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भाग –9 पुराना कैमरा और नया दोस्‍त

23 अगस्त 2022

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“फोटोग्राफी एक प्रोफेशन से ज्यादा पेशन है, अगर चीजों को देखकर आपको उसमें कुछ खास नजर नहीं आता तो आप एक अच्छे फोटोग्राफर नहीं बन सकते, कैमरे की नजर से पहले अपनी नजर और नजरिये को समझना जरुरी है यहां क्लासरूम में जो आपको पढ़ाया जाएगा उससे कहीं ज्यादा नोलेज आपको बाहर फील्ड में मिलेगी तो ये अच्छा होगा कि आप
क्लास में समय बर्बाद करने से ज्यादा बाहर समय बिताए। इस वर्कशॉप की कुछ स्टेज हमने तय की है आज आपको कैमरे की फंक्शन बताए जाएंगे और कल से आपका फोटोग्राफी मिशन शुरु होगा, हर दिन एक नई जगह एक नई खोज में आप सब जाएंगे”

उत्कर्ष की इन सभी बातों को काश्वी और बाकी सबने बड़े ध्यान से सुना, उन्‍हें ये काफी एक्साइटिंग लगा, उन्‍होंने पूरा प्लान समझा। उन्‍हें बताया गया कि दस स्टूडेंट के बैच को दो दो की पांच टीमों में बांटा जाएगा और सभी को जो टास्‍क मिलेगा उसे पूरा करना होगा। अब तक सब कुछ अच्‍छा लग रहा है स्‍टूडेंटस को, सब तैयार हैं अपने पहले असाइनमेंट के लिये लेकिन उत्कर्ष ने इसके बाद जो कहा उसे सुनकर सब दंग रह गये, उत्कर्ष ने अपने असिसटेंट को सभी को एक-एक कैमरा देने को कहा, हर किसी को एक कैमरा मिल गया लेकिन उन कैमरों को देखकर सब चौंक गये

दरअसल डिजीटल टेक्नॉलोजी के इस दौर में उन सबको पुराने जमाने के फोटोरील वाले कैमरे दिए गए, उनमें से कुछ ने तो पहली बार ये कैमरे देखे और ये सवाल भी एक स्टूडेंट ने कर दिया कि ये कैमरे तो बहुत पुराने हैं इनसे कैसे फोटो खींचेंगे, इसे तो चलाना भी नहीं आता

उत्कर्ष मुस्कुराए, वो जानते थे कि नए जमाने के ये बच्चे डिजीटल कैमरों और हाईटेक टेक्नोलॉजी के अलावा कुछ और नहीं जानते। उत्कर्ष के पास इसका जवाब भी है, उन्होंने कहा कि अगर फोटोग्राफी की बारिकियां सीखनी है तो पुराने कैमरों से अच्छा और कुछ नहीं, लाइट, फोकस और विजन सही मायने में इन्हें समझने के लिये ये कैमरे सही है। उत्कर्ष ने सभी को कैमरे चलाने सिखाए लेकिन क्लास खत्म होने के बाद भी कई स्टूडेंटस इस बात को लेकर परेशान दिखे कि इन कैमरों से वो अच्छा कैसे करेंगे जबकि इसके बारे में उन्हें कुछ पता ही नहीं…

काश्वी भी अपने नए कैमरे के फंक्शन जानने और अपने नये दोस्त को समझने में लगी थी देर शाम तक वो बाहर कैमरे के साथ अलग-अलग चीजों को लेंस से देखती रही, वहां से गुजर रहे निष्कर्ष ने काश्वी को देखा तो उसके पास आ गया। काश्वी
ने निष्कर्ष को देखा तो उससे बात करने के लिये आगे बढ़ गई, काश्वी ने निष्कर्ष को सुबह की मदद के लिये थैंक्स कहा पर निष्कर्ष ने उल्टा उससे पूछा कि वो आखिर थी कहां?

