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लघु कथा

hindi articles, stories and books related to Laghu katha


 आपने पीछले भाग मे देखा    आरव की बात सुनकर सुलोचना भी गुस्से में बोली - मुझे भी कोई शौक नहीं है । इतनी बेजती के होने के बाद जॉब करने की । सोच लो बाद में पछताना ना पड़े तुम्हें । आरव -

अब तक हमने पढ़ा कि किस तरह दिशा जर्नलिस्ट से रेस्टॉरेंट की ओनर होने का सफर तय करती है | दिशा का रेस्टॉरेंट द कैफे ही दिशा की ज़िन्दगी बन जाता है | आपको अनोखी याद है ? वो प्यारी सी लड़की जो कहानी की शुरुआ

कैफे जो दिशा की ज़िन्दगी बन चूका है उसकी शुरुआत भी इतनी आसान नहीं थी | दिशा किसी ज़माने में पत्रकार यानि जर्नलिस्ट हुआ करती थी पर उसे अपना जॉब बहुत बोरिंग लगता था | एक दिन हिम्मत जुटा  कर दिशा ने अ

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में ऐसे क्षण अवष्य आते हैं जब उसे लगता कि उसे उस समय वह कार्य नहीं करना चाहिए था और व्यक्ति का मन एक दुःख और निराषा से भर उठता है। इसी प्रकार की एक घटना याद आती है जब एक व्यक्

मुकेश लकड़ी का कार्य करने में अत्यन्त ही कुशल कारीगर था। काशी में दूर-दूर से लोग उसके पास लकड़ी के फर्नीचर और डिजाईनर सामान बनवाने के लिए आते थे जिससे उसके कार्य की ख्याति अत्यधिक फैल चुकी थी। मुकेश सदा

राम अमोल पाठक जी बिहार के एक गांव के भरे-पुरे परिवार से थे |  गांव में आँगन वाला सबसे ऊँचा मकान राम अमोल पाठक जी का था, घर पर पिताजी,भैया-भाभी, एक प्यारी सी भतीजी और बीवी अमरावती थी, अभी-अभी राम अमोल

आंचल आज बहुत उदास सी आकर घर के पास के गॉर्डन में बैठती है ,उसके आंखो में आंसु छलकने ही वाले थे ,वह उसे पोंछ लेती है , वह करीब पैतालीस ,पचास के बीच की थी !! वह सोचती हुई बड़बड़ाई ,*" क्या रखा इस जिंदगी

एक तुम्हारा होना~तुमसे कही बातों का कोई अंत क्यो नही मिलता । हर बार कहकर सोचता हूँ अब आखिरी बात तो कह डाली मैंने , पर देखो न अंतिम दफा की कहन अपनी मेढ़ को तोड़कर बह चुकी है किसी ओर , और अब मैं इसे शब्द

राहुल निम्न मध्यवर्गीय परिवार से तीन भाई-बहनों में मझला बेटा था। उसके पिता जूते बनाने वाली एक फैक्ट्री में सेल्समैन का काम करते थे। जिससे बड़ी मुष्किल से उनके परिवार का गुजारा चल पाता था। दसवीं की परीक

सदा बेईमानी करने वाला मनोहर स्कूटी चलाते हुए कुछ सोचते हुए कहीं जा रहा था। थोड़ी दूर बाद लाल बत्ती आने के कारण अनेकों गाड़ियां कतारबद्ध खड़ी हो गई। तभी पीछे से एक मोटरसाईकिल सवार मनोहर के आगे आकर रूका

इंसान का मन कभी अपने आप विचलित नहीं होता है, इंसान को विचलित करने वाला खुद इंसान ही होता है, कोई अच्छे संस्कारों में जीता है,कोई गलत संगति में जो गलत संगत में होते है, अच्छे के साथ बात

आज मनु को लड़के वाले देखने आये थे।मनु के पिताजी के  ही उसकी सगाई की बात चल रही थी पर अचानक से मनुके पिता का हार्ट अटैक से निधन हो गया।इस लिए बात वहीं की वहीं रह गयी। लेकिन जवान बेटी को कब तक रखते

प्रेम तब ही गहरा होता है जब विरह होता है।सभी प्रेम की ही बातें लिखते है जरा सोचे विरह के बाद जो मिलन होता है उसमे प्रेम रिश्तों की जड़ों तक समा जाता है ।एक कहानी के रूप मे आओ समझे।नंदिनी मां बाप की इक

शम्मी आज स्कूल से रोते रोते घर पहुंची । मां ने पूछा ,"क्यों रो रही हो बेटा ? किसी ने मारा है क्या?"  बेचारी शम्मी को मां का आंचल मिला तो बहुत ज़ोर से रोने लगी ।एक हाथ पीछे कमर मे छुपा रखा था । मा

भाईयों और बहनों ।जैसा कि आजादी की 75वीं वर्षगांठ आ रही है तो मै चाहता हूं भारत के हर घर मे तिरंगा लहराना चाहिए।"भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भाषण टीवी पर आ रहा था ।चमेली और उसका पति दिहाड़ी म

गांव की सुन्दर बालिका प्यारा-सा नाम सारिका, ये कविता उसकी कहानी हैजो मुझे आपको सुनानी है,कहानी का पहला चरण है सूरज और उमा का आँगन है,एक कमरे में प्रसव-पीड़ा से उमा आज बेचैन सी है,आँ

मुद्दतों बाद भैया और दिव्या संग मुस्कुरा रही थी,अरसों बाद आज सुरीली आज मायके जा रही थी | सुरीली की सवारी गांव के बहुत पास आ गई थी,पर आज सुरीली गांव पहचान ना पा रही थी | जंगलों और पर्वतों&nbs

आतंक केवल आतंकवादी से नही होता।शगुन ने आतंक प्रत्यक्ष देखा है।वह आतंक के साये मे जी है।शगुन अपने माँ बाप की इकलौती संतान थी।मुँह से बाद मे निकालती थी चीज पहले हाजिर हो जाती थी।लाड प्यार से पली-बढ़ी थी

आज ही सुमी को मां का फोन आया गांव से कुन्ती चाची की तबीयत बहुत खराब है।सुमी के पति ने उसे फटाफट ट्रेन मे तत्काल की टिकट करा कर बैठा दिया और ये कहा कि अगर टीटी कुछ कहे तो कुछ पैसे देकर अपना पीछा छुड़ा

नैना और अमन एक ही ओफिस में काम करते थे। दोनो में अच्छी मित्रता थी । समझ की बात हैं जब एक ही जगह साथ में कामकरते हैं तो दिन भर का ज़्यादातर वक़्त साथ ही गुजारते हैं। घर की बहुत सी बातें एक दूसरे से करत

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