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भाग–29 सच से सामना

12 सितम्बर 2023

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फ्लाइट में पूरा समय निष्कर्ष ने काश्वी से उदयपुर की बात की… उसने बताया कि वो जब भी उदयपुर आता था तो उसकी मां उसे अपने बचपन की कहानियां सुनाती थी… “रेगिस्तान के बीच पहाड़ों और झीलों से घिरा एक छोटा सा खूबसूरत शहर उदयपुर जिसे राजस्थान का हिलस्टेशन कहा जाता है…  यहां के पहाड़ और गहरे पानी की झीलें आपको एहसास भी नहीं होने देते कि आप राजस्थान जैसे गर्म जगह पर है शायद इसलिये मां को पहाड़ इतने पंसद थे क्योंकि उनका बचपन यहां गुजरा” निष्कर्ष ने कहा 

फ्लाइट उदयपुर एयरपोर्ट पर लैंड हुई… उदयपुर का छोटा सा एयरपोर्ट और यहां की ताजी ठंडी हवा एक अलग ही माहौल बना रही है…काश्वी की खुशी उसके चेहरे पर साफ दिख रही है… फाइनली वो उदयपुर पहुंच गई है और वो भी निष्कर्ष के साथ जैसा उसने सोचा था… काश्वी ने एयरपोर्ट से बाहर आकर अपना कैमरा निकाल लिया और फोटो क्लिक की… आस पास खुला एरिया है एयरपोर्ट के अलावा कई किलोमीटर तक वहां कुछ नहीं… निष्कर्ष के नानाजी ने कार भेजी है उन्हें घर तक लाने के लिये… एयरपोर्ट से नानाजी का घर एक घंटा दूर है  

रास्ते की हर दिलचस्‍प नजारे को काश्वी अपने कैमरे में उतार रही है… रास्ते के दोनों तरफ पीली रेत और सूखी घास से बने छोटे - छोटे घर हैं… थोड़ी - थोड़ी दूर उसे राजस्थान की शान उंट भी दिखाई दे रहे हैं… ये पहली बार है जब काश्वी देश के इस हिस्से में है… शहर से अलग एक अलग ही माहौल है यहां 

उदयपुर शहर में घुसते ही लगता है जैसे रजवाड़ों के बीच आ गये… आज भी यहां के घर, चौराहे और बड़े - बड़े महल
जैसी हवेलियां उस शान शौकत की गवाह है जो यहां कभी थी… महाराणा प्रताप का ये शहर आज भी उनकी निशानियों से भरा है… काश्वी ये सब बड़े गौर से देख रही है और निष्कर्ष उसे हर हिस्से के बारे में बता रहा है… वो कई बार यहां आ चुका है तो ये शहर उसके लिये अजनबी नहीं… शहर के बीचों बीच एक बड़ी सी हवेली के बाहर उनकी कार रूकी… कार के रूकते ही दरबान ने आकर उनकी कार का दरवाजा खोला… काश्वी निष्कर्ष को देखने लगी… निष्कर्ष ने मुस्कुराकर कहा “चलिये मैडम वेलकम टू उदयपुर” 

एक बड़ा सा गेट सामने है जो एक दम पुराने जमाने के आर्किटेक्चर जैसा है… काश्वी और निष्कर्ष अंदर पहुंचे… बड़े
से लॉन को पार करने के बाद सामने एक और दरवाजा आया… उस दरवाजे के अंदर आते ही सामने एक खूबसूरत हवेली दिखाई दी    

“वाह निष्कर्ष तुम्हारे नानाजी का घर तो पूरा महल जैसा है बहुत सुंदर है ये” काश्‍वी ने कहा  

“हां… ये बहुत बड़ा है तुम्हें दिखाउंगा पूरा पर पहले नानाजी से मिल लेते है” निष्कर्ष ने कहा 

