गतांक से आगे
बेला, रवि और विनोद 32 माइल स्टोन रिजॉर्ट के एक कमरे में बैठकर गपशप करने लगे । वे अपने स्कूल के दिनों की यादों में ऐसे खोये कि समय का पता ही नहीं चला । इतने में रवि का मोबाइल बज उठा ।
"हैलो"
"साहब, मैं आपका सेवक बलबीर बोल रहा हूँ"
"बोलो बलबीर, क्या बात है ? तुम इतने घबराये हुये क्यों हो" ?
"साहब, गजब हो गया । पुलिस मेरे बेटे प्रेम को उठा ले गई" । बलबीर फूट फूटकर रोने लगा ।
अचानक इस तरह के वाकिये से रवि हतप्रभ रह गया । बलबीर का परिवार तो गांव में रहता था जबकि बलबीर उसके घर में काम किया करता था । रवि ने पूछा
"पुलिस ने बताया कि वह तुम्हारे बेटे को क्यों लेकर जा रही है" ?
"जी साहब , कह रही थी कि उसने किसी लड़की का बलात्कार किया है । मेरा बेटा ऐसा नहीं है साहब । वह ऐसा गंदा काम कभी भी नहीं कर सकता है । किसी ने उसे फंसाया है साहब" । उधर से बीरबल के जोर जोर से रोने की आवाजें आ रही थी ।
"ठीक है । तुम चिंता मत करो । मैं पता करता हूँ कि बात क्या है" ?
"साहब, मेरे बेटे को बचा लो साहब। मैं आपका अहसान जिंदगी भर नहीं भूलूंगा साहब" । बीरबल लगातार रोता चला जा रहा था ।
रवि ने बेला और विनोद से इजाजत लेते हुये कहा कि उसे अभी जाना होगा । तुम लोग यहां ठहरो । कल हम लोग दिल्ली घूमने चलेंगे । और रवि चला गया ।
रवि ने अपने पी ए से वहां के पुलिस अधीक्षक का मोबाइल नंबर लिया और उससे बात की । उधर से आवाज आई
"सर, एक लड़की ने नामजद FIR दर्ज करवाई है कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ है और वह दुष्कर्म प्रेम ने ही किया है । यह दुष्कर्म उस लड़की के पिता के खेत में किया गया था जब वह लड़की अपने खेत में काम कर रही थी । हम लोग उस लड़की का मेडिकल करवा रहे हैं और कल कोर्ट में उसके धारा 164 के तहत बयान दर्ज करवायेंगे । मीडिया में भी यह मामला तूल पकड़ रहा है" ।
"ठीक है । अगर इतनी बात है तो आप अपना काम कीजिए और किसी ईमानदार अधिकारी को जांच दे दीजिए जिससे इस केस की सही जांच हो जाये और दूध का दूध तथा पानी का पानी हो जाये । इस ऐंगल से भी जांच होनी चाहिए कि कहीं वह लड़की प्रेम को झूठा तो नहीं फंसा रही है ? आजकल ऐसा बहुत हो रहा है । कहीं ऐसा ना हो कि कोई बेगुनाह किसी की साजिश में मारा जाये" । रवि ने एस पी को शंका जाहिर करते हुये कहा ।
इस घटना से रवि को अपने बचपन में घटी एक घटना याद आ गयी । जब वह सातवीं कक्षा में पढ़ता था तब वह एक दिन अपने खेतों में मटर खाने जा रहा था । उसके पिता सरपंच थे । लगभग बीस बीघा जमीन थी उनके पास । उन्होंने एक नौकर "बिहारी" रखा हुआ था जो उनके खेतों में काम करता था । बिहारी के लिए खेत में ही एक टापरीनुमा कमरा बनवा दिया था जिसमें वह रहता था । बिहारी दिन भर खेतों में काम करता था। टापरी में अपना खाना बनाता और वहीं सोता था ।
रवि के खेतों के पास ही मुरारीलाल का पांच बीघा का खेत था । गांव में मुरारीलाल की एक दुकान थी जो एक छोटा मोटा डिपार्टमेंटल स्टोर थी । गांव के लोगों की आवश्यकता का सारा सामान मिलता था उसमें । मुरारीलाल सुबह सात बजे से देर रात दस बजे तक दुकान में ही रहते थे । लंच भी दुकान में ही करते थे । देर रात में घर जाते । थके होने के कारण खाना वाना खाकर सो जाते थे । उनकी पत्नी शीला जिसे रवि शीला चाची कहता था , घर और खेत दोनों का ही काम संभालती थी । शीला चाची की उम्र लगभग 35 साल की थी । सुंदर और हंसमुख स्वभाव की थी शीला चाची । सबसे हंस हंस कर बातें करती थी वह ।
