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भेंट

18 अगस्त 2023

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सुगंधा ने बाहरवीं पास कर ली ,घर में न ही ख़ुशी का वातावरण है न ही दुःख का। बल्कि उसके पिता को उसके विवाह की चिंता अवश्य हो गयी और वे बड़ी तन्मयता से उसके लिए लड़के की तलाश में जुट गए। सुगंधा का बाहरवीं करना ही जैसे उनका उद्देश्य था उसके पूर्ण होते ही वे अपने आगे के कार्य में जुट गए। उन्होंने अपनी बेटी से ये भी नहीं पूछा कि उसे आगे पढ़ना है या नहीं। न ही उसके उत्तीर्ण होने पर कोई प्रसन्नता ही प्रकट की। सुगंधा के लिए तो जैसे ये आम बात थी ,उसको तो जैसे पहले ही मालूम था कि उसके साथ क्या होना है ?इसी से उसने अपने पिता के किसी भी कार्य के लिए कोई प्रतिक्रिया नहीं की क्योंकि उसने इन परिस्थितियों के लिए अपने को पहले ही तैयार कर लिया था। कहीं कोई लड़का बताता तो उसे देखने चल देते। बेटी को दहेज़ में क्या -क्या देना है ?उसकी सूची तैयार कर ली है किसी भी चीज की कमी न रहे। कभी बर्तन खरीदते ,कभी बिस्तर और कभी स्वर्ण आभूषण। सारा दिन अपनी नौकरी करते और जब समय मिलता तो बेटी को देने वाले सामान की सूची में निशान लगाते जाते और जो रह गया उसे लाने का प्रबंध करते। उन्हें दिन -रात की मेहनत में अपनी परेशानी नहीं दिखती वरन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की सोचकर अपनी परेशानी को महसूस ही नहीं कर पाते। 


                   अबकि छुट्टियों में जब उसका भाई नमन आया तो देखा -छोटी बहन के विवाह की तैयारियाँ चल रही हैं ,उसे बड़ा अज़ीब लगा ,आज के बदलते समय में पिता से ऐसी सोच की उसे उम्मीद नहीं थी। वो तो चाहता था जिस तरह पिता ने मुझे आगे पढ़ने के लिए प्रेरित किया उसी तरह अपनी बेटी को भी करेंगे किन्तु पिता की सोच सुनकर उसे आश्चर्य हुआ कि आज भी इनकी सोच के अनुसार लड़के -लड़की की परवरिश में भी भेदभाव करते हैं और लड़की को भी ज्यादा पढ़कर क्या करना है ?लड़केवालों को दिखाने के लिए उसे बाहरवीं करा दी। नमन ने अपने पिता से पूछा -आप छोटी को आगे क्यों नहीं पढ़ने दे रहे हैं ?विक्रम जी बोले -लड़कियों का ज्यादा पढ़ना ठीक नहीं ,इसने बाहरवीं तो कर ही ली तेरी माँ तो पाँचवीं पास थी। लड़कियों को करना भी क्या है ?आगे जाकर घर ही संभालना है आगे पढ़कर क्या करेगी ?किन्तु पापा ये अभी छोटी है इसकी उम्र ही क्या है ?नमन बोला। विक्रमजी बोले -अठ्ठाहरवें वर्ष में चल रही है ,अभी लड़का भी देख रहे हैं ,साल -छह माह तो लग ही जायेंगे। नमन बोला -तब तक ये क्या करेगी ?करना भी क्या है ?तब तक अपनी माँ के साथ काम में हाथ बटायेगी ,घर के काम सीखेगी, विक्रम जी ने समझाया। उनके उत्तर से नमन संतुष्ट नहीं हुआ ,बोला -पापा आपको पता नहीं ,आजकल लड़कियाँ क्या -क्या कर रही हैं ?पढ़ -लिखकर अभियंता ,पुलिस में हैं ,अध्यापिका ,मंत्री और भी न जाने क्या -क्या ?सबके माता -पिता आपकी तरह ही सोचते तो आज वे जिस मंजिल पर हैं ,वहां न पहुंच पातीं। 
                  विक्रमजी बोले -मुझे तेरे भाषण नहीं सुनने ,ये मेरी बेटी है। मैं अपने बच्चों का भला -बुरा समझता हूँ ,हमें अपनी बेटी को आगे पढ़ाना है या नहीं अथवा इसका ब्याह करके इसे इसके घर भेजना है। जो हमारा उत्तरदायित्व है उसे पूर्ण करना है , इससे तुझे कोई मतलब नहीं।पिता ने ऐसी विरक्तिपूर्ण बातें की ,जैसे मैं तो उसका कुछ लगता ही नहीं ,मुझे तो उसे कुछ कहने समझाने का अधिकार ही नहीं। सुनकर नमन को क्रोध आया किन्तु अपने को संयत रखते हुए ,बोला -पापा वो इस घर की बेटी है ,कोई ग़ैर नहीं ,उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए हम नहीं सोचेंगे तो और कौन सोचेगा ?अभी से ही इसका विवाह कर देंगे तो दूसरे के घर जाकर रोटी बनाएगी। मैं इस तरह अपनी बहन की ज़िंदगी नर्क में नही झोंक सकता। विक्रमजी तो जैसे ठानकर ही बैठे थे कि किसी की कोई बात न ही सुननी है, न हीं माननी है।बोले -रोटी तो बनानी पड़ती हैं ,कोई पढ़े या नहीं और जो काम जीवनभर करना है उसके सीखने या करने में कैसी बुराई ? बात बढ़ते -बढ़ते इतनी बढ़ गयी ,नमन ने अपना संयम खो दिया और तेज आवाज में बोला - यदि वो आपकी बेटी है तो मेरी बहन भी है और अपनी बहन का भला -बुरा सोचना मेरा भी कर्त्तव्य है और मुझे लगता है इसकी ख़ुशी आगे पढ़ने में है ,इसका जीवन संवर जायेगा।विक्रमजी बोले -तेरी नज़र में हम अपनी बेटी के विषय में अच्छा नहीं सोच रहे ,हम उसका बुरा चाहते हैं। तभी सुगंधा ने झगड़े की आवाज़ सुनी तो घबरा गयी और वो अपनी मम्मी को बुलाने के लिए दौड़ी। इसी झगड़े के कारण ही तो सुगंधा ने पिता से आगे पढ़ने की बात नहीं की और आज वो ही कारण बन गए। 


