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भाग–18 दोस्‍ती में दीवार ?

29 अक्टूबर 2022

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निष्‍कर्ष को इस तरह अचानक देखकर उत्कर्ष को कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन काश्वी एक दम शॉक थी। निष्‍कर्ष का चेहरा देखकर उसे समझ आ गया कि वो क्या सोच रहा है, उत्‍कर्ष के साथ काश्‍वी को ऐसे देखकर निष्‍कर्ष को अच्‍छा नहीं लगा और इसलिये वो इस तरह वहां से चला गया। अपने चेहरे पर तनाव की लकीरें छुपाने की कोशिश कर रही थी काश्वी, लेकिन बहुत कोशिश के बाद भी उसका ध्यान उसी दरवाजे की तरफ था जहां से अभी अभी निष्कर्ष वापस लौट गया। काश्वी को पता है कि निष्कर्ष पर इस वक्त क्या बीत रही है, काश्वी का डर अब उसके सामने खड़ा है।   

उधर उत्कर्ष पहले की तरह अपनी बात कह रहे हैं, काश्वी की फोटोग्राफ को देखकर उसे और बेहतर करने के लिये समझा रहे हैं लेकिन काश्वी का ध्यान उनकी बातों पर बिलकुल नहीं है वो तो निष्कर्ष के बारे में सोच रही है, कुछ देर बाद उत्कर्ष को भी लगा कि काश्वी उनकी बात पर ध्यान नहीं दे रही और कुछ परेशान सी लग रही है उत्कर्ष ने आखिर पूछ ही लिया 

“क्या हुआ काश्वी, तुम्हारी तबियत ठीक है ना?” 

अपने ख्यालों से बाहर आई काश्वी ने उत्कर्ष की बात का जवाब दिया, “हां, ठीक है क्यों?” 

“नहीं मुझे लगा… चलो ऐसा करते हैं बाकी कल करेंगे अभी जाओ आराम करो”, उत्कर्ष ने कहा 

ये कहकर उत्कर्ष वहां से चले गये, पर काश्वी कुछ देर वही बैठी रही, सोच रही थी कि आखिर कुछ देर पहले हुआ क्या?   

उधर निष्कर्ष का सारा जोश अब ठंडा पड़ चुका है, वो काश्वी को सरप्राइज देने आया था पर अब खुद ही सरप्राइज हो गया है।   

काश्वी काफी देर सोचती रही, कई बार ये भी सोचा कि निष्कर्ष से जाकर बात करें पर फिर उसे डर था कि पता नहीं उसे ये सब देखकर अच्छा लगा या नहीं, जहां तक काश्वी निष्कर्ष को समझ पाई है उसे अच्छा लगना तो मुश्किल है, काफी देर तक सोचने के बाद काश्‍वी ने हिम्मत की और निष्कर्ष से मिलने उसके कमरे में गई 

निष्कर्ष काश्वी को देखकर कुछ नहीं बोला, उसे अंदर आने का इशारा किया, अंदर आते ही काश्वी ने पूछा, “दो दिन से कहां गायब थे कितने फोन किए, मैसेज किए” 

“बस कुछ बिजी था, काम हो गया तो वापस आ गया”, निष्कर्ष ने जवाब दिया 

“आप ठीक हो? क्या हुआ?”, काश्वी ने पूछा 

“कुछ नहीं, क्या हुआ? और तुम बताओ कैसे चल रही है वर्कशॉप?”, निष्कर्ष ने कहा  

“बस ठीक है सब”, काश्वी ने कहा 

“बस ठीक, थोड़ा रूककर निष्कर्ष ने फिर कहा, पापा तो बहुत खुश लग रहे थे तुम्हारे साथ” 

काश्वी निष्कर्ष को देखती रही फिर कहा, “आपको अच्छा नहीं लगा क्या?” 

