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भाग–33 मुझे तुम्हारे पास होना चाहिए था

3 नवम्बर 2023

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 हम हमेशा सोचते है कि
हमसे ज्यादा दुख और तकलीफ किसी को नहीं,,,दूसरा
हमेशा खुद से खुश ही लगता है,,,किसी
की तकलीफ का एहसास तभी होता है जब आप उसी तकलीफ को महसूस करते है,,और उस वक्त जो इसे समझ जाये
वो फिर ये कभी नहीं सोचता कि उसे ही दुनियाभर के दुख मिले हैं,,,दुख सबकी जिंदगी का हिस्सा है
एक चक्र है जो चलता रहता है जब तक जिंदगी चलती है आज खुशी है तो इसके पीछे एक दुख
भी होगा,,, अगर दुख सामने खड़ा
है तो उसके पीछे कहीं न कहीं कोई खुशी भी छुपी होगी,,,बस
आपको तय करना है दुख को लेकर बैठना है या उसे झेलने की ताकत खुद में जगानी है
क्योंकि वो ज्यादा दिन तक साथ नहीं रहने वाला,,, मुश्किल
है ये करना पर यही एक रास्ता है जिससे हर दिन परेशान होने से बचा जा सकता है।  

निष्कर्ष हॉस्पिटल
पहुंचते हुए कई तरह की बातें सोच रहा था ये सब बातें तभी याद आती है जब मन में
हलचल हो,,, जब कोई रास्ता नजर न
आये,,,,कुछ ही देर में
निष्कर्ष हॉस्पिटल के बाहर पहुंच गया,,, उसने
पापा को फोन किया तो उन्होंने उसे काश्वी का पता बताया,,,,
तीसरे फ्लोर के आईसीयू में थी काश्वी,,,, आईसीयू के बाहर उत्कर्ष खड़े
थे निष्कर्ष उनके पास पहुंचा और उन्हें गले लगा लिया,,,दोनों
की आंखों में आंसू थे उत्कर्ष ने आईसीयू की तरफ इशारा कर निष्कर्ष को दिखाया,,,, 

  

निष्कर्ष अंदर जाने
लगा तो एक नर्स ने उसे रोक दिया,,, उत्कर्ष
ने बताया कि अंदर किसी को जाने नहीं दे रहे ,,, निष्कर्ष
ने दरवाजे से ही काश्वी को देखा,,,वो
लड़की जिसे हमेशा हंसते खेलते देखा था निष्कर्ष ने आज खामोश हॉस्पिटल के बेड पर सो
रही थी चारों तरफ कई तरह की मशीनें लगी थी,,,निष्कर्ष
काफी देर उसे देखता रहा उसे यकीन नहीं हो रहा था कि ये सब हो रहा है,,,, 

  

उत्कर्ष ने निष्कर्ष
के कंधे पर हाथ रखा और उसे बैठने के लिये कहा,,,निष्कर्ष
वो ठीक है डॉ ने कहा है एक दो दिन ऑबर्जरवेशन में रहना होगा फिर वॉर्ड में शिफ्ट
कर देंगे,,, यहां किसी को रूकने
नहीं देते,,, तुम घर चलो,,, सुबह आते हैं,,,तुम भी थक गये होगे इतना लंबा
सफर किया है 

  

मैं ठीक हूं,,, मुझे यही रहना है,,, निष्कर्ष ने कहा,,,, 

  

मैं जानता हूं,,, निष्कर्ष तुम्हें कैसा लग रहा
है लेकिन यहां का रूल है यहां रूकना अलॉउड नहीं है,,, तुम
अभी चलो हम सुबह आएंगे,,, घबराओ
मत यहां के डॉक्टर्स बहुत अच्छे है कुछ प्रोब्लम नहीं होगी कोई बात होगी तो हमें
कॉल कर लेंगे,,, उत्कर्ष ने कहा 

  