निष्कर्ष और काश्वी नानाजी से मिले और काफी देर बात करते रहे… उसके बाद निष्कर्ष ने काश्वी को पूरी हवेली दिखाई… ऐसी आलिशान हवेली काश्वी ने कभी नहीं देखी थी… चलते - चलते वो कमरा भी आ गया जहां निष्कर्ष को जाना है…
निष्कर्ष काश्वी को अपनी मां के कमरे में ले गया… कमरा बिलकुल वैसा ही सजा था जैसा हिमाचल में उत्कर्ष के घर पर मां का कमरा था… वैसी ही चीजें और वैसा ही सामान… काश्वी ये देखकर बिलकुल हैरान नहीं हुई क्योंकि अब वो निष्कर्ष के पूरे परिवार को अच्छे से समझने लगी है… मां की चीजों को एक बड़े से संदूक में रखा है नानाजी ने…
जो निष्कर्ष को अपने साथ लेकर जाने के लिये वो बुला रहे थे 

“तो ये है वो संदूक जिसमें मां की चीजें है… एक दम एंटीक है मैं खोल दू?” काश्वी ने पहले उस संदूक की फोटो ली और फिर पूछा 

“हां खोलो न” निष्कर्ष ने कहा 

उस संदूक में कई चीजें हैं… मां के बचपन की यादें… उनकी कठपुतलियां जिनसे वो बचपन में खेला करती होंगी… छोटे - छोटे लहंगे जो बड़े चाव से उनके पापा और मम्मी ने सिलवाएं होंगे उनके लिये और साथ में ढेर सारी किताबें जो निष्कर्ष की मां को बहुत पंसद थी 

एक एक सामान को देखकर निष्कर्ष उन्हें याद कर रहा है और काश्वी उसे संभालने की कोशिश कर रही है… कुछ
किताबें निष्कर्ष ने उठाई तो उनमें से कुछ कागज गिरे… निष्कर्ष ने वो कागज उठाएं और उन्हें पढ़ना शुरू किया… वो
लेटर्स थे जो उसके पापा ने मां को लिखे थे जब उन्होंने फोटोग्राफी दोबारा शुरू की 

निष्कर्ष ने वो लेटर पढ़े और वही बैठा रह गया… उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके पापा जो इतने मजबूत दिखते हैं जिन्होंने अपने पैशन के लिये दिन रात एक कर दिये अपने परिवार को खुद से दूर रखा… और मां के जाने के बाद भी टूटे नहीं… वो इतने इमोशनल थे… इसी बीच काश्वी निष्कर्ष से कुछ पूछा लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया… वो
उन्हीं खतों में खोया दिखा… उसे समझ नहीं आ रहा कि ये कैसे हो सकता है… उसने काश्वी की बात का जवाब नहीं दिया तो काश्वी ने उसका हाथ पकड़कर उसे हिलाया 

“निष्कर्ष क्या हुआ तुम ठीक हो?” काश्वी ने पूछा 

निष्कर्ष ने कुछ नहीं कहा… वो खत काश्वी को दे दिये और वहां से उठकर खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया 

काश्वी सन्न रह गई… उसने वो खत पढ़े उसमें लिखी बातों से साफ लग रहा है कि उत्कर्ष अपने परिवार को कभी छोड़
कर जाना ही नहीं चाहते थे खासकर निष्कर्ष के होने के बाद… लेकिन मां के बहुत जोर देने पर वो चले तो गये
फोटोग्राफी के असाइनमेंट करने पर उनका पूरा ध्यान निष्कर्ष पर ही था… हर खत में उनके पहले शब्द से
लेकर आखिरी शब्द तक निष्कर्ष का जिक्र है… वो कब क्या और कैसे कर रहा है ये जानना चाहते थे उत्कर्ष 

काश्वी खत पढ़ने के बाद निष्कर्ष के पास गयी और कहा “निष्कर्ष क्या हुआ अब क्या सोच रहे हो?” 

