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राजनीति

27 जुलाई 2023

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पारुल पढ़ी -लिखी होने के बावजूद, संस्कारों ,परम्पराओं जैसे बंधनों में बंधी ,एक आस्तिक महिला थी। विवाह के बाद अब तो ससुराल ही उसका अपना घर था। उस आशियाने को उसने बड़े प्यार और जतन से सजाया। उसने अपनी तरफ से पूरा प्रयत्न किया कि वो सास -ससुर के साथ -साथ घर के अन्य सदस्यों का दिल भी जीत ले। कई बार काम करते -करते थक जाती। कई बार ,कोई काम यदि नहीं आता तो उसे सीखने का प्रयत्न करती। सिलाई -कढ़ाई ,बुनाई और पढ़ाई सभी में तो पारंगत थी। पाक कला में भी निपुण थी। ससुराल वालों को और क्या चाहिए ?बहु मेहनती है ,बाहर इधर -उधर नहीं घूमती ,काम में लगी रहती है तो फिर कहाँ कमी रह गयी ?वो समझ नहीं पा रही थी। पारुल जैसी बहु पाकर किसी भी सास को अपनी बहु पर नाज़ होना चाहिए लेकिन ऐसा कुछ नज़र नहीं आता। हमेशा सास के तेवर चढ़े रहते ,काम में कमी न निकाल पातीं तो मायके से आये सामान में या उनके व्यवहार को लेकर मीन -मेख निकालतीं। उसने हर सम्भव प्रयत्न किया कि वो खुश रहें। 


          एक दिन उसने हिम्मत करके पूछा भी कि- मैं ऐसा क्या करूँ ,कि आप प्रसन्न हों या फिर मेरी कमी बताइये ,आखिर आप चाहती क्या हैं ?सवाल के जबाब के इंतजार में देर तक खड़ी रही ,जबाब तो मिला नहीं, किन्तु यही बात गृह -क्लेश 'का कारण बन गयी ,कि अब ये हमसे सवाल -जबाब करेगी ,क्यों दें हम जबाब ?ये कोई हमारी बड़ी है ?सास को ख़ुश करने के फेर में वो स्वयं भी खुश न रह सकी।कभी सोचती -कि ससुराल वालों को क्या चाहिए ?पत्रिका अथवा समाचार पत्रों में ''वधू चाहिए ''कॉलम में लिखा होता है -सुंदर ,सुशील ,पढ़ी -लिखी ,गृह कार्य में दक्ष वधू चाहिए, फिर भी समझ नहीं आ रहा। वो अपने कॉलिज अपने साथी सदस्यों के समूह की नेता रही ,सब उसे पसंद करते थे लेकिन अपनी ही ससुराल में फेल हो गयी। उसका मनोबल धीरे -धीरे डगमगाने लगा लेकिन फिर भी उसने हिम्मत का साथ नहीं छोड़ा। कुछ वर्षों पश्चात उसके देवर का विवाह निश्चित हुआ। उसने हर कार्यक्रम में बढ़ -चढ़कर हिस्सा लिया लेकिन उसकी सास का व्यवहार उसकी सहेली नंदा से भी छुपा नहीं था। नंदा ने उसे समझाया कि अब जब छोटी वाली आयेगी और उसके साथ ऐसा व्यवहार होगा तब उन्हें तुम्हारी कीमत का पता चलेगा ,हर लड़की इतना नहीं झेल सकती जितना तूने झेला।
देवरानी भी परिवार में शामिल हो गयी ,अब उसका समय था कि वो अपनी सास का दिल जीत सके। उसने कभी भी सामने से काम नहीं किया, बस मेरे साथ काम में लग जाती। पूरी तरह से जिम्मेदारी नहीं ली ,एक दिन हमारी सासु माँ ने उसे कोई काम दिया ,उसने बड़ी ही चालाकी इंकार कर दिया। पारुल सोच रही थी कि ''आज तो ''गृह क्लेश ''निश्चित है लेकिन वे चुपचाप उठीं और काम कर दिया। यह देखकर वो हैरत में पड़ गयी और सोच रही थी उसकी जगह यदि स्वयं पारुल होती तो इंकार करने पर घर में क्लेश हो जाता ,उसकी तो आज तक हिम्मत ही नहीं हुई कि अपने बड़ों का कहा टाल सके ,कोई काम नहीं भी आता तो सीखने का प्रयास करती और इसको सास ने कुछ भी नहीं कहा। उसने सोचा अभी नई बात है ,देंखें ,कब तक शांत रहती हैं ? मैं भी तो कभी नई आई थी। एक दिन मेरे पास आकर बोलीं - रेनू ,अभी छोटी है और नई आयी है ,यदि वो कोई गलती करे तो तुम मुझे आकर बताना। मैं इतने दिनों से इस घर में थी और जब से छोटी आयी है ,तब से छोटी का व्यवहार ,उसके प्रति मम्मी जी का भी व्यवहार देख रही थी। मैं सोच रही थी कि इस बात में इनका क्या उद्देश्य हो सकता है ?काफ़ी सोचने के बाद मैंने मम्मीजी से कहा -आपके लिए दोनों बहुएँ बराबर हैं ,आप स्वयं ही गलतियाँ देखें ,मेरी चुग़ली की आदत नहीं ,ये काम मुझसे नहीं होगा।