निष्कर्ष ने मुस्कुराते हुए कहा, “अच्छा, बुरा, क्या फर्क पड़ता है, पर बहुत दिन बाद उन्हें हंसते हुए देखा” 

“हां उनका मूड थोड़ा अच्छा था, एक पुरानी बात बता रहे थे वो, अपने एक असाइनमेंट की”, काश्वी ने कहा 

“अच्छा है, तुम्हारे करियर के लिये ठीक होगा उनके एक्सपीयरेंस से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा”, निष्कर्ष ने कहा 

“हां ये तो है, खैर ये सब छोड़ो आप बताओ काम हो गया सब ठीक से?”, काश्वी ने बात बदलने की कोशिश की 

“हां सब ठीक हो गया, काश्वी एक काम करते हैं डिनर के टाइम मिलते हैं अभी बहुत थक गया हूं थोड़ा आराम करना चाहता हूं”, निष्कर्ष ने कहा 

काश्वी समझ गई कि अभी निष्कर्ष बात करने के मूड में नहीं है, तो वो वहां से चुपचाप चली गई 

काश्वी को ऐसे भेजने पर निष्कर्ष को थोड़ी तकलीफ भी हुई, वो सोच रहा था कि आखिर पापा को काश्‍वी के साथ ऐसे हंसते बातें करते देखकर उसे तकलीफ क्‍यों हुई? बहुत कुछ चल रहा है निष्कर्ष के दिल दिमाग में, वो खुद से ही सवाल करके उनके जवाब ढूंढने की कोशिश करने लगा, उसने खुद से कहा कि काश्वी को यहां वो ही लेकर आया ताकि वो उत्कर्ष से सीख सके और अब जब उसके पापा काश्वी से अच्छी तरह पेश आ रहे हैं उसे सब सिखा रहे हैं वो उसे क्यों बुरा लगा, क्यों काश्वी को लेकर उसके मन में इतना कुछ चल रहा है 

काफी देर तक सोचने के बाद निष्कर्ष की नजर उस गिफ्ट पर गई जो वो काश्वी के लिये लाया था, अब उसे लगा कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था काश्वी को इतने दिनों बाद देखकर उसे यूं जाने के लिये नहीं कहना चाहिए था, पर अब पछताने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं 

तीन घंटे के बाद निष्कर्ष और काश्वी फिर आमने सामने आ गये, रोज की तीह डिनर हॉल में सब जमा हुए, काश्वी वहीं सबके बीच बातें करती दिखाई दी निष्कर्ष को, निष्कर्ष उसे देखकर उसके सामने जाकर खड़ा हो गया, काश्वी अचानक उसे अपने सामने देखकर चौंक गई, फिर जैसा निष्कर्ष ने पहले सोचा था वैसा ही किया, काश्वी के आगे वो तोहफा बढ़ा दिया जो वो दिल्ली से उसके लिये लाया है  

काश्वी ने देखा कि निष्कर्ष उसे कुछ दे रहा हैं, उसने चौंक कर पूछा, “ये क्या है?” 

निष्कर्ष ने कहा, “तुम्हारे लिये है देखो?” 

वो छोटा सा बॉक्स किसी इलेक्ट्रोनिक डिवाइस का लग रहा है, काश्वी ने हैरानी से पूछा, “ये क्या है?” 

“ये सोलर बैटरी है कभी भी किसी इलेक्ट्रोनिक गैजेट जैसे फोन या लैपटॉप की बैट्री खत्म हो तो इसे उसके उपर रख दो चार्ज हो जाएगा और अगर इसे चार्ज करना हो तो सूरज की रोशनी में दो घंटे रख दो, तुम्हारे काम आएगा काश्‍वी, अगली बार जंगल ट्रिप पर जाओ तो इसे साथ ले जाना, कम से कम तुम कांटेक्ट में तो रहोगी”, ये कहकर निष्कर्ष
मुस्कुराने लगा 

“वाह, ये तो बड़े काम की चीज है, आपका इनवेंशन है?”, काश्वी ने पूछा 

“हां तुम्हारे साथ उस दिन वहां जंगल में जाने के बाद आइडिया आया, इसी को बनाने जाना पड़ा दिल्ली, सबको बहुत पंसद आया, एक बड़ा प्रोजेक्ट मिला है इसके लिये, तुम्हारी वजह से ये बना तो पहला तुम्हारे लिये”, निष्कर्ष ने खुश होकर कहा 

काश्वी गौर से उसे देखने लगी, उसे लगा कुछ घंटे पहले जो निष्कर्ष उसके सामने था वो कोई और था और अब उसका पुराना दोस्त उसके सामने है, निष्‍कर्ष को फिर से उसी मोड में देखकर काश्वी बहुत खुश हो गई, उसकी सारी झिझक और घबराहट खत्‍म हो गई, दोनों ने साथ डिनर किया और फिर काश्वी को निष्कर्ष ने उस डिवाइस को बनाने का पूरा प्रोसेस भी समझाया, हां ये अलग बात है कि काश्वी की समझ में ज्यादा कुछ नहीं आया, पर निष्‍कर्ष का
साथ इतने दिनों बाद उसे बहुत पंसद आ रहा है। 