रवि के खेतों में सरसों, चना, मटर, गेंहूँ की फसल बोई हुई थी । रवि को खेत में चने का साग, टेंट और मटर खाना बहुत पसंद था इसलिए वह अक्सर खेतों में आता जाता रहता था ।
एक दिन वह मटर खाने के लिए खेत में गया । सरसों का खेत उसके बगल में ही था । वह मटर तोड़कर खाने लगा । अचानक उसे कुछ आवाजें सुनाई दीं । "आह , ओह , ओ ओ ओ ... हाय हाय ... " आवाज धीमे धीमे आ रही थी । रवि ने अपने चारों ओर देखा मगर उसे कोई दिखाई नहीं दिया । मगर आवाज निरंतर आ रही थी । रवि का कौतुहल बढ़ गया था । वह आवाज की दिशा की ओर चल पड़ा । दस बीस कदम सरसों के खेत में गया ही था कि सामने का नजारा देखकर वह भौचक्का रह गया । सामने शीला चाची जमीन पर लेटी थी और उनका नौकर बिहारी उस पर लेटा था । शीला चाची की साड़ी कमर तक ऊपर थी और दोनों किसी दूसरे लोक में विचरण करते से लग रहे थे । उन दोनों को ऐसी अवस्था में देखकर रवि ठिठक गया । वह उल्टे पांव जाने के लिए जैसे ही मुड़ा वैसे ही शीला चाची की निगाह उस पर पड़ गई । उसने बिहारी को धक्का देकर अपने ऊपर से दूर धकेल दिया और एकदम से खड़ी हो गई । अपने कपड़े ठीक करने लगी । उधर बिहारी भी उस स्थिति को भांप गया और अपने कपड़े पहनने लगा ।
रवि चुपचाप वहां से जाना ही चाहता था कि शीला चाची ने उसे रोक लिया । रवि के सामने आकर वह कहने लगी "तूने कुछ देखा तो नहीं ना रवि" ? उसके चेहरे पर घबराहट साफ दिखाई दे रही थी । बिहारी मौका देखकर भाग गया था ।
"नहीं चाची, मैंने कुछ भी नहीं देखा" । रवि ने इंकार में गर्दन हिलाते हुये कहा और भागने लगा ।
"देख रवि , अगर तूने कुछ देखा है और इसके बारे में किसी को कुछ भी बताया तो मुझसे बुरा और कोई नहीं होगा" । शीला चाची ने थप्पड़ दिखाते हुये रवि से कहा ।
"नहीं कहूंगा चाची , किसी से भी नहीं कहूंगा । भगवान की कसम" । भगवान की कसम बात बात पर खाने का रिवाज था गांव में इसलिए तकिया कलाम बन गए थे ये शब्द गांव वालों के लिए । इसलिए रवि के मुंह से भी निकल गया ।
रवि की बातों से शीला चाची आश्वस्त हो गई । फिर रवि का मन वहां मटर खाने में नहीं लगा और वह वापस अपने घर आ गया ।
उसके बाल मन में वह घटना अंकित हो गई । आंखों के सामने बार बार वही दृश्य नजर आने लगा । लाख कोशिश करने के बावजूद उसके दिमाग से वह दृश्य ओझल नहीं हो रहा था । क्या इस घटना को मां को बताना ठीक होगा ? पर उसने तो शीला चाची से वादा किया था इसे नहीं बताने का । और भगवान की कसम भी खाई थी उसने । अगर वह इस घटना को मां को बता देगा तो उस कसम का क्या होगा जो उसने शीला चाची के सामने खायी थी ? क्या इससे भगवान नाराज नहीं होंगे ?
उसके दिमाग में ऐसे अनेक प्रश्न घूम रहे थे । शीला चाची ने उसे धमकी भी दी थी । लेकिन वह धमकियों से डरने वाला शख्स नहीं है मन ही मन वह सोचता । फिर बिहारी तो उनका नौकर है । उसने ऐसा किया यह उसे हजम नहीं हो रहा था । कोई और होता तब तो उतनी दिक्कत नहीं थी मगर वहां तो बिहारी था । इसलिए मां को बताना आवश्यक हो गया था । क्या करे वह ? एक तरफ कुंआ दूसरी तरफ खाई । बेचारे रवि की जान आफत में आई ।
शेष अगले अंक में