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क्या यही प्यार है?(भाग:-15)

12 जून 2023

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गतांक से आगे:-

चंचला की सांस उपर की उपर और नीचे की नीचे रह गयी जब उसने राजसी पोशाक में एक अधेड़ उम्र की औरत को अपने सामने खड़े पाया।उसने मन ही मन अनुमान लगाया कि हो ना हो ये राजकुमार सूरज की माता जी है ।उसने दोनों हाथ जोड़कर उस सामने खड़ी औरत के चरणस्पर्श कर लिए।
वो सामने खड़ी औरत और कोई नही राजकुमार सूरज की मां रूपावती थी उसने भोर के समय जब वह पंछियों को दाना डाल रही थी तभी सूरजसेन को एक कमसिन सी लड़की के साथ महल मे प्रवेश करते हुए देख लिया था ।कुछ कुछ बात तो उसे समझ आ गयी थी पर पूरी बात जानने के लिए वह उस कक्ष मे आयी थी ।उसने  चरणों मे झुकी हुई चंचला को कंधों सू पकड़ कर उठाया और बोली,"तुम वही बंजारन हो ना जिसका जिक्र सूरजसेन मुझसे कर रहा था क्या नाम बताया था उसने भला……?"
" जी चंचला।" चंचला ने घबराकर कहा।
रानी रूपावती बोली,"मैने राजकुमार को कहा था इतनी जल्दबाजी ना करे ।हम कुछ दिनों मे कोई उपाय ढूंढ लेंगे तुम दोनों को एक करने का पर वो बहुत उतावला है ।जो मन मे ठान लेता है उसे पूरा करके ही दम लेता है अब इसने तुम को महल मे लाकर एक और समस्या खड़ी कर दी ।"
इतने मे रानी की नजर चंचला की मांग की तरफ गयी वो सन्न रह गयी " तुम दोनों ने विवाह भी…….
तभी बाहर से भीतर आते हुए राजकुमार सूरज ने कहा,"हां मां मै चंचला का बिछोह सहन नही कर पा रहा था इसलिए मैंने इससे गंधर्व विवाह कर लिया है ।मै ऐसा नही हूं किसी की इज्जत को अपनी इज्जत बना कर लाया हूं मां "
रानी रूपावती ने अपना सिर पीट लिया वो माथे पर हाथ रखकर बोली,"क्या चंचला के परिवार वाले इस विवाह के साक्षी है?"
"नही मां हमने शिव मंदिर मे विवाह किया है ।हमारा मन ही इस विवाह का साक्षी है ।"
रानी रूपावती पुत्र के लिए चिंतित होते हुए बोली,"ये तुमने क्या किया पुत्र इस विवाह का कोई साक्षी भी नही है और तुम अपने पिता जी को जानते ही हो फिर इसके(चंचला) घरवालों तक को नही पता कि ये कहां है प्रातः काल हो चुका है क्या कबीले मे अब तक इसकी टोह नही पड़ गयी होगी।ये बचपना छोड़ो इसे इसके खेमे मे वापस छोड़ आओ।"
राजकुमार सूरजसेन एकदम भड़क उठा,"मां आप भी … मैंने तो सोचा था आप मेरा साथ देंगी पर आप भी इसे इसके कबीले मे छोड़कर आने की बात कर रहें है "
इतना कहकर राजकुमार का गला भर आया।
अपने बेटे को एक बंजारन लड़की के लिए रोता देखकर रानी रूपावती बोली,"बेटा मै तुम्हे सही कह रही हूं बंजारों का एक  उसूल होता है वे दुश्मनी और दोस्ती बड़ी शिद्दत से करते है और अब बात उनकी इज्जत पर आ गयी है माना तुम चंचला को पत्नी रूप मे ब्याह कर ले आये हो पर इस विवाह का कोई साक्षी नही है जब तक समाज साक्षी ना हो ये विवाह अमान्य है ।"
