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कौसानी : हिमालय में प्रकृति की इक सुन्दर कविता

30 सितम्बर 2015

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featured image......................................................................................................... हरी-भरी वादियाँ, बर्फीली चोटियाँ, कल-कल करती नदियाँ, मोहक जीव-जन्तुओं की सपनीली दुनिया तथा बेहतरीन औद्योगिक एवं शैक्षणिक परिवेश को समेटे हुए सुन्दर, शांत, हरित, स्वच्छ, सुरक्षित एवं साक्षर देवभूमि उत्तराखंड ने विश्व-पटल पर एक विकासशील पर्यटन प्रदेश की पहचान बनाई है....उत्तराखंड पर समय-समय पर विभिन्न पर्यटन स्थलों की यायावरी के क्रम में इस बार बात बेहद तेजी से उभरते सुन्दर शांत कौसानी कस्बे की... ....................................................................................................... भोर में ही कौवों की कांव-कांव, यूं तो सूचक है, किसी मेहमान के आने का | लेकिन बचपन से मन-मष्तिष्क में बसी यह लोकोक्ति, तब चरितार्थ हो गई, जब शैशव सूरज की लालिमय किरणों ने हिमालय की सुन्दर पर्वत श्रेणियों- चौखम्भा, नंदाघूंटी, मृग्थुनी, मैक्टोली, नंदा देवी, नंदाखाट, पंचाचूली और विशेष कर त्रिशूल चोटियों को छुआ.....सामने जो मनमोहक नजारा था, उसका वर्णन अकल्पनीय और सर्वथा अवर्णनीय था | वास्तव में, हर व्यक्ति के लिए यह दृश्य अपनी तरह से व्याख्या करने योग्य था | इस एक दृश्य के सौंदर्य में वह मायाजाल था, जिसके मोहपाश में आप सदियाँ तो क्या युगों-युगों तक मानव बनकर, इस दैवीय भूमि पर आना चाहेंगें | जी हाँ, बात हो रही है देवभूमि उत्तराखंड के कुमाऊँ अंचल के बागेश्वर जिले में अवस्थित, हिमालय में प्रकृति की एक सुन्दर कविता, कौसानी की जहां का अप्रतिम सूर्योदय पूरी दुनिया में सुविख्यात है | भोर का यह मनभावन नजारा इतना मशहूर है कि विश्व के कोने-कोने के पर्यटकों के साथ ही छायाकारों, चित्रकारों एवं रचनाकारों का यहाँ जमावड़ा लगा होता है, इसी दृश्य की सुन्दरता के रह्स्योद्घाटन हेतु | लेकिन यह नजारा प्रकृति का वह अनादि स्वरुप है, जो स्वयं में व्यक्ति की चिंता, विवशता, बेचैनी, असफलता आदि सभी नकारात्मकता अपने में समाहित कर उसकी आत्मा में नीरव शांति भर देता है | इस पल साधारण से साधारण व्यक्ति के अन्दर भी काव्यात्मक क्षमता सहज ही जागृत हो उठती है | शायद यही वजह है कि हम जैसे घुमक्कड़-यायावर पर्यटन लेखकों का तो पूरा कुनबा ही यहाँ उमड़ा होता है | इस पल यहाँ मुझे ऐसा प्रतीत हुआ मानों भगवान शिव के त्रिशूल का साक्षात् दर्शन हो रहा हो | अच्छी बात यह कि होटल के टैरेस पर आरामदायक कुर्सी में बैठ कर एक कप चाय की प्याली के साथ सूर्योदय का यह नज़ारा मेरे मन में नित नए विचारों को जन्म दे रहा था, जो अन्यत्र मुश्किल है | इन विचारों से हजारों, लाखों कहानियों का सृजन हो सकता था | यही तो ताकत है प्रकृति की, जिस पर कृपा हो गई उसकी रचना को अमरत्व मिलने से कोई रोक नहीं सकता | हालांकि मैंने पूर्व में ही कौसानी के सूर्योदय के बारे में सुन रखा था लेकिन सामने देखने का अहसास अद्भुत था | इस पल आधात्मिकता का मुझे सहज ही बोध हो गया था | यहाँ मन के धागे मन से अपने आप जुड़ जायेंगे, ऐसा मेरा मानना है | मेरे सामने बर्फीली चोटियों का विहंगम नज़ारा तथा बैजनाथ एवं गरुड़ घाटियों की हरियाली और वहां के स्थानीय फल माल्टा की सुगंध वातावरण में इक नयी ताजगी भर रही थी | इस दृश्य को अपने कैमरे में कैद कर ढ़ेरों फोटोग्राफर्स बहुत सारे अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं | और यह नज़ारा बहुत सारे पत्र-पत्रिकाओं में भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाता है | दीगर है कि जाड़े के महीनों में कौसानी में चाँद और सूरज का एक