  
          मैं रोजाना की तरह अपने काम में लगी रहती मेरे साथ छोटी बच्ची भी थी ,उसके साथ समय कब बीत जाता ?पता ही नहीं चलता था। कुछ दिन ही बीते होंगे ,मैंने महसूस किया कि दोनों आपस में हंसती -बतियातीं ,मेरी बच्ची को पकड़ती भी नहीं ,न ही किसी काम में मदद करतीं। मेरी कोई बात छोटी को पता होती तो सास तक पहुंच जाती। मैं हैरान -परेशान कि ये हो क्या रहा है ?मैं डॉक्टर के लिए बताकर गयी थी 
लेकिन मैंने छोटी से बताया कि मैं अपनी मम्मी से भी मिलकर आऊँगी वो बिमार थीं , आने में थोड़ी देर हो जाएगी ,बाक़ी का काम तुम संभाल लेना। उसने तब तो हाँ कह दिया फिर मेरे पीछे मम्मीजी को नमक -मिर्च लगाकर पता नहीं, क्या -क्या बोला -जब मैं घर आयी तो उन्होंने न जाने क्या -क्या सुनाया,? मैंने छोटी से पूछा- कि मैंने तो तुम्हें बताया था कि संभाल लेना ,तब क्या हुआ ?छोटी अपना पल्ला झाड़ते हुए बोली -पता नहीं दीदी ,आप तो मम्मीजी की आदत जानती ही हैं ,मुझे उसकी बात सही लगी। मैंने मम्मीजी से पूछा- कि आपको किसने बोला ?कि मैं घूमती फिर रही हूँ। तब उन्होंने उसी तीख़ी ज़बान में कहा -तू न बतायेगी, तो क्या हमें नहीं चलेगा ?वो ही तो मैं पूछना चाह रही हूँ कि किसने बताया ?''मैं घूमने गयी हूँ ,मैं तो अपनी मम्मी को देखने गयी थी। ठीक है ,तुझे इससे क्या ?वो उसे बचाते हुए बोलीं -काले चोर ने बताया, क्योंकि वो तो पहले ही उनसे वादा ले चुकी थी कि मम्मीजी मेरा नाम न आ जाये। मैं परेशान सारी बातें मेरे मन में घूम रहीं थीं ,वो क्यों ऐसे भड़कीं ,किसने क्या कहा ?तभी मेरे दिमाग में वो बात घूमी ,मम्मीजी ने मुझसे कहा था-' कि छोटी की बातें बताना और शायद छोटी से भी यही कहा हो और वो इन परिस्थितियों का लाभ उठा रही हो ,फिर भी मैंने एक बार बात कर लेना उचित समझा। मैं तुरंत उसके पास गयी और उससे सीधे बात की ,क्या मम्मीजी ने ऐसा कुछ कहा ?मैंने उसे चौंकते हुए देखा लेकिन वो बोली -नहीं ,ऐसा कुछ नहीं। मैंने उससे कहा -मेरे पास भी आईं थीं लेकिन मैं ऐसी बातों से दूर रहना ही पसंद करती हूँ ,आज जैसी स्थिति में' मैं 'हूँ ,मेरी जगह तुम भी हो सकतीं थीं ,लेकिन उसने मेरी बातों को नजरंदाज किया। 
            मैं पहले से ही सास के व्यवहार से परेशान थी लेकिन अब तो छोटी के आने पर राजनीति होने लगी। मैं सोचती थी कि सास ऐसी ही होतीं हैं पुरानी 'चलचित्रों 'में ऐसे दिखाते थे लेकिन राजनीति तो मुझसे पहले ही नहीं होती थी मेरा विषय भी समाजशास्र और अर्थशास्त्र थे। राजनीति शास्त्र तो पहले से ही पसंद नहीं था। सास की राजनीति थी , दो बहुओं के बीच फूट डालो और अपना वर्चस्व क़ायम रखो। किसी देश या राज्य पर नहीं ,उस घर में जिसे प्रेम , मान -सम्मान ,प्रतिष्ठा का घर ,भवन और भी न जाने कितने नामों से पुकारते हैं। जहाँ नारी को पूजते हैं ,वो सोच रही थी ,-क्या वो इस घर की' गृहलक्ष्मी' है ,उसने व्यर्थ ही इतनी शिक्षा प्राप्त की ,उसे तो चापलूसी ,चुगली करना और थोड़ी सी राजनीति सीखनी चाहिए थी ,आज उसे ये सब आते तो आज वो यहाँ राज कर रही होती। वो तो शांत ,मधुर ,प्यार के साथ जीवन जीना पसंद करती थी लेकिन उसे तो उसकी मम्मी ने भी घरेलू राजनीति नहीं सिखाई। तब उसे बुआजी की याद आई ,उन्होंने कुछ आशंकाएँ जताई भी थीं तो उसने उस समय उन बातों पर ध्यान नहीं दिया था। तब मैंने बुआजी को ही निरुत्तर कर दिया था ,मैंने जबाब दिया था कि बुआजी !इन तुच्छ बातों से कुछ नहीं होता ,अच्छे रिश्तों की शुरुआत अच्छी सोच के साथ ही होनी चाहिए। आज बुआजी की वही बातें उसे रह -रहकर याद आ रहीं हैं। उसे अपनी शिक्षा पर शक़ होने लगा कि दो कम पढ़ी -लिखी महिलायें अपनी राजनीति के कारण आज उस पर हावी हो रही हैं ,उसे मूर्ख या पागल अथवा मानसिक रूप से कमज़ोर बना रहीं हैं। उसने तो प्यार से अपने लोगों के बीच जीवन व्यतीत करने की कल्पना की थी। राजनीति वो समझती थी लेकिन उसमें उसकी रूचि नहीं थी ,क्यों बेवज़ह दिलों में कड़वाहट भरना। किन्तु उस वातावरण में उसकी उन भावनाओं का कोई मूल्य नहीं था। 