                 कलावती जी कम शिक्षित होने के बावजूद भी बहुत ही सुलझी हुई और समझदार महिला हैं ,अपने अनुभव से बहुत कुछ सीखा है। रिश्तों को कैसे सम्भालना है ?बड़े -छोटे का मान कैसे बनाये रखना है ?वे बखूबी समझती हैं। सुगंधा के बताने पर सारा काम छोड़कर उसके पीछे चल दीं। बेटे और पिता की बहस को देखकर उन्होंने पहले दोनों की शांत होने के लिए कहा किन्तु विक्रमजी बेटे के इस तरह जबान लड़ाने के कारण ज्यादा आहत थे ,कलावती जी ने परिस्थितियों को समझते हुए ,बोलीं - वो तेरे पिता हैं ,अपने बच्चों की ख़ुशी ही चाहेंगे ,तुम लोगों का आजतक भला -बुरा ये ही सोचते आये हैं और अब तुम इनकी सोच पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हो ,जो भी इन्होने सोचा होगा अपनी बेटी का अच्छा ही सोचा होगा। कलावती को इस तरह अपने पक्ष में बोलते देखकर विक्रमजी थोड़ा शांत हुए और बोले -अब तुम ही समझाओ अपने लाड़ले को कहकर बाहर चले गए। उनके जाते ही नमन बोला -मैं भी तो इसका भाई हूँ। माँ मुस्कुराते हुए बोली -हम कब मना कर रहे हैं ?बल्कि हमें तो ये सोचकर प्रसन्नता हुई कि तुम अपनी बहन के लिए सोचते हो। फिर सारी परिस्थितियों को समझाते हुए ,बोलीं -तेरे पिता इसकी शिक्षा के विरुद्ध नहीं हैं,यहाँ जहां तक भी विद्यालय था उन्होंने इसे पढ़ने से नहीं रोका ,रही बात इसे आगे पढ़ाने की ,आगे पढ़ने के लिए इसे बाहर जाना होगा। स्यानी लड़की का बाहर निकलना मतलब ''अंगारों पर चलने ''जैसा है। नमन बोला -बाहर लड़कियों के लिए छात्रावास हैं और अलग कमरा लेकर भी रह सकती है। कलावती जी बोलीं -और हमें यहां रातभर नींद नहीं आएगी ,पता नहीं लड़की कैसी होगी ?और जब समाचार सुनते हैं कि पिता ने बेटी को कितने परिश्रम से पढ़ाया ?और बेटी किसी लड़के के चक्कर में पड़कर ,अपने पिता के मान -सम्मान से खेल गयी तो हिम्मत नहीं होती ,अभी तूने भी तो वो ख़बर सुनी होगी ,उसके पिता ने बेटी के व्यवहार के कारण आत्महत्या कर ली। 
                 नमन बोला -मम्मी ये जरूरी तो नहीं कि सभी लड़कियां ऐसा करें। कलावती जी बोलीं -क्या हम किसी का भविष्य पढ़ सकते हैं ?भविष्य में क्या लिखा है ,कौन क्या करता है ?ये कौन जान सका है ?सभी माता -पिता को अपने बच्चों पर विश्वास होता है किन्तु कौन, किन परिस्थितियों में क्या करता है ?ये तो हम नहीं कह सकते। नमन बोला -मम्मी आप भी पापा की भाषा बोलने लगीं। नहीं ,मैं उनकी भाषा नहीं बोल रही किन्तु मैं उनकी सोच उनकी भावनाओ को समझती हूँ कलावती जी ने समझाया। बोलीं -हम लड़के वालों से पूछ लेंगे यदि ये आगे पढ़ना चाहेगी तो क्या आगे पढ़ने देंगे ?ये क्या मम्मी ?जो कार्य आप स्वयं नहीं कर रहे वो कार्य दूसरों से करने की कैसे उम्मीद लगा सकते हैं ?वहां तो इसकी जिम्मेदारियां भी बढ़ जाएँगी नमन झुंझलाकर बोला। कलावती जी बोलीं - जिसके लिए ,तू जो इतना लड़ रहा है ,उससे भी तो पूछ ले कि वो भी पढ़ना चाहती है या नहीं।इसकी इच्छा भी तो महत्व रखती है ,पढ़ना तो इसे ही है। नमन को माँ की बात सही लगी और सुगंधा से बोला -देख मैं चाहता हूँ कि तू गांव की हीनभावना से ग्रस्त लड़की न बनकर आगे बढ़। बाहर निकलेगी तो तेरा आत्मविश्वास भी बढ़ेगा ,सही -गलत की समझ होगी। अपना अच्छा -बुरा सोचेगी ,अपने जीवन के फैसले करना सीखेगी। अब बता तू आगे पढ़ना चाहती है या नहीं। सुगंधा हिचकिचाती हुई बोली -पढ़ना तो चाहती हूँ किन्तु पापा,कहकर वो चुप हो गयी। नमन बोला -तू पापा की चिंता मत कर, मैं उन्हें समझा लूंगा। अपने भविष्य और जीवन के बारे में तुझे सोचना है ,विवाह करना है या आगे पढ़ना चाहती है। सुगंधा बोली -पढना तो चाहती हूँ। नमन खुश होकर बोला -तो फिर तय रहा तू आगे पढ़ेगी। कलावती जी सुगंधा से बोलीं -देखा ,तेरा भाई कितना ध्यान रखता है ?अपनी बहन का। उधर नमन से बोलीं -बेटा ,बहुत बड़ा उत्तरदायित्व ले रहे हो ,तुम जो भी करो ,सोच -समझकर करना। तुम्हारे पिता आहत न हों। उन्हें दुःख नहीं होना चाहिए। नमन बोला -ऐसे कैसे हो सकता है ?या तो वो आहत होंगे या फिर इसकी इच्छाएँ दफ़न होंगी। कलावती जी ने फैसला बच्चों पर सौंप दिया ,बोलीं -जो भी करो ,समझदारी से करना। 
                      अगले दिन सुबह विक्रम जी उठे उनके चेहरे पर थकावट सी थी ,उनका उतरा चेहरा देखकर कलावती बोली -आप तो व्यर्थ ही चिंतित होते हैं , हमारे बच्चे समझदार हैं जो भी करेंगे ठीक ही होगा। एक बार विश्वास करके तो देखिये। नमन तो अपने काम पर चला गया ,घर में उस झगड़े का कुछ दिन तो असर रहा ,धीरे -धीरे सब ठीक हो गया। किसी ने किसी से कुछ नहीं कहा। सुगंधा भी मन ही मन सोच रही थी ,भइया दो दिन के लिए आया था और अब मेरी पढ़ाई का किसी ने भी जिक्र नहीं किया। उसने अपने को भाग्य के भरोसे छोड़ दिया। एक माह पश्चात ''रक्षा -बंधन ''पर नमन आया और बोला -तेरी पढ़ाई कैसी चल रही है ?सुगंधा बोली -क्यों मज़ाक कर रहे हो ?आपने तो कुछ बताया नहीं। मेरी पुस्तकें भी कौन लाता ?


