shabd-logo

विश्व व्यापार संगठन का नैरोबी मंत्रिसम्मेलन और भारत की भूमिका

28 मई 2022

22 बार देखा गया 22

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) का दसवां मंत्रिसम्मेलन अफ़्रीकी देश केन्या की राजधानी नैरोबी में चार की जगह पांच दिनों (15-19 दिसंबर) में संपन्न हुआ। अफ़्रीकी महादेश में होनेवाला यह पहला मंत्रिसम्मेलन था। कई कारणों से पूरी दुनिया की नजर इस मंत्रिसम्मेलन पर थी। इसकी पृष्टभूमि में सतत विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसी वर्ष अपनायी गई योजना (जिसे एमडीजी भी कहते हैं) तथा हाल ही में जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने को लेकर हुआ पेरिस का सफल समझौता था। अतः आशा की जा रही थी कि 2015 के समाप्त होते-होते यह सम्मेलन भी सफल होगा। वैसे भी डब्ल्यूटीओ के वार्ताचक्र पर पिछले चौदह सालों से ग्रहण लगा हुआ था। वर्ष 2001 में क़तर की राजधानी दोहा में ‘वार्ताचक्र’ आरम्भ हुआ पर विभिन्न कारणों से आज तक यह अपनी मंजिल तक नहीं पहुँच सका है।

नैरोबी में संपन्न सम्मलेन के परिणाम पर भारत ने घोर निराशा जाहिर की है। दरअसल भारत चाहता था कि दोहा वार्ताचक्र को लेकर सदस्य देश अपनी वचनबद्धता की पुनर्पुष्टि करें। वैसे तो दोहा एजेंडा में अनेक तरह के मुद्दे थे पर विकास इसके केंद्र में था। इसीलिए भारत सहित सभी विकासशील देश इससे भावनात्मक रूप से जुड़े रहे हैं। लेकिन इस सम्मलेन ने दोहा वार्ता को ही अनौपचारिक रूप से मृत घोषित कर दिया है। ‘नैरोबी पैकेज’ के अनुसार अब दोहा एजेंडा जैसे भारी-भरकम विषयों को छोड़कर छोट-छोटे मुद्दों पर ही वार्ता होगी।

जानकार लम्बे समय से दोहा वार्ता को औपचारिक तौर पर मृत घोषित किये जाने की प्रतीक्षा कर रहे थे। ऐसे में दोहा को पीछे छोड़ना बहुत आश्चर्यजनक नहीं है। पिछले डेढ़ दशक में विश्व के आर्थिक परिदृश्य में क्रांतिकारी परिवर्तन हो चुका है। जहाँ अमरीका और यूरोपीय देशों का आर्थिक महत्व तुलनात्मक दृष्टिकोण से घटा है वहीँ चीन, भारत, ब्राज़ील और इंडोनेशिया जैसी उभरती शक्तियों का महत्व बढ़ा है। इसके आलावा 2007 के अंत से शुरू हुई आर्थिक मंदी से विकसित देश अब तक ऊबर नहीं पाये हैं और डब्ल्यूटीओ की किसी भी नई जिम्मेदारी से बच रहे हैं। पर विडम्बना है कि नई शक्तियाँ अभी नेतृत्व के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।

उभरती शक्तियों में चीन और रूस बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। पर ये दोनों अपेक्षाकृत नए सदस्य हैं और इस कारण ये पहले से ही बड़ी जिम्मेदारियों से दबे हुए हैं। वैसे रूस की तुलना में चीन पुराना सदस्य है लेकिन चीन ने अब तक नेतृत्व करने की अपनी महत्वाकांक्षा जग-जाहिर नहीं की है। यह भी संभव है कि अभी हाल में आर्थिक वृद्धि दर में आई गिरावट के कारण भी चीन को अंतर्मुखी होना अधिक श्रेयस्कर लगता हो। इस तरह बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में आज भारत ही है जो सबसे तेजी से बढ़ रहा है और डब्ल्यूटीओ का संस्थापक सदस्य होने के कारण इसे व्यापार वार्ता का लम्बा अनुभव है। अतः भारत से स्वाभाविक तौर पर नेतृत्व की अपेक्षा थी। लेकिन इस सम्मेलन के परिणाम से लगता है कि पिछले दो दशकों से भारत द्वारा जिस तरह की भूमिका निभायी जा रही थी उसमें कोई गुणात्मक परिवर्तन नहीं आया है। इसका एक कारण संभवतः विदेश व्यापार को लेकर हमारा संकुचित दृष्टिकोण हो सकता है।