“तुम थी कहां इतनी देर कैसे हो गई सुबह?”, निष्कर्ष ने पूछा

काश्वी मुस्कुराई और कहा, “हां वो मैं बाहर चली गई थी, ये जगह बहुत अच्छी है घूमते-घूमते टाइम का पता ही नहीं चला, बहुत मजा आ रहा था”

“हां ये जगह है ही ऐसी जो यहां आता है बस यही खो जाता है पर तुम ऐसे अकेले बाहर मत जाया करो, नई जगह है किसी को साथ ले जाना ठीक रहेगा” निष्‍कर्ष ने कहा”

“हां पर मेरा कोई दोस्त नहीं यहां, तो कैसे?”, काश्वी ये कहकर चुप हो गई

“दोस्त तो बनाने पड़ते है, किसी से बात होगी तो दोस्त भी बन जाएंगे”, निष्कर्ष ने जवाब दिया

“मैंने तो यहां सिर्फ आप से ही बात की है तो आप ही दोस्ती कर लो”, काश्वी ने शरारत भरी मुस्कान के साथ कहा

निष्कर्ष काश्वी की बात सुनकर चौंक गया, हमेशा चुपचाप रहने वाली काश्वी आज कुछ अलग सी लगी उसे

“हां हम दोस्त बन सकते हैं”, निष्कर्ष ने जवाब दिया

“तो ठीक है फिर अब मुझे जरूरत होगी तो मैं आपसे बात कर लूंगी ओ के?”, काश्वी ने निष्कर्ष की बात पर कहा

“अच्छा वो तो ठीक है पर अभी अंदर चलो सब लोग डिनर के लिये इंतजार कर रहे होंगे”, निष्कर्ष ने काश्वी को अंदर जाने का इशारा करते हुए कहा

डिनर के बाद सब अपने कमरे में चले गये, कुछ देर बाद काश्वी फिर अपने कैमरे के साथ दिखाई दी, बहुत कोशिश की पर उसे कुछ परेशानी हो रही थी कैमरा चलाने में, काश्वी ने सोचा शायद निष्कर्ष उसकी कुछ मदद कर सके, काश्वी ने निष्कर्ष को एसएमएस किया

'एक हेल्प चाहिए आपसे', एसएमएस में लिखा

कुछ सैंकड के बाद ही निष्कर्ष का फोन काश्वी के फोन पर आया

“हां बोलो काश्वी क्या हुआ, सब ठीक है न?, निष्कर्ष ने पूछा

“हां सब ठीक है बस मुझे ये जो नया कैमरा मिला है उसे लेकर कुछ कंफ्यूजन है क्या आप मेरी हेल्प कर सकते हो”, काश्वी ने पूछा

“नया कैमरा कौन सा? वो पापा ने दिया है पुराने स्टाइल का? अच्छा तो उसे चलाने में दिक्क्त हो रही है, कोई बात नहीं मैं मदद कर सकता हूं बताओ क्या हुआ?”, निष्कर्ष ने पूछा

“आप अभी आ सकते हो”, काश्वी ने पूछा

“अभी… रात के दस बजे है.. इस वक्त? कल सुबह मिलते है” निष्कर्ष ने थोड़ा संकोच करते हुए कहा

“मुझे नींद नहीं आएगी जब तक ये कंफ्यूजन दूर नहीं होगा, प्लीज अगर पोसिबल हो तो अभी”, काश्वी ने फिर कहा

“ठीक है एक काम करते है नीचे गार्डन में आ जाओ, वहीं मिलते है ठीक है?”, निष्कर्ष ने कहा

“हां मैं बस पांच मिनट में आती हूं थैंक्स” कहकर काश्वी ने फोन रख दिया

कुछ मिनट में ही काश्वी और निष्कर्ष खुले आसमान के नीचे थे, हल्की ठंडी हवा के बीच हल्की रोशनी में पहाड़ों की एक शाम है ये, काश्वी के हाथ में कैमरा देख कर निष्कर्ष ने उसे देने का इशारा किया और पूछा बताओ क्या कंफ्यूजन है?

“इसका फोकस एडजस्ट नहीं हो रहा, किस लाइट में कितना एडजस्ट करुं कुछ समझ नहीं आ रहा”, काश्वी ने कहा

“अरे वो कुछ नहीं है देखो इसे यहां से एडजस्ट करते हैं, इतनी परेशान मत हो, थोड़ा सा घूमाने से हो जाएगा, और जो फ्लैश है वो खुद ही एडजस्ट हो जाएगा बस सनलाइट कितनी तुम्हारे सब्जेक्ट पर पड़ रही है ये देखना होगा, ज्यादा टेंशन नहीं
है, ये कैमरा बेस्ट क्वालिटी का है एक दो बार पिक्चर खींचने पर सब समझ आ जाएगा”, निष्कर्ष ने काश्वी को समझाया

कुछ देर तक यूंही निष्कर्ष समझाता रहा और काश्वी सुनती रही  थोड़ी देर बाद काश्वी ने निष्कर्ष से पूछा, “आपको भी
फोटोग्राफी का शौक है?”

