तियार कैसे बढ़ा- नेहरू/ प्रेमचंद

1 नवम्बर 2021
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<p>मुझे उम्मीद है कि पुरानी जातियों और उनके बुजुर्गों का हाल तुम्हें रूखा न मालूम होता होगा।</p> <p>

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सरगना राजा हो गया- नेहरू/ प्रेमचंद

3 नवम्बर 2021
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<p>बूढ़े सरगना ने हमारा बहुत-सा वक्त ले लिया। लेकिन हम उससे जल्द ही फुर्सत पा जाएंगे या यों कहो उसका

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शुरू का रहन-सहन- नेहरू/ प्रेमचंद

3 नवम्बर 2021
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<p>सरगनों और राजाओं की चर्चा हम काफी कर चुके। अब हम उस जमाने के रहन-सहन और आदमियों का कुछ हाल लिखेंग

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पुरानी दुनिया के बडे़-बड़े शहर- नेहरू/ प्रेमचंद

3 नवम्बर 2021
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<p>मैं लिख चुका हूँ कि आदमियों ने पहले-पहल बड़ी-बड़ी नदियों के पास और उपजाऊ घाटियों में बस्तियाँ बना

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मिस्र और क्रीट- नेहरू/ प्रेमचंद

3 नवम्बर 2021
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<p>पुराने जमाने में शहरों और गाँवों में किस तरह के लोग रहते थे? उनका कुछ हाल उनके बनाए हुए बड़े-बड़े

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चीन और हिंदुस्तान- नेहरू/ प्रेमचंद

6 नवम्बर 2021
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<p>हम लिख चुके हैं कि शुरू में मेसोपोटैमिया, मिस्र और भूमध्‍य सागर के छोटे-से टापू क्रीट में सभ्यता

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समुद्री सफर और व्यापार- नेहरू/ प्रेमचंद

6 नवम्बर 2021
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<p>फिनीशियन भी पुराने जमाने की एक सभ्य जाति थी। उसकी नस्ल भी वही थी जो यहूदियों और अरबों की है। वे ख

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भाषा, लिखावट और गिनती- नेहरू/ प्रेमचंद

6 नवम्बर 2021
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<p>हम तरह-तरह की भाषाओं का पहले ही जिक्र कर चुके हैं और दिखा चुके हैं कि उनका आपस में क्या नाता है।

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आदमियों के अलग-अलग दरजे- नेहरू/ प्रेमचंद

10 नवम्बर 2021
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<p>लड़के, लड़कियों और सयानों को भी इतिहास अकसर एक अजीब ढंग से पढ़ाया जाता है। उन्हें राजाओं और दूसरे

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राजा, मंदिर और पुजारी- नेहरू/ प्रेमचंद

10 नवम्बर 2021
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<p>हमने पिछले खत में लिखा था कि आदमियों के पाँच दरजे बन गए। सबसे बड़ी जमात मजदूर और किसानों की थी। क

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पीछे की तरफ एक नजर- नेहरू/ प्रेमचंद

10 नवम्बर 2021
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<p>तुम मेरी चिट्ठियों से ऊब गई होगी! जरा दम लेना चाहती होगी। खैर, कुछ अरसे</p> <p>तक मैं तुम्हें नई

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फॉसिल और पुराने खंडहर- नेहरू/ प्रेमचंद

10 नवम्बर 2021
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<p>मैंने अरसे से तुम्हें कोई खत नहीं लिखा। पिछले दो खतों में हमने उस पुराने जमाने पर एक नजर डाली थी

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