बिना विदेश व्यापार की सहायता के आज तक कोई देश समृद्ध नहीं हुआ है। मध्यकाल तक भारत की समृद्धि का भी मुख्य कारण विदेश व्यापार ही था। विदेश व्यापार का आर्थिक विकास में अन्यतम योगदान होता है जिससे अंततः गरीबी उन्मूलन में मदद मिलती है। चीन सहित पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश इसका सफल उदाहरण हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के रास्ते की बाधाओं को, जहां तक हो सके, दूर किया जाए। इस दृष्टि से इस सम्मेलन का सफल होना भारत के हित में होता। परन्तु भारत की दिक्कत यह है कि इसकी छवि विकसित देशों और उनके द्वारा उठाए गए अधिकतर मुद्दों के विरोधी की रही है। डब्ल्यूटीओ को लेकर भी इसका व्यवहार एक सहयोगी का नहीं रहा है।

डब्ल्यूटीओ की 1995 में स्थापना के बाद से आज तक एक भी मंत्रिसम्मेलन भारत में आयोजित नहीं हुआ है। जबकि दूसरी ओर क़तर जैसे देशों ने एक ख़ास रणनीति के तहत प्रयास करके अपने यहाँ मंत्रिसम्मेलन का आयोजन किया है। इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन से मेजबान देश की विश्व भर में ब्रांडिंग होती है। इसके अलावा आमतौर पर मेजबान देश सम्मेलन की सफलता के लिए भरपूर प्रयास भी करते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि इनके रूख में थोड़ा लचीलापन और व्यावहारिकता आ जाती है। विदेश व्यापार की नीति की दृष्टि से ऐसे देश उदार माने जाते हैं। दुर्भाग्य से भारत ने अब तक ऐसा कोई संदेश नहीं दिया है। यह विडंबना ही है कि पच्चीस सालों से आर्थिक उदारीकरण को अपनाने और उससे लाभान्वित होने के बावजूद हम कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उदारीकरण के विरूद्ध खड़े दिखते हैं।

पिछले दो दशकों पर यदि हम नजर डालें तो हम पाते हैं कि भारत ने डब्ल्यूटीओ के ऐसे सम्मेलनों में अधिकतर कड़ा रूख ही अख्तियार किया है। सम्मलेन के एजेंडा के तीन स्तम्भ थे – कृषि, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) तथा सेवा। जहाँ तक कृषि का प्रश्न है तो विश्व व्यापार में इसका हिस्सा लगातार घटता जा रहा है । 1960 के दशक में जहाँ विश्व भर में वस्तु व्यापार में कृषि का हिस्सा 25 प्रतिशत था वह अब घट कर 10 प्रतिशत के नीचे आ गया है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में भी कृषि का योगदान घटकर 15 प्रतिशत के नीचे आ गया है। इसी तरह अब रोजगार में भी इसका योगदान 50 प्रतिशत के आसपास आ गया है। आनेवाले समय में विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्रों में ही रोजगार के बढ़ने की संभावना है। इस दृष्टिकोण से देखें तो विश्व व्यापार में हमारा ध्यान कृषि के इतर विषयों पर भी होना चाहिए। परन्तु अब तक हुआ यह है कि कृषि क्षेत्र पर अपेक्षाकृत अधिक ध्यान दिया गया है। यह सच है कि विकसित देशों द्वारा भारी मात्रा में दी जा रही सब्सिडी के फलस्वरूप कृषि का अंतरराष्ट्रीय बाजार विकृत हो गया है और विकासशील देशों के कृषि उत्पाद प्रतिस्पर्धा में ठहर नहीं पाते हैं। पर यह भी सच है कि ऐसी स्थिति सभी विकासशील देशों की है। इसलिए सिर्फ भारत द्वारा आनुपातिक रूप से अधिक ऊर्जा खर्च करना वांछनीय नहीं था।