अगले दिन राखी पर जब सुगंधा ने नमन को राखी बाँधी और अपनी भेंट यानि उपहार के लिए उसकी तरफ देखने लगी ,तब नमन ने एक लिफाफा उसकी थाली में रख दिया। उत्सुकतावश सुगंधा ने वो लिफाफा खोलकर देखा -शहर के बड़े कॉलिज की ''नियमावली पुस्तिका'' थी ,उसके साथ ही ''फीस रशीद ''भी थी। जिसे देखकर सुगंधा खिल उठी ,बोली -भइया ये आपने सब कैसे किया ?नमन बोला -जब मैं यहाँ से गया था तो सभी जरूरी कागज़ात लेकर गया था। अब तुझे वहां जाने की भी आवश्यकता नहीं। घर पर ही रहकर अपनी शिक्षा पूर्ण कर सकती है। बस तुझे परीक्षा देने जाना होगा। अपने विषय भी चुन लेना ,तेरी पुस्तकें भी ले आऊँगा। और इस तरह नमन ने अपने पिता की बात का भी मान रखा और बहन को भी आगे पढ़ने के लिए प्रेरित किया। ये सभी बातें कलावती जी ने खुश होकर अपने पति यानि विक्रम जी को बताई तो वो भी प्रसन्न होकर बोले -तुम्हारे माता -पिता ने तुम्हारा नाम यूँ ही कलावती नहीं रख दिया कुछ तो कलाएं तुम में भी हैं। वो हंसकर बोली -हाँ -हाँ तीस वर्षों से मैं अपनी कला से किसी के जिद्दी और गुस्सैल बेटे को संभाल रही हूँ तो क्या मैं अपने बच्चों को नहीं संभाल सकती सुनकर विक्रम जी हंस पड़े बोले -आज मेरे बेटे ने अपनी बहन को अद्भुत ''भेंट ''दी जो उसे जीवन भर काम आएगी।   
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रचनाएँ
जीवन के रंग
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इतना लम्बा जीवन हम जीते हैं,उसमे सुख है,दुःख है, मस्ती है,मिलना है,बिछुड़ना है,जीवन की पटरी उतार- चढ़ाव से भरी है,जीवन के इस सफ़र में लोग मिलते हैं,बिछुड़ते हैं, उस जीवन के छोटे छोटे हिस्सों को लेकर बनती है एक कहानी वो कहानी जो आपके और हमारे जीवन से मिलती जुलती सी लगती है।उस कहानी में किसी का दर्द छुपा है तो किसी का प्यार समेटती नजर आती है,किसी की दिल से जुड़ी भावनाएं पढ़ हम भावविभोर हो उठते है,किसी का दर्द अपना सा लगता है,जीवन के कुछ ऐसे ही रंग बिखेरती नज़र आती हैं,ये कहानियाँ,इनमें शामिल हो जाइये और इन रंगों को महसूस कर मुझे अपनी समीक्षाओं द्वारा प्रोत्साहित करते रहिये धन्यवाद🙏
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राजनीति