निष्कर्ष मुस्कुरा कर बोला हां बहुत पंसद है

“तो फिर आप इंजीनियर कैसे बन गये?”, काश्वी ने पूछा

“क्योंकि फोटोग्राफर नहीं बनना था”, निष्कर्ष ये कहते कहते कुछ संजीदा हो गया

काश्वी ये सुनकर हैरान हो गई, वो जानना चाहती है कि ऐसा क्यों है कि दुनियाभर में नाम कमाने वाले फोटोग्राफर उत्‍कर्ष राय का बेटा फोटोग्राफर नहीं बनना चाहता था, पर उससे पहले ही निष्कर्ष ने बात खत्म करते हुए काश्वी को वापस जाने के लिये कह दिया

काश्वी ने आगे कुछ नहीं पूछा और वो वापस अपने कमरे में आ गई। एक तरफ निष्कर्ष है जो काश्वी से बात करते-करते कहीं अपने अतीत में पहुंच गया, काश्वी का एक सवाल उसके जहन में गूंजने लगा वो जिस सवाल से हमेशा भागता रहा वो उसकी इस नई दोस्त ने पूछ लिया, निष्कर्ष बहुत परेशान हो गया, काफी देर तक कुछ सोचता रहा काश्वी की बातें याद करता रहा, कब उसे नींद आ गई उसे पता ही नहीं चला

दूसरी तरफ काश्वी है जो इस उलझन में है कि कहीं उसने कुछ गलत तो नहीं पूछ लिया, निष्कर्ष ने उसकी बात का जवाब क्यों नहीं दिया, ये सवाल काश्वी को परेशान करता रहा, कई तरह की बातें उसके दिल दिमाग पर छाई रही पर एक
चेहरा आंखों के आगे से हट नहीं रहा, निष्कर्ष कहीं न कहीं काश्वी को पंसद आने लगा है शायद काश्वी के लिये इस अंजान जगह पर अंजान लोगो के बीच कोई अपना है, निष्कर्ष को दोस्त बनाना काश्वी को अच्छा लग रहा है।

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रचनाएँ
तलाश में हूं खुद की
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अपनी तलाश की है कभी, कभी खुद को ढूंढने निकले हैं, फुर्सत के लम्हों में कभी खुद से बात की है, कभी जाना क्या चाहता है दिल, हालातों में गुम होने पर तन्हाई की रात में खुद से टकराएं हैं कभी, कभी चलते चलते यूं ही रुक कर पीछे मुड़कर देखा है, सोचा कहां छोड़ आये खुद को, किस मोड़ पर खुद को खो दिया, किस मोड़ पर खुद से फिर मिले, हां, पता है, ये सब सोचने का टाइम किसके पास है, टाइम हो न हो, सवाल तो है, सोच का दायरा छोटा हो, पर जवाब बड़ा है, यूं ही चलते चलते कोई बता जाता है, यूं ही चलते चलते कोई समझा जाता है, यूं ही चलते चलते कोई खुद को खुद से मिलवा जाता है, ये कहानी भी ऐसी ही है अपने आप को तलाशने की, एक सफर अपने आप तक पहुंचने का। काश्‍वी और उत्‍कर्ष एक दूसरे के करीब आये और तब दोनों को एहसास हुआ कि उनकी जिदंगी कितनी अधूरी थी एक तलाश जो हमेशा से उन्‍हें थी धीरे – धीरे पूरी होने को है…
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भाग–1 बिंदास काश्‍वी

2 अगस्त 2022
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भाग–2 काश्‍वी का नया दोस्‍त

3 अगस्त 2022
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काश्वी के बड़े होने के सिलसिले में कई मोड़ आए, कभी वो खुद से सवाल करती, तो कभी कोई उससे, कब खुश होती, कब उदास उसे खुद भी नहीं पता चलता, दूसरी लड़कियों से कुछ अलग थी, उसके पापा उससे अक्सर पूछते थे कि उ

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भाग–3 जिदंगी की तलाश

5 अगस्त 2022
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काश्वी ने अपने पापा को काम्पिटीशन के बारे में बताया, वो इतनी खुश थी कि उसके पापा ने झट से हां कर दी, रात भर पूरा परिवार उसकी तस्वीरों में से 10 ऐसी तस्वीरें ढूंढता रहा जो उसके टेलेंट को सही - सही दिखा