इसके स्थान पर हमें चाहिए था कि हम कृषि की बात करते हुए दूसरे क्षेत्रों पर भी सफलता हासिल करते। भारत द्वारा दिए गए आधिकारिक वक्तव्य का केंद्रीय विषय कृषि था और इसकी भाषा में कड़वाहट थी। विनिर्माण का जिक्र तक नहीं था जबकि देश का सारा ध्यान अभी ‘मेक इन इंडिया’ पर है। इसी तरह सेवा क्षेत्र पर सिर्फ एक पैरा था जबकि भारत विश्व का छठा सबसे बड़ा सेवा निर्यातक है। आनेवाले समय में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता रखता है। पर भारत के वक्तव्य में ऐसा कुछ भी प्रतिबिंबित नहीं हुआ।

वैसे, अपने किसानों का बचाव करने के लिए विशेष सुरक्षा तंत्र का सहारा लेने की अनुमति प्रदान करने की भारत की माँग मान ली गयी है। साथ ही, भारत के खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के लिए बफर स्टॉक रखने की माँग मान ली गई है। इसी तरह विकसित देशों द्वारा कृषि निर्यात पर दी जा रही सब्सिडी पर रोक लगाने का निर्णय भारत के पक्ष में जाता है। लेकिन सबसे बड़ी बात तो यह है कि भारत को अपने विनिर्माण और सेवा निर्यात बढ़ाने के लिए कुछ भी हासिल नहीं हुआ। इसके अलावा एक बहुपक्षीय संस्था के रूप में डब्ल्यू टी ओ की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लग गया है क्योंकि इसके परे सदस्य देश द्विपक्षीय तथा क्षेत्रीय व्यापार समझौतों पर अधिक भरोसा करने लगे हैं। कुछ जानकारों का मानना है कि इस सम्मेलन में जीत विकसित देशों की हुई है क्योंकि न केवल वे विकासशील देशों के ज्यादातर मुद्दों को दरकिनार करने में सफल रहे बल्कि भविष्य में अपने मुद्दों को एजेंडा में शामिल करने जैसे निर्णय लिवाने में भी सफल रहे।

फिर भी इतना तो हुआ है कि सम्मेलन पूरी तरह असफल नहीं रहा और डब्ल्यूटीओ अपना अस्तित्व बचाने सफल रहा। इस प्रकार बाली के बाद इसे लगातार दूसरी सफलता नैरोबी में मिली है। अब असली चुनौती भारत के सामने है । भारत को चाहिए कि वह अपना पुराना बोझ उतारे और विश्व व्यापार के नियमन में सकारात्मक और निर्णायक भूमिका निभाए।

लेखक निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग , वित्त मंत्रालय ,भारत सरकार में संयुक्त सचिव हैं। लेख में व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं । 

4 सितम्बर  2018 



डॉ. शैलेन्द्र कुमार की अन्य किताबें

41
रचनाएँ
डॉ. शैलेन्द्र कुमार के आर्टिकल
0.0
डॉ. कुमार ने 1992 में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करके और प्रशिक्षण प्राप्त करके भारत सरकार में पदासीन हुए ।
1

तुर्की : ईसाइयत और इस्लाम द्वारा सनातन धर्म का विनाश

28 मई 2022
1
0
0

डॉ. शैलेन्द्र कुमार तुर्की : एक परिचय इस्लाम की दृष्टि से तुर्की एक महत्वपूर्ण देश है । यह संसार के सभी मुसलमानों के मजहबी और राजनीतिक मुखिया — खलीफा का मुख्यालय भी रह चुका है ।1 तुर्की की सरकार के

2

तीन मुसलमान विद्वानों से बातचीत

28 मई 2022
2
0
0

इस्लाम का थोड़ा-बहुत अध्ययन करने के बाद मेरे मन में यह विचार आया कि देखें मुसलमान विद्वान इस्लाम के बारे में क्या सोचते हैं ? शताब्दियों से इस देश में रहते हुए भी मुसलमान अपनी पहचान को लेकर सदा इतने द