27 जुलाई 2023
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पारुल पढ़ी -लिखी होने के बावजूद, संस्कारों ,परम्पराओं जैसे बंधनों में बंधी ,एक आस्तिक महिला थी। विवाह के बाद अब तो ससुराल ही उसका अपना घर था। उस आशियाने को उसने बड़े प्यार और जतन से सजाया। उसने अपनी

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रेगिस्तान में खो गया

29 जुलाई 2023
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लो , बाबू सा ,चाय पी लो ,सुबोध का इस आवाज से ध्यान भंग हुआ ,उसने पलटकर देखा ,वही काली कजरारी आँखें , दमकता सुडौल बदन किन्तु वो आँखें...... ऐसा कैसे हो सकता है ?उसने आश्चर्य से मन ही मन कहा। नहीं ,ये

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अकेले हम, अकेले तुम

31 जुलाई 2023
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रामलाल जी के दो बेटियाँ और एक बेटा है ,बेटा अभी छोटा है, पढ़ाई कर रहा है। रामलाल जी समय रहते अपनी दोनों बेटियों का विवाह कर देते हैं। दोनों ही अपने -परिवार में खुश हैं। रामलाल जी भी प्रसन्न ही थे किंतु

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बच्चे

2 अगस्त 2023
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विमला देवी ,रसोई घर में ,जोर शोर से, कार्य करने में लगी हुई हैं। उन्होंने खाने में लौकी के कोफ्ते ,कढ़ी चावल और गरमा -गरम चपाती बनाई है। हालांकि उनके कमर में और घुटनों में दर्द है फिर भी वह रसोईघर मे

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सहारा

5 अगस्त 2023
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मैं अक्सर उन्हें ,अपनी खिड़की से देखा करता ,वह एक तस्वीर लिए ,या कुछ कागज...... ,दूर से इतना पता नहीं चल पा रहा था , वे लोगों से मिलते ,कुछ पूछते या बातचीत करते और चले जाते। पता नहीं ,क्या जानना चाह

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आदर

6 अगस्त 2023
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मम्मी घर में ही ,''हॉबी क्लासेस '' चलातीं थीं ,विशेष रूप से लड़कियों, को केक -बिस्किट बनाना सिखातीं ,सारा दिन अपने ही कार्यों में लगीं रहतीं हैं ,वैसे वो बहुत मेहनत करती हैं। यह कार्य भी आसान नहीं , सभ