           वो बहुत दिनों तक उन्हें समझाती रही ,कभी सफाई पेश करती ,उसे ज़िंदगी जैसे नर्क नज़र आ रही थी ,घर में आये दिन, कोई न कोई कांड हो ही जाता ,मानसिक रूप से वो अपने को टुटा महसूस करती। समझ रही थी कि किसी भी बात को ये लोग कैसे ''तोड़ -मरोड़कर ''कहाँ से कहाँ ले जाते हैं ?इन लोगों ने पढ़ाई तो की नहीं, लेकिन ''तिल का ताड़ ''कैसे बनाते हैं ?ये जरूर सीखा है ,दूसरे व्यक्ति को कैसे नीचा दिखाना है ,ये भी बाखूबी आता है। कैसे छोटी सी बात को लेकर 'गृह -क्लेश ''करवाना है ?स्वयं मस्त रहना है। वो अपने को पढ़ -लिखने के बाद भी' पप्पू 'महसूस कर रही थी। पारुल रोती ,उन घटनाओं का आंकलन करती कि गलती किससे और कहाँ हुई ?लेकिन कोई फायदा नहीं। उसे महसूस हुआ ,जैसे वो अपना अस्तित्व खोती जा रही है ,उसके सहन करने की शक्ति अब जबाब देने लगी थी। एक दिन रोते -रोते उसे किसी की बात याद आई कि'' अत्याचार करने वाले से सहन करने वाला भी उतना ही दोषी होता है ''अब उसे रोकर नहीं, हिम्मत से काम लेना होगा ,उनके साथ राजनीति तो नहीं खेलेगी लेक़िन उसका मुँह तोड़ जबाब तो दे ही सकती है , अब उनकी हरकतों का मुँह तोड़ जबाब देगी। उसे याद आया कि जब वो विद्यालय में पढ़ाती थी ,तब भी उसके साथ कुछ अध्यापिकाओं ने राजनीति का खेल खेला था ,तब भी तो उसने उनको ''करारा जबाब'' दिया था। इस परिवार के लिए ही तो उसने अपनी नौकरी छोड़ी थी। अपने ही परिवार के साथ क्या लड़ना लेकिन अब वो ही परिवार उसकी'' विरोधी पार्टी ''बना बैठा है। 
            बाहर समाज में जो परिवार दिखने में तो शांत और एकजुट , उसके अंदर कितनी अशांति और हलचल है। अब मैं और अत्याचार और धोखेबाज़ी बर्दाश्त नहीं करुँगी। इनकी चालाकियों का जबाब इन लोगों को उनकी ही जबान में मिलेगा। मन ही मन उसने उन लोगों के खिलाफ़ उनके विरोध के लिए बिगुल बजाया , उन्हें उन्हीं की भाषा में जबाब मिलने लगे तो वो तिलमिला गए। यहाँ कोई भी सही को सही ,गलत को गलत कहने के लिए तैयार नहीं था ,जिसका राज उसी की हां में हां। बहुयें तो वैसे ही बदनाम होती हैं कि सास पर अत्याचार करती हैं लेकिन समय अथवा परिस्थिति सबके साथ एक जैसी नहीं होती ,कहीं बहु हावी, तो कहीं सास।कहने को , छोटी भी बहु थी लेकिन वे दोनों अपने -अपने स्वार्थ से जुडी थीं या यूँ समझें अपने स्वार्थ के लिए उसे अपने पक्ष में रखा था। पारुल सोच रही थी -मैंने अपनी ज़िंदगी के कितने वर्ष इन्हें खुश करने की इच्छा में गवाँ दिए। पढ़ी -लिखी होने के बावज़ूद मैं घरेलू राजनीति में फँसकर रह गयी। मैं दूसरों को खुश करने के फेर में पड़ी रही न ही वो खुश हुए न ही' मैं 'खुश रह सकी ,कम से कम अपने को ही खुश कर लेती ,अपने अरमानों को ही उड़ान दे देती तो शायद मैं यहाँ ''नून तेल लकड़ी'' में न फंसकर देश की नहीं अपनी ही उन्नति कर पाती। जब व्यक्ति अपने में सक्षम होता है तो दूसरों के लिए भी सोचता है ,मैं तो अपनी ही मदद नहीं कर पायी ,दूसरों के बारे में सोचने का तो प्रश्न ही नहीं उठता। 