3

तिब्बतम शरणम गच्छामि

28 मई 2022
0
0
0

पिछले दो महीनों से हम चीन के साथ लद्दाख की गलवान घाटी में उलझे हुए हैं । पर जब तक बात केवल उलझने तक ही सीमित थी, तब तक तो सह्य थी । लेकिन अभी चार दिन पहले दोनों सेनाओं के बीच जमकर हाथपाई हुई और वह भी

4

मित्र संजय नहीं रहे

28 मई 2022
1
0
0

– प्रोफेसर डॉक्टर संजय जैन नहीं रहे!! – आज शुक्रवार की सुबह कैसी मनहूस सुबह थी, जब एक मित्र से इस अनपेक्षित, अप्रत्याशित और हृदय को क्षत-विक्षत करने वाली घटना का अत्यंत दुखद समाचार मिला । पल भर के लि

5

इन्दौर दौरे के बहाने

28 मई 2022
0
0
0

13 अभी पिछले सप्ताह मेरा इन्दौर का दो-दिवसीय दौरा हुआ। वहां राजभाषा संगोष्ठी थी। कहने को तो यह मेरा तीसरा दौरा था, लेकिन इन्दौर को थोड़ा ध्यान देकर पहली बार देखा। लगभग बीस लाख की जनसंख्या के साथ इन्दौ

6

जीते

28 मई 2022
1
0
1

एक दिन वसंत वाटिका में सुबह की सैर करके जब मैं घर लौट रहा था तो दाहिने  तलवे में थोड़ा दर्द महसूस हुआ। घर में कुर्सी पर बैठकर जब दाहिने पैर का जूता  उतारकर देखा तो पाया कि जूते की तल्ली का अग्रभाग घिस

7

ईरानी क्रांति के चालीस साल : क्या खोया, क्या पाया

28 मई 2022
0
0
0

वैसे तो ईरानी क्रांति जनवरी 1979 में ही शुरु हो गई थी, पर नई व्यवस्था की शुरुआत फरवरी में हुई। इस प्रकार क्रांति के चालीस वर्ष हो चुके हैं। आवश्यक है कि इसका लेखा-जोखा किया जाए। यह दुखद है कि इस ऐतिहा

8

28 जुलाई 2018 को द इंडियन एक्सप्रेस में हरबंस

28 मई 2022
0
0
0

28 जुलाई 2018 को द इंडियन एक्सप्रेस में हरबंस मुखिया ने एक लेख लिखा जिसमें उन्होंने कुल मिलाकर इस बात पर घोर आपत्ति जताई है कि क्यों आजकल टीवी चैनलों पर ऐसी बात की जाती है कि भारत में मध्यकाल में तलवा

9

सर सैयद अहमद खां का वक्तव्य

28 मई 2022
0
0
0

1 अगस्त 2018 के जनसत्ता में आलोक मेहता का लेख ‘विश्वास का पुल’ पढ़ा। इसमें सर सैयद अहमद खां के जिस वक्तव्य को उद्धृत किया गया है उससे उनके व्यक्तित्व का सिर्फ एक पक्ष उजागर होता है, जबकि उनके व्यक्तित

10

संकट में आधुनिक चिकित्सा प्रणाली

28 मई 2022
0
0
0

संभवतः जब से मनुष्य इस धरा पर आया है तब से वह किसी न किसी तरह अपने स्वास्थ्य की देखभाल कर रहा है। इसलिए प्राचीन काल से ही अनेक देशों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में नाना प्रकार की खोजें हुईं। भारत में तो

11

एमएफएन का दर्जा और पाकिस्तान

28 मई 2022
1
0
1

पिछले दिनों उड़ी में अठारह भारतीय जवानों की आतंकवादियों द्वारा हत्या के बाद देश में पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश चरम सीमा पर पहुँच गया। कहा यह भी जाने लगा कि यह आक्रोश 1965 के युद्ध जैसा था। फिर भारत की ओ

12

जेवर से उत्तर प्रदेश का भाग्योदय

28 मई 2022
0
0
0

भारत सरकार ने जेवर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की स्थापना की घोषणा करके न केवल बरसों पुरानी माँग को ही पूरा किया है बल्कि इससे उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास को अभूतपूर्व गति देने का भी काम किया है। वै

