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ऊपर की कमाई

19 जुलाई 2023

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बीयर की चुस्कियों के साथ मैं और राजेश अपने मनपसंद रेस्टोरेंट में टाइमपास कर रहे थे क्योंकि हमारी फ्लाइट तीन घंटे देरी से जाने वाली थी। काफी दिनों से मैं ऐसे ही किसी मौके की तलाश में था जहाँ एक दोस्त की हैसियत से उसे सही समझाइश दे सकूं ।
यूं तो राजेश का घर मेरे घर के पास ही था और उसके यहाँ मेरा खूब आना जाना था पर न तो उसकी पत्नी सुधा और न ही अपनी पत्नी के सामने ये सब बातें करना चाहता था।

"राजेश, क्या तुम्हें अंदाज़ा है की लोग तुम्हें और रीता को लेकर क्या क्या बातें कर रहे हैं आजकल?"

"भाई तू लोगों की छोड़ ,अपनी बात कर ", उसने सुनते ही कहा ।

"तो ऐसे ही सुन फिर दोस्त। तेरी अच्छी खासी गृहस्थी है और इतनी अच्छी जीवन संगिनी मिली है ,क्यों कांटे बो
रहा है खुद ही अपने हाथ से ?

माहौल अब गंभीर हो चुका था। राजेश समझ गया था कि मैं उसके और उसकी पड़ोसन रीता के साथ चल रहे उसके
प्रेम प्रसंग के मुद्दे को एक भला चाहने वाले दोस्त कि हैसियत से कुरेद रहा था और आसानी से हार मानने वाला नहीं था । राजेश मेरा बचपन का लंगोटिया यार था और हम लोग हर तरह कि बातें एक दूसरे से कर के हलके हो लिया करते थे ।

उसने एक दार्शनिक अंदाज में भूमिका बनाते हुए कहा," यार , तुझे तो मालूम ही है सुधा से मेरी शादी किन हालातों में हुयी है। ये एक तरह का समझौता ही था, न ही इसमें को प्रेम प्रसंग था और ना ही भावनाओ का कोई ज्वार । फिर उन दिनों मेरे आर्थिक हालत बेहद ख़राब थे और पूरा का पूरा दिन ही झुंझलाहट में बीत जाता था। सुधा ने आकर घर को बड़े अच्छे ढंग से संभाल लिया और फिर हमारे दिन भी पलट गए। सुधा से मुझे आज कोई शिकायत भी नहीं है। पर जब से रीता हमारे पड़ोस में रहने आयी है उसे देखते ही न जाने मुझे क्या हो जाता है । यूं तो हमारी और भी पड़ोसन है और सुधा की भी कितनी ही सहेलियों के साथ मेरी बातचीत होती रहती है पर रीता के साथ कुछ अलग ही बात है ।
लगता है हमारी फ्रीक्वेंसी मैच हो गयी है । उसके साथ रहना , उससे बातें करना मुझे बेहद अच्छा लगता है । उसके बारे में सोचने भर से ही कई बोतलों का नशा हो जाता है।

“पर आखिर आखिर जो सुख तू रीता में ढूंढ रहा है वह भाभी में क्यों नहीं ढूंढ सकता, मेरे भाई?”, मैंने कहा।

"यार, तनख्वाह में वो मजा कहाँ जो ऊपर कि कमाई में है। जो मजा रंगबिरंगी पत्रिकाओं को पढ़ने में है वह स्लैबस कि बोरिंग किताबों में कहाँ? फिर सुधा तो उसे अपनी बहन मानती है तो मुझे लगता है इस हिसाब से वह मेरी साली हुयी और साली तो आधी घरवाली होती है न?"

मुझे उसके पक्ष में भी कुछ सच्चाई नज़र आ रही थी पर फिर भी अपनी तरफ से उसे आगाह करना मेरा फ़र्ज़ था एक अच्छा दोस्त होने के नाते । मैंने कहा," भाई मैंने बहुत से घरों को जरा सी बेबकूफी से बर्बाद होते देखा है , तू भी संभाल जा , वक्त रहते । किसी शायर ने कहा है - वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुश्किल, उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर भूलना अच्छा…..।”

इस पर उसने कहा, “सबको एक ही तो जिंदगी मिलती है दोस्त। क्यों न उसे अपनी खुशी से जियें?”