          अब थोड़ा वो सम्भलने लगी और उसने ये पारिवारिक राजनीति छोड़ ,अपनी उन्नति की सोची ,उसे लग रहा था कि देश में भी पारिवारिक झगड़े ही ,एक -दूसरे को नीचा दिखाना, अपना उल्लू सीधा करना ,चापलूसों से घिरे न रहकर ,अपनी सोच की उन्नति करें देश के पारस्परिक झगड़ों में न उलझकर ,देश की उन्नति के विषय में सोचें ज्यादा बेहतर हो ,वैसे वो सोच रही थी कि घर की राजनीति ने भी उसे बहुत कुछ सीखा दिया लेकिन इन सबके बावजूद भी देश ,परिवार चलते रहते हैं। कुछ असामाजिक तत्व होते हैं जो देश में ,ज़िंदगी में हलचल मचाते हैं ,ये तत्व न ही स्वयं चैन से रहते हैं ,न ही रहने देते हैं। मैंने ये जाना ये सब लड़ाई अपने अहम की है ,झूठ ,छल ,कपट ,बेईमानी की है जिसके कारण राजनीति जन्म लेती है। सब अपने -अपने 'अहम' को संतुष्ट करने में लगे रहते हैं। घर -परिवार हो या देश की उन्नति ,इस राजनीति के चक्कर में गयी चूल्हे में। 

मीनू द्विवेदी वैदेही

मीनू द्विवेदी वैदेही

विषय वस्तु बहुत सही चुना आपने ,बेहद खूबसूरत लिखा 👌👌 आप मेरी कहानी प्रतिउतर पर अपनी समीक्षा जरूर दें 🙏

14 दिसम्बर 2023

Laxmi Tyagi

Laxmi Tyagi

21 दिसम्बर 2023

धन्यवाद आपका🙏💐💐💐

प्रभा मिश्रा 'नूतन'

प्रभा मिश्रा 'नूतन'

बहुत सुंदर लिखा है आपने बहन कृपया मेरी कहानी 'बहू की विदाई' के हर भाग पर अपना लाइक 👍 और व्यू दे दें 😊🙏

8 अगस्त 2023

Laxmi Tyagi

Laxmi Tyagi

8 अगस्त 2023

👍

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रचनाएँ
जीवन के रंग
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इतना लम्बा जीवन हम जीते हैं,उसमे सुख है,दुःख है, मस्ती है,मिलना है,बिछुड़ना है,जीवन की पटरी उतार- चढ़ाव से भरी है,जीवन के इस सफ़र में लोग मिलते हैं,बिछुड़ते हैं, उस जीवन के छोटे छोटे हिस्सों को लेकर बनती है एक कहानी वो कहानी जो आपके और हमारे जीवन से मिलती जुलती सी लगती है।उस कहानी में किसी का दर्द छुपा है तो किसी का प्यार समेटती नजर आती है,किसी की दिल से जुड़ी भावनाएं पढ़ हम भावविभोर हो उठते है,किसी का दर्द अपना सा लगता है,जीवन के कुछ ऐसे ही रंग बिखेरती नज़र आती हैं,ये कहानियाँ,इनमें शामिल हो जाइये और इन रंगों को महसूस कर मुझे अपनी समीक्षाओं द्वारा प्रोत्साहित करते रहिये धन्यवाद🙏
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राजनीति

27 जुलाई 2023
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पारुल पढ़ी -लिखी होने के बावजूद, संस्कारों ,परम्पराओं जैसे बंधनों में बंधी ,एक आस्तिक महिला थी। विवाह के बाद अब तो ससुराल ही उसका अपना घर था। उस आशियाने को उसने बड़े प्यार और जतन से सजाया। उसने अपनी

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रेगिस्तान में खो गया

29 जुलाई 2023
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लो , बाबू सा ,चाय पी लो ,सुबोध का इस आवाज से ध्यान भंग हुआ ,उसने पलटकर देखा ,वही काली कजरारी आँखें , दमकता सुडौल बदन किन्तु वो आँखें...... ऐसा कैसे हो सकता है ?उसने आश्चर्य से मन ही मन कहा। नहीं ,ये

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अकेले हम, अकेले तुम

31 जुलाई 2023
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रामलाल जी के दो बेटियाँ और एक बेटा है ,बेटा अभी छोटा है, पढ़ाई कर रहा है। रामलाल जी समय रहते अपनी दोनों बेटियों का विवाह कर देते हैं। दोनों ही अपने -परिवार में खुश हैं। रामलाल जी भी प्रसन्न ही थे किंतु

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बच्चे

2 अगस्त 2023
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विमला देवी ,रसोई घर में ,जोर शोर से, कार्य करने में लगी हुई हैं। उन्होंने खाने में लौकी के कोफ्ते ,कढ़ी चावल और गरमा -गरम चपाती बनाई है। हालांकि उनके कमर में और घुटनों में दर्द है फिर भी वह रसोईघर मे