साथ का बेजोड़ दृश्य अविस्मरणीय होता है | वास्तव में, कौसानी के शांत माहौल में आपको आत्मिक शांति का अर्थ सहज ही समझ में आ जाता है | कौसानी के मुख्य चौराहे से व्यू-प्वाइंट तक पैदल पहुँचने में बमुश्किल १५ मिनट लगते हैं | ज्ञातव्य है कि महात्मा गाँधी ने कौसानी के अपने ३ हफ्ते के प्रवास के दौरान यह उद्धरण दिया था कि सुन्दरता की खोज में पता नहीं क्यों लोग यूरोप जाते हैं जबकि कौसानी में ही स्विट्ज़रलैंड विद्यमान है | शांत गाँव, फलों से लदे बगीचे, चीड़ के पंक्तिबद्ध पेड़, चाय बागान, पहाड़ों में सर्पीले घुमाव भरे रास्ते कौसानी को बेहद खूबसूरत स्थल की गरिमा प्रदान करते हैं | उल्लेखनीय है कि कौसानी में पर्वत चोटियाँ दिन भर अपना रंग बदलती रहती हैं | एक और खास बात है कि कविताओं के सुविख्यात रचनाकार सुमित्रानंदन पन्त जी का जन्म भी कौसानी में ही हुआ था, जहां उन्होंने प्रकृति की गोद में रहकर एक से बढ़कर एक प्राकृतिक मौलिक रचनाओं का सृजन किया | वास्तव में, कौसानी का अर्थ ही है जिसका कोई सानी नहीं | यहाँ हैदराबाद से आये शादीशुदा जोड़े के चेहरों पर बिखरी खुशियाँ कौसानी की पर्यटन क्षमता का भान कराने के लिए पर्याप्त थीं | खास आकर्षण : - अनासक्ति आश्रम : अनासक्ति या गाँधी आश्रम महात्मा गाँधी को समर्पित स्थल है, जहां सन १९२९ में अपने ३ हफ्ते बापू ने बिताये थे और कौसानी की आबो-हवा, सुन्दरता पर रीझकर इसे स्विटज़रलैंड कहा था | यहाँ के शिखर सोपान से हिमालयी चोटियों का विहंगम नज़ारा लिया जा सकता है | यहाँ गाँधी साहित्य से भरा एक पुस्तकालय भी है, जो हर रविवार को छोड़कर शेष दिन खुला रहता है | यहाँ पर्यटन सीजन में लगभग १००० पर्यटक रोजाना आते हैं | यहाँ स्थित प्रार्थना कक्ष में सुबह-शाम विशेष प्रार्थना भी होती है | वैसे तो यहाँ हर प्रान्त से लोग बड़े पैमाने पर इस स्थल का भ्रमण करने आते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा तादाद पश्चिम बंगाल से आने वाले पर्यटकों की होती है | यहाँ ठहराने की भी अच्छी सुविधा है साथ ही यहाँ का शाकाहार सादा भोजन भी लोगों को अच्छा लगता है | विशेष आकर्षण यहाँ बापू की वंशावली बोर्ड भी है, जिससे बापू परिवार के सदस्यों के बारे में रोचक जानकारी हासिल होती है | - सुमित्रानंदन पन्त गैलरी : प्रख्यात कवि सुमित्रानंदन पन्त की जन्मस्थली होने के कारण कौसानी में इस गैलरी का निर्माण किया गया | यहाँ तक पहुँचने वाला रास्ता पन्त मार्ग कहलाता है | यहाँ अल्मोड़ा के नेशनल म्यूजियम की एक शाखा संचालित है | यह कौसानी के मुख्य चौराहे के बिल्कुल समीप ही अवस्थित है | यहाँ पन्त जी द्वारा प्रयोग में लाये गए टेबल, कुर्सी तथा हरिवंश रॉय बच्चन, अमिताभ बच्चन के साथ की दुर्लभ तस्वीरों का संग्रह भी है | यह सुबह १०.३० से शाम ४.३० तक खुला रहता है | अन्य आकर्षण : कौसानी के जिला पंचायत रेस्ट हाउस से लगभग ९ किलोमीटर की दूरी पर श्री रुद्रधारी महादेव का सिद्ध मंदिर है, जहां एक गुफा में एक प्राकृतिक शिवलिंग विराजमान है | यहाँ के अन्य आकर्षणों में उत्तराखंड चाय बोर्ड द्वारा बने चाय के बागान भी शामिल हैं | समीपवर्ती अन्य पर्यटन स्थलों से कौसानी की दूरी : बैजनाथ (२० किमी ), ग्वालदम (४० किमी ), चौकोरी (८५ किमी ), जागेश्वर धाम ज्योतिर्लिंग (८५ किमी), बिनसर (८७ किमी ), पाताल भुवनेश्वर (१३५ किमी ), मुनस्यारी (१९५ किमी ) | कैसे पहुंचे ? कौसानी का निकटतम हवाई-अड्डा पंतनगर है, जो यहाँ से लगभग १८० किमी दूर है | जबकि निकटस्थ रेलवे स्टेशन काठगोदाम लगभग १४२ किमी है | कौसानी सड़कों द्वारा अग्रलिखित महत्वपूर्ण शहरों से भली-प्रकार जुड़ा है, मसलन अल्मोड़ा (५१ किमी ), रानीखेत (७९ किमी ), नैनीताल (१२० किमी ), बागेश्वर (३९ किमी ), बद्रीनाथ (२७० किमी ), हरिद्वार (३२५ किमी ), दिल्ली (४१० किमी ) इत्यादि |
Gyanendra