दोस्ती ऐसी हो कि कोई दीवार बीच में न आ पाये, दोस्ती ऐसी हो कि कोई बात मन में न रह जाये, बात हो तो दिल खोल के और साथ रहे तो पूरी तरह, ये दोस्ती का अंदाज है अगर सच्ची दोस्ती करनी हो तो, 

निष्कर्ष और काश्वी भी दोस्ती के सही मायने समझ रहे हैं। निष्कर्ष और काश्वी की दोस्ती अब अगले पड़ाव की तरफ बढ़ रही है, जहां से दोनों अपने रास्ते जोड़ रहे हैं, इस तरह की फिर कभी कोई अलग न कर सके।  


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रचनाएँ
तलाश में हूं खुद की
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अपनी तलाश की है कभी, कभी खुद को ढूंढने निकले हैं, फुर्सत के लम्हों में कभी खुद से बात की है, कभी जाना क्या चाहता है दिल, हालातों में गुम होने पर तन्हाई की रात में खुद से टकराएं हैं कभी, कभी चलते चलते यूं ही रुक कर पीछे मुड़कर देखा है, सोचा कहां छोड़ आये खुद को, किस मोड़ पर खुद को खो दिया, किस मोड़ पर खुद से फिर मिले, हां, पता है, ये सब सोचने का टाइम किसके पास है, टाइम हो न हो, सवाल तो है, सोच का दायरा छोटा हो, पर जवाब बड़ा है, यूं ही चलते चलते कोई बता जाता है, यूं ही चलते चलते कोई समझा जाता है, यूं ही चलते चलते कोई खुद को खुद से मिलवा जाता है, ये कहानी भी ऐसी ही है अपने आप को तलाशने की, एक सफर अपने आप तक पहुंचने का। काश्‍वी और उत्‍कर्ष एक दूसरे के करीब आये और तब दोनों को एहसास हुआ कि उनकी जिदंगी कितनी अधूरी थी एक तलाश जो हमेशा से उन्‍हें थी धीरे – धीरे पूरी होने को है…
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भाग–1 बिंदास काश्‍वी

2 अगस्त 2022
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कहानी शुरु होती है एक स्कूल के प्रिंसिपल रुम से जहां एक 10 साल की बच्ची को उसी के पेरेंटस के सामने प्रिंसिपल डांट रही है, “मिस्टर कुमार आपकी बेटी इतनी शरारती है, इसकी वजह से एक बच्चे का हाथ टूट गया, इ

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भाग–2 काश्‍वी का नया दोस्‍त

3 अगस्त 2022
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काश्वी के बड़े होने के सिलसिले में कई मोड़ आए, कभी वो खुद से सवाल करती, तो कभी कोई उससे, कब खुश होती, कब उदास उसे खुद भी नहीं पता चलता, दूसरी लड़कियों से कुछ अलग थी, उसके पापा उससे अक्सर पूछते थे कि उ

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भाग–3 जिदंगी की तलाश

5 अगस्त 2022
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काश्वी ने अपने पापा को काम्पिटीशन के बारे में बताया, वो इतनी खुश थी कि उसके पापा ने झट से हां कर दी, रात भर पूरा परिवार उसकी तस्वीरों में से 10 ऐसी तस्वीरें ढूंढता रहा जो उसके टेलेंट को सही - सही दिखा

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भाग–4 धुंधली होती खुशियां

6 अगस्त 2022
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 निष्‍कर्ष की बात ने काश्‍वी की सारी खुशी को धुंधला कर दिया। थोड़ी देर पहले तक वो खुद पर इतरा रही थी लेकिन अब उसे खुद पर ही शक होने लगा। धीरे – धीरे निराशा उसे घेरने लगी और वो चुपचाप एक कोने में जाकर

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भाग–5 जिंदगी की झलक

17 अगस्त 2022
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काश्‍वी के करियर का ये मोड़ उसके परिवार को नए उत्‍साह से भर गया। घर लौटते हुए सब इसी के बात करते रहे। पापा ने काश्वी से पूछा “एक महीने की वर्कशॉप, कब से जाना है?” “दो दिन बाद रजिस्ट्रेशन कराने जाना है