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सहारा

5 अगस्त 2023
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मैं अक्सर उन्हें ,अपनी खिड़की से देखा करता ,वह एक तस्वीर लिए ,या कुछ कागज...... ,दूर से इतना पता नहीं चल पा रहा था , वे लोगों से मिलते ,कुछ पूछते या बातचीत करते और चले जाते। पता नहीं ,क्या जानना चाह

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आदर

6 अगस्त 2023
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मम्मी घर में ही ,''हॉबी क्लासेस '' चलातीं थीं ,विशेष रूप से लड़कियों, को केक -बिस्किट बनाना सिखातीं ,सारा दिन अपने ही कार्यों में लगीं रहतीं हैं ,वैसे वो बहुत मेहनत करती हैं। यह कार्य भी आसान नहीं , सभ

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बाप की कमाई

8 अगस्त 2023
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प्रशांत ,ने स्कूल में नया -नया दाखिला लिया ,इससे पहले अपने मम्मी -पापा के संग दूसरे शहर में रहता था ,अब उसके पापा का, इस शहर में तबादला हो गया। जब से इस कक्षा से आया है ,सभी बच्चे अपने -अपने घर जाकर

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आखिरी कॉल

10 अगस्त 2023
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पूरा घर गेंदे और गुलाब के फूलों से सजा हुआ है , बहुत सारे मेहमान आए हुए हैं , सभी अपने -अपने कार्य में व्यस्त हैं, घर में खूब चहल-पहल हो रही है , मेहमान आ रहे हैं।' बरनाले' वाली बुआ जी भी आ गई हैं ,

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समाज - सेवा

14 अगस्त 2023
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बच्चे बड़े हो गए ,निशा दिनभर घर में अकेली रहती ,बच्चे अपनी पढ़ाई और दोस्तों में व्यस्त रहते ,मौहल्ले में घूमने का भी उसे ज्यादा शौक नहीं ,फोन उठाया, उसे ऐसे ही चला -चलाकर देखती रही ,उसने अपनी पसंद का

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अबके बरस

16 अगस्त 2023
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श्रावण मास 'तो हर बरस आता है और श्रावण के त्यौहार भी ,जैसे -हरियाली तीज , श्रावण के सोमवार,पूरे माह व्रत और कुछ लोग कांवड़ भी लाते हैं फिर महाशिवरात्रि और रक्षाबंधन।बारिश की रिमझिम फुहार से सारी प्रक

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भेंट

18 अगस्त 2023
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सुगंधा ने बाहरवीं पास कर ली ,घर में न ही ख़ुशी का वातावरण है न ही दुःख का। बल्कि उसके पिता को उसके विवाह की चिंता अवश्य हो गयी और वे बड़ी तन्मयता से उसके लिए लड़के की तलाश में जुट गए। सुगंधा का बाहरवीं

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एक राज़

20 अगस्त 2023
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आज तो निलेश ने हद ही कर दी, उसके एक तमाचा भी जड़ दिया। सारिका जी, को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया, उन्होंने निलेश को डांटते हुए कहा -तुम्हें तनिक भी शर्म नहीं है। तुमसे उम्र में कितनी बड़ी हैं ?तुम्हार

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सुम्मी!

25 अगस्त 2023
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जी हाँ ,आज की हमारी कहानी की नायिका ''सुम्मी ''है ,जो सांवली सी भोली -भाली ,अंतर्मुखी लड़की है। वैसे तो माता-पिता ने उसका नाम' सुमनलता 'रखा है किंतु मां लाड में उसे 'सुम्मी 'ही कहकर पुकारती है।सांवली ह

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दादीजी!

30 अगस्त 2023
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प्रियाजी, के लड़के का विवाह हुआ है , बहु पढ़ी -लिखी सुंदर है, नौकरी भी करती है। प्रियाजी , अकेले ही सारे काम संभाल रहीं थीं लेकिन ख़ुशी में अपनी थकान का ध्यान ही नहीं। आज बहु की मुँह दिखाई की रस्म है ,म

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तैयारी, अगले जन्म की

5 सितम्बर 2023
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आज आपको मिलवाते हैं ,''मिस्टर अनोखेलाल से '', मिस्टर अनोखेलाल ,अपने नाम की तरह ही अनोखे हैं। उनकी बातें भी दिलचस्प हैं , मैंने उस इंसान को जब भी देखा या मिला हमेशा खुश ही देखा। उसे इस तरह खुश देखकर,

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पैसा बोलता है!

8 सितम्बर 2023
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बहू के आते ही घर में खुशहाली आ गई , आये भी क्यों न ?बहुत धूमधाम से शादी हुई है ,बहु दान -दहेज भी बहुत लाई है। पच्चीस लाख नकद , समधी जी ने बेटी -दामाद के खाते में जमा करा दिए। बाक़ी घरेलू सभी सामान

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सांझा चूल्हा

11 सितम्बर 2023
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साँझा चूल्हा ''जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है। एक ऐसा परिवार ,एक ऐसी छत जिसके नीचे ,एक बड़ा परिवार रहता है ,जिसमें दादी -बाबा ,ताऊ -ताई ,चाचा -चाची ,उनके बच्चे। घर में खूब रौनक रहती है। सास- बहुएं ,रस

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बहकते कदम!

