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कतर्नियाघाट वन्य-जीव अभ्यारण्य : अद्भुत एवं अभिनव आकर्षण

8 अक्टूबर 2015

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अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय परन्तु अद्भुत एवं अभिनव पर्यटन आकर्षण यह वन्य-जीव अभ्यारण्य उत्तर प्रदेश के बहराइच जनपद के तराई क्षेत्र में नेपाल सीमा के समीप स्थित है, जो दुधवा टाइगर रिज़र्व का एक हिस्सा है| 


३१ मई, १९७६ में स्थापित इस अभ्यारण्य को ६ प्रखंडों में बांटा गया है| ४ प्रखंड कतर्निया, निशानगारा, मुर्थिया और धर्मपुर अभ्यारण्य के कोर (ह्रदय-स्थल) जबकि बाकी के २ प्रखंड बफर (ह्रदय-स्थल के चारों ओर) क्षेत्र में स्थित हैं, जहां थारू जन-जातीय लोग निवास करते हैं| कतर्नियाघाट नेपाल स्थित बार्दिया राष्ट्रीय पार्क के सीमा-क्षेत्र से भी जुड़ा है| गिरवा और कोडिआला नदियाँ, जो आपस में जुडती हैं और बाद में घाघरा नदी के नाम से जानी जाती हैं, इस अभ्यारण्य से होकर गुजरती हैं| वन्य-जीव संरक्षा अधिनियम, १९७२ और उत्तर प्रदेश वन्य-जीव संरक्षा नियम, १९७४ जनपद में लागू है, जिसके तहत् यहाँ के सभी जीव-जंतु एवं पक्षिओं के पकड़ने एवं शिकार पर पूर्ण प्रतिबन्ध है| 

यहाँ पाए जाने वाले जंतुओं में बाघ, चीता, स्वाम्प डियर, चीतल, कांकर, उड़ने वाली गिलहरी, नीला सांड (गवल), सांभर, कला छेला (ब्लैक बक), भौकने वाला हिरन, जंगली सूअर, गीदड़, भालू, हिरन, गैंडा, हाथी, ४ सींगों वाला एंटीलोप, भारतीय चिंकारा, जंगली मुर्गा इत्यादि प्रमुखता से शामिल हैं| बाघों की आबादी के ताज़ा रिपोर्ट (२०११) के अनुसार अभ्यारण्य एवं इसके आस-पास के क्षेत्रों (भारत-नेपाल) में बाघों की संख्या भी बढ़ रही है| वहीं यहाँ के जलीय जंतुओं में डॉल्फिन, मगरमच्छ, घड़ियाल, मछलियाँ- रोहू, भाकुर, परहिन, नइन, टोंगन, बेलगागरा, करोंच इत्यादि, कछुवे, अजगर, उदबिलाव के नाम प्रमुखता से लिए जा सकते हैं| 

उल्लेखनीय है कि कतर्नियाघाट स्थित क्रोकोडाईल फार्म की स्थापना १९७२ में हुई थी| पूर्व में, मगरमच्छों की संख्या बढ़ाने एवं इनके संरक्षण हेतु यहाँ कृत्रिम मगरमच्छ प्रजनन प्रक्रिया अपनाई जाती थी, जो अब प्राकृतिक उत्पत्ति में परिवर्तित हो चुकी है| भारत में जल के समीप लगभग १३०० पक्षिओं की प्रजातियां पायी जाती हैं, जिसमें से ३५० प्रजातियाँ अपने प्राकृतिक आवास की उपलब्धता के कारण कतर्नियाघाट अभ्यारण्य में सहज ही देखी जा सकती हैं| 

प्रवासी पक्षी (लाल कलगी वाला बुडार, लाल बत्तख, खाचैंचा) जाड़े में यहाँ कुछ दिन ठहरते हैं और बाद में अपने अगले गंतव्य की ओर उड़ जाते हैं| वहीं यहाँ पाए जाने वाले अन्य पक्षिओं में भारतीय जल-कौवा, डार्टर, ग्रे-हेरॉन, पेंटेड स्टोर्क, ऊनी गर्दन वाला स्टोर्क (चमरघेंच), काला बुज्जा, स्पूनबिल, एशियन ओपनबिल, चैती, नार्दर्न पिनतैन, नदी टिटहरी, ब्लैक विन्ग्द स्टिल्ट, कामन कूट, पाईड किंगफ़िशर एवं वाइट थ्रोटेड किंगफ़िशर प्रमुख हैं| जबकि पेड़ों पर पाए जाने वाले पक्षियों में शिकरा, लाल सिर वाला गिद्ध, भस्मवर्णीय गिद्ध, लम्बा गिद्ध, वाइट रम्पड राकेट टेल्ड ड्रोंगो, कला छात्र वाला पीलक, ग्रीन बी-ईटर एवं स्टोर्क बिल्ड किंगफ़िशर के नाम विशेष रूप से गिनाये जा सकते हैं| साथ ही, घास के मैदानों में पाए जाने वाले जंतुओं विशेष कर पैडीफिल्ड पिपिट (चचरी), ब्लैक फ्रैंकोलिन, ग्रे फ्रेंकोलिन, स्वाम्प फ्रेंकोलिन, यूरेशियन थिक-नी, बेंगाल फ्लोरिकन, वाइट वाग्टेल एवं लाल जंगली मुर्गे को देखने का आनंद ही कुछ और है|