अब मुझे लगने लगा था कि मैंने तो अपना काम ईमानदारी से कर दिया अब आगे इस आदमी कि हरकतों के ऊपर है कि अपनी जिन्दगी को किस मोड़ पर ले जाना चाहता है । पर सुधा भाभी पर मुझे बड़ी दया आ रही थी । बेचारी बेहद
अच्छी और सीधी साधी औरत थीं और एक ऐसी इंसान जो हमेशा सबका भला ही सोचता हो और अपने परिवार को स्वर्ग बनाने में जिंदगी खपा देता हो । पर वह नहीं जानती थी की मेरे दोस्त राजेश के दिमाग में क्या खिचड़ी पक रही थी । मुझे लगा जैसे एक निरीह बकरी एक कसाई के हाथों कटने जा रही थी और वह पागल उस कसाई को ही अपना सर्वेसर्वा मालिक मानती हो । या फिर जैसे कोई बेखबर और भोली जनता किसी अधिकारी या मंत्री के पास अपनी छोटी बड़ी फरियाद ले कर जा रही हो और उस अधिकारी/नेता को रिश्वत लेने के सिवा कुछ सूझता ही न हो। मन ही मन राजेश के परिवार में होने वाली किसी अनहोनी की कल्पना से मैं डरने लगा , पर ज्यादा कुछ कर
भी नहीं सकता था ।

इस बात को कई दिन बीत गए और मैं व्यावसायिक व्यस्तताओं के चलते राजेश से मिल न सका। एक दिन जब
फुर्सत मिली तो उसके घर पर जा पहुंचा बतियाने । दोनों पति पत्नी सहज और खुश लग रहे थे । बातों बातों में रीता का जिक्र आया तो सुधा भाबी बोलीं," भाई साहब नाम न लोग उस औरत का। उसने हमारे साथ बड़ा धोका
किया। अब हमारे साथ उनके कोई सम्बन्ध नहीं हैं । आगे की बातों से समझ आया कि दोनों सहेलियों (सुधा भाभी और रीता) में किसी छोटी सी बात को लेकर मनमुटाव हो गया था और दोनों ने आपस में बोल चाल बंद कर दी थी ।

उस दिन के बाद राजेश और रीता को लेकर कहे जाने वाले किस्से भी सुनायी देना धीरे-धीरे बंद हो गए ।
मैंने जब पूरी बात का विश्लेषण किया तो समझ में आया कि सुधा भाभी इतनी भी अबला और निरीह नहीं थी। वो तो अब तक सब जानते हुए भी सह रही थी इस देश की जनता की तरह पर साथ ही अपनी किसी लुहार की सी चल चलने की तयारी कर रही थीं राजेश की सुनारों वाली सौ चालों के जबाबमे। और फिर उन्होंने वह चाल चल दी । अपने पर रीता के बीच में बिना बात का झगड़ा करा कर उन्होंने ऐसी स्तिथि पैदा कर दी कि न तो रीता का उसके घर में
आना हो सके और न ही राजेश का वहां जाना। किसी ने खूब कहा है,'आदमी के शरीर में लाखों नाड़ी होती हैं पर सिर्फ उसकी बीबी ही जानती है कि कब कौन सी नस कितनी देर तक दबाना है ।

लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक दीक्षित (से. नि.) की अन्य किताबें

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रचनाएँ
इन्द्रधनुष
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आम लोगों की जिंदगी की तरह तरह के रंग बिखेरती हुयी कहानियाँ जो कभी आपको हँसाएगी , कभी आपकी आँखें नम कर देंगी और कभी सोचने पर मजबूर कर देंगी। भावनाओं की कशमकश , विचारों की उथल पुथल में झूलते पात्रों से मिल कर लगेगा कि उसे आपने जरूर कभी न कभी अपने आस पास ही देखा है ।
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जब गाड़ी ट्रैफिक लाइट पर रेंग रही थी, आशा ने ताज्जुब से कहा, ‘आज दोपहर में भी इतना ट्रैफिक है इस रोड पर’। ‘सारा शहर ही जब देखो तब कहीं भागता रहता है’, लता ने उसकी हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा। सुदीप उन