16 सितम्बर 2023
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जिंदगी में पहली बार कुछ अलग ही एहसास हो रहे थे ,ऐसा उसने आज से पहले कभी महसूस नहीं किया। वो उसकी बातों को यादकर अंदर ही अंदर मुस्कुरा रही थी। लगता है ,जिंदगी कितनी सुहानी है ,सब कुछ अच्छा ही अच्छा है

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स्वार्थी

19 सितम्बर 2023
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मां !तुम कितनी लापरवाह हो ? अपना तनिक भी ख्याल नहीं रखतीं। रमेश ,माँ को आज डॉक्टर को दिखलाकर लाया है। माँ, कई दिनों से ,थकावट ,घुटनों में दर्द , इत्यादि बीमारियों की शिकायत कर रही थीं। रमेश ने सोचा

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बेसन के लड्डू

21 सितम्बर 2023
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गुप्ता जी ,शांति से बैठे ,समाचार -पत्र पढ़ रहे थे ,तभी उन्हें कुछ मीठा खाने की इच्छा हुई और अपने बेटे की बहु से बोले - पल्लवी बेटा ! जरा'' बेसन के लड्डू'' तो देना। पल्लवी रसोई घर में थी, रसोई घर स

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श्राद्ध

29 सितम्बर 2023
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नई नवेली दुल्हन जब घर में आ जाती है, तो बहु की जिम्मेदारी तो बढ़ती ही हैं लेकिन सास की जिम्मेदारियां भी कम नहीं होतीं। बहु को अपने घर के तौर- तरीक़े समझाना ,बहु को उसकी जिम्मेदारियों से परिचित कराना। व

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बासी रोटी

21 अक्टूबर 2023
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दीप्ती आज, अपने घर आ रही है। बहुत दिनों से मायके जाना नहीं हुआ था। घर -गृहस्थी में ऐसी फंसी ,मम्मी भी अक्सर फोन करती रहतीं , तब भी जाना नहीं होता। क्योंकि कभी तो पतिदेव को छुट्टी नहीं मिलती और कभी बच्

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रात का डर

30 अक्टूबर 2023
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मैंने दादा जी से , रात कितनी बार कहा था ?चलो !चलकर डॉक्टर को दिखा लेते हैं ,लेकिन इन्होंने मेरा कहा नहीं माना , क्रोधित और उत्तेजित होते हुए ,जाह्नवी अपनी मम्मी से बोली - अब बड़े हैं, अपनी चलाएंगे बच्

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भूले नहीं, उलझ गये थे

16 नवम्बर 2023
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आज दीपक की बिटिया का विवाह है। सब कुछ सही समय पर ठीक -ठाक चल रहा है। कुछ दिन पहले दीपक की हालत देखने लायक थी।' बहनजी' आईं थीं ,रिश्ता लेकर,उनके किसी जानने वाले का बेटा था। उनका परिवार और वो लड़का भी ह

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चिट्ठी का सच

19 नवम्बर 2023
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क्या तुम यही रहती हो ? आज से पहले तो तुम्हें कभी नहीं देखा , पड़ोस का एक लड़का अपनी छत से खड़े होकर, दूसरी छत पर खड़ी लड़की से पूछ रहा था। वह लड़की मुस्कुराते हुए बोली -नहीं ,मैं यहां नहीं रहती ,

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खो गया, बच्चा

13 दिसम्बर 2023
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आज कबीर बहुत फूट कर रोया , उसे अपने किए पर पछतावा था। अपनी मां की गोद में सिर रखकर बहुत देर तक रोता रहा, पछतावा करता रहा ,मैंने अपनी मां को कितने कष्ट दिए हैं ? कभी सोचा ही नहीं, उस पर क्या बीतती होग

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तुम्हारी याद में

14 दिसम्बर 2023
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आरती को जब कपिल का पत्र मिला ,उसके मन में तो ख़ुशी थी, किन्तु दिल में घबराहट थी। अजीब सी गुदगुदी महसूस हो रही थी,न जाने इस पत्र में ,उसने क्या लिखा होगा ?यह सोचकर ही ,चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है। कुछ

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सराहना

19 दिसम्बर 2023
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प्रगति अपनी बारी के इंतजार में, अस्पताल में,मरीज़ों की पंक्ति में बैठी थी। इतने बीमार लोगों की ,भीड़ थी। हर कोई परेशान नजर आ रहा था, किसी को कुछ न कुछ बीमारी थी। प्रतीक्षा करते-करते उसे काफी देर हो

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रहस्यमयी चाबी

21 दिसम्बर 2023
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केदारनाथ जी की, आज हालत बहुत खराब है ,उनकी पत्नी और उनके बहु -बेटा और उनके चार पोते उनके समीप ही खड़े हैं। बहुत दिनों से, उनकी तबियत खराब थी किन्तु आज कोई दवाई भी असर नहीं कर रही। डॉक्टर ने भी जबाब दे

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अपूर्ण किस्सा

23 दिसम्बर 2023
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रेवती आज पराग के लिए पराठे लाई, दोनों ने खुश होकर, एक साथ बैठकर खाए। जब से पराग ,इस दफ्तर में आया है, तब से रेवती से, उसकी कुछ ज्यादा ही दोस्ती हो गई है। रेवती भी, उसके आने से खुश है। दोनों ही समझदार

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क्या तुम्हें याद है!