निष्कर्ष कुछ नहीं बोला… बस चुपचाप बाहर देखता रहा 

कुछ देर चुप रहने के बाद कहा… शायद तुम ठीक थी काश्वी… मैं उन्हें पहचान नहीं पाया… मां जानती थी… उन्हें समझती थी इसलिये उन्होंने कभी शिकायत नहीं की और तुम भी चाहती हो हम दोनों के बीच सब ठीक हो… मतलब मुझे वो क्यों नहीं दिखाई दिया जो तुम्हें और मां को दिखा… मैंने क्यों हमेशा उन्हें खुद से दूर देखा अपने पास महसूस नहीं किया… ऐसा क्यों है काश्वी? 

“ये तो पता नहीं निष्कर्ष… शायद वक्त ही ऐसा था… आप दोनों कभी खुलकर बात नहीं करते यही वजह होगी शायद… मुझे लगता है कभी - कभी कुछ चीजें करना जरूरी होता है हो सकता है सही समय पर सही बात नहीं हुई हो इसलिये दूरियां बढ़ती गई… पर अब भी वक्त है निष्कर्ष अब भी सब ठीक हो सकता है…” 

“पता नहीं… क्या सही है क्या नहीं… उस वक्त जो किया वो सही लगता था इसलिये किया… आज
लग रहा है कुछ और करना चाहिए था… पता नहीं… चलो छोड़ो ये सब… मुझे इस पर बात नहीं करनी… चलो ये सामान पैक करते हैं इसे साथ लेकर जाना है” निष्कर्ष ने कहा 

काश्वी ने कुछ नहीं कहा वो जानती है बर्फ पिघलनी शुरू हो गई है वो बर्फ जो निष्कर्ष और उसके पापा के बीच है पर उसे ये भी पता है कि निष्कर्ष इतने सालों से जिसे मानता आया है उसे इतनी जल्दी भूलेगा नहीं…  

काश्वी निष्कर्ष को वक्त देना चाहती है जिसकी उसे सबसे ज्यादा जरूरत है 

काश्वी को उसके कमरे में छोड़ते हुए निष्कर्ष ने उसे सुबह जल्दी तैयार होने को कहा 

“कहां जा रहे हैं हम?” काश्वी ने पूछा 

“बस कल ही का दिन है तुम्हें उदयपुर घुमाना है फिर परसों सुबह हमारी फ्लाइट है तुम्हें जाने की तैयारी भी करनी है इसलिये बस एक दिन ही यहां रहेंगे” निष्कर्ष ने जवाब दिया 

“क्या सिर्फ एक दिन… एक दिन में क्या देख पाएंगे?” काश्वी ने पूछा 

 “काश्वी तुमने कहा तो मैं ले आया ना… अब मेरी बात मानो… यूएस जाने के पहले घर पर रहो परिवार के साथ वो भी तुम्हें मिस करेंगे ना… उन्‍हे भी टाइम देना पड़ेगा” निष्कर्ष ने कहा 

“अच्छा ठीक है पर एक बात बताओ” काश्वी ने पूछा 

“हां कहो” निष्कर्ष ने जवाब दिया 

“आप ठीक हो?” काश्वी ने पूछा 

“हां… ठीक हूं… काश्वी” निष्कर्ष ने गहरी सांस लेते हुए कहा उसे पता है काश्‍वी ऐसा क्‍यों पूछ रही है  