राजकुमार सूरज व्यग्र होकर बोला,"अगर दुनिया हमे जीने नही देगी तो मौत तो हमें मिला ही देगी ।आप यहां  रहने दे तो ठीक है नही तो हम दोनों कही और जाकर अपनी दुनिया बसा लेंगे।"
राजकुमार की बातें सुन कर रानी रूपावती रोने लगी ,"क्या मुझे बुढ़ापे मे पुत्र विछोह सहना पड़ेगा ।आहहहह भगवान इससे पहले तू मुझे उठा ले ।"
अपनी मां का विलाप सुनकर राजकुमार सूरज द्रवित हो गया । थोड़ी दूर खड़ी चंचला ये सब देख रही थी उसे पहले ही इस बात की ग्लानि थी कि वो एक पुत्र को अपने माता पिता से दूर नही करेगी । लेकिन अब रानी रूपवती का ऐसा विलाप ओर राजकुमार सूरजसेन का यूं द्रवित होना अंदर तक कचोट गया चंचला को ।उसने आगे बढ़ कर रानी के आंसू पोंछे ओर बोली,"रानी मां आप दुखी ना हो आप जैसा कहेगी वैसा ही होगा ।मै अभी अपने कबीले मे चली जाती हूं।"
राजकुमार तड़प उठा,"नहीं तुम ऐसा नही कर सकती तुम मेरी ब्याहता हो ।मेरी अनुमति के बगैर कही नही जाओगी।"
चंचला ने बहुत समझाया पर राजकुमार ने एक ना सुनी ।चंचला ने मन ही मन विचार किया कि अभी राजकुमार थोड़ा रौष मे है जब गुस्सा शांत हो जाएगा तो अपने आप कह देंगे।
रानी बिलखती हुई अपने कक्ष मे चली गयी ।अभी प्यार का जादू राजकुमार के सिर चढ़ कर बोल रहा था ।
धीरे धीरे पूरा दिन निकल गया चंचला उसी कमरे मे बैठी रही वही राजकुमार ने उसके लिए खाना भिजवा दिया ।
चंचला को ये बिल्कुल भी अच्छा नही लग रहा था कि उसके कारण एक मां बेटे मे अनबन हो गयी थी ।
धीरे धीरे शाम घिर आई तभी दरवाजे पर दस्तक हुई ।चंचला ने दरवाजा खोला तो सामने दासी को खड़े पाया।वह दासी रानी रूपावती की थी वह चंचला को रानी के कमरे मे बुलाकर ले गयी। वहां जाकर आधा घंटा चंचला और रानी रूपावती मे बातचीत हुई और उसके दो घंटे बाद चंचला अपने कबीले के आगे खड़ी थी ।
उधर सुबह जब जब चंचला के बापू सरदार धर्म सिंह उसे जगाने आये तो चंचला को अपने तम्बू मे ना पा कर हड़कंप मच गया । क्यों कि किसी ने भी चंचला को सांझ के बाद से नही देखा था । चंचला का बापू देर रात दूसरे गांव से खेल दिखाकर लौटा था ।कालू भी उसके साथ गया था ।पहले तो चंचला भी साथ जाती थी तमाशा दिखाने के लिए पर जब से राजकुमार सूरज से नजरें मिली थी उसका ये सब करने मे मन ही नही लगता था वह सारा दिन अपने तमबू मे पड़ी भगवान को धयाती रहती थी ।कि हे भगवान कोई तो मिलन का रास्ता निकलेगा राजकुमार से ।
और आज देखो राजकुमार की ब्याहता हैते हुए भी उसे यूं दबे पांव खेमे मे लौटना पड़ रहा था।
सुबह से भागदौड़ मची थी उसे ढूंढने के लिए कोई कह रहा था जंगली जानवर तो नही ले गया उसे उठा कर कोई कुछ तो कोई कुछ कह रहा था लेकिन सरदार की बेटी थी तो खुलकर कोई नही बोल रहा था ।
रात को जैसे ही चंचला कबीले मे पहुंची तो सबसे पहली नजर उसके पिता की उस पर पड़ी उन्होंने दौडकर उसे गले लगा लिया और बोले,"बिटिया कहां चली गयी थी ।सुबह से सारा कबीला परेशान है तुझे ढूंढ ढूंढ कर।जब मशाल की रोशनी चंचला के मुंह की तरफ की तो सरदार धर्म सिंह उसके मुंह की ओर देखता ही रह गया।
(क्रमशः)