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बाप की कमाई

8 अगस्त 2023
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प्रशांत ,ने स्कूल में नया -नया दाखिला लिया ,इससे पहले अपने मम्मी -पापा के संग दूसरे शहर में रहता था ,अब उसके पापा का, इस शहर में तबादला हो गया। जब से इस कक्षा से आया है ,सभी बच्चे अपने -अपने घर जाकर

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आखिरी कॉल

10 अगस्त 2023
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पूरा घर गेंदे और गुलाब के फूलों से सजा हुआ है , बहुत सारे मेहमान आए हुए हैं , सभी अपने -अपने कार्य में व्यस्त हैं, घर में खूब चहल-पहल हो रही है , मेहमान आ रहे हैं।' बरनाले' वाली बुआ जी भी आ गई हैं ,

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समाज - सेवा

14 अगस्त 2023
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बच्चे बड़े हो गए ,निशा दिनभर घर में अकेली रहती ,बच्चे अपनी पढ़ाई और दोस्तों में व्यस्त रहते ,मौहल्ले में घूमने का भी उसे ज्यादा शौक नहीं ,फोन उठाया, उसे ऐसे ही चला -चलाकर देखती रही ,उसने अपनी पसंद का

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अबके बरस

16 अगस्त 2023
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श्रावण मास 'तो हर बरस आता है और श्रावण के त्यौहार भी ,जैसे -हरियाली तीज , श्रावण के सोमवार,पूरे माह व्रत और कुछ लोग कांवड़ भी लाते हैं फिर महाशिवरात्रि और रक्षाबंधन।बारिश की रिमझिम फुहार से सारी प्रक

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भेंट

18 अगस्त 2023
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सुगंधा ने बाहरवीं पास कर ली ,घर में न ही ख़ुशी का वातावरण है न ही दुःख का। बल्कि उसके पिता को उसके विवाह की चिंता अवश्य हो गयी और वे बड़ी तन्मयता से उसके लिए लड़के की तलाश में जुट गए। सुगंधा का बाहरवीं

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एक राज़

20 अगस्त 2023
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आज तो निलेश ने हद ही कर दी, उसके एक तमाचा भी जड़ दिया। सारिका जी, को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया, उन्होंने निलेश को डांटते हुए कहा -तुम्हें तनिक भी शर्म नहीं है। तुमसे उम्र में कितनी बड़ी हैं ?तुम्हार

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सुम्मी!

25 अगस्त 2023
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जी हाँ ,आज की हमारी कहानी की नायिका ''सुम्मी ''है ,जो सांवली सी भोली -भाली ,अंतर्मुखी लड़की है। वैसे तो माता-पिता ने उसका नाम' सुमनलता 'रखा है किंतु मां लाड में उसे 'सुम्मी 'ही कहकर पुकारती है।सांवली ह

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दादीजी!

30 अगस्त 2023
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प्रियाजी, के लड़के का विवाह हुआ है , बहु पढ़ी -लिखी सुंदर है, नौकरी भी करती है। प्रियाजी , अकेले ही सारे काम संभाल रहीं थीं लेकिन ख़ुशी में अपनी थकान का ध्यान ही नहीं। आज बहु की मुँह दिखाई की रस्म है ,म

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तैयारी, अगले जन्म की

5 सितम्बर 2023
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आज आपको मिलवाते हैं ,''मिस्टर अनोखेलाल से '', मिस्टर अनोखेलाल ,अपने नाम की तरह ही अनोखे हैं। उनकी बातें भी दिलचस्प हैं , मैंने उस इंसान को जब भी देखा या मिला हमेशा खुश ही देखा। उसे इस तरह खुश देखकर,

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पैसा बोलता है!

8 सितम्बर 2023
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बहू के आते ही घर में खुशहाली आ गई , आये भी क्यों न ?बहुत धूमधाम से शादी हुई है ,बहु दान -दहेज भी बहुत लाई है। पच्चीस लाख नकद , समधी जी ने बेटी -दामाद के खाते में जमा करा दिए। बाक़ी घरेलू सभी सामान

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सांझा चूल्हा

11 सितम्बर 2023
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साँझा चूल्हा ''जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है। एक ऐसा परिवार ,एक ऐसी छत जिसके नीचे ,एक बड़ा परिवार रहता है ,जिसमें दादी -बाबा ,ताऊ -ताई ,चाचा -चाची ,उनके बच्चे। घर में खूब रौनक रहती है। सास- बहुएं ,रस

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बहकते कदम!