“अगर नींद न आये तो मुझसे बात करना” काश्वी ने कहा 

“हां ठीक है अभी जाओ सो जाओ” निष्कर्ष ने जवाब दिया  

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रचनाएँ
तलाश में हूं खुद की
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अपनी तलाश की है कभी, कभी खुद को ढूंढने निकले हैं, फुर्सत के लम्हों में कभी खुद से बात की है, कभी जाना क्या चाहता है दिल, हालातों में गुम होने पर तन्हाई की रात में खुद से टकराएं हैं कभी, कभी चलते चलते यूं ही रुक कर पीछे मुड़कर देखा है, सोचा कहां छोड़ आये खुद को, किस मोड़ पर खुद को खो दिया, किस मोड़ पर खुद से फिर मिले, हां, पता है, ये सब सोचने का टाइम किसके पास है, टाइम हो न हो, सवाल तो है, सोच का दायरा छोटा हो, पर जवाब बड़ा है, यूं ही चलते चलते कोई बता जाता है, यूं ही चलते चलते कोई समझा जाता है, यूं ही चलते चलते कोई खुद को खुद से मिलवा जाता है, ये कहानी भी ऐसी ही है अपने आप को तलाशने की, एक सफर अपने आप तक पहुंचने का। काश्‍वी और उत्‍कर्ष एक दूसरे के करीब आये और तब दोनों को एहसास हुआ कि उनकी जिदंगी कितनी अधूरी थी एक तलाश जो हमेशा से उन्‍हें थी धीरे – धीरे पूरी होने को है…
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भाग–1 बिंदास काश्‍वी

2 अगस्त 2022
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कहानी शुरु होती है एक स्कूल के प्रिंसिपल रुम से जहां एक 10 साल की बच्ची को उसी के पेरेंटस के सामने प्रिंसिपल डांट रही है, “मिस्टर कुमार आपकी बेटी इतनी शरारती है, इसकी वजह से एक बच्चे का हाथ टूट गया, इ

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भाग–2 काश्‍वी का नया दोस्‍त

3 अगस्त 2022
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काश्वी के बड़े होने के सिलसिले में कई मोड़ आए, कभी वो खुद से सवाल करती, तो कभी कोई उससे, कब खुश होती, कब उदास उसे खुद भी नहीं पता चलता, दूसरी लड़कियों से कुछ अलग थी, उसके पापा उससे अक्सर पूछते थे कि उ

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भाग–3 जिदंगी की तलाश

5 अगस्त 2022
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काश्वी ने अपने पापा को काम्पिटीशन के बारे में बताया, वो इतनी खुश थी कि उसके पापा ने झट से हां कर दी, रात भर पूरा परिवार उसकी तस्वीरों में से 10 ऐसी तस्वीरें ढूंढता रहा जो उसके टेलेंट को सही - सही दिखा

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भाग–4 धुंधली होती खुशियां

6 अगस्त 2022
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 निष्‍कर्ष की बात ने काश्‍वी की सारी खुशी को धुंधला कर दिया। थोड़ी देर पहले तक वो खुद पर इतरा रही थी लेकिन अब उसे खुद पर ही शक होने लगा। धीरे – धीरे निराशा उसे घेरने लगी और वो चुपचाप एक कोने में जाकर

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भाग–5 जिंदगी की झलक

17 अगस्त 2022
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काश्‍वी के करियर का ये मोड़ उसके परिवार को नए उत्‍साह से भर गया। घर लौटते हुए सब इसी के बात करते रहे। पापा ने काश्वी से पूछा “एक महीने की वर्कशॉप, कब से जाना है?” “दो दिन बाद रजिस्ट्रेशन कराने जाना है

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भाग –6 पहाड़ों का सफर

18 अगस्त 2022
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तेरह घंटे का सफर शुरू तो बहुत जोश के साथ हुआ लेकिन दिन चढ़ते-चढ़ते सबका जोश ठंडा होने लगा। बस में बातों का सिलसिला अहिस्ता अहिस्ता थमने लगा। अब बस, बस के चलने की आवाज और हवा का शोर सुनाई दे रहा है। हम

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भाग –7 बस एक नजर

21 अगस्त 2022
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पहाड़ों की शाम बहुत शांत होती है यहां सच में आप महसूस कर सकते हैं कि शाम हो गई है बड़े शहरों की तरह यहां ट्रेफिक का शोर नहीं होता जिसमें पंछियों की आवाज गुम हो जाती हैं। यहां शाम होते ही पंछी अपने घरो

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भाग –8 जिदंगी ढूंढने निकला जब भी…

22 अगस्त 2022
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काश्वी अब थोड़ी कंफर्टेबल हो गई, काश्वी ने उत्कर्ष से पूछा, “आपने मेरी फोटोग्राफ देखी हैं?” उत्कर्ष ने सिर हिला कर हां कहा और ये भी कहा कि काश्वी को पहला प्राइज देने का आखिरी फैसला उन्होंने ही लिया था