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रचनाएँ
क्या यही प्यार है?
5.0
क्या आज की युवा पीढ़ी प्यार का मतलब जानती है ....नहीं।बस आज कल के युवा लैला मजनूं,शीरी फरहाद,इन की कहानी पढ़कर उन राहों पर निकल पड़ते हैं। प्यार पाना ही नहीं होता। प्यार के लिए मर मिटना भी प्यार है। सदियों तक किसी का इंतजार भी प्यार है। आइए हम और आप जाने चंचला के प्यार को अपने अपने नजरिए से।
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प्यार क्या चीज है ये अच्छे अच्छे को समझ नही आता ।आजकल के बच्चे बस मोबाइल और इंटरनेट के प्यार को ही प्यार समझ बैठे है ।वो हीर रांझा,वो शीरी फरहाद,वो लैला मजनू ये तो आजकल की पीढ़ी को बस शो पीस ही लगते ह

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जोगिंदर घर की ओर जा रहा था तभी रमनी के घर के आगे से जैसे ही गुजरा उसे बहुत तेज तेज आवाजें आ रही थी।रमनी उसकी बचपन की दोस्त थी संग खेले थे दोनों और साथ ही पढ़ें थे एक ही स्कूल मे। जहां जोगिंदर पढ़ाई मे

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क्या यही प्यार है?(भाग:-4)

6 मई 2023
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<div>रमनी की सांसे धौकनी की तरह चल रही थी।उसे यही लग रहा था कि अब जोगिंदर उससे कहेगा।"मेरी रमनी मै तुम बिन शहर कैसे रहूंगा?"</div><div>वह उसकी ओर देख रही थी तभी जोगिंदर बोला,"सुन रही है ना ।मै शहर जा

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गतांक से आगे:-नरेंद्र सपने मे दब सा रहा था उसे सपने मे एक हास्टल दिखाई दे रहा था ।वह क्या देखता है वह अकेला एक गलियारे मे चला जा रहा था।वह शायद पानी की तलाश कर रहा था । दोनों ओर कमरों मे भूतहा शांति छ

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गतांक से आगेअभी जोगिंदर को सोये घंटा भर ही हुआ था कि उसे ऐसे लगा जैसे उसे कोई बुला रहा है "सूरज उठो ना । आंखें खोल कर तो देखो।"जोगिंदर आधा नींद में और आधा जगा हुआ था उसे ऐसे लगा जैसे वही दोपहर सपने वा

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गतांक से आगे:-जोगिंदर को लगातार पायल की आवाज आ रही थी ।उसने नरेंद्र की तरफ देखा वह अपनी मस्ती में चला जा रहा था।उसे आश्चर्य हुआ कि लड़कों के हास्टल मे पायल की आवाज और उसे ही वो सुनाई दे रही है नरेंद्र

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गतांक से आगे:-दोनों जल्द से जल्द होस्टल पहुंच जाना चाहते थे। क्यों कि आज पहला दिन था हास्टल मे ।वो अपनी छवि खराब नही करना चाहते थे वार्डन के आगे।जोगिंदर ने वार्डन से दो घंटे की महोलत मांगीं थी दो घंटे

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गतांक से आगे:-<div><br></div><div>जोगिंदर जैसे ही अपने कमरे के दरवाजे के पास आया तो हैरान रह गया।वह शायद जब कमरे से बाहर गया था तब भी वो चीज वही रखी होगी पर उस पायल की आवाज का पीछा करते करते वह हड़बड़

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16 जून 2023
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20 जून 2023
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गतांक से आगे:-कालू को खंजर हाथ मे लेकर कबीले से बाहर जाते सरदार ने देख लिया था उसका मन कांप गया ।उसे ये तो था कि कालू जल्दी से राजकुमार सूरज पर हाथ तो नही डाल सकता क्योंकि वो कोई साधारण मनुष्य नही है