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मनमोहक

23 अक्टूबर 2015

वर्तिका

वर्तिका

हिमालय की गोद में बसें"कौसानी" का लेख के माध्यम से सैर करवाने के लिए धन्यवाद!

1 अक्टूबर 2015

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रचनाएँ
tourism
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पर्यटन क्षेत्र की रोचक जानकारियों का सतरंगी पिटारा...
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एक अरब पर्यटक...एक अरब अवसर : बुर्कीना-फासो (विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष)

22 सितम्बर 2015
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संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा हर वर्ष २७ सितम्बर को विश्व पर्यटन दिवस का आयोजन होता है, एक नई थीम या प्रसंग के टैगलाइन से, जिसकी मेज़बानी अलग-अलग देश में होती है. इस बार विश्व पर्यटन दिवस (२७ सितम्बर, २०१५ ) की थीम है- एक अरब पर्यटक . . . एक अरब अवसर, जिसका प्रायोजक देश है – बुर्किना-फासो

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संपूर्ण पर्यटन का सर्वोत्कृष्ट संसार है उत्तराखंड

23 सितम्बर 2015
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आगामी विश्व पर्यटन दिवस (२७ सितम्बर, २०१५) के उपलक्ष्य में आज बात करते हैं भारत के पर्यटन प्रदेश एवं देवभूमि की प्रतिष्ठा रखने वाले उत्तराखंड की, जहां की आर्थिकी मुख्यतः पर्यटन पर ही निर्भर है.......... प्राकृतिक पर्यटन के परंपरागत प्रतिमान :नैनीताल, भोवाली, रामगढ, मुक्तेश्वर, भीमताल, रानीखेत, कौसान

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विश्व पर्यटन ही नहीं, भारत पर्यटन दिवस भी मनाएं

29 सितम्बर 2015
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विश्व पर्यटन दिवस, विगत २७ सितम्बर को पूरे विश्व में जोशोखरोश के साथ मनाया गया जिसकी आहट या धूम तो हम कहीं ना कहीं अवश्य महसूस करते है लेकिन भारत पर्यटन दिवस के बारे में अभी हमारे देश ही में जागरूकता एवं लोकप्रियता की भारी कमी है | जरुरत है इसे और लोकप्रिय बनाने की क्योंकि भारत हर प्रकार के पर्यटन क

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कौसानी : हिमालय में प्रकृति की इक सुन्दर कविता

30 सितम्बर 2015
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.........................................................................................................हरी-भरी वादियाँ, बर्फीली चोटियाँ, कल-कल करती नदियाँ, मोहक जीव-जन्तुओं की सपनीली दुनिया तथा बेहतरीन औद्योगिक एवं शैक्षणिक परिवेश को समेटे हुए सुन्दर, शांत, हरित, स्वच्छ, सुरक्षित एवं साक्षर देवभूम