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भाग–4 धुंधली होती खुशियां

6 अगस्त 2022
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 निष्‍कर्ष की बात ने काश्‍वी की सारी खुशी को धुंधला कर दिया। थोड़ी देर पहले तक वो खुद पर इतरा रही थी लेकिन अब उसे खुद पर ही शक होने लगा। धीरे – धीरे निराशा उसे घेरने लगी और वो चुपचाप एक कोने में जाकर

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भाग–5 जिंदगी की झलक

17 अगस्त 2022
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काश्‍वी के करियर का ये मोड़ उसके परिवार को नए उत्‍साह से भर गया। घर लौटते हुए सब इसी के बात करते रहे। पापा ने काश्वी से पूछा “एक महीने की वर्कशॉप, कब से जाना है?” “दो दिन बाद रजिस्ट्रेशन कराने जाना है

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भाग –6 पहाड़ों का सफर

18 अगस्त 2022
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तेरह घंटे का सफर शुरू तो बहुत जोश के साथ हुआ लेकिन दिन चढ़ते-चढ़ते सबका जोश ठंडा होने लगा। बस में बातों का सिलसिला अहिस्ता अहिस्ता थमने लगा। अब बस, बस के चलने की आवाज और हवा का शोर सुनाई दे रहा है। हम

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भाग –7 बस एक नजर

21 अगस्त 2022
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पहाड़ों की शाम बहुत शांत होती है यहां सच में आप महसूस कर सकते हैं कि शाम हो गई है बड़े शहरों की तरह यहां ट्रेफिक का शोर नहीं होता जिसमें पंछियों की आवाज गुम हो जाती हैं। यहां शाम होते ही पंछी अपने घरो

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भाग –8 जिदंगी ढूंढने निकला जब भी…

22 अगस्त 2022
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काश्वी अब थोड़ी कंफर्टेबल हो गई, काश्वी ने उत्कर्ष से पूछा, “आपने मेरी फोटोग्राफ देखी हैं?” उत्कर्ष ने सिर हिला कर हां कहा और ये भी कहा कि काश्वी को पहला प्राइज देने का आखिरी फैसला उन्होंने ही लिया था

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भाग –9 पुराना कैमरा और नया दोस्‍त

23 अगस्त 2022
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भाग–10 तुम सवाल बहुत करती हो

24 अगस्त 2022
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रात के बाद फिर सुबह हुई, काश्वी और दूसरे फोटोग्राफर को आज बाहर भेजा जा रहा है जहां वो अपने फोटोग्राफी के हुनर को निखार सके, अपने अपने कैमरे के साथ सब निकलने के लिये लॉबी में इकट्ठा हो गये, काश्वी की न

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भाग–11 नीला आसमान और तुम

25 अगस्त 2022
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अपना पहला एसाइनमेंट देखने के लिये सभी एक्‍साइटेड हैं लेकिन वापस आने के बाद से काश्वी काफी बेचैन  है, वो काफी देर से हॉल के बाहर कोरिडोर के एक छोर से दूसरे छोर तक चक्कर लगा रही है,  निष्कर्ष काफी देर त

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भाग–12 क्‍या हम दोस्‍त हैं?

26 अगस्त 2022
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करीब दो घंटे तक सबकी तस्वीरों पर खूब चर्चा हुई गलतियों और खूबियों को बताने के बाद उत्कर्ष वहां से चले गये, निष्कर्ष अब भी चुप रहा उसने काश्वी से कोई बात नहीं की, दोनों वहां से कोरिडोर की तरफ निकले, क

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भाग–13 मेरा घर कहीं खो गया है !

28 अगस्त 2022
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निष्कर्ष को ऐसे देखकर काश्वी परेशान हो गई और उसने पूछ ही लिया “क्या हुआ? बात क्या है अचानक सीरीयस क्‍यों हो गये?”  “कुछ नहीं बस यूं ही” निष्कर्ष ने जवाब दिया  “नहीं.. कुछ तो है आप और आपके पापा के बी

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भाग–14 नाराज क्‍यूं हो तुम?

28 अगस्त 2022
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 “पापा तो जैसे अपने कैमरे को भूल ही गये थे, उनके लिये अपने परिवार के लिये पैसा कमाना ज्यादा जरूरी था पर मां को लग रहा था कि ऐसे वो अपने सपनों के साथ समझौता कर रहे हैं, जिस कैमरे की वजह से वो दोनों मिल

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भाग–15 काश्वी तुम यहां कैसे आई?