निष्कर्ष एक बार फिर
दरवाजे से काश्वी को देखने लगा उसका मन नहीं था जाने का पर वहां रूक नहीं सकता था
इसलिये पापा के साथ उनके घर आ गया,,,,पंद्रह
मिनट में दोनों घर पहुंच गये,,,,,, पहली
बार निष्कर्ष अपने पापा के इस घर में आया था लेकिन अंदर आकर उसे लगा कि वो अपने
पुराने घर में है जैसे मां को पंसद था वैसा ही घर सजाया था पापा ने,,, मां,
पापा और निष्कर्ष की कई तस्वीरें लगी थी वहां,,, घर के हर कोने में शांति जरूर
थी लेकिन यहां की एक एक चीज उसे अपनी सी लग रही थी,, शायद
आज वो पापा को करीब महसूस कर रहा था इसलिये उसे सब अपना सा लग रहा था,,,,निष्कर्ष को एक कमरा दिखाकर
पापा ने उससे खाने के लिये पूछा लेकिन निष्कर्ष ने मना कर दिया,,,, 

  

कुछ देर बाद वो हाथ
में दो कप कॉफी लेकर उसके कमरे में आ गये,,,निष्कर्ष
को कॉफी देते हुए उत्कर्ष ने कहा,,, देखो
सब ठीक हो जाएगा,,, डॉ ने कहा है कुछ ही
दिनों में वो पहले जैसी हो जाएगी,,, 

  

आप उसके साथ थे उस वक्त,,,,निष्कर्ष ने पूछा 

  

हां,,,वहीं था थोड़ी दूर,,,,वो केबल कार में थी,,फोटोग्राफ ले रही थी हमेशा की
तरह बहुत एक्साइटेड थी उसे पंसद आई थी वो जगह पर अचानक उसमें कुछ टेक्नीकल फॉल्ट
हुआ और वो नीचे गिर गई,,, ये
शुक्र था कि किनारे के करीब आ गई थी इसलिये वापस उपर खींच पाये अगर बीच में हुआ
होता तो पता नहीं क्या होता,,,,काश्वी
में बहुत हिम्म्त है निष्कर्ष उसे कमजोर मत समझो,,, कुछ
ही दिनो में पूरी तरह से फिट हो जाएगी,,,, उत्कर्ष
ने कहा 

  

हां मैं जानता हूं पर
अभी तो वो तकलीफ में है,,, उससे
मिलना चाहता हूं,,उसके पापा भी बहुत
परेशान हो गये जब बताया तो, सब
लोग दुखी है इस वक्त,,,, निष्कर्ष
ने कहा 

  

हां निष्कर्ष दुखी तो
होंगे ही पर सब जल्दी ठीक हो जाएगा,,, चलो
अब थेाड़ा आराम करो हम सुबह चलेंगे हॉस्पिटल,,,कुछ
चाहिए हो तो बताना,,,, उत्कर्ष ये कहकर वहां से चले गये  

  

काश्वी से मिलने के
बाद ये पहली बार था जब निष्कर्ष को उसकी जरूरत थी और वो उसके पास नहीं था ये रात
काटनी आसान नहीं थी निष्कर्ष के लिये,,,, पर
वो कोशिश कर रहा था,,, उसे
काश्वी की बातें याद आ रही थी और ये भी कि वो हमेशा पॉजिटिव रहती है कुछ बुरा भी
हो तो रोकर अपना दुख जता लेती है लेकिन उसके बाद उसे एक एक्सपीरिंयस की तरह लेकर
आगे बढ़ जाती है 

  

रात भर जैसे तैसे
सुबह का इंतजार में निष्कर्ष कभी जागा कभी सोया,,,, सुबह
तैयार होकर वो उत्कर्ष के साथ हॉस्पिटल आ गया,,, डॉ
से बात की पता चला कि पहले से कुछ ठीक है काश्वी एक दो दिन में उसे आईसीयू से
वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा,,, निष्कर्ष
ने कुछ राहत की सांस ली और काश्वी के पापा को भी फोन कर पूरा अपडेट देता रहा,,,, आईसीयू के बाहर वेटिंग एरिया
में अब निष्कर्ष और उत्कर्ष ही थे,,,, 

