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💫उठ जाग मुसाफिर भोर भई 💫

3 अक्टूबर 2021

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😊उठ जाग मुसाफिर भोर भई,
अब रैन कहाँ जो सोवत है।
टुक नींद से अँखियाँ खोल जरा,
प्रभु जागत है तू सोवत है?💥
💥
सूरज की किरणों से बेला
ये सुप्रभात की आई है.
ये हरी भरी बसुंधरा,
आसमां को देख मुस्काई है।😄
🎄
कलरव करते उड़ते पंछी,
दूर गगन  सैर को जाते हैं।
पाकर  मदहोश हवा ठंडी,
अपना संगीत सुनाते हैं।💫

डाली डाली फूलों की ये
मस्ती में जा लहराई है।
पाकर के साथ एक दूजे का,
हर ओर सुगंध बिखराई है।💫
🎄
क्यों आलस में पड़कर के तू,
ये ओढ़ बिछोना सोता है।
क्यों प्रकृति की अनुपम भेंट,
ये लेने से तू खोता है।😔
🎄
उठकर के रोज सवेरे से,
ये रूठा  भाग्य मना ले तू।
आकर के गोद में प्रकृति के,
खुद को भी थोड़ा हँसा ले तू।😄
🎄
तू एक मुसाफिर इस जग का,
इक दिन यहाँ से  चले जाना है।
कर कुछ ऐसी नेकी बंदे
पहचान छोड़ कर जाना  है। 💥

@ vineetakrishna 

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