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भाग –9 पुराना कैमरा और नया दोस्‍त

23 अगस्त 2022
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“फोटोग्राफी एक प्रोफेशन से ज्यादा पेशन है, अगर चीजों को देखकर आपको उसमें कुछ खास नजर नहीं आता तो आप एक अच्छे फोटोग्राफर नहीं बन सकते, कैमरे की नजर से पहले अपनी नजर और नजरिये को समझना जरुरी है यहां क्ल

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भाग–10 तुम सवाल बहुत करती हो

24 अगस्त 2022
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रात के बाद फिर सुबह हुई, काश्वी और दूसरे फोटोग्राफर को आज बाहर भेजा जा रहा है जहां वो अपने फोटोग्राफी के हुनर को निखार सके, अपने अपने कैमरे के साथ सब निकलने के लिये लॉबी में इकट्ठा हो गये, काश्वी की न

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भाग–11 नीला आसमान और तुम

25 अगस्त 2022
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अपना पहला एसाइनमेंट देखने के लिये सभी एक्‍साइटेड हैं लेकिन वापस आने के बाद से काश्वी काफी बेचैन  है, वो काफी देर से हॉल के बाहर कोरिडोर के एक छोर से दूसरे छोर तक चक्कर लगा रही है,  निष्कर्ष काफी देर त

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भाग–12 क्‍या हम दोस्‍त हैं?

26 अगस्त 2022
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करीब दो घंटे तक सबकी तस्वीरों पर खूब चर्चा हुई गलतियों और खूबियों को बताने के बाद उत्कर्ष वहां से चले गये, निष्कर्ष अब भी चुप रहा उसने काश्वी से कोई बात नहीं की, दोनों वहां से कोरिडोर की तरफ निकले, क

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भाग–13 मेरा घर कहीं खो गया है !

28 अगस्त 2022
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निष्कर्ष को ऐसे देखकर काश्वी परेशान हो गई और उसने पूछ ही लिया “क्या हुआ? बात क्या है अचानक सीरीयस क्‍यों हो गये?”  “कुछ नहीं बस यूं ही” निष्कर्ष ने जवाब दिया  “नहीं.. कुछ तो है आप और आपके पापा के बी

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भाग–14 नाराज क्‍यूं हो तुम?

28 अगस्त 2022
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 “पापा तो जैसे अपने कैमरे को भूल ही गये थे, उनके लिये अपने परिवार के लिये पैसा कमाना ज्यादा जरूरी था पर मां को लग रहा था कि ऐसे वो अपने सपनों के साथ समझौता कर रहे हैं, जिस कैमरे की वजह से वो दोनों मिल

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भाग–15 काश्वी तुम यहां कैसे आई?

28 अगस्त 2022
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 निष्‍कर्ष सीधा अपने कमरे में चला गया उसने किसी से कोई बात नहीं की, कुछ देर बाद काश्‍वी भी अपने कमरे में आ गई रात भर वो निष्‍कर्ष के मैसेज या फोन का इंतजार करती रही। रात गुजर गई और सुबह के 9 बजे तक भ

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भाग–16 बोलो दोगे मेरा साथ

9 सितम्बर 2022
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निष्कर्ष इधर–उधर सब तरफ काश्वी को ढूंढने लगा, उसने काश्‍वी को फोन भी किया लेकिन फोन लगा नहीं, वो ज़ोर-ज़ोर से चिल्‍लाकर काश्‍वी को बुलाने लगा लेकिन काश्‍वी का कुछ पता नहीं लग रहा था, उसने थोड़ी दूर जा

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भाग–17 कुछ सामने है तो कुछ छुपा है

13 सितम्बर 2022
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रात को अकेले अपने कमरे में काश्वी ने उन किताबों में से एक को पढ़ना शुरू किया, उसे पढ़ते हुए काश्वी को निष्कर्ष की बात याद आने लगी, निष्‍कर्ष ने उसे ये किताबें इसलिये दी जिससे वो अकेला ना महसूस करें और

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भाग–18 दोस्‍ती में दीवार ?

