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बयार

5 जून 2016

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संयम का वरदान लिये और लज्जा की मुसकान लिये

अन्तर में मनुहार लिये वो करती हास विलास है |

भोलेपन के मधुर हास में ओ राही तू खो ना जाना

बौराई सी मृदु चितवन में खिला हुआ मधुमास है ||


प्रायः यह विषय सदा से ही गरमा गरम बहस का विषय रहा है कि स्त्री और पुरुष में कौन अधिक शक्तिशाली है | लेखक होने के साथ साथ एक नारी संगठन से जुड़ी होने के नाते मेरे लिये भी यह विषय उतना ही आकर्षक है | यह सार्वभौम सत्य है कि स्त्री सदा से ही पुरुष की अपेक्षा अधिक शक्तिशाली है | वास्तव में तो पुरुष की समस्त शक्ति नारी रूपा ही है क्योंकि शक्ति स्त्री तत्व है | किन्तु स्त्री का बल उसकी कोमलता में होता है | जब भी वह पुरुष के सामान बलशाली अथवा कठोर बनने का प्रयास करेगी, कुछ न कुछ अमूल्य गँवा देगी | स्त्री में स्त्रीत्व का ही बल और साहस होना चाहिये | यदि स्त्री अपने विचित्र बल और साहस को पहचान जाए तो संसार का कोई पुरुष उसके साथ कुछ अनुचित करने का साहस कर ही नहीं सकता | किन्तु प्रश्न उत्पन्न होता है कि स्त्री में आख़िर ऐसा क्या होता है जो पुरुष को उससे डरने के लिये विवश करता है ? उत्तर बिल्कुल सीधा सा है | वो गुण है स्त्री का स्त्रीत्व | पुरुष बिना रुके कितनी भी देर तक बहस कर सकता है, किन्तु अधिकाँश में जीत अन्त में स्त्री की ही होती है, भले ही वह उचित तर्क न प्रस्तुत कर सके | लाओत्से और उनके स्त्रीत्व से सम्बन्धित सिद्धान्त के विषय में चर्चा करते हुए ओशो ने स्पष्ट किया था स्त्री स्वभावतः कोमल होने के कारण विजयी होती है | वह कभी झगड़ा नहीं करती, झगड़ने का प्रयास भर करती है और उसकी लड़ाई अप्रत्यक्ष किन्तु दृढ़ होती है | यदि वह किसी बात को नकारना चाहेगी तो मुँह से तो हाँकहेगी, किन्तु उसका रोम रोम, उसकी हर क्रिया प्रतिक्रियानहींकह रहे होंगे | जिसमें इतनी अधिक गहराई हो उसे तुम किस प्रकार परस्त कर सकते हो ? यदि तुम स्त्री से प्रेम करते हो तो तुम्हारी पराजय निश्चित है | और देखा जाए तो यह अच्छी बात ही है कि कठोरता परस्त हो जाए और कोमलता विजयी हो जाए | क्योंकि दुष्टों पर विजय प्राप्त करने का यही एकमात्र उपाय है |”