16 सितम्बर 2023
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जिंदगी में पहली बार कुछ अलग ही एहसास हो रहे थे ,ऐसा उसने आज से पहले कभी महसूस नहीं किया। वो उसकी बातों को यादकर अंदर ही अंदर मुस्कुरा रही थी। लगता है ,जिंदगी कितनी सुहानी है ,सब कुछ अच्छा ही अच्छा है

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स्वार्थी

19 सितम्बर 2023
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मां !तुम कितनी लापरवाह हो ? अपना तनिक भी ख्याल नहीं रखतीं। रमेश ,माँ को आज डॉक्टर को दिखलाकर लाया है। माँ, कई दिनों से ,थकावट ,घुटनों में दर्द , इत्यादि बीमारियों की शिकायत कर रही थीं। रमेश ने सोचा

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बेसन के लड्डू

21 सितम्बर 2023
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गुप्ता जी ,शांति से बैठे ,समाचार -पत्र पढ़ रहे थे ,तभी उन्हें कुछ मीठा खाने की इच्छा हुई और अपने बेटे की बहु से बोले - पल्लवी बेटा ! जरा'' बेसन के लड्डू'' तो देना। पल्लवी रसोई घर में थी, रसोई घर स

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श्राद्ध

29 सितम्बर 2023
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नई नवेली दुल्हन जब घर में आ जाती है, तो बहु की जिम्मेदारी तो बढ़ती ही हैं लेकिन सास की जिम्मेदारियां भी कम नहीं होतीं। बहु को अपने घर के तौर- तरीक़े समझाना ,बहु को उसकी जिम्मेदारियों से परिचित कराना। व

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बासी रोटी

21 अक्टूबर 2023
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दीप्ती आज, अपने घर आ रही है। बहुत दिनों से मायके जाना नहीं हुआ था। घर -गृहस्थी में ऐसी फंसी ,मम्मी भी अक्सर फोन करती रहतीं , तब भी जाना नहीं होता। क्योंकि कभी तो पतिदेव को छुट्टी नहीं मिलती और कभी बच्

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रात का डर

30 अक्टूबर 2023
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मैंने दादा जी से , रात कितनी बार कहा था ?चलो !चलकर डॉक्टर को दिखा लेते हैं ,लेकिन इन्होंने मेरा कहा नहीं माना , क्रोधित और उत्तेजित होते हुए ,जाह्नवी अपनी मम्मी से बोली - अब बड़े हैं, अपनी चलाएंगे बच्

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भूले नहीं, उलझ गये थे

16 नवम्बर 2023
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आज दीपक की बिटिया का विवाह है। सब कुछ सही समय पर ठीक -ठाक चल रहा है। कुछ दिन पहले दीपक की हालत देखने लायक थी।' बहनजी' आईं थीं ,रिश्ता लेकर,उनके किसी जानने वाले का बेटा था। उनका परिवार और वो लड़का भी ह

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चिट्ठी का सच

19 नवम्बर 2023
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क्या तुम यही रहती हो ? आज से पहले तो तुम्हें कभी नहीं देखा , पड़ोस का एक लड़का अपनी छत से खड़े होकर, दूसरी छत पर खड़ी लड़की से पूछ रहा था। वह लड़की मुस्कुराते हुए बोली -नहीं ,मैं यहां नहीं रहती ,

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खो गया, बच्चा

13 दिसम्बर 2023
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आज कबीर बहुत फूट कर रोया , उसे अपने किए पर पछतावा था। अपनी मां की गोद में सिर रखकर बहुत देर तक रोता रहा, पछतावा करता रहा ,मैंने अपनी मां को कितने कष्ट दिए हैं ? कभी सोचा ही नहीं, उस पर क्या बीतती होग

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तुम्हारी याद में

14 दिसम्बर 2023
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आरती को जब कपिल का पत्र मिला ,उसके मन में तो ख़ुशी थी, किन्तु दिल में घबराहट थी। अजीब सी गुदगुदी महसूस हो रही थी,न जाने इस पत्र में ,उसने क्या लिखा होगा ?यह सोचकर ही ,चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है। कुछ

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सराहना

19 दिसम्बर 2023
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प्रगति अपनी बारी के इंतजार में, अस्पताल में,मरीज़ों की पंक्ति में बैठी थी। इतने बीमार लोगों की ,भीड़ थी। हर कोई परेशान नजर आ रहा था, किसी को कुछ न कुछ बीमारी थी। प्रतीक्षा करते-करते उसे काफी देर हो

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रहस्यमयी चाबी

21 दिसम्बर 2023
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केदारनाथ जी की, आज हालत बहुत खराब है ,उनकी पत्नी और उनके बहु -बेटा और उनके चार पोते उनके समीप ही खड़े हैं। बहुत दिनों से, उनकी तबियत खराब थी किन्तु आज कोई दवाई भी असर नहीं कर रही। डॉक्टर ने भी जबाब दे

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अपूर्ण किस्सा

23 दिसम्बर 2023
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रेवती आज पराग के लिए पराठे लाई, दोनों ने खुश होकर, एक साथ बैठकर खाए। जब से पराग ,इस दफ्तर में आया है, तब से रेवती से, उसकी कुछ ज्यादा ही दोस्ती हो गई है। रेवती भी, उसके आने से खुश है। दोनों ही समझदार

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क्या तुम्हें याद है!