26 दिसम्बर 2023
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सुनो ! क्या तुम्हें याद है ? हम कब ,एक साथ बाहर गए थे ? कब एक साथ ,हमने चलचित्र देखा ?क्या तुम्हें याद है ? कब एक साथ बैठकर , चैन की सांस ली ? चलो ,छोड़ो ! क्या तुम्हें मेरा, जन्मदिन भी याद है या हमार

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सर्दी की रात

31 दिसम्बर 2023
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ठंड़ आज कुछ ज्यादा ही पड़ रही है, तन थर-थर कांप रहा है। ऐसे में कुछ लोग, आग जलाकर आग के आसपास बैठे हुए हैं। कुछ लोग रजाई में घुस गए हैं। कुछ गर्म दूध में हल्दी मिलाकर पीने की तैयारी कर रहे हैं। विभोर

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कमरा नंबर ३०३

6 जनवरी 2024
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एक अधेड़ उम्र दम्पत्ति ,प्रातःकाल ,वृद्ध आश्रम के दरवाजे पर खड़े नजर आये। उस व्रद्धाश्रम के संस्थापक ने इतनी ठंड में ,उन दोनों को खड़े देखा। तब वह उनके करीब गया और उनसे ,उनके इस स्थान पर खड़े होने का कार

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जैसे को तैसा

12 जनवरी 2024
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मेरे बेटे का आज जन्मदिन है, मैंने रात में ही सोचकर तैयारी कर ली थी कि क्या -क्या बनाना है ?सुबह बेटे को उठाने गई -आदि !उठो बेटा ,आज तुम्हारा जन्मदिन है। उठो !तुम्हारे मामा -मामी आने वाले हैं ,तुम्हा

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अनूठा निर्णय

21 जनवरी 2024
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अरे ,कलमूही ! यह तूने क्या कर डाला ? यह सब करते हुए, तुझे तनिक भी शर्म नहीं आई। तूने परिवार की इज्जत को, मिट्टी में मिला डाला। डोली की मां उस पर चिल्लाते हुई ,बोली -उसके मन में तो आ रहा था कि इसे पीट

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समझौता

3 फरवरी 2024
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कल्पना के पैरों तले से जैसे, जमीन खिसक गई ,उसे विश्वास ही नहीं हुआ ,यह भी हो सकता है। उसे लगा ,शायद उसकी नजरों का धोखा है। वह नजदीक ही ,छुपकर खड़ी हो गई, और चुपचाप उनका पीछा करने लगी। वह जानना चाहती थ

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रहस्यमयी पत्र

4 फरवरी 2024
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श्रीमती गुप्ता ने जैसे ही, कक्षा में प्रवेश किया ,तभी उनके ऊपर एक पर्ची आकर गिरी। उस पर्ची को उन्होंने देखा और आसपास भी देखने लगीं। यह पर्ची उनके पास, किसने फेंकी है ?पहले तो सोचा ,ऐसे ही कहीं से उड़क

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एक कप कॉफी

24 फरवरी 2024
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आज शीघ्र ही, कॉलेज की छुट्टी हो जाएगी, लेक्चर भी शीघ्र ही समाप्त हो जाएगा इसीलिए सभी दोस्तों ने आपस में मिलकर'' कॉफी हाउस'' में जाकर कॉफी पीने की योजना बनाई। श्रुति, पल्लवी ,अनिरुद्ध और तेजस्व ! चारों

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भयानक रात का आख़िरी कॉल

2 मार्च 2024
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शोभित, रतन, अतुल और नारंग चारों दोस्त ,मस्ती में जा रहे थे। कॉलेज की छुट्टियां चल रही थीं। कुछ समझ नहीं आ रहा था ,समय काटे नहीं कट रहा था। जब भी समय मिलता है ,चारों दोस्त घूमने निकल पड़ते हैं । आज के

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सोशल मिडिया

5 मार्च 2024
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पापा ने उसे नया फोन दिलवाया था, आज उसने'' सोशल मीडिया'' पर अपना नया-नया अकाउंट बनाया था। वह बहुत प्रसन्न थी, अपने जन्मदिन पर बहुत सारी तस्वीरें, अपने फोन में ही खींच लीं थीं । कभी फेसबुक कभी व्हाट्स

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स्कूटी ( भाग १)