  

दोनों चुप थे फॉरमेलिटी
के अलावा दोनों के बीच अब तक कोई खास बात नहीं हुई थी,,, उत्कर्ष
के फोन पर एक कॉल आई और वो कह रहे थे कि अभी नहीं आ सकता,,,, 

  

निष्कर्ष ने सुना तो
उसे लगा कि उसके पापा काश्वी की वजह से नहीं जा पा रहे हैं तो उसने पापा से कहा कि
अगर आपको कहीं जाना है तो आप जाइये मैं हूं यहां,,,  

  

हां वो एक जरूरी काम
था ठीक है तुम यही रूको कोई बात हो तो मुझे फोन करना,,, मैं
थोड़ी देर में आ जाउंगा,,, निष्कर्ष
ने कहा 

  

उत्कर्ष वहां से चले
गये,,, निष्कर्ष वहीं इंतजार
करता रहा,,,काफी घंटे बाद एक
नर्स ने उसे आकर कहा कि काश्वी उसे बुला रही है और वो मिल सकता है 

  

निष्कर्ष तुरंत उठा
और अंदर आ गया,,, काश्वी के सर पर
पट्टी बंधी थी हाथ और पैर में फ्रेक्चर था,, कई
जगह गहरे जख्म थे,,, उसकी आंखे बंद थी,,, निष्कर्ष ने काश्वी के पास
जाकर उसका नाम लिया तो काश्वी ने आंखे खोली,,,, उसके
चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई,,,, निष्कर्ष
को कई महीनों बाद देख रही थी काश्वी,,,, 

  

निष्कर्ष काश्वी के
पास जाकर बैठ गया और उसका हाथ पकड़कर रोने लगा,,,, 

  

काश्वी परेशान हो गई
और कहा,, ये क्या है मैं ठीक
हूं,, मुझे कुछ नहीं हुआ,,,, 

  

निष्कर्ष कुछ बोल
नहीं पा रहा था,,, कुछ देर वो यूं ही
बैठा रहा फिर कहा,,, सॉरी काश्वी मैंने
तुम्हें अकेला छोड़ दिया मुझे तुम्हारे पास होना चाहिए था,,,,, 

  

तुम हमेशा मेरे साथ
हो निष्कर्ष,,,, जो हुआ वो एक
एक्सीडेंट था इसमें किसी की गलती नहीं थी,,, और
वैसे एक तरह से अच्छा ही हुआ तुम यहां आये तो,,,कितने
महीने हो गये तुम्हें देखे,,,, काश्वी
ने कहा 

  

तुम पागल हो काश्वी,,, अपनी हालत देखो तुम्हें अभी
भी ये सब मजाक लग रहा है,,, निष्कर्ष
ने कहा 

  

अरे कुछ नहीं है
देखना कुछ दिन में बिलकुल ठीक हो जाएगा,,, मैंने
डॉक्टर से बात की उन्होंने कहा बस एक महीने में सारे फैक्चर ठीक हो जाएंगे और मैं
फोटोग्राफी फिर से कर पाउंगी,,, काश्वी
ने कहा 

  

हां ऐसा ही होगा,,, पर एक बात बताओ इतने बड़े
एक्सीडेंट के बाद भी तुममें इतनी हिम्मत कैसे है 

  

बताया तो था तुमसे
हिम्मत मिलती है साथ रहो मुझे कभी कुछ नहीं होगा काश्वी ने कहा 

   