26 दिसम्बर 2023
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सुनो ! क्या तुम्हें याद है ? हम कब ,एक साथ बाहर गए थे ? कब एक साथ ,हमने चलचित्र देखा ?क्या तुम्हें याद है ? कब एक साथ बैठकर , चैन की सांस ली ? चलो ,छोड़ो ! क्या तुम्हें मेरा, जन्मदिन भी याद है या हमार

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सर्दी की रात

31 दिसम्बर 2023
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ठंड़ आज कुछ ज्यादा ही पड़ रही है, तन थर-थर कांप रहा है। ऐसे में कुछ लोग, आग जलाकर आग के आसपास बैठे हुए हैं। कुछ लोग रजाई में घुस गए हैं। कुछ गर्म दूध में हल्दी मिलाकर पीने की तैयारी कर रहे हैं। विभोर

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कमरा नंबर ३०३

6 जनवरी 2024
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एक अधेड़ उम्र दम्पत्ति ,प्रातःकाल ,वृद्ध आश्रम के दरवाजे पर खड़े नजर आये। उस व्रद्धाश्रम के संस्थापक ने इतनी ठंड में ,उन दोनों को खड़े देखा। तब वह उनके करीब गया और उनसे ,उनके इस स्थान पर खड़े होने का कार

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जैसे को तैसा

12 जनवरी 2024
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मेरे बेटे का आज जन्मदिन है, मैंने रात में ही सोचकर तैयारी कर ली थी कि क्या -क्या बनाना है ?सुबह बेटे को उठाने गई -आदि !उठो बेटा ,आज तुम्हारा जन्मदिन है। उठो !तुम्हारे मामा -मामी आने वाले हैं ,तुम्हा

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अनूठा निर्णय

21 जनवरी 2024
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अरे ,कलमूही ! यह तूने क्या कर डाला ? यह सब करते हुए, तुझे तनिक भी शर्म नहीं आई। तूने परिवार की इज्जत को, मिट्टी में मिला डाला। डोली की मां उस पर चिल्लाते हुई ,बोली -उसके मन में तो आ रहा था कि इसे पीट

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समझौता

3 फरवरी 2024
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कल्पना के पैरों तले से जैसे, जमीन खिसक गई ,उसे विश्वास ही नहीं हुआ ,यह भी हो सकता है। उसे लगा ,शायद उसकी नजरों का धोखा है। वह नजदीक ही ,छुपकर खड़ी हो गई, और चुपचाप उनका पीछा करने लगी। वह जानना चाहती थ

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रहस्यमयी पत्र

4 फरवरी 2024
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श्रीमती गुप्ता ने जैसे ही, कक्षा में प्रवेश किया ,तभी उनके ऊपर एक पर्ची आकर गिरी। उस पर्ची को उन्होंने देखा और आसपास भी देखने लगीं। यह पर्ची उनके पास, किसने फेंकी है ?पहले तो सोचा ,ऐसे ही कहीं से उड़क

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एक कप कॉफी

24 फरवरी 2024
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आज शीघ्र ही, कॉलेज की छुट्टी हो जाएगी, लेक्चर भी शीघ्र ही समाप्त हो जाएगा इसीलिए सभी दोस्तों ने आपस में मिलकर'' कॉफी हाउस'' में जाकर कॉफी पीने की योजना बनाई। श्रुति, पल्लवी ,अनिरुद्ध और तेजस्व ! चारों

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भयानक रात का आख़िरी कॉल

2 मार्च 2024
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शोभित, रतन, अतुल और नारंग चारों दोस्त ,मस्ती में जा रहे थे। कॉलेज की छुट्टियां चल रही थीं। कुछ समझ नहीं आ रहा था ,समय काटे नहीं कट रहा था। जब भी समय मिलता है ,चारों दोस्त घूमने निकल पड़ते हैं । आज के

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सोशल मिडिया

5 मार्च 2024
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पापा ने उसे नया फोन दिलवाया था, आज उसने'' सोशल मीडिया'' पर अपना नया-नया अकाउंट बनाया था। वह बहुत प्रसन्न थी, अपने जन्मदिन पर बहुत सारी तस्वीरें, अपने फोन में ही खींच लीं थीं । कभी फेसबुक कभी व्हाट्स

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स्कूटी ( भाग १)

16 मार्च 2024
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जीवन तो हादसों से ही भरा होता है ,कुछ न कुछ हादसे हमारे जीवन में हो ही जाते हैं और कुछ हादसे ऐसे होते हैं जो जीवन को एक नई दिशा दे जाते हैं, या फिर व्यक्ति की सोच ही नहीं ,उसका व्यक्तित्व ही बदल जाता

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स्कूटी ( भाग २)

