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त्योहारों की अविस्मरणीय यादें

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हमारी भारतीय संस्कृति उत्सवधर्मी है, जहाँ वर्ष भर तन-मन की थकान दूर करने के उद्देश्य से हमारे धार्मिक ग्रंथों में तीज-त्योहारों का उल्लेख कर उन्हें समय-समय पर मनाये जाने का वर्णन किया गया है। इन त्योह

जलाकर ढेर दीपों को खूब प्रकाश कर ले हम मनाकर ढेर खुशहाली खूब उल्लास कर ले हम जलाकर प्रेम के दीपक जग गुलजार कर दें हम मिठाई न खिलाकर इक मुस्कान दे दें हम उड़ाए रंग ढेरों हम गुलाबी लाल पीले ह

जलाकर ढेर दीपों को खूब प्रकाश कर ले हम मनाकर ढेर खुशहाली खूब उल्लास कर ले हम जलाकर प्रेम के दीपक जग गुलजार कर दें हम मिठाई न खिलाकर इक मुस्कान दे दें हम उड़ाए रंग ढेरों हम गुलाबी लाल पीले ह

प्रिय सखी।कैसी हो ।हम अच्छे है । दीपावली की तैयारी मे जुट गये है ।आज बेसन की बर्फी बनाई थी हमने ‌‌‌‌।कल कचोरी, लड्डू और गुलाबजामुन बनाएं गे। पतिदेव बाहर की मिठाई पसंद नही करते है ।मै तो शुरू से ही घर

त्योहारों की यादों  के अविस्मरणीय दर्दपर ये दर्द भरी दास्तां आप सब भी पढ़ना न इश्क का दर्द हैं,,न जुदाई का दर्द है,लगता है साहब ये तो,दिवाली की सफाई,का दर्द है।जिसकी दास्तां हरदिवाली पर दोहरा

सचमुच त्योहारों की बात बड़ी निराली होती,याद है न वो पल जब घुल मिल जाते सब भूल सारे मतभेद मिल जाते गले और खुशियों से नाचते झूमते और मनाते त्योहार न कोई पराया होता न कोई गैर सब अपने बन जाते..., एक दिन

वे यादें मैं अभी भूला नही,त्यौहारों की खुशियां महकती थी।एक खिलते हुए फूलों के बाग की तरहमन में जोश और उत्साह बन उबलती थी।।हर मनुज महीनों पहले रंग में रंग जाता,इंतजार में उसे बैचेनी सी रहती थी।जिनसे नह

बचपन के त्योहार मानो जवानी के सुनहरे बस ख़्वाब,क्या हसीन बनती तब त्योहारों की अविस्मरणीय यादें,वो तीखे मीठे पकवान और फटाकों की आतिशबाजी,नए कपड़ो की सुगंध और पापा मम्मी का ढेर सारा प्यार,सच कहूं तो सब

मेरे प्यारे अलबेले मित्रों !बारम्बार नमन आपको 🙏🙏जब मैं दस साल का बच्चा था । तब नादान उम्र का कच्चा था ॥ दशहरा मेला घूमने को हठ किया । माई से अपनी दो रुपया पा लिया ॥ बहुत भीड़ थी म

जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने को थी वो एकांत जगह की तलाश में घूम रही थी कि उसे नदी किनारे ऊँची और घनी घास दिखी।उसे वो उपयुक्त स्थान लगा शिशु को जन्म देने के लिये वहां पहुँचते ही उसे प्र

त्यौहार ही तो हैं जो बेरंग जिन्दगी को रंगों से सराबोर कर देते हैं। यन्त्रवत् कार्य करते-करते मनुश्य के मस्तिश्क को ताजगी और ऊर्जा भर देने के लिए त्यौहार ही हैं। फिर चाहे वो कोई भी त्यौहार हो, सबका उद्

राम नाम जपे रे बंदे,सब सुख तू पायेगा।राम नाम है सत्य का,ज्ञान मार्ग प्रशस्त होगा।।राम नाम जपे तू बंदे,संसार क्या जान पायेगा।कोई नहीं किसी का बंदे,यह सच्चाई जान पायेगा।।राम नाम जपे तू बंदे,मोह माया जान

भारत देश में जहां अनगिनत त्यौहार रीति व रस्मे निभाई व मनाई जाती है वही त्योहारों के मौसम में एक अलग ही रोमांच रहता है जब त्यौहार आते है और हम बड़े ही हर्शोल्लास के साथ त्योहार मनाते है आप चाहे कोई भी त

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