16 मार्च 2024
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जीवन तो हादसों से ही भरा होता है ,कुछ न कुछ हादसे हमारे जीवन में हो ही जाते हैं और कुछ हादसे ऐसे होते हैं जो जीवन को एक नई दिशा दे जाते हैं, या फिर व्यक्ति की सोच ही नहीं ,उसका व्यक्तित्व ही बदल जाता

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स्कूटी ( भाग २)

17 मार्च 2024
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निशा का विवाह एक अभियंता से हो जाता है ,जिस पर सम्पूर्ण घर की ज़िम्मेदारियाँ थीं ,निशा ने भी उसका हर सुख -दुःख में सहयोग किया। उसकी हर ज़िम्मेदारी को अपना मानकर चली ,जिस कारण वो अपनी ओर, और अपनी इच्छाओं

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डरावनी गुड़िया

17 मार्च 2024
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बिट्टो ! हां ,यही तो नाम है , उसका...... उसका भी मन करता था कि वह खेल -खिलौनों से खेले , किंतु उसकी मां के पास तो इतने पैसे ही नहीं थे कि वह उसको खिलौने दिलवा सके। एक दिन तो बिट्टो जिद करके ही बैठ ग

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ये कैसा सम्मान?

23 मार्च 2024
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उसके घर से अक्सर, चीखने- चिल्लाने की, लड़ने की आवाजें आती रहतीं। अक़्सर सुनने में आता ,जो लोग अनपढ़ या गरीबी के वातावरण में रहते हैं। उनके घरों में ही ऐसे झगड़े होते रहते हैं। किंतु उन्हें गरीब भी नहीं

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पिछला जन्म

30 मार्च 2024
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धीरेंद्र और वीरेंद्र दो अच्छे मित्र थे। एक ही गांव में रहते थे। साथ-साथ पढ़ते और खेलते थे। उन दोनों में काफी गहरी दोस्ती थी। एक दूसरे पर जान छिड़कते थे ,दोनों ने विवाह भी लगभग एक साथ ही किया दो

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वो भयानक रात

2 अप्रैल 2024
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रात कोई भी हो, सबके लिए समान नहीं होती, किसी के लिए सुख लेकर आती है ,तो किसी के लिए दुख लेकर आती है। रात्रि तो वही होती है , किंतु अलग-अलग समय के लोगों के लिए अलग-अलग संदेश लाती है। हर भयानक रात, में

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मुझे सम्मान चाहिए

5 अप्रैल 2024
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बहुत दिनों पश्चात शिखा अपने मायके अपने भैया -भाभी से मिलने आई है , आये भी क्यों न ? खुशी का बहाना भी है। भाभी की अभी कुछ महीनों पूर्व ही , नई नौकरी लगी है। भैया- भाभी ने तो एक बार भी नहीं कहा -क

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जादुई घोड़ा

7 अप्रैल 2024
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वह किसी ऐसे जादू की कल्पना करता ,पलक झपकते ही ,उसके सभी कार्य हो जाए। वो हमेशा कल्पनाओं में खोया रहता है। सोचता है ,कोई ऐसी चीज हो, जो जादू की तरह उसकी सभी कल्पनाओं को उड़ान दे या फिर कोई ऐसी जादुई

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दोस्ती या प्यार

20 अप्रैल 2024
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रजत ! यह तुम क्या कह रहे हो ? मैंने कभी तुम्हें इस नजर से देखा ही नहीं , मैं तो तुम्हें अपना सबसे अच्छा दोस्त ही समझती हूं। किंतु मैं तो तुमसे मन ही मन प्रेम करता आ रहा हूं, जब से मैंने तुम्हें

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जाने का डर

22 अप्रैल 2024
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स्वांती परेशानी में बैठी थी , उसके मन में अनेक प्रश्न उठ रहे थे, क्या यह सही होगा ? जो लोग सोचते हैं या कहते हैं, वे सही हैं। समझ नहीं आ रहा क्या करूं? जब प्रणव ने बताया -कि वह बाहर पढ़ने जाना चाहता

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सिर्फ़ तुम्हारे लिए

22 मई 2024
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आज तो हद ही हो गई,'' मिस्टर गुप्ता '', बेटे की बात सुनकर बाहर चले गए। अरुंधति को रोना आ गया और वह अपने कमरे में जाकर फूट-फूट कर रोने लगी। आजकल के बच्चे कैसे हो गए हैं ? उन्हें इतना भी एहसास नहीं रहता

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हीरों का हार

10 जून 2024
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आज' फेसबुक' पर, 'अनामिका' ने अपनी सहेली रोहिणी की तस्वीर देखी, उसे देखकर प्रसन्न तो हुई किंतु मन ही मन जल -भुन भी गई। उसके जलने का कारण उसकी सहेली रोहिणी नहीं थी ,वरन उसके गले में पड़ा हुआ, वह 'हीरे

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जादू प्यार का

13 जून 2024
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किशोरी अपने घर की छत पर खड़ी, उस लड़के को देख रही थी। जो अभी -अभी गाड़ी से उतरा है। शायद ,पड़ोसी के घर में, वह मेहमान बन कर आया है। शायद ,उनका कोई रिश्तेदार है। अनेक अटकलें लगा बैठी। देखने में बहुत ही

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