16 अगस्त 2018 पूर्व स्वर्गीय प्रधान मंत्री अटल बिहारी बाजपेयी जीको ‘भाव भीनी श्रद्धांजली’ डॉ शोभा भारद्वाज स्वर्गीय प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू ने संसद में अटल जी के पहले भाषण पर अपनी प्रतिक्रियादेते हुए कहा था एक दिन अटल देश के प्रधान मंत्री पद पर पहुंचेगे |श्री अटल जी एक ऐसे प्रधा
एक पेड़ पर बैठा मुर्ग़ा, कुकडूँ-कूँ कर रहा था।वर्षात होने पर भी, उष्ण गर्मी से मर रहा था।मैंने पूछा अरे!भाई, इतना क्यों कर रहे हो शोर।मुर्गा कुकडूँ-कूँ करते हुए, बोल पड़ा बहुत ज़ोर।ए
जब लोग बसे हो आंखों में, खोज लेंगे उन्हें लाखों में। जब नही बसें है आंखों में, क्या ख़ाक खोजेंगे लाखो में?
सनातनी विधाता छन्द===============================१२२२ १२२२ १२२२ १२२२नज़ारे देखकर सावन बरसने मेघ आते हैं lशराफ़त देखकर उनकी तड़पते लोग जाते हैंllइमारत यह खड़ी कैसे पसीनें खून हैं उनके ,कयामत देखती दुनियाँ शराफ़त भूल जाते हैंllनज़ाकत वक्त का देखो कहर ढाते रहे नित दिन,तवायफ़ बन लुटी शबनम ग़रीबी को भुना
मापनी--- १२२, १२२, १२२, १२२बसे आँख में श्याम सुंदर हमारेl सखी प्रीति पावन समुंदर सहारेl बसाया हिए ज्ञान गीता विधाता- सुधा सार संसार अंदर तुम्हारेl राजकिशोर मिश्र'राज' प्रतापगढ़ी
आँख में उम्र कैद बल्ब की रोशनी लकड़ी की मेज मे पड़ रही थी, मेज के ऊपर एक किताब जिसके मुख्यप्रष्ठ मे उभरता शब्द शहर की तरफ ले गया शहर नदी के किनारे बसा परछाई को उसके पानी मे पाता हैं| दिन की रोशनी और रात की रोशनी मे अलग-अलग दिखता| इन दोनों की परछाई मे एक बस्ती शामिल थी जिसकी परछाई नदी मे डूबी रहती|
आँखों की कमजोरी का इलाजआँखे हमारे शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। ये हमारे शरीर सबसे संवेदनशील अंग हैं। आँखों का कमजोर होना आजकल आम बात हो गई। हर व्यक्ति,बच्चा दिनभर फोन,टीबी,कम्पूयटर और टैबलेट में आंखे गढ़ाए रहता हैं। बालों में कलरऔर तरह-तरह के एक्सपेरिमेंट करना। अनियमित जिवनशैली। तनाव भरा
वृद्ध दंपति द्वारा आत्महत्या... दुर्भाग्यपूर्ण घटना –हल्द्वानी...2018…( भाव= काल्पनिक )जैसे-जैसे आज शाम ढलने लगी, रोज़ की तरह दीपक की, लौजलने लगी,पत्नी की एकटक आँखें, डब- डबा रही थी,घर की एक-एक चीज़, आँखों में उतर-आ रही थी, दोनों नेमिलकर जाने कैसा , अभागा निर्णयले लिया,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैदेखना है ज़ोर कितना बाज़ुए-क़ातिल में हैवक़्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमाँहम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में हैसरफ़रोशी की...देख फाँसी का ये फंदा ख़ौफ़ से है काँपताउफ़्फ़ कि जल्लादों की हालत भी बड़ी मुश्किल में हैनर्म स्याही से लिखे शेरों की बातें चुक गईंइ