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भारत के कुछ चुनिंदा पर्यटन राज्य-केन्द्रशासित प्रदेश, जहां है पर्यटन में अपार अवसर

7 अक्टूबर 2015
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भारत में हर मौसम के लिएइतने पर्यटन स्थल हैं कि हमें किसी और देश में जाने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी | भारतमें सामुदायिक विविधता भरे इन पर्यटन स्थलों की संस्कृति, खान-पान, रहन-सहन औरसुन्दरता इन्हें ख़ास बनाती है | आइये एक नज़र डालते हैं, भारत के ऐसे ही कुछचुनिंदा पर्यटन प्रदेशों, केन्द्रशासित राज्यों पर...

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हनीमून डेस्टिनेशन : जीवन के सबसे सुखद पलों का खुशनुमा अहसास

7 अक्टूबर 2015
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हनीमून डेस्टिनेशन...यानि...जीवनके सबसे सुखद पलों का खुशनुमा अहसास...रोमांस एवं प्यार से सराबोर कुछ अन्तरंगलम्हों को ताउम्र सहेजने हेतु हर नव-विवाहित युगल की बेशकीमती सौगात...मोहब्बत कीखुशबू से लबरेज़ अपने हमसफ़र के साथ जनम-जनम के लिए बंधे डोर को मजबूत करने एवं एकख़ूबसूरत रिश्ता बनाने का सुनहरा अवसर...क

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कतर्नियाघाट वन्य-जीव अभ्यारण्य : अद्भुत एवं अभिनव आकर्षण

8 अक्टूबर 2015
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अपेक्षाकृतकम लोकप्रिय परन्तु अद्भुत एवं अभिनव पर्यटन आकर्षण यह वन्य-जीव अभ्यारण्य उत्तरप्रदेश के बहराइच जनपद के तराई क्षेत्र में नेपाल सीमा के समीप स्थित है, जो दुधवाटाइगर रिज़र्व का एक हिस्सा है| ३१ मई, १९७६ में स्थापित इस अभ्यारण्य को ६प्रखंडों में बांटा गया है| ४ प्रखंड कतर्निया, निशानगारा, मुर्थि

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अनोखे हांगकांग का अविस्मरणीय सफ़र

9 अक्टूबर 2015
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हांगकांगचीनी-गणराज्य का एक स्वायत्त-प्रशासकीय क्षेत्र है, जिसकी अपनी पृथकमुद्रा-प्रणाली, प्रवासी-कानून तथा कस्टम एवं न्याय-पद्धति है| यह संसार केमहत्वपूर्ण व्यापारिक एवं बड़े बैंकिंग केन्द्रों में से एक है, जहां की विशिष्टभौगोलिक दशा तथा व्यापारिक एवं राजनैतिक स्थिति के कारण आज इसे “चीन काप्रवेश-द्वा

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सुंदरबन है भारत के राष्ट्रीय-पशु का सबसे बड़ा घर

16 अक्टूबर 2015
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सुंदरबनदक्षिण-२४ परगना जिले के अंतर्गत आता है, जो भारत के पश्चिम बंगाल राज्य काक्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा तथा जनसंख्या के लिहाज से दूसरा सबसे बड़ा जिला है| इस जिले का मुख्यालय अलीपुर है | दक्षिण-२४ परगना जिला अलीपुर सदर, बरुईपुर,कैनिंग, डायमंड हार्बर तथा काकद्वीप नामक ५ सब-डिविजनों में बंटा है |

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मुंबई नाईट-लाइफ : जिसमें रात जागते हुए गाती है

20 अक्टूबर 2015
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संगीतकी तेज धुनों पर ऊर्जा से भरे लम्हों में पसीने से तर-बतर बदन और लहराते हुए जामके लिए पब तथा बार से अच्छी जगह कोई और नहीं है, जहां नाईट-लाइफ अपने पूरे शबाब परहोती है | मुम्बई शहर की तो हर बात निराली है, जिसमें यहाँ की रंगीन नाईट-लाइफ केजादू का कहना ही क्या ?मुंबईमें व्यक्ति रात को सोता नहीं, बल्क

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भारतीय पुरातन परंपरा का जीवंत एवं प्रवाहमयी संगम : अर्धकुंभ-2016 (हरिद्वार)