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रचनाएँ
तलाश में हूं खुद की
5.0
अपनी तलाश की है कभी, कभी खुद को ढूंढने निकले हैं, फुर्सत के लम्हों में कभी खुद से बात की है, कभी जाना क्या चाहता है दिल, हालातों में गुम होने पर तन्हाई की रात में खुद से टकराएं हैं कभी, कभी चलते चलते यूं ही रुक कर पीछे मुड़कर देखा है, सोचा कहां छोड़ आये खुद को, किस मोड़ पर खुद को खो दिया, किस मोड़ पर खुद से फिर मिले, हां, पता है, ये सब सोचने का टाइम किसके पास है, टाइम हो न हो, सवाल तो है, सोच का दायरा छोटा हो, पर जवाब बड़ा है, यूं ही चलते चलते कोई बता जाता है, यूं ही चलते चलते कोई समझा जाता है, यूं ही चलते चलते कोई खुद को खुद से मिलवा जाता है, ये कहानी भी ऐसी ही है अपने आप को तलाशने की, एक सफर अपने आप तक पहुंचने का। काश्‍वी और उत्‍कर्ष एक दूसरे के करीब आये और तब दोनों को एहसास हुआ कि उनकी जिदंगी कितनी अधूरी थी एक तलाश जो हमेशा से उन्‍हें थी धीरे – धीरे पूरी होने को है…
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भाग–1 बिंदास काश्‍वी

2 अगस्त 2022
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कहानी शुरु होती है एक स्कूल के प्रिंसिपल रुम से जहां एक 10 साल की बच्ची को उसी के पेरेंटस के सामने प्रिंसिपल डांट रही है, “मिस्टर कुमार आपकी बेटी इतनी शरारती है, इसकी वजह से एक बच्चे का हाथ टूट गया, इ

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भाग–2 काश्‍वी का नया दोस्‍त

3 अगस्त 2022
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13
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काश्वी के बड़े होने के सिलसिले में कई मोड़ आए, कभी वो खुद से सवाल करती, तो कभी कोई उससे, कब खुश होती, कब उदास उसे खुद भी नहीं पता चलता, दूसरी लड़कियों से कुछ अलग थी, उसके पापा उससे अक्सर पूछते थे कि उ

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भाग–3 जिदंगी की तलाश

5 अगस्त 2022
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काश्वी ने अपने पापा को काम्पिटीशन के बारे में बताया, वो इतनी खुश थी कि उसके पापा ने झट से हां कर दी, रात भर पूरा परिवार उसकी तस्वीरों में से 10 ऐसी तस्वीरें ढूंढता रहा जो उसके टेलेंट को सही - सही दिखा

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भाग–4 धुंधली होती खुशियां

6 अगस्त 2022
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 निष्‍कर्ष की बात ने काश्‍वी की सारी खुशी को धुंधला कर दिया। थोड़ी देर पहले तक वो खुद पर इतरा रही थी लेकिन अब उसे खुद पर ही शक होने लगा। धीरे – धीरे निराशा उसे घेरने लगी और वो चुपचाप एक कोने में जाकर

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भाग–5 जिंदगी की झलक

17 अगस्त 2022
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काश्‍वी के करियर का ये मोड़ उसके परिवार को नए उत्‍साह से भर गया। घर लौटते हुए सब इसी के बात करते रहे। पापा ने काश्वी से पूछा “एक महीने की वर्कशॉप, कब से जाना है?” “दो दिन बाद रजिस्ट्रेशन कराने जाना है

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भाग –6 पहाड़ों का सफर

18 अगस्त 2022
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तेरह घंटे का सफर शुरू तो बहुत जोश के साथ हुआ लेकिन दिन चढ़ते-चढ़ते सबका जोश ठंडा होने लगा। बस में बातों का सिलसिला अहिस्ता अहिस्ता थमने लगा। अब बस, बस के चलने की आवाज और हवा का शोर सुनाई दे रहा है। हम

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भाग –7 बस एक नजर

21 अगस्त 2022
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पहाड़ों की शाम बहुत शांत होती है यहां सच में आप महसूस कर सकते हैं कि शाम हो गई है बड़े शहरों की तरह यहां ट्रेफिक का शोर नहीं होता जिसमें पंछियों की आवाज गुम हो जाती हैं। यहां शाम होते ही पंछी अपने घरो

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भाग –8 जिदंगी ढूंढने निकला जब भी…

