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और मैं बुझती गई

30 नवम्बर 2021

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वो   आग   बनकर मेरे दिल  को  जलाते   रहे
                  मैं.....सुलगती    रही

वो    कहकहे   ......लगाते    रहे
                  मैं..... रोती    रही

वो    नश्तर    चुभोते    ....गए
                   मैं    कराहती..रही

वो   शोला   बनकर  जलाते  .... रहे
                   मैं    राख.....बनकर    बुझती   गई
                                           
                                                बुझती   गई

                                                        बुझती  गई

स्वरचित मौलिक रचना

           अनीता   अरोड़ा

                          
    

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