भारतवर्ष में तो ईश्वर को भी अधिकाँश में मातृशक्ति के रूप में पूजा जाता है | चाहे वह माँ दुर्गा हों, सरस्वती हों, लक्ष्मी हों, यहाँ तक कि जो पुरुष देवता हैं उनकी उपासना के लिये भी उनकी नारी शक्ति का साथ में होना आवश्यक है, अन्यथा पूजा अधूरी मानी जाती है | संसार में अच्छे कार्य करने के लिये नारी के जैसी कोमलता आवश्यक है | इसलिये भारत में मातृशक्ति की उपासना एक अच्छी प्रक्रिया है | ईश्वर का प्रयास होता है हमें अपने नज़दीक बुलाने का, और इसीलिये वह एक रहस्यमयी सुगंध के रूप में सदा हमारे साथ चलता रहता है | अपने भीतर गहरे उतर कर ही उस सुगन्धित पुष्प का अनुभव किया जा सकता है | यह स्त्रीत्व नहीं तो और क्या है ? जितने भी ज्ञानी महापुरुष हुए हैं गौतम बुद्ध और महावीर के उदाहरण लिये जा सकते हैं सभी में स्त्री की गरिमा विद्यमान थी | यहाँ तक कि भगवान राम में भी स्त्री की कोमलता और मधुरता थी | भगवान कृष्ण में स्त्री और पुरुष शक्तियों का बहुत अच्छा सम्मिश्रण था | और भगवान शिव तो हैं ही अर्धनारीश्वर | इन सभी में स्त्री की वह गरिमा, मधुरता, प्रेम, और स्त्री शक्ति का वह रहस्य निहित है जो संसार के किसी भी अलैक्जैंडर अथवा नेपोलियन में नहीं था | यही कारण है कि मानवता पर इनका विस्तृत प्रभाव है | मानवता उनके समक्ष श्रद्धानत होती है | जबकि संसार पर विजय प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले सारे अलैक्जैंडर बुरी तरह असफल होते हैं पराजित होते हैं | पुरुष शक्ति में उग्रता है इसलिये उसके समक्ष श्रद्धानत होने के स्थान पर उससे भयभीत हुआ जा सकता है | जबकि स्त्री शक्ति में दुर्गा भवानी की उग्रता होते हुए भी प्रेम और भावुकता की अधिकता होती है, इसीलिये वह अपनी ओर आकर्षित करती है और मानवता स्वतः ही उसके समक्ष श्रद्धानत हो जाती है | पौरुष कड़क होता है इसलिये दुर्बल होता है | टूट सकता है, झुक नहीं सकता | एडजस्ट नहीं कर सकता | हर हाल में बस तना रहना चाहता है | तो टूटना तो लाज़मी है | उसका अहम् इतना प्रबल होता है कि किसी भी प्रकार के समझौते के लिये वहाँ स्थान नहीं होता | जबकि मार्ग बस दो ही हैं या तो टूट जाओ या झुक जाओ | स्त्रीत्व में लचीलेपन की शक्ति होती है क्योंकि वह प्रत्येक परिस्थति में स्वयं को ढाल सकती है | जिसका सबसे प्रबल उदाहरण यही है कि विवाह के बाद लड़की पूर्ण रूप से अपरिचित एवं नवीन परिवेश में आती है और स्वयं को उसके अनुरूप बना लेती है | स्त्री की यही समझौतेवादी प्रकृति उसे शाश्वत बनाती है | ऐसी है मेरी यह बयार”, जो सम्भव है आपको यत्र तत्र सर्वत्र देखने को मिल जाए |


तो आइये और बह जाइए मेरी इस बयारके प्रवाह में उन्मुक्त भाव से, जिसे प्रकाशित किया है एशिया पब्लिशर्स, ए ३६, चेतक अपार्टमेंट्स, सेक्टर ९, रोहिणी, दिल्ली-८५ ने

 
योगिता वार्डे ( खत्री )

योगिता वार्डे ( खत्री )

क्या बात है पूर्णिमा जी बहुत सुन्दर लिखा है आपने ... मेने आपका पहला लेख पड़ा है शब्दनगरी पर .. पर मैं तो आपकी फैन हो गई हूँ , और बयार को जल्दी ही पड़ना पड़ेगा ...बहुत बहुत धन्यवाद !

6 जून 2016

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रचनाएँ
katyayanipurnima
0.0
"जीवन के अद्भुत रंगों में रंगी हुई मेरी बातें, मुझसे मेरा ही परिचय करवाती हैं मेरी बातें" <p class="MsoNormal" style="text-align:justify;mso-layout-grid-align:none; text-autospace:none"><span style="font-family:&quot;Mangal&quot;,&quot;serif&quot;; color:black" lang="HI"> ४ जुलाई १९५५ को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में जन्म <span style="font-family:&quot;Mangal&quot;,&quot;serif&quot;;mso-bidi-font-family:&quot;Times New Roman&quot;; color:black">|<span style="font-family:&quot;Mangal&quot;,&quot;serif&quot;; color:black" lang="HI"> शिक्षा दीक्षा उत्तर प्रदेश के ही जिला बिजनौर के नजीबाबाद में सम्पन्न <span style="font-family:&quot;Mangal&quot;,&quot;serif&quot;;mso-bidi-font-family: &quot;Times New Roman&quot;;color:black">|<span style="font-family:&quot;Mangal&quot;,&quot;serif&quot;; color:black" lang="HI"> बचपन से ही लेखन<span style="font-family:&quot;Mangal&quot;,&quot;serif&quot;; mso-bidi-font-family:&quot;Times New Roman&quot;;color:black">, कथक और शास्त्रीय गायन में गहन रूचि <span style="font-family:&quot;Mangal&quot;,&quot;serif&quot;;mso-bidi-font-family: &quot;Times New Roman&quot;;color:black">|<span style="font-family:&quot;Mangal&quot;,&quot;serif&quot;;mso-bidi-font-family: &quot;Times New Roman&quot;;color:black"> <p class="MsoNormal" style="text-align:justify;mso-layout-grid-align:none; text-autospace:none"><span style="font-family:&quot;Mangal&quot;,&quot;serif&quot;; color:black" lang="HI"> १९७५ में संस्कृत में एम. ए. <span style="font-family:&quot;Mangal&quot;,&quot;serif&quot;; mso-bidi-font-family:&quot;Times New Roman&quot;;color:black">| १९७७ से आकाशवाणी नजीबाबाद से उदघोषण<span style="font-family:&quot;
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है तभी तो फूल जग सर चढ़ रहा