22 अगस्त 2022
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3
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काश्वी अब थोड़ी कंफर्टेबल हो गई, काश्वी ने उत्कर्ष से पूछा, “आपने मेरी फोटोग्राफ देखी हैं?” उत्कर्ष ने सिर हिला कर हां कहा और ये भी कहा कि काश्वी को पहला प्राइज देने का आखिरी फैसला उन्होंने ही लिया था

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भाग –9 पुराना कैमरा और नया दोस्‍त

23 अगस्त 2022
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“फोटोग्राफी एक प्रोफेशन से ज्यादा पेशन है, अगर चीजों को देखकर आपको उसमें कुछ खास नजर नहीं आता तो आप एक अच्छे फोटोग्राफर नहीं बन सकते, कैमरे की नजर से पहले अपनी नजर और नजरिये को समझना जरुरी है यहां क्ल

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भाग–10 तुम सवाल बहुत करती हो

24 अगस्त 2022
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रात के बाद फिर सुबह हुई, काश्वी और दूसरे फोटोग्राफर को आज बाहर भेजा जा रहा है जहां वो अपने फोटोग्राफी के हुनर को निखार सके, अपने अपने कैमरे के साथ सब निकलने के लिये लॉबी में इकट्ठा हो गये, काश्वी की न

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भाग–11 नीला आसमान और तुम

25 अगस्त 2022
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अपना पहला एसाइनमेंट देखने के लिये सभी एक्‍साइटेड हैं लेकिन वापस आने के बाद से काश्वी काफी बेचैन  है, वो काफी देर से हॉल के बाहर कोरिडोर के एक छोर से दूसरे छोर तक चक्कर लगा रही है,  निष्कर्ष काफी देर त

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भाग–12 क्‍या हम दोस्‍त हैं?

26 अगस्त 2022
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करीब दो घंटे तक सबकी तस्वीरों पर खूब चर्चा हुई गलतियों और खूबियों को बताने के बाद उत्कर्ष वहां से चले गये, निष्कर्ष अब भी चुप रहा उसने काश्वी से कोई बात नहीं की, दोनों वहां से कोरिडोर की तरफ निकले, क

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भाग–13 मेरा घर कहीं खो गया है !

28 अगस्त 2022
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निष्कर्ष को ऐसे देखकर काश्वी परेशान हो गई और उसने पूछ ही लिया “क्या हुआ? बात क्या है अचानक सीरीयस क्‍यों हो गये?”  “कुछ नहीं बस यूं ही” निष्कर्ष ने जवाब दिया  “नहीं.. कुछ तो है आप और आपके पापा के बी

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भाग–14 नाराज क्‍यूं हो तुम?

28 अगस्त 2022
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 “पापा तो जैसे अपने कैमरे को भूल ही गये थे, उनके लिये अपने परिवार के लिये पैसा कमाना ज्यादा जरूरी था पर मां को लग रहा था कि ऐसे वो अपने सपनों के साथ समझौता कर रहे हैं, जिस कैमरे की वजह से वो दोनों मिल

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भाग–15 काश्वी तुम यहां कैसे आई?

28 अगस्त 2022
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 निष्‍कर्ष सीधा अपने कमरे में चला गया उसने किसी से कोई बात नहीं की, कुछ देर बाद काश्‍वी भी अपने कमरे में आ गई रात भर वो निष्‍कर्ष के मैसेज या फोन का इंतजार करती रही। रात गुजर गई और सुबह के 9 बजे तक भ

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भाग–16 बोलो दोगे मेरा साथ

9 सितम्बर 2022
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निष्कर्ष इधर–उधर सब तरफ काश्वी को ढूंढने लगा, उसने काश्‍वी को फोन भी किया लेकिन फोन लगा नहीं, वो ज़ोर-ज़ोर से चिल्‍लाकर काश्‍वी को बुलाने लगा लेकिन काश्‍वी का कुछ पता नहीं लग रहा था, उसने थोड़ी दूर जा

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भाग–17 कुछ सामने है तो कुछ छुपा है

13 सितम्बर 2022
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रात को अकेले अपने कमरे में काश्वी ने उन किताबों में से एक को पढ़ना शुरू किया, उसे पढ़ते हुए काश्वी को निष्कर्ष की बात याद आने लगी, निष्‍कर्ष ने उसे ये किताबें इसलिये दी जिससे वो अकेला ना महसूस करें और

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भाग–18 दोस्‍ती में दीवार ?