17 मार्च 2024
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निशा का विवाह एक अभियंता से हो जाता है ,जिस पर सम्पूर्ण घर की ज़िम्मेदारियाँ थीं ,निशा ने भी उसका हर सुख -दुःख में सहयोग किया। उसकी हर ज़िम्मेदारी को अपना मानकर चली ,जिस कारण वो अपनी ओर, और अपनी इच्छाओं

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डरावनी गुड़िया

17 मार्च 2024
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बिट्टो ! हां ,यही तो नाम है , उसका...... उसका भी मन करता था कि वह खेल -खिलौनों से खेले , किंतु उसकी मां के पास तो इतने पैसे ही नहीं थे कि वह उसको खिलौने दिलवा सके। एक दिन तो बिट्टो जिद करके ही बैठ ग

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ये कैसा सम्मान?

23 मार्च 2024
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उसके घर से अक्सर, चीखने- चिल्लाने की, लड़ने की आवाजें आती रहतीं। अक़्सर सुनने में आता ,जो लोग अनपढ़ या गरीबी के वातावरण में रहते हैं। उनके घरों में ही ऐसे झगड़े होते रहते हैं। किंतु उन्हें गरीब भी नहीं

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पिछला जन्म

30 मार्च 2024
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धीरेंद्र और वीरेंद्र दो अच्छे मित्र थे। एक ही गांव में रहते थे। साथ-साथ पढ़ते और खेलते थे। उन दोनों में काफी गहरी दोस्ती थी। एक दूसरे पर जान छिड़कते थे ,दोनों ने विवाह भी लगभग एक साथ ही किया दो

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वो भयानक रात

2 अप्रैल 2024
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रात कोई भी हो, सबके लिए समान नहीं होती, किसी के लिए सुख लेकर आती है ,तो किसी के लिए दुख लेकर आती है। रात्रि तो वही होती है , किंतु अलग-अलग समय के लोगों के लिए अलग-अलग संदेश लाती है। हर भयानक रात, में

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मुझे सम्मान चाहिए

5 अप्रैल 2024
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बहुत दिनों पश्चात शिखा अपने मायके अपने भैया -भाभी से मिलने आई है , आये भी क्यों न ? खुशी का बहाना भी है। भाभी की अभी कुछ महीनों पूर्व ही , नई नौकरी लगी है। भैया- भाभी ने तो एक बार भी नहीं कहा -क

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जादुई घोड़ा

7 अप्रैल 2024
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वह किसी ऐसे जादू की कल्पना करता ,पलक झपकते ही ,उसके सभी कार्य हो जाए। वो हमेशा कल्पनाओं में खोया रहता है। सोचता है ,कोई ऐसी चीज हो, जो जादू की तरह उसकी सभी कल्पनाओं को उड़ान दे या फिर कोई ऐसी जादुई

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दोस्ती या प्यार

20 अप्रैल 2024
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रजत ! यह तुम क्या कह रहे हो ? मैंने कभी तुम्हें इस नजर से देखा ही नहीं , मैं तो तुम्हें अपना सबसे अच्छा दोस्त ही समझती हूं। किंतु मैं तो तुमसे मन ही मन प्रेम करता आ रहा हूं, जब से मैंने तुम्हें

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जाने का डर

22 अप्रैल 2024
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स्वांती परेशानी में बैठी थी , उसके मन में अनेक प्रश्न उठ रहे थे, क्या यह सही होगा ? जो लोग सोचते हैं या कहते हैं, वे सही हैं। समझ नहीं आ रहा क्या करूं? जब प्रणव ने बताया -कि वह बाहर पढ़ने जाना चाहता

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सिर्फ़ तुम्हारे लिए

22 मई 2024
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आज तो हद ही हो गई,'' मिस्टर गुप्ता '', बेटे की बात सुनकर बाहर चले गए। अरुंधति को रोना आ गया और वह अपने कमरे में जाकर फूट-फूट कर रोने लगी। आजकल के बच्चे कैसे हो गए हैं ? उन्हें इतना भी एहसास नहीं रहता

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हीरों का हार

10 जून 2024
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आज' फेसबुक' पर, 'अनामिका' ने अपनी सहेली रोहिणी की तस्वीर देखी, उसे देखकर प्रसन्न तो हुई किंतु मन ही मन जल -भुन भी गई। उसके जलने का कारण उसकी सहेली रोहिणी नहीं थी ,वरन उसके गले में पड़ा हुआ, वह 'हीरे

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जादू प्यार का

13 जून 2024
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किशोरी अपने घर की छत पर खड़ी, उस लड़के को देख रही थी। जो अभी -अभी गाड़ी से उतरा है। शायद ,पड़ोसी के घर में, वह मेहमान बन कर आया है। शायद ,उनका कोई रिश्तेदार है। अनेक अटकलें लगा बैठी। देखने में बहुत ही

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