1 जून 2016
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शुभ प्रभात

2 जून 2016
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जैसे हमारे विचार होते हैं वैसा ही हमारा व्यक्तित्व बनता है सभी मित्रों को आज का शुभ प्रभात

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किसने हाहाकार दिया

2 जून 2016
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प्रताड़ना

4 जून 2016
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शुभ प्रभात

5 जून 2016
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बयार

5 जून 2016
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शुभ प्रभात

6 जून 2016
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मैं एक हूँ

6 जून 2016
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शुभ प्रभात

7 जून 2016
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शुभ प्रभात

8 जून 2016
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वैदिक काल में पर्यावरण सुरक्षा तथा वृक्षारोपण की वैज्ञानिकता

8 जून 2016
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शुभ प्रभात

9 जून 2016
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सभी मित्रों को आज का शुभ प्रभात

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मैं तो हार कभी ना मानूँ

9 जून 2016
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शुभ प्रभात

10 जून 2016
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माँ

10 जून 2016
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ये बरखा का मौसम

11 जून 2016
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मैं करती हूँ नृत्य

11 जून 2016
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मैं बन जाना चाहती हूँ तुम्हारी आँखें

12 जून 2016
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शुभ प्रभात

13 जून 2016
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गन्ध तेरे प्यासे हाथों की

13 जून 2016
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ज़िन्दगी को तपा लिया मैंने

15 जून 2016
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मानव मन की नौका को तुम ज़रा संभाले रखना

16 जून 2016
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कितनी दूर अभी जाना है

18 जून 2016
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तुम क्या समझो तुम क्या जानो

19 जून 2016
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काश कि बचपन एक बार फिर अपना रंग दिखा जाता

20 जून 2016
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बच्चों जैसी भोली माँ तू

21 जून 2016
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अपना क्या है

22 जून 2016
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पुष्प का सौरभ मुझे दो

23 जून 2016
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शुभ प्रभात

24 जून 2016
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सभी मित्रों को आज का शुभ प्रभात

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फिर भी हँसता रहता है

24 जून 2016
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यों ही मुसकाते रहना

25 जून 2016
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शुभ प्रभात

29 जून 2016
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0

सभी मित्रों को आज का शुभ प्रभात

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परिचय की यह शाश्वत परिणति

2 जुलाई 2016
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मैं तो हूँ शाश्वत सत्य सदा

6 जुलाई 2016
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अर्थों को सार्थकता दे दें

7 जुलाई 2016
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पा ही जाएँगे मंज़िल को

9 जुलाई 2016
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 आपसमें हम रूठ गए जो, हाथ हमारे छूट गए जो । ऐसेमें अब तुम ही बोलो, कौन मनाएगा फिर किसको ।|अहम् तुम्हारा बहुत बड़ा है, मुझमेंभी कुछ मान भरा है । नहींबढ़ेंगे आगे जो हम, कौन भगाएगा इस "मैं" को ।।जीवन पथ है संकरीला सा, ऊबड़खाबड़ और सूना सा । चलेअकेले, कोई आकर राह दिखाएगा फिर किसको ||यों ही रूठे रहे अगर हम,

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शुभ प्रभात

10 जुलाई 2016
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सभी मित्रों को आज का शुभ प्रभात

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लहराती ये पड़ीं फुहारें

12 जुलाई 2016
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स्वामी वेदभारती जी

13 जुलाई 2016
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ये बरखा का मौसम सजीला सजीला

15 जुलाई 2016
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मैं सदा शून्य का ध्यान किया करती हूँ

17 जुलाई 2016
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हीरे से दमकती ये बरखा की बूँदें

30 जुलाई 2016
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 आजफिर से बारिश का दिन है |रतभर भी छाए रहे बादल औरहलकी हलकी बूँदें भिगोतीरहीं धरा बावली को नेह के रस में |बरखाकी इस भीगी रुत में पेड़ोंकी हरी हरी पत्तियों पुष्पोंसे लदी टहनियों केमध्य से झाँकता सवेरे का सूरज बिखराताहै लाल गुलाबी प्रकाश इस धरा पर |मस्तीमें मधुर स्वरों में गान करते पंछी बुलातेहैं एक दू

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बादल

31 जुलाई 2016
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रक्तबीज के जैसे दानव

2 अगस्त 2016
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आओ मिलकर ऊँची पेंग बढ़ाएं

5 अगस्त 2016
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अपरिचित, किन्तु परिचित बनी ऊर्जा

9 अगस्त 2016
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प्रकृति भी दुल्हिन बन शरमाई

10 अगस्त 2016
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