13

इस्लामी लकीर के फकीर

28 मई 2022
0
0
0

अभी पिछले दिनों पटना में एक मुस्लिम मंत्री ने जय श्रीराम का नारा लगाया। जिसके बाद एक मुफ्ती ने उन्हें काफिर करार दिया। मजबूरन उन्हें माफी माँगनी पड़ी, जिससे उनके पाप का प्रायश्चित हो गया और पुनर्मूषिको

14

विश्व व्यापार संगठन का नैरोबी मंत्रिसम्मेलन और भारत की भूमिका

28 मई 2022
0
0
0

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) का दसवां मंत्रिसम्मेलन अफ़्रीकी देश केन्या की राजधानी नैरोबी में चार की जगह पांच दिनों (15-19 दिसंबर) में संपन्न हुआ। अफ़्रीकी महादेश में होनेवाला यह पहला मंत्रिसम्मेलन

15

जाति बंधन नहीं l

28 मई 2022
0
0
0

अमरीका के प्रतिष्ठित हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर स्टीवन पिंकर, जो हाल ही में भारत की यात्रा पर थे, की स्थापना है कि ‘हमें ऐसा लग सकता है कि विश्व में गिरावट आ रही है। परंतु यह हमारी समझ की समस्

16

दर्शनीय दुमका

28 मई 2022
0
0
0

”दर्शनीय दुमका ”आलेख के लिए सर्वप्रथम मैं अपने मित्र साकेश जी के प्रति आभार व्यक्त करना चाहूंगा, जिन्होंने दुमका और उसके आसपास के दर्शनीय स्थलों, जैसे बासुकिनाथ धाम, मसानजोर बांध और रामगढ़ स्थित छिन्न

17

ईद, बकरीद और मुहर्रम

28 मई 2022
0
0
0

इस्लाम के तीन प्रमुख त्यौहार हैं — ईद, बकरीद और मुहर्रम । जहां ईद का संबंध इस्लाम के जन्मदाता मुहम्मद पैगंबर और कुरान से है, वहीं बकरीद का यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों  — तीनों के पहले पैगंबर यानी इ

18

मास्साहब

28 मई 2022
0
0
0

हमारे कस्बानुमा बड़े गांव — बथनाहा के पूर्वोत्तर में एक छोटा सा गांव है — बंगराहा । पता नहीं यह नाम कब रखा गया और इसका क्या अर्थ हो सकता है ? संभव है बंग से बंगाल शब्द का कोई लेना-देना हो । वैसे भी सद

19

राजा राममोहन राय -एक रहस्यमय व्यक्तित्व

28 मई 2022
0
0
0

राजा राममोहन राय, इस नाम से देश के सभी साक्षर और शिक्षित अवश्य परिचित होंगे, क्योंकि उनके विषय में इतिहास की विद्यालयी पुस्तकों में थोड़ा-बहुत उल्लेख अनिवार्यत: मिलता है। उन्हें भारतीय नवजागरण का अग्र

20

वो महिला

28 मई 2022
0
0
0

प्रातः बेला मैं तैयार होकर गुवाहाटी से शिवसागर, असम की पुरानी राजधानी, की यात्रा के लिए गाड़ी में बैठा। हमारा ड्राइवर असम का ही था। उसकी कद-काठी अच्छी थी। नाम था खगेश्वर बोरा। वह सहज रूप से हिन्दी बोल

21

जम्मू-कश्मीर को उर्दू नहीं हिन्दी, कश्मीरी और डोगरी चाहिए

28 मई 2022
0
0
0

यदि हम भारत के भाषायी परिदृश्य पर ध्यान दें तो हमें पता चलेगा कि जम्मू-कश्मीर जैसी अतिशोचनीय स्थिति किसी और राज्य की नहीं है। यहां एक ऐसी भाषा राजभाषा बनकर राज कर रही है जिसकी उपस्थिति उस राज्य में नग

22

अटेंडेंट

28 मई 2022
0
0
0

सूर्यास्त की बेला — मैं नहा धोकर बचे हुए पानी से गमलों के पौधों की सिंचाई में लग गया। देखा एक पौधा सिकुड़कर छोटा हो गया है और मुरझा गया है। मन में ग्लानि हुई कि यह मेरे ध्यान न देने का फल है। पानी ही