29 अक्टूबर 2022
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निष्‍कर्ष को इस तरह अचानक देखकर उत्कर्ष को कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन काश्वी एक दम शॉक थी। निष्‍कर्ष का चेहरा देखकर उसे समझ आ गया कि वो क्या सोच रहा है, उत्‍कर्ष के साथ काश्‍वी को ऐसे देखकर निष्‍कर्ष को

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भाग–19 आखिरी असाइनमेंट

3 नवम्बर 2022
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जो बात हमें तकलीफ देती है उसे दिमाग से निकालना इतना आसान नहीं होता और उसे भूलकर किसी और चीज पर ध्‍यान लगाना काफी मुश्किल होता है, निष्कर्ष और उसके पापा का रिश्‍ता अब उस स्‍टेज पर पहुंच गया है जहां दोन

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भाग–20 मुझसे मिलोगे दिल्ली में?

4 नवम्बर 2022
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एक तरफ बर्फ से ढके पहाड़ इौर दूसरी तरफ रंग बिरंगा छोटा सा बाज़ार, निष्‍कर्ष और काश्‍वी अपनी थीम की तलाश करते आगे बढ़ने लगे। दुकानों के बाहर लटके रंग बिरंगी चीजें, ठंड का एहसास कराते गर्म कपड़ों से सजे

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भाग–21 कहानी अनकही

14 नवम्बर 2022
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निष्कर्ष ने काश्वी से पूछा एक बात बताओ, “तुम तो दिल्ली में रही हो हमेशा, फिर नेचर से कितनी करीबी कैसे हो गई? दिल्ली की लड़कियों को तो बड़े बड़े मॉल्स और फोरेन ट्रिप्स पर जाने का शौक होता है और तुम यहा

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भाग–22 एक खूबसूरत रिश्‍ता

30 जनवरी 2023
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सुबह जब निष्‍कर्ष उठा तो उसने अपने फोन पर कई मिस कॉल देखी, रात के ढाई बजे काश्‍वी क्‍यों फोन कर रही थी? ये सोचकर निष्‍कर्ष कुछ परेशान भी हुआ उसने तुंरत काश्‍वी को कॉल किया लेकिन फोन उठा नहीं, शायद अब

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भाग–23 सबसे बड़ी उलझन

30 जनवरी 2023
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कुछ देर तक सब शांत रहा, काश्वी की नजर पहले उत्कर्ष पर गई जो चुप हैं शायद किसी गहरी सोच में हैं, फिर उसने निष्कर्ष को देखा जो उसे ही देख रहा है, निष्कर्ष भी चुप है, कुछ सैकेंड बाद हॉल की शांति तालियों

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भाग–24 प्‍यार के पड़ाव

1 फरवरी 2023
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एक और पड़ाव पार कर लिया निष्कर्ष और काश्वी ने अपनी दोस्ती का, एक महीने के अंदर ही दोनों इतने गहरे दोस्त बन गये कि अब एक दूसरे की जिंदगी से अच्छी तरह परिचित हैं   रात तो गहरी हो रही है लेकिन काश्वी को

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भाग–25 वापसी

2 फरवरी 2023
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काश्वी मुस्कुराते हुए उत्कर्ष के ऑफिस से बाहर निकली, उसे खुशी है कि निष्कर्ष अपने पापा के बारे में जो सोच रहा है वो गलत है और एक न एक दिन दोनों फिर साथ होंगे, ये कैसे होगा ये काश्वी को नहीं पता पर एक

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भाग–26 “ये क्या है काश्वी?”

8 फरवरी 2023
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 पापा के जाने के बाद काश्वी ने अपना फोन चेक किया, निष्कर्ष का मैसेज था, उसे भी नींद नहीं आ रही थी इसलिये मैसेज किया, काश्वी ने टाइम देखा तो रात के तीन बज रहे थे, उसने सोचा अब सुबह ही बात करेगी निष्कर्

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भाग–27 दूर कैसे रह पाएंगे?