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24 जून 2023
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1 जुलाई 2023
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गतांक से आगे:-जोगिंदर हैरान रह गया अगर नरेंद्र का ये काम नही है तो फिर चिठ्ठी गयी कहां।वह जब कालेज से आया था तो उसने देखी ही थी मेज पर रखी थी फिर अचानक से कहां गायब हो गयी जब वह नहा कर आया।वह बड़े अनम

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गतांक से आगे:-जोगिंदर ये देख कर हैरान रह गया कि जिस चिठ्ठी को वो सारे होस्टल में ढूंढ आया था वह उस कमरे मे बिछे बिस्तर पर पड़ी है और खुली पड़ी है। वह रमनी की चिठ्ठी पहचानता था ।वह पूरे चेतना मे था ऐसा

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गतांक से आगे:-नरेंद्र का घबराहट के मारे बुरा हाल था । आखिर जोगिंदर गया तो गया कहां? रात को तो अच्छा भला सोया था कमरे मे ।वह दौड़कर कमल और नोबीन के कमरे मे गया और उनसे सारी बात बताई ।वे चारों होस्टल मे

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गतांक से आगे:-जोगिंदर ने मां को कह तो दिया कि वह रमनी का ब्याह रूकवा कर रहे गा ।पर कैसे वह यही सोचता रहा।फिर उसके दिमाग मे एक उपाय आया वह उस पर कार्रवाई करने की सोचने लगा। थोड़ी देर आराम करके वह अपनी

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13 जुलाई 2023
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गतांक से आगे:-आज सारा दिन वह रमनी के विषय में सोचता रहा। इसलिए उसे ऐसे लगा जैसे रमनी आयी है उससे बात करने ।पर शीघ्र ही उसे चमेली के फूलों की महक आने लगी जैसे चंचला के कमरे से आती थी । जोगिंदर नींद मे

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13 जुलाई 2023
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गतांक से आगे:-रमनी तो चली गयी पर जोगिंदर अब इस सोच मे था कि हरिया और भोला को जो काम सौंपा था वो उन्होंने किया या नही ।वह उसी की जांच पड़ताल करने उनके घर चला गया । दोनों दोस्तों ने उसे आश्वस्त कर

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17 जुलाई 2023
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गतांक से आगे:-सारी रात जोगिंदर और उसके माता पिता की आंखों ही आंखों में कटी ।सुबह सबसे पहले जोगिंदर के माता पिता ओझा जी के पास पहुंच गए और सारा हाल कह सुनाया और अपने साथ ही ओझा जी को घर ले आये ।

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क्या यही प्यार है?(भाग:-28)

17 जुलाई 2023
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गतांक से आगे:-जोगिंदर सब जान चुका था कि रमनी पर चंचला की आत्मा ने कब्जा किया हुआ है ।ये तो ओझा जी की भभूत का असर है जो ये अभी शांत है ।वह ये देखना चाहता था कि रमनी कितनी शांत है तभी वह उसे जगा रहा था

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क्या यही प्यार है?(भाग:-29)

19 जुलाई 2023
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गतांक से आगे:-जोगिंदर ने हल्के से मुस्कुरा कर रमनी का पकड़ा हुआ हाथ दबा दिया ।रमनी भी होले से मुस्कुरा दी।वो दोनों जो चाहते थे वो काम हो रहा था ‌।दोनों ने एक दूसरे को वरमाला पहना दी और फेरों की वेदी प

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क्या यही प्यार है?(भाग:-30)

19 जुलाई 2023
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गतांक से आगे:-नरेंद्र ने कलश लाकर आंगन मे रख दिया और जोगिंदर के पास जाकर बोला,"ये क्या बात हो गयी यार । मुझे तो बड़ी हैरानी हुई कि कमरा नं 13 मे किसी दीवार मे कोई लाश भी दबी हो सकती थी जब वार्डन की मद

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