23

गौरी

28 मई 2022
0
0
0

चैत्र मास समाप्ति की ओर है। यद्यपि दोपहर के बाद तो अब सूर्यदेव अपना प्रचंड रूप दिखाने लगे हैं, परंतु प्रातः बेला अभी भी शीतल है। बालसूर्य की नयनाभिराम बेला। टहलने के लिए उपयुक्त समय। इसलिए इसी बेला मे

24

‘ लक्ष्मण टीला ‘ या ‘ टीले की मस्जिद ‘

28 मई 2022
0
0
0

लक्ष्मण टीला ‘ या ‘ टीले की मस्जिद ‘ लखनऊ की प्राचीन गाथा कहने का एक लघु किंतु क्रांतिकारी प्रयास डॉ शैलेन्द्र कुमार स्वतंत्रता पूर्व विदेशी इतिहासकारों और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हमारे इतिहासकार

25

बांग्लादेश : आहत लोकतंत्र

28 मई 2022
0
0
0

हाल ही में संपन्न हुए बांग्लादेश के चुनाव पर हमारे देश के हिंदी और अंग्रेजी समाचार पत्रों में जितने भी लेख छपे उनमें से अधिकतर में यह भाव मुखर था कि शेख हसीना की जीत भारत के लिए बहुत लाभकारी है। इस प्

26

अनावश्यक अजान और पांच बार नमाज की अनिवार्यता के परिणाम।

28 मई 2022
0
0
0

अनावश्यक अजान और पांच बार नमाज की अनिवार्यता के परिणाम। इन दिनों वाराणसी में गंगा नदी में नौका विहार करते हुए एक विदेशी पर्यटक का वीडियो सोशल मीडिया में काफी वायरल ( प्रचलित ) हुआ है। वीडियो में यह व

27

शेख अहमद सरहिन्दी : भारत में अलगाववादी विचारधारा का जन्मदाता

28 मई 2022
0
0
0

शेख अहमद सरहिन्दी : भारत में अलगाववादी विचारधारा का जन्मदाता डॉ शैलेन्द्र कुमार सारांश इस लेख का सर्वप्रधान उद्देश्य यह दर्शाना है कि भारत में अलगाववादी विचारधारा का जन्मदाता शेख अहमद सरहिंदी था। इ

28

गो रक्षण, जिन्ना और अम्बेडकर

28 मई 2022
1
0
0

शेख मुजिबुर रहमान, जो जामिया मिलिया इस्लामिया में पढ़ाते हैं, का पिछले 25 जून को ‘द हिंदू’ दैनिक में गो रक्षण के नाम पर घटित हिंसक घटनाओं को लेकर एक अतार्किक और अत्यंत आपत्तिजनक लेख प्रकाशित हुआ। इस स

29

मस्जिद की अनिवार्यता

28 मई 2022
0
0
0

फैजुर रहमान का 7 अगस्त के ‘द हिंदू’ दैनिक में ‘मस्जिद की अनिवार्यता’ विषय पर एक लेख प्रकाशित हुआ। रहमान एक इस्लामी मंच के महासचिव हैं जिसका उद्देश्य है संयत विचार को बढ़ाना या बढ़ावा देना। इस लेख का म

30

अनन्य हिंदी प्रेमी अटल बिहारी वाजपेयी

28 मई 2022
0
0
0

अटल बिहारी वाजपेयी भारत के राजनैतिक क्षितिज में पिछले कई दशकों से सर्वाधिक चमकता हुआ सितारा थे। अपनी मिलनसार प्रवृत्ति, विलक्षण वाकपटुता, मनमोहक वक्तृत्वकला और असाधारण प्रतिउत्पन्नमति के कारण सारे देश

31

स्वच्छ भारत की ओर निर्णायक कदम

28 मई 2022
0
0
0

हमारे देश में गाँव कविता के विषय के रूप में कवियों को आकर्षित करता रहा है। मैथिलीशरण गुप्त की ये पंक्तियाँ तो जगप्रसिद्ध रही हैं – “अहा ! ग्राम जीवन भी क्या है। क्यों न इसे सबका जी चाहे।“ इसी तरह सुमि