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 नवीन ने नयी कार क्या खरीदी बधाई देने वालों का ताँता सा लग गया। हर कोई आकर उसे नयी कार की बधायी देता ,मिठाई मांगता और फिर लगभग एक जैसे सवालों की झड़ी लगा देता,"कितने की ली? क्या एवरेज देती है? साथ में

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‘……. यात्री गण कृपया ध्यान दें ,छत्रपति शिवाजी टर्मिनल को जानेवाली पुष्कर एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से चालीस मिनट की देरी से चल रही है। आपको हुई असुविधा के लिए हमें खेद है।’ इस एनाउंसमेंट को सुनकरस

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साक्षात्कार के अधिकतर सवाल अब भी रमन  के दिमाग में घूम रहे थे । “हमारे इस प्रोडक्ट को तुम आज कितने लोगों को बेच सकते हो ? तुम्हारे कितने जानने वाले इसे इस्तेमाल करते हैं ?” वो परेशान था, ये सोच कर कि

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6 जुलाई 2023
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छोटू और लम्बू एक छोटे से गाँव में रहते थे और अक्सर शहर जाकर पैसा कमाने की बातें किया करते थे. एक दिन दोनों ने आपस में सलाह कर शहर जाने का फैसला किया। छोटू ने खूब घी डाल कर १०० लड्डू बनाये तो लम्बू भी

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तेजप्रताप से मेरी मुलाकात बारह साल बाद हो रही थी । उसको कुश्ती में एक राज्यस्तरीय सम्मान मिला था और मुझे जिलाधिकारी की हैसियत से उस सम्मान समारोह में विशेष अतिथि का दर्जा दिया गया था। बरसों पहले गॉंव

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सितारा

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पैक-अप होते ही भीड़ का रेला उसकी एक झलक पाने को सारे बंधन तोड़ कर उस तक पहुँचना चाहता था, मगर कार के दक्ष ड्राइवर ने सधे हुए नपे तुले हाथों से एक पल में ही गाड़ी ठीक उसके सामने लगा दी,फिर लपक कर बड़ी न

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एक बार एक लोभी व्यक्ति रात में एक गड्ढे में गिर गया।  सुबह हुयी तो वहां जा रहे एक एक युवक राहगीर से उसने निकलने के लिए मदद माँगी।  उसे ऊपर लेने के लिए राहगीर ने अपना हाथ बढ़ाया और बोला , ‘बुजुर्गवार,

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19 जुलाई 2023
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सुल्तान और अंजलि दोनों भाई बहन की मंजिल एक थी - उनका घर। जैसे ही उनके पापा यानी प्रमोद ने उनकी मम्मी यानी सलमा की मौत की खबर दी ,दोनों सकते में आ गए थे । अचानक हुए हार्ट अटैक को पहचानने और डाक्टर के

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मुन्नी का आतंक

30 जुलाई 2023
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 हमारे घर में अगर कोई वीआईपी है तो वो मेरी पत्नी नहीं है।  जी हाँ , आपने ठीक समझा। उसकी भी एक बॉस है जो उसे भी अपनी उँगलियों पर नचाती है।   वो है हमारी काम वाली बाई –मुन्नी।   इस बात का अनुमान तो मु

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‘हे भगवान! ये महीने की पहली तारीख हर बार इतनी देर से क्यों आती है’ दामिनी ने फिर सोचा। हर महीने के तीसरे–चौथी हफ्ते में अक्सर यह ख़याल उसके मन में आता था, खास कर जब कोई पैसे खर्च करने वाली बात होती। अख

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एक चोर की दिहाड़ी

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सुनील एक शातिर चोर था। चोरों की बिरादरी में उसकी खासी इज्जत थी. वो लोग कहते थे कि अगर सुनील का दिल आ जाये तो वो किसी आदमी की आँखों से काजल भी चुरा लाये और उसे पता भी न चले। टूंडला जंक्शन से मुगलसराय ज

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सुदीप की डायरी (21 अगस्त 20**) आज का दिन शुरू से ही मनहूस रहा है. सुबह देर से आँख खुली, रात भर मुन्ने ने सोने जो नहीं दिया था। ऑफिस के लिए भी लेट हुआ. ब्रेकफ़ास्ट छोड़ कर भी समय से न पहुँच सका और बॉस