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भाग –6 पहाड़ों का सफर

18 अगस्त 2022
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तेरह घंटे का सफर शुरू तो बहुत जोश के साथ हुआ लेकिन दिन चढ़ते-चढ़ते सबका जोश ठंडा होने लगा। बस में बातों का सिलसिला अहिस्ता अहिस्ता थमने लगा। अब बस, बस के चलने की आवाज और हवा का शोर सुनाई दे रहा है। हम

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भाग –7 बस एक नजर

21 अगस्त 2022
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पहाड़ों की शाम बहुत शांत होती है यहां सच में आप महसूस कर सकते हैं कि शाम हो गई है बड़े शहरों की तरह यहां ट्रेफिक का शोर नहीं होता जिसमें पंछियों की आवाज गुम हो जाती हैं। यहां शाम होते ही पंछी अपने घरो

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भाग –8 जिदंगी ढूंढने निकला जब भी…

22 अगस्त 2022
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काश्वी अब थोड़ी कंफर्टेबल हो गई, काश्वी ने उत्कर्ष से पूछा, “आपने मेरी फोटोग्राफ देखी हैं?” उत्कर्ष ने सिर हिला कर हां कहा और ये भी कहा कि काश्वी को पहला प्राइज देने का आखिरी फैसला उन्होंने ही लिया था

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भाग –9 पुराना कैमरा और नया दोस्‍त

23 अगस्त 2022
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“फोटोग्राफी एक प्रोफेशन से ज्यादा पेशन है, अगर चीजों को देखकर आपको उसमें कुछ खास नजर नहीं आता तो आप एक अच्छे फोटोग्राफर नहीं बन सकते, कैमरे की नजर से पहले अपनी नजर और नजरिये को समझना जरुरी है यहां क्ल

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भाग–10 तुम सवाल बहुत करती हो

24 अगस्त 2022
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रात के बाद फिर सुबह हुई, काश्वी और दूसरे फोटोग्राफर को आज बाहर भेजा जा रहा है जहां वो अपने फोटोग्राफी के हुनर को निखार सके, अपने अपने कैमरे के साथ सब निकलने के लिये लॉबी में इकट्ठा हो गये, काश्वी की न

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भाग–11 नीला आसमान और तुम

25 अगस्त 2022
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अपना पहला एसाइनमेंट देखने के लिये सभी एक्‍साइटेड हैं लेकिन वापस आने के बाद से काश्वी काफी बेचैन  है, वो काफी देर से हॉल के बाहर कोरिडोर के एक छोर से दूसरे छोर तक चक्कर लगा रही है,  निष्कर्ष काफी देर त

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भाग–12 क्‍या हम दोस्‍त हैं?

26 अगस्त 2022
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करीब दो घंटे तक सबकी तस्वीरों पर खूब चर्चा हुई गलतियों और खूबियों को बताने के बाद उत्कर्ष वहां से चले गये, निष्कर्ष अब भी चुप रहा उसने काश्वी से कोई बात नहीं की, दोनों वहां से कोरिडोर की तरफ निकले, क

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भाग–13 मेरा घर कहीं खो गया है !

28 अगस्त 2022
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निष्कर्ष को ऐसे देखकर काश्वी परेशान हो गई और उसने पूछ ही लिया “क्या हुआ? बात क्या है अचानक सीरीयस क्‍यों हो गये?”  “कुछ नहीं बस यूं ही” निष्कर्ष ने जवाब दिया  “नहीं.. कुछ तो है आप और आपके पापा के बी

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भाग–14 नाराज क्‍यूं हो तुम?

28 अगस्त 2022
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 “पापा तो जैसे अपने कैमरे को भूल ही गये थे, उनके लिये अपने परिवार के लिये पैसा कमाना ज्यादा जरूरी था पर मां को लग रहा था कि ऐसे वो अपने सपनों के साथ समझौता कर रहे हैं, जिस कैमरे की वजह से वो दोनों मिल

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भाग–15 काश्वी तुम यहां कैसे आई?