32

शैक्षणिक संस्थानों का देश के विकास में योगदान

28 मई 2022
0
0
0

आधी सदी पहले ही अर्थशास्त्रियों ने किसी भी देश के आर्थिक विकास में शिक्षा के महत्व को समझ लिया था। बाद में यह विचार फैलने लगा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति को स्थायी रूप से परिवर्तित कर देती है और उसे मान

33

पाकिस्तान में जनसंख्या विस्फोट के निहितार्थ

28 मई 2022
0
0
0

पिछले दिनों करीब दो दशक बाद पाकिस्तान की छठवीं जनगणना सम्पन्न हुई। इसके अनुसार आज पाकिस्तान की जनसंख्या 20 करोड़ 78 लाख है। 1998 में की गई पिछली जनगणना में पाकिस्तान की जनसंख्या लगभग 13 करोड़ थी और उस

34

हवाई यात्रा के लिए बिहार देश का छाया प्रदेश

28 मई 2022
0
0
0

किसी भी देश के विकास में यातायात और उसमें भी वायु यातायात का योगदान अन्यतम है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने एक अध्ययन के हवाले से बताया है कि किस तरह वायु सेवा से तेजी से आर्थिक विकास सम्भव होता है।

35

हिंदी साहित्याकाश में सूर्य की तरह चमकने वाले ‘दिनकर’

28 मई 2022
1
1
0

हिंदी साहित्याकाश में सूर्य की तरह चमकने वाले सचमुच में दिनकर ही थे। रामधारी सिंह दिनकर में साहित्य सर्जन के गुण नैसर्गिक रूप से विद्यमान थे। इसलिए आश्चर्य नहीं कि केवल पंद्रह वर्ष की आयु में ही उनका

36

क्यों बार बार संकट आता है मालदीव पर?

28 मई 2022
0
0
0

पिछले कुछ दिनों से मालदीव के संकट में आ जाने के कारण वहाँ का राजनीतिक घटना क्रम बहुत तेजी से बदल रहा है। हुआ यह कि वहाँ के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने मालदीव के सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश

37

क्यों नहीं मिल रहा रोजगार युवाओं को?

28 मई 2022
0
0
0

उन्नीस सौ नब्बे के दशक में आरंभ हुए आर्थिक उदारीकरण के परिणामस्वरूप माना जाता है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर में अभूतपूर्व तेजी आई। जबकि आजादी के बाद से 1980 तक भारत की आर्थिक वृद्धि दर औसतन सिर्फ 3.5

38

नेताजी का अमूल्य योगदान इतिहासकारों का मोहताज नहीं

28 मई 2022
0
0
0

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू की तरह हमारे स्वतंत्रता आंदोलन के पहली पंक्ति के नेता थे। पर अपने आप को भारत माता पर उत्सर्ग करने की आतुरता में उनकी तुलना शहीद भगत सिंह जैसे वीरों

39

क्यों बार बार संकट आता है मालदीव पर ?

28 मई 2022
0
0
0

पिछले कुछ दिनों से मालदीव में राजनीतिक घटना क्रम बहुत तेजी से बदल रहा है। हुआ यह कि वहाँ के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने मालदीव के सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश तथा एक न्यायाधीश को गिरफ़्तार

40

भारत-अफ्रीका के गहराते संबंध और इनके निहितार्थ

28 मई 2022
0
0
0

भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मलेन के तीसरे संस्करण का आयोजन 26 से 29 अक्टूबर 2015 तक नई दिल्ली में होने जा रहा है। सभी 54 अफ़्रीकी देशों को निमंत्रण देकर भारत सरकार ने अफ्रीका से अपने संबंधों को आगे ले जा

41

1857 की क्रांति की 160वीं जयंती

28 मई 2022
1
0
0

आज ही के दिन ठीक एक सौ साठ साल पहले यानी 10 मई 1857 को जिस ऐतिहासिक क्रांति का सूत्रपात मेरठ से हुआ वह कई अर्थों में विलक्षण थी । क्रांति का क्षेत्र व्यापक था और इसका प्रभाव लम्बे समय तक महसूस किया गय

---

किताब पढ़िए

लेख पढ़िए