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नाम का सवाल

7 अगस्त 2023
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अजय को एक अदद क्रिकेट बैट की तलाश थी। कल सुबह सात बजे से उसका इंटर कॉलेज टूर्नामेंट में ओपनिंग बैटिंग करनी थी और आज रात को उसका बेट एक एक्सीडेंट में शहीद हो गया था। गनीमत है उसे खुद इसमें कोई चोट नहीं

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अजय ने पान की गुमटी देख कर कार रोकी और अपनी मनपसंद सिगरेट खरीद कर उसके कश लगाने लगा। बेचारे को घर और ऑफिस में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है क्योंकि उसकी बीबी और बॉस दोनों ही उसका सिगरेट पीना पसंद नहीं करते

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बरसों की मेहनत

7 अगस्त 2023
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तेजप्रताप से मेरी मुलाकात बारह साल बाद हो रही थी । उसको कुश्ती में एक राज्यस्तरीय सम्मान मिला था और मुझे जिलाधिकारी की हैसियत से उस सम्मान समारोह में विशेष अतिथि का दर्जा दिया गया था। बरसों पहले गॉ

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खबरों की दुनियां

7 अगस्त 2023
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हमारी टीम ने अपनी मनपसंद जगह चुन कर कैमरा लगा लिया था। इस जगह से वह मंच बिल्कुल साफ दिखता था जहाँ से एक वीईपी को आकर कोरोना के प्रकोप से बेघर हुए मजदूरों को खाना बांटना था। मेरी चैनल के चीफ-एडिटर ने

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भिक्षाम देहि:

7 अगस्त 2023
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“भिक्षाम देहि:”, कहते हुए अजय ने भिक्षा-पात्र संदीप के सामने खटखटाया तो संदीप को उन भिखारियों का ध्यान आया जो रोज ऑफिस जाते समय मेट्रो में इस तरह कटोरे खड़काते हुए घूमते रहते थे। उसने मुस्कुराते हुए

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शादी का लिफाफा

16 सितम्बर 2023
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 अजय की बेटी की शादी में जाने के लिए जब सब तैयार हो रहे थे तो मैंने इस काम के लिए ले जाने वाले एक लिफाफे को निकाला और सोचा इसमें कितनी रकम डालूं। आम तौर पर मेरी पत्नी इस जिम्मेदारी को निभाती थी और इस

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आदत से मजबूर

16 सितम्बर 2023
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विमान में प्रवेश की उद्घोषणा के साथ रमा एक झटके से उठ बैठी और लपक कर लाइन में लग गयी। वहीं सुरेश आराम से अपने लैपटॉप पर काम करता रहा। दोनों दम्पतिअक्सर हवाई जहाज से यात्रा करते थे और हर बार ऐसा ही घटन

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बचपन का भोलापन

16 सितम्बर 2023
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अपने कम्प्यूटर के लिए मैं एक नया रंगीन प्रिंटर लाया था। घर में सबको बुला कर शेखी बघारते हुए बताया," ये बहुत अच्छी तकनीक से बना है और किसी भी चीज को हू-बहू प्रिंट कर देता है।" फिर मैंने सबको आदेश दिया

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बस के इंतजार में

3 अक्टूबर 2023
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'उन्नीस नंबर की फ़्रीक़ुएन्सी क्या है?', उसी आवाज ने दूसरी बार ये सवाल किया था। शायद सवाल मुझसे ही पूंछा जा रहा था।  मैंने काले रंग की उस लम्बी सी कार को घूरना बंद किया जिसका ड्राईवर गुनगुनाते हुए उसे

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निःशब्द

3 अक्टूबर 2023
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रूमी अपने गांव में दादाजी के साथ कुछ दिन के लिए छुट्टी मनाने अमेरिका के एक बड़े संस्थान से मैनेजमेंट की डिग्री लेकर आई थी। ब्रांडिंग के बारे में चर्चा करते हुए उसने दादाजी को मैकडोनल कंपनी का उदाहरण द

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ज्ञान की बात

3 अक्टूबर 2023
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टेलीविजन पर शंकराचार्य और मंडन मिश्र के शास्त्रार्थ का प्रसंग चल रहा था। जीत और हार के लिए जो मानक निर्धारित किए गए थे मुझे उस समय वह बड़े हास्यास्पद लग रहे थे। दोनों के गले में फूलों की एक-एक माला थी