1 जनवरी 2016
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नव-वर्षके नव-श्रृंगार भरे माहौल में मन के मेले का आगाज़ हो गया है | जी हाँ, धर्मनगरी हरिद्वारमें में हर-हर गंगे के उद्घोष के साथ 1 जनवरी से आरम्भ हो गया है अर्धकुंभ-2016का जो 30 अप्रैल तक समाप्त होगा | मान्यतानुसार पौराणिक समुद्र-मंथन के बाद निकले दिव्यअमृत की बूँदें पृथ्वी पर 4 स्थलों- प्रयाग (इलाहा

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शक्तिपीठ है हरिद्वार स्थित माया देवी मंदिर

2 जनवरी 2016
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हरिद्वार रेलवेस्टेशन के बिल्कुल समीप ही अवस्थित है माया देवी मंदिर | यह पावन स्थल मां शक्ति(देवी दुर्गा) के दिव्यचमत्कारिक 52 शक्तिपीठों में से एक है, जहां हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी माया विराजमानहैं | लगभग 11वीं शताब्दीपुराने इस मंदिर के बारे में यह प्रचलित मान्यता है कि यहाँ देवी सती का ह्रदय एव

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क्या कभी आपको भी ऐसा लगता है कि कुछ दिनों के लिए सब कुछ छोड़-छाड़कर एकांत में हिमालय या सागर किनारे बहुत दूर निकल जाएँ ??? क्या यह पलायन है अथवा पुन्हः ऊर्जा की अवस्थापना ???

4 जनवरी 2016
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रानीखेत स्थित झूला देवी मंदिर स्थापना का महात्म्य

7 जनवरी 2016
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काठगोदाम से लगभग 78 किलोमीटर,नैनीताल से लगभग 55 किलोमीटर और अल्मोड़ा से लगभग 40 किलोमीटर दूरस्थित अल्मोड़ा जिले में स्थित हिल स्टेशन रानीखेत की नीरव सुन्दरता हर किसी को यहाँसहज ही खींच लाती है| कुमाऊँ रेजिमेंटल के मुख्यालय रानीखेत के प्राकृतिक गोल्फकोर्स को यूं तो आपने विवाह जैसी बहुत सारी फिल्मों में

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कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व स्थित गर्जिया माता मंदिर की महिमा

9 जनवरी 2016
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देवीदुर्गा का अन्य प्रतिरूप मां गर्जिया का यह पवित्र मंदिर विश्वप्रसिद्ध कॉर्बेटटाइगर रिज़र्व के मनोरम वन्य-क्षेत्र में स्थित है | कॉर्बेट का प्रवेश-द्वार रामनगरक़स्बा जो नैनीताल जनपद का हिस्सा है से इस मंदिर की दूरी लगभग 10 किलोमीटर है | उल्लेखनीयहै कि नैनीताल से लगभग 63 किलोमीटर दूर रामनगर से कॉर्बे

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पहाड़-बादलों के मिलन से दिखता है यहाँ स्वर्ग सा नज़ारा

18 जनवरी 2016
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संसार में बहुत सारे ऐसे स्थल हैं जो स्वर्ग सरीखे लेकिन अति रहस्यमय औरआश्चर्यजनक हैं| ऐसे ही स्थलों में शुमार है रहस्यमय देश चीन के यून्नान प्रांत के झंगजियाजी क्षेत्र में स्थित तियांजी माउंटेन| मार्बलके पत्थरों वाला तियांजी माउंटेन ऐसा स्थल है जहां बादलों का बसेरा है| वास्तव में आस-पास मौजूदजंगल और

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नैनीताल घूमें तो शक्तिपीठ नैना देवी मंदिर का दर्शन अवश्य करें

18 जनवरी 2016
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विश्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थल सरोवर नगरी नैनीताल में यूं तो बहुत सारे पर्यटनआकर्षण हैं| लेकिन महत्वपूर्ण बात है कि इस स्थल के धार्मिक एवं पौराणिक महिमा से बहुतसारे लोग आज भी अनभिज्ञ हैं| उल्लेखनीय है कि नैनीताल अपनी प्राकृतिक सुन्दरता हीनहीं वरन देवी शक्ति के 52  शक्तिपीठ स्थलों में से भी एक पावन स्थल ह

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150 करोड़ का गांधीनगर स्थित हाईटेक 'महात्मा मंदिर'