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स्थिति एवं दूरी: उत्तर प्रदेश के बहराइच जनपद के जिला-मुख्यालय बहराइच शहर से सड़क द्वारा ८६ किलोमीटर एवं रेल द्वारा १०५ किलोमीटर तथा नेपाल सीमा से लगभग ७ किलोमीटर एवं लखनऊ से २०५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित| मुख्य निकटतम मार्केट- बिछिया बाज़ार (६ किलोमीटर दूर)|

भ्रमण हेतु आदर्श मौसम: १५ नवम्बर – १५ जून

खुलने की समयावधि: सूर्योदय से सूर्यास्त|

मुख्य आकर्षण: प्राकृतिक सौंदर्य एवं वन्य-जीव विशेष कर मगरमच्छ, घड़ियाल तथा डाल्फिन| साथ ही पर्यटकों के लिए उपलब्ध हाथी एवं नाव-सवारी सेवा|

उपलब्ध सुविधाएँ: रहन-सहन हेतु किचन की सुविधायुक्त थारू हट एवं फ़ॉरेस्ट रेस्ट हाउस|

कैसे पहुंचें?

  • सड़क – लखनऊ से बहराइच होते हुए बिछिया बाज़ार|
  • रेल – पूर्वोत्तर रेलवे के गोंडा-बहराइच रेल खंड (मीटर गेज़) पर स्थित बिछिया यहाँ का निकटतम रेलवे स्टेशन है, जबकि यहाँ का मुख्य निकटतम रेलवे जंक्शन गोंडा है, जो लखनऊ-गोरखपुर मुख्या रेल मार्ग पर अवस्थित है|
  • वायु – यहाँ का निकटस्थ एअरपोर्ट लखनऊ में अमौसी स्थित चौधरी चरण सिंह एअरपोर्ट है (दूरी : २१० किलोमीटर)
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रचनाएँ
tourism
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क्या कभी आपको भी ऐसा लगता है कि कुछ दिनों के लिए सब कुछ छोड़-छाड़कर एकांत में हिमालय या सागर किनारे बहुत दूर निकल जाएँ ??? क्या यह पलायन है अथवा पुन्हः ऊर्जा की अवस्थापना ???

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काठगोदाम से लगभग 78 किलोमीटर,नैनीताल से लगभग 55 किलोमीटर और अल्मोड़ा से लगभग 40 किलोमीटर दूरस्थित अल्मोड़ा जिले में स्थित हिल स्टेशन रानीखेत की नीरव सुन्दरता हर किसी को यहाँसहज ही खींच लाती है| कुमाऊँ रेजिमेंटल के मुख्यालय रानीखेत के प्राकृतिक गोल्फकोर्स को यूं तो आपने विवाह जैसी बहुत सारी फिल्मों में

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कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व स्थित गर्जिया माता मंदिर की महिमा

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देवीदुर्गा का अन्य प्रतिरूप मां गर्जिया का यह पवित्र मंदिर विश्वप्रसिद्ध कॉर्बेटटाइगर रिज़र्व के मनोरम वन्य-क्षेत्र में स्थित है | कॉर्बेट का प्रवेश-द्वार रामनगरक़स्बा जो नैनीताल जनपद का हिस्सा है से इस मंदिर की दूरी लगभग 10 किलोमीटर है | उल्लेखनीयहै कि नैनीताल से लगभग 63 किलोमीटर दूर रामनगर से कॉर्बे

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पहाड़-बादलों के मिलन से दिखता है यहाँ स्वर्ग सा नज़ारा

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संसार में बहुत सारे ऐसे स्थल हैं जो स्वर्ग सरीखे लेकिन अति रहस्यमय औरआश्चर्यजनक हैं| ऐसे ही स्थलों में शुमार है रहस्यमय देश चीन के यून्नान प्रांत के झंगजियाजी क्षेत्र में स्थित तियांजी माउंटेन| मार्बलके पत्थरों वाला तियांजी माउंटेन ऐसा स्थल है जहां बादलों का बसेरा है| वास्तव में आस-पास मौजूदजंगल और

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नैनीताल घूमें तो शक्तिपीठ नैना देवी मंदिर का दर्शन अवश्य करें