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3 अक्टूबर 2023
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कई साल पहले की बात है , मैं दिल्ली में नौकरी करता था. सर्दियों की एक सुबह स्कूटर पर मैं गाज़ियाबाद से अपने ऑफिस जा रहा था।  रोज की इस दिनचर्या में स्कूटर के साथ दिमाग में विचार भी अपनी गति और दिशा में

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3 अक्टूबर 2023
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एक बार मेरा भतीजा अपने मित्र का फौज की वर्दी में एक फोटो लेकर आया और बोला कि चाचा यह भी फौज में अफसर बन गया है। मैंने कुछ पल तक उस फोटो को देखा और कहा,"तुम्हारा दोस्त तुमसे कोई मज़ाक कर रहा है, यह आदम

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नयी ट्रक

3 अक्टूबर 2023
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हमारे यूनिट में एक बार एक प्रख्यात कंपनी की दो दर्जन ट्रक ट्रायल की लिए आईं। ये उस समय की देश की आधुनिकतम ट्रक थीं जिसमे‘आटोमेटिकगियर’ लगे थे। इस ट्रायलके आधार पर ही उस कंपनी को फौज से एक बड़ा आर्डर मि

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लौटा बचपन

3 अक्टूबर 2023
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 "खुशबू,मैं नीचे टहलने जा रहा हूँ, तुम भी चलोगी क्या?" मैंने सोफे से उठते हुए पूछा।   इससे पहले कि खुशबू कोई जबाब देती,माया ने उसे आंखें दिखते हुए कहा,“खुशबू को अभी होम-वर्क पूरा करना है,आप जाइये।“ 

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विदेशी मेहमान

3 अक्टूबर 2023
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 जमुनादास की चाय तो कुछ खास नहीं थी पर उसकी छोटी सी दुकान पर जमीं रहने वाली भीड़ शायद उसकी लच्छेदार बातों के दम पर ही जुटा करती थी। हर बात वो इतने विश्वास के साथ कहता था कि मानों उसके आँखों के सामने घ

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सारी दुनिया को बेच डालूँगा

3 अक्टूबर 2023
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 बेचनलाल जी बचपन के मित्र है। तीन साल पहले तक सैकिंड-हैण्डखटारास्कूटर को घसीटते घूमते थे। अब न जाने कैसे उनका कायापलट हो गया है। पांच गाड़ियों और दो फ्लैट के साथ आलीशान आफिस है। बड़ा काम हैऔर नाम भी।

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ये कैसी भीड़ ?

3 अक्टूबर 2023
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 उस दिन से पहले मैं भगवान् से हमेशा मन्नत माँगता था कि मेरे खोमचे पर भी खूब भीड़ हो.  वैसी ही भीड़ जैसी नंदू और राधे के खोमचों पर अक्सर हुआ करती है. इसी भीड़ के दम पर वो लोग अक्सर मेरा मजाक भी उड़ाया करत

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किरायेदार

3 अक्टूबर 2023
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गुप्ताजी का आज का व्यवहार अप्रत्याशित था । पिछले बारह वर्षों से मैं उनका किरायेदार था पर हम दोनों के परिवारों के बीच इतना आना-जाना था कि लोग उन्हें हमारा रिश्तेदार ही समझते थे। घर में कोई उत्सव हो या

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आँख वाले तो देख लेते

3 अक्टूबर 2023
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कई साल पहले की बात है ,मेरे ग्यारह वर्षीय पुत्र ने गिटार सीखने की इच्छा जाहिर की थी। मेरे घर के पास ही एक संस्थान था जहाँ बच्चों को गिटार सीखने का प्रशिक्षण दिया जाता था, अत: मैंने अपने बेटे का दाखिला

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नमूने

3 अक्टूबर 2023
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मेरे एक मित्र के सर पर गिनती के पांच बाल हैं। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं हैं बल्कि बिलकुल सत्य वचन हैं । आप चाहें तो गिन भी सकते हैं। पर मजाल हैं की कोई उनको सामने आकर गंजा कह जाये। वो पहले तो अविश्वास से

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हिसाब किताब

3 अक्टूबर 2023
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घर में कल शाम से ही बबाल मचा हुआ था। शाम को सुधा की शादी में जाना था और लेन देन की डायरी कहीं मिल ही नहीं रही थी। इस डायरी में इस बात का हिसाब किताब रखा जाता था कि किसने हमारे घर में हुए किसी समारोह म

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