30 जनवरी 2016
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अहमदाबाद के साबरमती आश्रम की तर्ज पर गुजरात की राजधानी गांधीनगर में नव-निर्मित“महात्मा मंदिर” भी सैलानियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। उल्लेखनीयहै कि लगभग 34 एकड़ में बना यह मंदिर करीब 150 करोड़ रुपए की लागत से बना है जिसके निर्माण मेंलगभग डेढ़ साल का वक्त लगा है। वर्ष 2012 में

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हरिद्वार का सिद्धपीठ चंडी देवी मंदिर

1 फरवरी 2016
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चंडीदेवी मंदिर देवभूमि उत्तराखण्ड की धार्मिक नगरी हरिद्वार जिसे धर्मनगरी औरकुंभनगरी भी कहते हैं में नील पर्वत के शिखर पर विराजमान है चंडी देवी मंदिर| इनदिनों यूं भी हरिद्वार में अर्ध-कुंभ मेला चल रहा है| इसलिए अगर आप अर्ध-कुंभ में हरिद्वारजा रहे हैं तो यहाँ हर की पैड़ी में पवित्र स्नान के साथ ही देवी

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जानें महिमा हरिद्वार स्थित सिद्धपीठ मां मन्शा देवी मंदिर की

2 फरवरी 2016
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देवभूमि उत्तराखंड के धार्मिक शहर हरिद्वार मेंइस समय अर्धकुंभ का मेला चल रहा है| अर्धकुंभ में अगर आप भी हरिद्वार जाने वाले हैंतो हर की पैड़ी में गंगा स्नान एवं आरती के साथ ही यहाँ मां मन्शा देवी मंदिर कापावन दर्शन करने भी अवश्य जाइए जहां निश्चय ही आपको आध्यात्मिक शांति मिलेगी|बिल्व पर्वत पर विराजमान ह

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भारतीय व्यंजनों का सफ़र / प्रस्तावना

12 अप्रैल 2016
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आहार मानव-जाति की मूलभूत आवश्यकता है | यह संस्कृति की सबसे अधिक महत्वपूर्ण पहचान है, जो भौतिक सुखों की सबसे आदिम अवस्था भी है | आहार के संबंध में भारतीयों की एक खास पहचान है | संसार के भिन्न-भिन्न लोगों की पसंद के सम्बन्ध में भारतीय व्यंजनों का वैसे भी कोई जोड़ नहीं है | संसार का शायद ही ऐसा कोई देश

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भारतीय व्यंजनों का सफ़र / सिक्किम के व्यंजन

12 अप्रैल 2016
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पहाड़ी राज्य सिक्किम अपने विशिष्ट प्रकार के व्यंजनों के लिए जाना जाता है | सिक्किमी व्यंजन अत्यंत अनोखे व्यंजन हैं क्योंकि इन व्यंजनों में न केवल भारत के अन्य राज्यों का अभूतपूर्व मेल दिखाई पड़ता है बल्कि पड़ोस के अन्य देशों के विविध व्यंजनों की छाप भी सामान्य रूप से मिलती है | भारतीय पाक कला शैली से त

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भारतीय व्यंजनों का सफ़र / लज़ीज़ शाकाहारी सिक्किमी-मोमोज बनाने की विधि

12 अप्रैल 2016
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सामग्री : मोमोज के लिए (200 ग्राम मैदा, 1 टेबल-स्पून घी या तेल, 1/5 टी-स्पून बेकिंग पाउडर, नमक स्वादानुसार), भरावन के लिए (2 प्याज, 8 कली लहसुन, 2 शिमला मिर्च, 1 टेबल-स्पून बंदगोभी, 2 गाजर, कद्दूकस की हुई आधा कटोरी हरी मटर, 100 ग्राम पनीर, 1 टेबल-स्पून घी या तेल, 1/4 स्पून काली मिर्च, 1 चुटकी लाल मि

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मरुस्थल में नखलिस्तान है माउंट आबू जो राजस्थान का इकलौता हिल स्टेशन है

27 अप्रैल 2016
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गर्मियों के दिनों में राजस्थान घूमने की बात करें तो आप जरूर हसेंगे कि गर्मी में पहाड़ के बजाय मरुस्थल की बात करने वाला शख्स शायद बावला है| लेकिन यह बात बिल्कुल दुरुस्त है क्योंकि राजस्थान में भी अरावली पर्वतों की गोद में एक बेहद लोकप्रिय पहाड़ी शहर ( हिल स्टेशन ) बसा है जिसे राजस्थान के इकलौते हिल स्ट

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