29 अक्टूबर 2022
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निष्‍कर्ष को इस तरह अचानक देखकर उत्कर्ष को कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन काश्वी एक दम शॉक थी। निष्‍कर्ष का चेहरा देखकर उसे समझ आ गया कि वो क्या सोच रहा है, उत्‍कर्ष के साथ काश्‍वी को ऐसे देखकर निष्‍कर्ष को

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भाग–19 आखिरी असाइनमेंट

3 नवम्बर 2022
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जो बात हमें तकलीफ देती है उसे दिमाग से निकालना इतना आसान नहीं होता और उसे भूलकर किसी और चीज पर ध्‍यान लगाना काफी मुश्किल होता है, निष्कर्ष और उसके पापा का रिश्‍ता अब उस स्‍टेज पर पहुंच गया है जहां दोन

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भाग–20 मुझसे मिलोगे दिल्ली में?

4 नवम्बर 2022
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एक तरफ बर्फ से ढके पहाड़ इौर दूसरी तरफ रंग बिरंगा छोटा सा बाज़ार, निष्‍कर्ष और काश्‍वी अपनी थीम की तलाश करते आगे बढ़ने लगे। दुकानों के बाहर लटके रंग बिरंगी चीजें, ठंड का एहसास कराते गर्म कपड़ों से सजे

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भाग–21 कहानी अनकही

14 नवम्बर 2022
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निष्कर्ष ने काश्वी से पूछा एक बात बताओ, “तुम तो दिल्ली में रही हो हमेशा, फिर नेचर से कितनी करीबी कैसे हो गई? दिल्ली की लड़कियों को तो बड़े बड़े मॉल्स और फोरेन ट्रिप्स पर जाने का शौक होता है और तुम यहा

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भाग–22 एक खूबसूरत रिश्‍ता

30 जनवरी 2023
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सुबह जब निष्‍कर्ष उठा तो उसने अपने फोन पर कई मिस कॉल देखी, रात के ढाई बजे काश्‍वी क्‍यों फोन कर रही थी? ये सोचकर निष्‍कर्ष कुछ परेशान भी हुआ उसने तुंरत काश्‍वी को कॉल किया लेकिन फोन उठा नहीं, शायद अब

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भाग–23 सबसे बड़ी उलझन

30 जनवरी 2023
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कुछ देर तक सब शांत रहा, काश्वी की नजर पहले उत्कर्ष पर गई जो चुप हैं शायद किसी गहरी सोच में हैं, फिर उसने निष्कर्ष को देखा जो उसे ही देख रहा है, निष्कर्ष भी चुप है, कुछ सैकेंड बाद हॉल की शांति तालियों

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भाग–24 प्‍यार के पड़ाव

1 फरवरी 2023
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एक और पड़ाव पार कर लिया निष्कर्ष और काश्वी ने अपनी दोस्ती का, एक महीने के अंदर ही दोनों इतने गहरे दोस्त बन गये कि अब एक दूसरे की जिंदगी से अच्छी तरह परिचित हैं   रात तो गहरी हो रही है लेकिन काश्वी को

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भाग–25 वापसी

2 फरवरी 2023
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काश्वी मुस्कुराते हुए उत्कर्ष के ऑफिस से बाहर निकली, उसे खुशी है कि निष्कर्ष अपने पापा के बारे में जो सोच रहा है वो गलत है और एक न एक दिन दोनों फिर साथ होंगे, ये कैसे होगा ये काश्वी को नहीं पता पर एक

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भाग–26 “ये क्या है काश्वी?”

8 फरवरी 2023
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 पापा के जाने के बाद काश्वी ने अपना फोन चेक किया, निष्कर्ष का मैसेज था, उसे भी नींद नहीं आ रही थी इसलिये मैसेज किया, काश्वी ने टाइम देखा तो रात के तीन बज रहे थे, उसने सोचा अब सुबह ही बात करेगी निष्कर्

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भाग–27 दूर कैसे रह पाएंगे?