28 अगस्त 2022
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 निष्‍कर्ष सीधा अपने कमरे में चला गया उसने किसी से कोई बात नहीं की, कुछ देर बाद काश्‍वी भी अपने कमरे में आ गई रात भर वो निष्‍कर्ष के मैसेज या फोन का इंतजार करती रही। रात गुजर गई और सुबह के 9 बजे तक भ

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भाग–16 बोलो दोगे मेरा साथ

9 सितम्बर 2022
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निष्कर्ष इधर–उधर सब तरफ काश्वी को ढूंढने लगा, उसने काश्‍वी को फोन भी किया लेकिन फोन लगा नहीं, वो ज़ोर-ज़ोर से चिल्‍लाकर काश्‍वी को बुलाने लगा लेकिन काश्‍वी का कुछ पता नहीं लग रहा था, उसने थोड़ी दूर जा

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भाग–17 कुछ सामने है तो कुछ छुपा है

13 सितम्बर 2022
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रात को अकेले अपने कमरे में काश्वी ने उन किताबों में से एक को पढ़ना शुरू किया, उसे पढ़ते हुए काश्वी को निष्कर्ष की बात याद आने लगी, निष्‍कर्ष ने उसे ये किताबें इसलिये दी जिससे वो अकेला ना महसूस करें और

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भाग–18 दोस्‍ती में दीवार ?

29 अक्टूबर 2022
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निष्‍कर्ष को इस तरह अचानक देखकर उत्कर्ष को कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन काश्वी एक दम शॉक थी। निष्‍कर्ष का चेहरा देखकर उसे समझ आ गया कि वो क्या सोच रहा है, उत्‍कर्ष के साथ काश्‍वी को ऐसे देखकर निष्‍कर्ष को

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भाग–19 आखिरी असाइनमेंट

3 नवम्बर 2022
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जो बात हमें तकलीफ देती है उसे दिमाग से निकालना इतना आसान नहीं होता और उसे भूलकर किसी और चीज पर ध्‍यान लगाना काफी मुश्किल होता है, निष्कर्ष और उसके पापा का रिश्‍ता अब उस स्‍टेज पर पहुंच गया है जहां दोन

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भाग–20 मुझसे मिलोगे दिल्ली में?

4 नवम्बर 2022
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एक तरफ बर्फ से ढके पहाड़ इौर दूसरी तरफ रंग बिरंगा छोटा सा बाज़ार, निष्‍कर्ष और काश्‍वी अपनी थीम की तलाश करते आगे बढ़ने लगे। दुकानों के बाहर लटके रंग बिरंगी चीजें, ठंड का एहसास कराते गर्म कपड़ों से सजे

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भाग–21 कहानी अनकही

14 नवम्बर 2022
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निष्कर्ष ने काश्वी से पूछा एक बात बताओ, “तुम तो दिल्ली में रही हो हमेशा, फिर नेचर से कितनी करीबी कैसे हो गई? दिल्ली की लड़कियों को तो बड़े बड़े मॉल्स और फोरेन ट्रिप्स पर जाने का शौक होता है और तुम यहा

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भाग–22 एक खूबसूरत रिश्‍ता

30 जनवरी 2023
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सुबह जब निष्‍कर्ष उठा तो उसने अपने फोन पर कई मिस कॉल देखी, रात के ढाई बजे काश्‍वी क्‍यों फोन कर रही थी? ये सोचकर निष्‍कर्ष कुछ परेशान भी हुआ उसने तुंरत काश्‍वी को कॉल किया लेकिन फोन उठा नहीं, शायद अब

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भाग–23 सबसे बड़ी उलझन

30 जनवरी 2023
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कुछ देर तक सब शांत रहा, काश्वी की नजर पहले उत्कर्ष पर गई जो चुप हैं शायद किसी गहरी सोच में हैं, फिर उसने निष्कर्ष को देखा जो उसे ही देख रहा है, निष्कर्ष भी चुप है, कुछ सैकेंड बाद हॉल की शांति तालियों

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भाग–24 प्‍यार के पड़ाव

1 फरवरी 2023
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एक और पड़ाव पार कर लिया निष्कर्ष और काश्वी ने अपनी दोस्ती का, एक महीने के अंदर ही दोनों इतने गहरे दोस्त बन गये कि अब एक दूसरे की जिंदगी से अच्छी तरह परिचित हैं   रात तो गहरी हो रही है लेकिन काश्वी को

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भाग–25 वापसी

2 फरवरी 2023
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काश्वी मुस्कुराते हुए उत्कर्ष के ऑफिस से बाहर निकली, उसे खुशी है कि निष्कर्ष अपने पापा के बारे में जो सोच रहा है वो गलत है और एक न एक दिन दोनों फिर साथ होंगे, ये कैसे होगा ये काश्वी को नहीं पता पर एक

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भाग–26 “ये क्या है काश्वी?”