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विश्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थल सरोवर नगरी नैनीताल में यूं तो बहुत सारे पर्यटनआकर्षण हैं| लेकिन महत्वपूर्ण बात है कि इस स्थल के धार्मिक एवं पौराणिक महिमा से बहुतसारे लोग आज भी अनभिज्ञ हैं| उल्लेखनीय है कि नैनीताल अपनी प्राकृतिक सुन्दरता हीनहीं वरन देवी शक्ति के 52  शक्तिपीठ स्थलों में से भी एक पावन स्थल ह

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150 करोड़ का गांधीनगर स्थित हाईटेक 'महात्मा मंदिर'

30 जनवरी 2016
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अहमदाबाद के साबरमती आश्रम की तर्ज पर गुजरात की राजधानी गांधीनगर में नव-निर्मित“महात्मा मंदिर” भी सैलानियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। उल्लेखनीयहै कि लगभग 34 एकड़ में बना यह मंदिर करीब 150 करोड़ रुपए की लागत से बना है जिसके निर्माण मेंलगभग डेढ़ साल का वक्त लगा है। वर्ष 2012 में

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हरिद्वार का सिद्धपीठ चंडी देवी मंदिर

1 फरवरी 2016
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चंडीदेवी मंदिर देवभूमि उत्तराखण्ड की धार्मिक नगरी हरिद्वार जिसे धर्मनगरी औरकुंभनगरी भी कहते हैं में नील पर्वत के शिखर पर विराजमान है चंडी देवी मंदिर| इनदिनों यूं भी हरिद्वार में अर्ध-कुंभ मेला चल रहा है| इसलिए अगर आप अर्ध-कुंभ में हरिद्वारजा रहे हैं तो यहाँ हर की पैड़ी में पवित्र स्नान के साथ ही देवी

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जानें महिमा हरिद्वार स्थित सिद्धपीठ मां मन्शा देवी मंदिर की

2 फरवरी 2016
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देवभूमि उत्तराखंड के धार्मिक शहर हरिद्वार मेंइस समय अर्धकुंभ का मेला चल रहा है| अर्धकुंभ में अगर आप भी हरिद्वार जाने वाले हैंतो हर की पैड़ी में गंगा स्नान एवं आरती के साथ ही यहाँ मां मन्शा देवी मंदिर कापावन दर्शन करने भी अवश्य जाइए जहां निश्चय ही आपको आध्यात्मिक शांति मिलेगी|बिल्व पर्वत पर विराजमान ह

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भारतीय व्यंजनों का सफ़र / प्रस्तावना

12 अप्रैल 2016
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आहार मानव-जाति की मूलभूत आवश्यकता है | यह संस्कृति की सबसे अधिक महत्वपूर्ण पहचान है, जो भौतिक सुखों की सबसे आदिम अवस्था भी है | आहार के संबंध में भारतीयों की एक खास पहचान है | संसार के भिन्न-भिन्न लोगों की पसंद के सम्बन्ध में भारतीय व्यंजनों का वैसे भी कोई जोड़ नहीं है | संसार का शायद ही ऐसा कोई देश

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भारतीय व्यंजनों का सफ़र / सिक्किम के व्यंजन

12 अप्रैल 2016
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पहाड़ी राज्य सिक्किम अपने विशिष्ट प्रकार के व्यंजनों के लिए जाना जाता है | सिक्किमी व्यंजन अत्यंत अनोखे व्यंजन हैं क्योंकि इन व्यंजनों में न केवल भारत के अन्य राज्यों का अभूतपूर्व मेल दिखाई पड़ता है बल्कि पड़ोस के अन्य देशों के विविध व्यंजनों की छाप भी सामान्य रूप से मिलती है | भारतीय पाक कला शैली से त

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भारतीय व्यंजनों का सफ़र / लज़ीज़ शाकाहारी सिक्किमी-मोमोज बनाने की विधि

12 अप्रैल 2016
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सामग्री : मोमोज के लिए (200 ग्राम मैदा, 1 टेबल-स्पून घी या तेल, 1/5 टी-स्पून बेकिंग पाउडर, नमक स्वादानुसार), भरावन के लिए (2 प्याज, 8 कली लहसुन, 2 शिमला मिर्च, 1 टेबल-स्पून बंदगोभी, 2 गाजर, कद्दूकस की हुई आधा कटोरी हरी मटर, 100 ग्राम पनीर, 1 टेबल-स्पून घी या तेल, 1/4 स्पून काली मिर्च, 1 चुटकी लाल मि

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मरुस्थल में नखलिस्तान है माउंट आबू जो राजस्थान का इकलौता हिल स्टेशन है

27 अप्रैल 2016
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गर्मियों के दिनों में राजस्थान घूमने की बात करें तो आप जरूर हसेंगे कि गर्मी में पहाड़ के बजाय मरुस्थल की बात करने वाला शख्स शायद बावला है| लेकिन यह बात बिल्कुल दुरुस्त है क्योंकि राजस्थान में भी अरावली पर्वतों की गोद में एक बेहद लोकप्रिय पहाड़ी शहर ( हिल स्टेशन ) बसा है जिसे राजस्थान के इकलौते हिल स्ट

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