28 अगस्त 2022
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 निष्‍कर्ष सीधा अपने कमरे में चला गया उसने किसी से कोई बात नहीं की, कुछ देर बाद काश्‍वी भी अपने कमरे में आ गई रात भर वो निष्‍कर्ष के मैसेज या फोन का इंतजार करती रही। रात गुजर गई और सुबह के 9 बजे तक भ

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भाग–16 बोलो दोगे मेरा साथ

9 सितम्बर 2022
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निष्कर्ष इधर–उधर सब तरफ काश्वी को ढूंढने लगा, उसने काश्‍वी को फोन भी किया लेकिन फोन लगा नहीं, वो ज़ोर-ज़ोर से चिल्‍लाकर काश्‍वी को बुलाने लगा लेकिन काश्‍वी का कुछ पता नहीं लग रहा था, उसने थोड़ी दूर जा

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भाग–17 कुछ सामने है तो कुछ छुपा है

13 सितम्बर 2022
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रात को अकेले अपने कमरे में काश्वी ने उन किताबों में से एक को पढ़ना शुरू किया, उसे पढ़ते हुए काश्वी को निष्कर्ष की बात याद आने लगी, निष्‍कर्ष ने उसे ये किताबें इसलिये दी जिससे वो अकेला ना महसूस करें और

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भाग–18 दोस्‍ती में दीवार ?

29 अक्टूबर 2022
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निष्‍कर्ष को इस तरह अचानक देखकर उत्कर्ष को कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन काश्वी एक दम शॉक थी। निष्‍कर्ष का चेहरा देखकर उसे समझ आ गया कि वो क्या सोच रहा है, उत्‍कर्ष के साथ काश्‍वी को ऐसे देखकर निष्‍कर्ष को

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भाग–19 आखिरी असाइनमेंट

3 नवम्बर 2022
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जो बात हमें तकलीफ देती है उसे दिमाग से निकालना इतना आसान नहीं होता और उसे भूलकर किसी और चीज पर ध्‍यान लगाना काफी मुश्किल होता है, निष्कर्ष और उसके पापा का रिश्‍ता अब उस स्‍टेज पर पहुंच गया है जहां दोन

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भाग–20 मुझसे मिलोगे दिल्ली में?

4 नवम्बर 2022
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एक तरफ बर्फ से ढके पहाड़ इौर दूसरी तरफ रंग बिरंगा छोटा सा बाज़ार, निष्‍कर्ष और काश्‍वी अपनी थीम की तलाश करते आगे बढ़ने लगे। दुकानों के बाहर लटके रंग बिरंगी चीजें, ठंड का एहसास कराते गर्म कपड़ों से सजे

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भाग–21 कहानी अनकही

14 नवम्बर 2022
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निष्कर्ष ने काश्वी से पूछा एक बात बताओ, “तुम तो दिल्ली में रही हो हमेशा, फिर नेचर से कितनी करीबी कैसे हो गई? दिल्ली की लड़कियों को तो बड़े बड़े मॉल्स और फोरेन ट्रिप्स पर जाने का शौक होता है और तुम यहा

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भाग–22 एक खूबसूरत रिश्‍ता

30 जनवरी 2023
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सुबह जब निष्‍कर्ष उठा तो उसने अपने फोन पर कई मिस कॉल देखी, रात के ढाई बजे काश्‍वी क्‍यों फोन कर रही थी? ये सोचकर निष्‍कर्ष कुछ परेशान भी हुआ उसने तुंरत काश्‍वी को कॉल किया लेकिन फोन उठा नहीं, शायद अब

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भाग–23 सबसे बड़ी उलझन

30 जनवरी 2023
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कुछ देर तक सब शांत रहा, काश्वी की नजर पहले उत्कर्ष पर गई जो चुप हैं शायद किसी गहरी सोच में हैं, फिर उसने निष्कर्ष को देखा जो उसे ही देख रहा है, निष्कर्ष भी चुप है, कुछ सैकेंड बाद हॉल की शांति तालियों

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भाग–24 प्‍यार के पड़ाव

1 फरवरी 2023
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एक और पड़ाव पार कर लिया निष्कर्ष और काश्वी ने अपनी दोस्ती का, एक महीने के अंदर ही दोनों इतने गहरे दोस्त बन गये कि अब एक दूसरे की जिंदगी से अच्छी तरह परिचित हैं   रात तो गहरी हो रही है लेकिन काश्वी को

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भाग–25 वापसी

2 फरवरी 2023
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काश्वी मुस्कुराते हुए उत्कर्ष के ऑफिस से बाहर निकली, उसे खुशी है कि निष्कर्ष अपने पापा के बारे में जो सोच रहा है वो गलत है और एक न एक दिन दोनों फिर साथ होंगे, ये कैसे होगा ये काश्वी को नहीं पता पर एक

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भाग–26 “ये क्या है काश्वी?”

