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बाल-साहित्य

hindi articles, stories and books related to Bal-sahitya


*बरसा ऋतु*आई है वर्षा ऋतु लेकर बूँदों कि बहार। नाच रहें हैं मोर जंगल में अपनी ही धुन में होकर सवार।। सुखी धरती पर गिरती है जब,बारिश कि बुँदे छम- छमखिल उठते हैं चेहरे किसानों केनाच उठता है उनका तन

 जबजब याद सताय, सुहानासफर बचपन का।     माँ पिता ताया ताई,शरारत पर फठकार लगाई।। मौजमस्ती,खेलना कुदना, सुननाअपने भनका l   जब याद सता --- :: --- --- -।।     

लेख- "बच्चे हमारी नहीं सुनते पर हमारी नकल करते हैं " आज हर माता पिता की एक ही शिकायत है कि बच्चे हमारी बात नहीं सुनते हैं। हर समय मोबाइल का उपयोग करते हैं। टी.वी देखते रहते हैं। हमारी बात तो बिल्कुल

***** यहाँ वृंदा की दिशा ही बदल गई।जो पैरामैड़ीकल डॉक्टर बनने की जगह आयुर्वेदिक डॉक्टर(वैध)बनने की दिशा में मुँड़ गई। गाँव में स्थति बिगड़ती जा रही थी।दो महीने से अम्मा की पेंशन नहीं आई थी।कमाने का एक ही

               बचपन से ही बहुत शरारती थी मनु। कुछ ना कुछ खुराफ़ात चलती रहती थी उसके दिमाग में। कभी वह छोटों को परेशान करती तो कभी बड़ों की टांग खिंचाई करती थी।

#बादल_और_राजा – दो घोड़ों की कहानीHindi Story on Overcoming Obstaclesचुनौतियों पर काबू पाने की सीख देती प्रेरणादायक कहानीबादल अरबी नस्ल का एक शानदार घोड़ा था। वह अभी 1 साल का ही था और रोज अपने पिता – “र

कहानी- मनोबल की जीत सुधांशु और हर्ष बहुत अच्छे मित्र थे। कक्षा एक से साथ-साथ पढ़े थे। दोनों के घर भी आमने सामने थे। संयोग की बात है कि दोनों को दिल्ली की एक ही कंपनी में नौकरी भी मिली। दोनों एक ही गा

प्रत्येक गांव की ग्राम सभा को ई ग्राम सभा के माध्यम से करवाना जरूरी हो जिसमे ज्यादा से ज्यादा ग्रामीणों की भागीदारी व ग्राम पंचायत के सभी सदस्यों की उपस्थिति जरुरी हो। जिसकी शुरुवात वर्तमान सरकार ने क

छोटू बोला छोड़ दो भैया नही रहूंगा अब ए ठैयाबात बात मालिक की किच किच बैठा एक कमरे में पिच पिचरात को रोटी टेढ़ी मेढ़ी पल पल गलती की तेरी मेरीदार भात से दहल गया हूँ लगता है मैं बदल गया हूँनींद न आये का

"होली का आध्यात्मिक रहस्य"       भारत में अनेक त्यौहार मनाए जाते हैं उनमें से 'होली' का पवित्र  त्यौहार बहुत उमंग उत्साह और खुशियों से मनाया जाता है।  उसमें होली जलाते ,

आज दोहरी ख़ुशी मिली। पहली मेरे बेटे का 10 वीं सीबीएसई बोर्ड के फर्स्ट टर्म के रिजल्ट आया, जिसमें उसने 93 प्रतिशत अंक प्राप्त किये। मैं उससे कहती कि बेटा यदि केवल पढाई पर ध्यान देता तो कम से कम 99 या फ

चंडीगढ की रहने वाली प्रिया "प्रिया त्रिपाठी" गुणवान ,आस्तिक,अपने किस्मत पर गर्व करने वाली एक मिडिल क्लास फैमिली से बिलोंग करने वाली लडकी थी।वैसे तो प्रिया ज़्यादा देर तक पढ़ाई करते रेहना पसंद नही करती

“लव यू इक अनकही" सी में आपका स्वागत है । यह “प्रिया” “प्रिया त्रिपाठी”पूरी उम्र उसी से प्यार करती रह गई, जो भगवान पर विश्वास करने वाली एकआस्तिक, संकोची स्वभाव पर अपनी किस्मत पर नाज करने वाली लडकी थीक्

आकांक्षा’ पत्रिका-2022 हेतु ‘नारी सशक्तिकरण’ पर केन्द्रित रचनाएँ सहयोग सहित आमंत्रित-टीकमगढ़ जिले से प्रकाशित एक मात्र साहित्यिक वार्षिक पत्रिका *'आकांक्षा’* के सन् 2022 अंक-17 हेतु *‘नारी सशक्तिकरण’*

शहर में कौआ प्यासा था और उसने अपने बड़ों से सुना था कि एक पेड़ के नीचे आपको पानी से भरा एक घड़ा मिलेगा इसलिए उसने उसे खोजना शुरू कर दिया। पहले तो उसे शहर में एक भी पेड़ नहीं मिला। अंत में उसे वह मिल ग

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कई सालों पहले की बात है। एक गांव में युधिष्ठिर नाम का एक कुम्हार रहा करता था। दिन में वह मिट्टी के बर्तन बनाता था और जो भी पैसे मिलते थे, उनसे शराब खरीद कर पी लेता।एक रात वह शराब के नशे में अपने घर

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विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय को अद्भुत व विलक्षण चीजें संग्रह करने का बहुत शौक था।हर दरबारी उन्हें खुश रखने के लिए ऐसी ही दुर्लभ वस्तुओं की खोज में रहता था ताकि वह चीज महाराज को देकर उनका शुभचिंतक

हिंदी का अद्भुत संगम है लेकिन शायद सिक्के के दो पहलू है थे लेकिन उन्होंने बताया था तो मैं क्या कहूं मुझे बहुत अच्छा लगता है लेकिन उन्होंने कहा मैं इस नतीजे पर पहुंची तो यह संसार रहने लायक नहीं हैं बल्

हिंदी का अद्भुत संगम है लेकिन शायद सिक्के के दो पहलू है थे लेकिन उन्होंने बताया था तो मैं क्या कहूं मुझे बहुत अच्छा लगता है लेकिन उन्होंने कहा मैं इस नतीजे पर पहुंची तो यह संसार रहने लायक नहीं हैं बल्

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