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मानवीय पूँजी

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जीवन से बड़ी पूंजी संसार में कुछ नहीं इसलिए कहते हैं सुबह सुर्योदय से पहले उठ सुबह की ताज़ा हवा खाओ... क्योंकि वही सबसे फायदेमंद है जड़ीबूटी जो शरीर को रखें चुस्त दुरुस्त... मानती हूं सुख साधन आज के य

हर इंसान अपनी आजिविका को चलाने के लिये नित्य निरन्तर कठोर परिश्रम कर धनोपर्जन करता है | व अपने परिवार के भरण पोषण के लिये हर रोज कुछ ना कुछ करता ही रहता है | ताकि उसका परिवार खुशहाल रहे | किंतु जो इंस

मानवीय पूँजी क्या है? मानव पूंजी शब्द एक कार्यकर्ता के अनुभव और कौशल के आर्थिक मूल्य को दर्शाता है। मानव पूंजी में शिक्षा, प्रशिक्षण, बुद्धि, कौशल, स्वास्थ्य, और अन्य चीजें जैसे  वफादारी और समय की पा

ईसानियत है सबसे बढ़कर मानवीय पूंजी,इस बात पे शायद सभी होंगे मेरे साथ राज़ी।

मानव एक संसाधन है । एक ऐसी पूंजी  जिसके हाथों ने सदियों से इस सृष्टि को अथक रूप से निरंतर गढ़ा है । सृजन से लेकर विनाश तक अनेकों बार सृष्टि के खेल को देखते ,समझते और सहेजते मानव ने आज वो मुकाम हास

Hello friends मानव का व्यवहार ही मानव केआदर्शों को झलकाता है , मानवता का संचालन करने वाला ही , सबसे महान कहलाता है ।सबसे बोलो मीठे बोल और ,मन में रखो अच्छे भाव ,शब्दों के स्वाद को

हमारी मानवीय पूंजी शिक्षा, प्रशिक्षण, बुद्धि, कौशल, स्वास्थ्य और अनुभव होती है। इसी आधार पर किसी भी संगठन या संस्थान में हमारी सेवाओं के बदले हमारा पारिश्रमिक और भूमिका का निर्धारण होता है। यह मानवीय

इंसान को जीवन दिया,भगवन ने कर्म करने वास्ते।कर्म करो तुम कर्म करो,मंजिल तय करने के रास्ते।।इंसान को समझाया भगवन ने,सही गलत तय करने के रास्ते।बुद्धि और विवेक प्रशस्त कर,तू बंदे अपने जीवन के वास्ते।।कर्

मानवीय पूँजी ,तो हैं मनुष्य के संस्कार,उसके आचार,विचार ,उसका व्यवहार ,यही असली पूंजी है जो ,आपसे कोई चुरा न पाता है,यही पूंजी है वास्तविक ,जिसके बल पर ही इंसान,सबके मन में अपना ,एक अच्छा व अटल स्थान ब

आंखे तो सबकी एक जैसी,देखने का अंदाज अलग होता।बातें सबकी होती अलग अलग,कहने का अंदाज अलग होता।।दिलों के एहसास की बातें,धड़कन का अंदाज अलग होता।बातें जुबां पे आती रहती,कहने का अंदाज अलग होता।।इज्ज़त शौक

15/9/2022प्रिय डायरी,                  आज का शीर्षक है मानवीय पूंजी,      मानवीय पूंजी निवेश उसके विचारों का दर्पण होता है। मानव को समा

मानव की पूंजी सद्गुण है,मानव संग सद्व्यवहार करें।बचे काम क्रोध मद लोभ मोह से,मानवता का व्यवहार करें। हर राह मानव के जीवन में,सद्गुण काम सदा आते हैं।बनकर सुमन जीवन उपवन के,खिलते फूल बन महकाते हैं।

मधुर व्यवहार और मीठा बोलना एक कला है...  जो हरेक के पास नहीं होता...  बोलने की कला श्रीराम से सीखो...  जहां रावण ने कड़क जबान से अपने सगे भाई विभीषण को खो दिया...  वहीं श्रीराम ने मीठी जुबान से दुश

सदा बेईमानी करने वाला मनोहर स्कूटी चलाते हुए कुछ सोचते हुए कहीं जा रहा था। थोड़ी दूर बाद लाल बत्ती आने के कारण अनेकों गाड़ियां कतारबद्ध खड़ी हो गई। तभी पीछे से एक मोटरसाईकिल सवार मनोहर के आगे आकर रूका

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