8 फरवरी 2023
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 पापा के जाने के बाद काश्वी ने अपना फोन चेक किया, निष्कर्ष का मैसेज था, उसे भी नींद नहीं आ रही थी इसलिये मैसेज किया, काश्वी ने टाइम देखा तो रात के तीन बज रहे थे, उसने सोचा अब सुबह ही बात करेगी निष्कर्

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भाग–27 दूर कैसे रह पाएंगे?

10 अप्रैल 2023
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काश्वी ने देखा तो उसका ईमेल खुला हुआ है वहीं मेल जो उत्कर्ष ने उसे किया… मेल में उत्कर्ष ने काश्वी को रिमांइड कराया कि उसे जल्द एडमिशन के बारे में फैसला करना है… काश्वी सब समझ गई… उसका डर अब उसके सामन

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भाग–28 यादगार सफर

26 जुलाई 2023
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निष्कर्ष के कहने पर काश्वी ने उत्कर्ष को रिप्लाई किया और एडमिशन के लिये हां कर दिया… कुछ घंटे बाद ही रिप्लाई आया जिसमें कंफरमेशन के साथ काश्वी को 15 दिन में ज्वाइन करने को कहा गया रिप्लाई आते ही काश्

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भाग–29 सच से सामना

12 सितम्बर 2023
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फ्लाइट में पूरा समय निष्कर्ष ने काश्वी से उदयपुर की बात की… उसने बताया कि वो जब भी उदयपुर आता था तो उसकी मां उसे अपने बचपन की कहानियां सुनाती थी… “रेगिस्तान के बीच पहाड़ों और झीलों से घिरा एक छोटा सा

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भाग–30 हर वक्त साथ रहूंगा

21 सितम्बर 2023
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निष्कर्ष कुछ उदास है… काश्वी ने ठीक कहा था उसे नींद नहीं आ रही है… बहुत बैचेनी है… जब कुछ समझ नहीं आया तो निष्कर्ष ने अपने पापा को फोन किया…   कुछ देर घंटी बजने के बाद उत्कर्ष ने फोन उठाया वो कुछ घबर

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भाग–31 उत्‍कर्ष का सच

3 नवम्बर 2023
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 काश्वी चली गई और निष्कर्ष अपने घर लौट आया… कई घंटे की यात्रा के बाद काश्वी पहुंच गई… एयरपोर्ट पर पहुंचते ही सबसे पहले उसने निष्कर्ष को फोन किया… निष्कर्ष ने उसे वहीं रूकने को कहा… काश्वी कुछ पूछ प

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भाग–32 नया चैप्‍टर

3 नवम्बर 2023
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 सुबह हुई और काश्वी की जिंदगी का नया चैप्टर शुरू हुआ,,, नया देश,, नया कॉलेज और नये लोग पर एक डोर थी जो उसे घबराने या डरने नहीं दे रही थी पहली बार वो नये माहौल में भी इतनी कांफिडेंट थी,,,, वो डोर

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भाग–33 मुझे तुम्हारे पास होना चाहिए था

3 नवम्बर 2023
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 हम हमेशा सोचते है कि हमसे ज्यादा दुख और तकलीफ किसी को नहीं,,,दूसरा हमेशा खुद से खुश ही लगता है,,,किसी की तकलीफ का एहसास तभी होता है जब आप उसी तकलीफ को महसूस करते है,,और उस वक्त जो इसे समझ जाये वो

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भाग–34 सामना करो अपने डर का

3 नवम्बर 2023
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 निष्कर्ष को देखकर काश्वी काफी खुश थी डॉक्टर्स भी हैरान थे उसकी इंप्रूवमेंट देखकर,,, अगले ही दिन काश्वी को आईसीयू से वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया गया,,,,कोई ऐसा पास हो जिससे जिंदगी की हर सांस जुड़ी हो त

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भाग–35 तलाश आज पूरी हुई

3 नवम्बर 2023
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 जब सवालों की भीड़ लग जाये तो जवाब तलाशने पड़ते हैं और जवाब कहां मिलेगा ये सबसे बड़ा सवाल होता है,,,निष्कर्ष के सामने भी अब ये हालात थे काश्वी के सवालों के जवाब उसके पास नहीं थे और जो सवाल उसके मन म

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