10 अप्रैल 2023
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काश्वी ने देखा तो उसका ईमेल खुला हुआ है वहीं मेल जो उत्कर्ष ने उसे किया… मेल में उत्कर्ष ने काश्वी को रिमांइड कराया कि उसे जल्द एडमिशन के बारे में फैसला करना है… काश्वी सब समझ गई… उसका डर अब उसके सामन

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भाग–28 यादगार सफर

26 जुलाई 2023
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निष्कर्ष के कहने पर काश्वी ने उत्कर्ष को रिप्लाई किया और एडमिशन के लिये हां कर दिया… कुछ घंटे बाद ही रिप्लाई आया जिसमें कंफरमेशन के साथ काश्वी को 15 दिन में ज्वाइन करने को कहा गया रिप्लाई आते ही काश्

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भाग–29 सच से सामना

12 सितम्बर 2023
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फ्लाइट में पूरा समय निष्कर्ष ने काश्वी से उदयपुर की बात की… उसने बताया कि वो जब भी उदयपुर आता था तो उसकी मां उसे अपने बचपन की कहानियां सुनाती थी… “रेगिस्तान के बीच पहाड़ों और झीलों से घिरा एक छोटा सा

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भाग–30 हर वक्त साथ रहूंगा

21 सितम्बर 2023
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निष्कर्ष कुछ उदास है… काश्वी ने ठीक कहा था उसे नींद नहीं आ रही है… बहुत बैचेनी है… जब कुछ समझ नहीं आया तो निष्कर्ष ने अपने पापा को फोन किया…   कुछ देर घंटी बजने के बाद उत्कर्ष ने फोन उठाया वो कुछ घबर

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भाग–31 उत्‍कर्ष का सच

3 नवम्बर 2023
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 काश्वी चली गई और निष्कर्ष अपने घर लौट आया… कई घंटे की यात्रा के बाद काश्वी पहुंच गई… एयरपोर्ट पर पहुंचते ही सबसे पहले उसने निष्कर्ष को फोन किया… निष्कर्ष ने उसे वहीं रूकने को कहा… काश्वी कुछ पूछ प

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भाग–32 नया चैप्‍टर

3 नवम्बर 2023
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 सुबह हुई और काश्वी की जिंदगी का नया चैप्टर शुरू हुआ,,, नया देश,, नया कॉलेज और नये लोग पर एक डोर थी जो उसे घबराने या डरने नहीं दे रही थी पहली बार वो नये माहौल में भी इतनी कांफिडेंट थी,,,, वो डोर

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भाग–33 मुझे तुम्हारे पास होना चाहिए था

3 नवम्बर 2023
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 हम हमेशा सोचते है कि हमसे ज्यादा दुख और तकलीफ किसी को नहीं,,,दूसरा हमेशा खुद से खुश ही लगता है,,,किसी की तकलीफ का एहसास तभी होता है जब आप उसी तकलीफ को महसूस करते है,,और उस वक्त जो इसे समझ जाये वो

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भाग–34 सामना करो अपने डर का

3 नवम्बर 2023
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 निष्कर्ष को देखकर काश्वी काफी खुश थी डॉक्टर्स भी हैरान थे उसकी इंप्रूवमेंट देखकर,,, अगले ही दिन काश्वी को आईसीयू से वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया गया,,,,कोई ऐसा पास हो जिससे जिंदगी की हर सांस जुड़ी हो त

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भाग–35 तलाश आज पूरी हुई

3 नवम्बर 2023
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 जब सवालों की भीड़ लग जाये तो जवाब तलाशने पड़ते हैं और जवाब कहां मिलेगा ये सबसे बड़ा सवाल होता है,,,निष्कर्ष के सामने भी अब ये हालात थे काश्वी के सवालों के जवाब उसके पास नहीं थे और जो सवाल उसके मन म

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