10 अप्रैल 2023
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काश्वी ने देखा तो उसका ईमेल खुला हुआ है वहीं मेल जो उत्कर्ष ने उसे किया… मेल में उत्कर्ष ने काश्वी को रिमांइड कराया कि उसे जल्द एडमिशन के बारे में फैसला करना है… काश्वी सब समझ गई… उसका डर अब उसके सामन

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भाग–28 यादगार सफर

26 जुलाई 2023
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निष्कर्ष के कहने पर काश्वी ने उत्कर्ष को रिप्लाई किया और एडमिशन के लिये हां कर दिया… कुछ घंटे बाद ही रिप्लाई आया जिसमें कंफरमेशन के साथ काश्वी को 15 दिन में ज्वाइन करने को कहा गया रिप्लाई आते ही काश्

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भाग–29 सच से सामना

12 सितम्बर 2023
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फ्लाइट में पूरा समय निष्कर्ष ने काश्वी से उदयपुर की बात की… उसने बताया कि वो जब भी उदयपुर आता था तो उसकी मां उसे अपने बचपन की कहानियां सुनाती थी… “रेगिस्तान के बीच पहाड़ों और झीलों से घिरा एक छोटा सा

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भाग–30 हर वक्त साथ रहूंगा

21 सितम्बर 2023
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निष्कर्ष कुछ उदास है… काश्वी ने ठीक कहा था उसे नींद नहीं आ रही है… बहुत बैचेनी है… जब कुछ समझ नहीं आया तो निष्कर्ष ने अपने पापा को फोन किया…   कुछ देर घंटी बजने के बाद उत्कर्ष ने फोन उठाया वो कुछ घबर

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भाग–31 उत्‍कर्ष का सच

3 नवम्बर 2023
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 काश्वी चली गई और निष्कर्ष अपने घर लौट आया… कई घंटे की यात्रा के बाद काश्वी पहुंच गई… एयरपोर्ट पर पहुंचते ही सबसे पहले उसने निष्कर्ष को फोन किया… निष्कर्ष ने उसे वहीं रूकने को कहा… काश्वी कुछ पूछ प

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भाग–32 नया चैप्‍टर

3 नवम्बर 2023
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 सुबह हुई और काश्वी की जिंदगी का नया चैप्टर शुरू हुआ,,, नया देश,, नया कॉलेज और नये लोग पर एक डोर थी जो उसे घबराने या डरने नहीं दे रही थी पहली बार वो नये माहौल में भी इतनी कांफिडेंट थी,,,, वो डोर

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भाग–33 मुझे तुम्हारे पास होना चाहिए था

3 नवम्बर 2023
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 हम हमेशा सोचते है कि हमसे ज्यादा दुख और तकलीफ किसी को नहीं,,,दूसरा हमेशा खुद से खुश ही लगता है,,,किसी की तकलीफ का एहसास तभी होता है जब आप उसी तकलीफ को महसूस करते है,,और उस वक्त जो इसे समझ जाये वो

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भाग–34 सामना करो अपने डर का

3 नवम्बर 2023
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 निष्कर्ष को देखकर काश्वी काफी खुश थी डॉक्टर्स भी हैरान थे उसकी इंप्रूवमेंट देखकर,,, अगले ही दिन काश्वी को आईसीयू से वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया गया,,,,कोई ऐसा पास हो जिससे जिंदगी की हर सांस जुड़ी हो त

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भाग–35 तलाश आज पूरी हुई

3 नवम्बर 2023
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 जब सवालों की भीड़ लग जाये तो जवाब तलाशने पड़ते हैं और जवाब कहां मिलेगा ये सबसे बड़ा सवाल होता है,,,निष्कर्ष के सामने भी अब ये हालात थे काश्वी के सवालों के जवाब उसके पास नहीं थे और जो सवाल उसके मन म

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