8 फरवरी 2023
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 पापा के जाने के बाद काश्वी ने अपना फोन चेक किया, निष्कर्ष का मैसेज था, उसे भी नींद नहीं आ रही थी इसलिये मैसेज किया, काश्वी ने टाइम देखा तो रात के तीन बज रहे थे, उसने सोचा अब सुबह ही बात करेगी निष्कर्

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भाग–27 दूर कैसे रह पाएंगे?

10 अप्रैल 2023
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काश्वी ने देखा तो उसका ईमेल खुला हुआ है वहीं मेल जो उत्कर्ष ने उसे किया… मेल में उत्कर्ष ने काश्वी को रिमांइड कराया कि उसे जल्द एडमिशन के बारे में फैसला करना है… काश्वी सब समझ गई… उसका डर अब उसके सामन

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भाग–28 यादगार सफर

26 जुलाई 2023
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निष्कर्ष के कहने पर काश्वी ने उत्कर्ष को रिप्लाई किया और एडमिशन के लिये हां कर दिया… कुछ घंटे बाद ही रिप्लाई आया जिसमें कंफरमेशन के साथ काश्वी को 15 दिन में ज्वाइन करने को कहा गया रिप्लाई आते ही काश्

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भाग–29 सच से सामना

12 सितम्बर 2023
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फ्लाइट में पूरा समय निष्कर्ष ने काश्वी से उदयपुर की बात की… उसने बताया कि वो जब भी उदयपुर आता था तो उसकी मां उसे अपने बचपन की कहानियां सुनाती थी… “रेगिस्तान के बीच पहाड़ों और झीलों से घिरा एक छोटा सा

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भाग–30 हर वक्त साथ रहूंगा

21 सितम्बर 2023
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निष्कर्ष कुछ उदास है… काश्वी ने ठीक कहा था उसे नींद नहीं आ रही है… बहुत बैचेनी है… जब कुछ समझ नहीं आया तो निष्कर्ष ने अपने पापा को फोन किया…   कुछ देर घंटी बजने के बाद उत्कर्ष ने फोन उठाया वो कुछ घबर

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भाग–31 उत्‍कर्ष का सच

3 नवम्बर 2023
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 काश्वी चली गई और निष्कर्ष अपने घर लौट आया… कई घंटे की यात्रा के बाद काश्वी पहुंच गई… एयरपोर्ट पर पहुंचते ही सबसे पहले उसने निष्कर्ष को फोन किया… निष्कर्ष ने उसे वहीं रूकने को कहा… काश्वी कुछ पूछ प

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भाग–32 नया चैप्‍टर

3 नवम्बर 2023
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 सुबह हुई और काश्वी की जिंदगी का नया चैप्टर शुरू हुआ,,, नया देश,, नया कॉलेज और नये लोग पर एक डोर थी जो उसे घबराने या डरने नहीं दे रही थी पहली बार वो नये माहौल में भी इतनी कांफिडेंट थी,,,, वो डोर

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भाग–33 मुझे तुम्हारे पास होना चाहिए था

3 नवम्बर 2023
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 हम हमेशा सोचते है कि हमसे ज्यादा दुख और तकलीफ किसी को नहीं,,,दूसरा हमेशा खुद से खुश ही लगता है,,,किसी की तकलीफ का एहसास तभी होता है जब आप उसी तकलीफ को महसूस करते है,,और उस वक्त जो इसे समझ जाये वो

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भाग–34 सामना करो अपने डर का

3 नवम्बर 2023
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 निष्कर्ष को देखकर काश्वी काफी खुश थी डॉक्टर्स भी हैरान थे उसकी इंप्रूवमेंट देखकर,,, अगले ही दिन काश्वी को आईसीयू से वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया गया,,,,कोई ऐसा पास हो जिससे जिंदगी की हर सांस जुड़ी हो त

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भाग–35 तलाश आज पूरी हुई

3 नवम्बर 2023
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 जब सवालों की भीड़ लग जाये तो जवाब तलाशने पड़ते हैं और जवाब कहां मिलेगा ये सबसे बड़ा सवाल होता है,,,निष्कर्ष के सामने भी अब ये हालात थे काश्वी के सवालों के जवाब उसके पास नहीं थे और जो सवाल उसके मन म

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