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कचोटती तनहाइयाँ-भाग 2

26 जुलाई 2023

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कथा सुनते मादा गौरैया सोने लगी थी और नर गौरैया भी ऊँघने लगा था ।


"ऊँहहूँ , बडी़ आफत है !दिनभर मजदूरी करके आओ,रात में सोने को मिलता है तो ये बुढ़ऊ भक्क भक्क लगाकर सारी नींद बिगाड़ देते हैं !!"
सत्य शरण ने अपनी पत्नी की तरफ करवट बदलकर उठकर बैठते हुए कहा । 
" अरे जाकर कहिए ना कि हमारी नींद न खराब करें " सत्य शरण की पत्नी ने नींद में भरे हुए कहा और सत्य शरण उठकर बाहर आँगन में आकर वृद्ध पिता से बोला -" आपको रात में ही खाँसना होता है क्या !! सारी नींद खराब कर देते हैं ,, मुझे  और सुगना को तो सुबह फिर काम पर जाना होता है ,,  !!"

वृद्ध पिता अपने बेटे की उलाहना सुनकर कुछ न बोला पर उसकी आँखों से आँसू ढु़लक पडे़ ।अब खाँसी पर भी किसी का वश चलता है क्या !! उमर हो चली है उसकी ,, जब तक उसने काम किया तब तक बेटे व बहू को काम न करने दिया ये कहकर कि मैं कर रहा हूँ तुम लोगों के तो अभी खेलने-खाने के दिन हैं ,, 

पर जब काम छूट गया , उमर हो गई और उसके अशक्त हो जाने के कारण बेटे व बहू को मजदूरी करने जाना पडा़ तो ये  नित्य की उलाहनाएं!!उपेक्षा , ये कचोटती तनहाइयां ,, उसे रह रह कर अपनी पत्नी की याद दिला रही थीं ।

बुड्डा मुँह में अपना अँगौछा ठूँस कर खाँसी दबाता रहा और सोचता रहा कि वाह रे बेटा ,,, बाप के खाँसी आ रही थी तो उसे पानी देने के स्थान पर उलाहना दे गया !! 



"ये आज किस तरफ हम उडा़न भर रहे हैं ?? मैं इसतरफ तो कभी न आई ??" मादा गौरैया ने भोर में अपने नर गौरैया के साथ आकाश में उडा़न भरते हुए विस्मय से पूछा।

नर गौरैया ने मादा गौरैया की बात का उत्तर न देते हुए उससे कहा -" कल तुमको एक दंपत्ति की कथा सुना रहा था , पर तू सुनते हुए सो गई और मैं सुनाते हुए !!"

"हाँ , मुझे आगे जानने की बहुत उत्सुकता है ,,"मादा गौरैया बोली ।

"ये हवेली देख रही हो ,,,ये उन्हीं दंपत्ति की हवेली है जिनकी मैं तुमको कथा कल सुना रहा था ।"नर गौरैया ने आकाश से नीचे देखते हुए एक हवेली की तरफ इशारा करते हुए कहा ।


"अच्छा !!ये वही हवेली है !!" मादा गौरैया ने  पूछा ।

"हाँ इसी हवेली में वो दंपत्ति उस ऊपरी माले के कमरे में रहते हैं ,, लौटते में उन्हें भी दिखाऊँगा " नर गौरैया बोला और दोनों एक घर की छत पर बैठकर विश्राम करने लगे।

" हाँ तो अब आगे बताइए ना क्या हुआ ??" मादा गौरैया ने उत्सुकता से पूछा ।

नर गौरैया आगे बताते हुए जैसे उन्हीं पलों में पहुँच गया --
"ऐसा न कहें मालिक , बेटी है तो क्या हुआ ? है तो आपकी संतान ही ना !!" सुरतिया अपनी साडी़ का पल्लू हाथ से पकड़ कर मुँह में दबाए ,निगाहें झुकाए हुए सूर्य प्रताप भानु से  दबे स्वर में बोली ।

"अरे ओ गन्ने का चीभुर !!!"सूर्य प्रताप भानु क्रोध में चीखे कि शिव प्रताप भानु,व दिव्य प्रताप भानु ,दोनों बच्चे सहम कर माँ से सटकर खडे़ हो गए ।

" जी मालिक !!" श्रीधन ने दौड़कर आकर हवेली के प्रथम कक्ष जो कि हवेली में प्रवेश करने पर ही पड़ जाता था, के बाहर से ही कहा ।
ये कक्ष सूर्य प्रताप भानु ने पत्नी दिव्या को अस्थाई रूप से दिया था जब उसे बच्चा होने के दिन नज़दीक आ गया था।

" सुन ,अपनी घरवाली को इतनी भी तमीज न सिखाई तूने कि जब पति अपनी पत्नी से बात कर रहा हो तो नौकर लोग बीच में अपनी टाँग न अडा़ते हैं !!" 

"क्षमा कर दें सरकार !" सुरतिया मुँह में पल्लू खोंसे हुए सहम कर बोली ।

"सुरतिया,बाहर आ तनिक !!" श्रीधन क्रोध में बोला और सुरतिया कक्ष से बाहर निकल कर गई।

" तेरी अक्ल क्या घास चरने गई है !! खबरदार जो मालिक के सामने मुँह भी खोला !!" श्रीधन गुर्राया ।

और सुरतिया -"क्षमा कर दें आगे से ऐसा न होगा "कहकर वहाँ से चली गई।
श्रीधन भी हैरान था कि इतने वर्षों तक सुरतिया ने कभी भी मालिक के सामने या उनसे प्रत्यक्ष कुछ न कहा था ,,, आज सुरतिया इतना बोल गई !! 

ये सँभव है सुरतिया के रूप में एक माँ की पीडा़ छलक आई थी ।
सुरतिया व श्रीधन के संतान के रूप में एक पुत्र था  जिसका जन्म दो वर्ष पूर्व ही हुआ था 
पर सुरतिया एक बेटी चाहती थी कि उसके एक बेटी भी हो क्योंकि उसका मानना था कि जब तक आँगन में बेटी न खेले तब तक घर का आँगन सूना ही रहता है ।उसको बेटी हुई थी पर जन्म लेते ही उसका निधन हो गया था ।

सूर्य प्रताप भानु ने क्रोध में भरकर अपने दोनों हाथ अपनी नवजात पुत्री की गर्दन की तरफ बढा़ए जिससे दिव्या काँप उठी पर अगले ही क्षण सूर्य प्रताप भानु क्रोध में भरे हुए कक्ष से बाहर निकल गए ।
दिव्या प्रताप भानु ने राहत की साँस ली पर शिव प्रताप भानु और दिव्य प्रताप भानु दोनों को पिता का ये व्यवहार समझ न आया और दिव्य प्रताप भानु ने मासूमियत से माँ से पूछा --"माँ ,पिताजी हमारी छोटी बहन को मारने जा रहे थे !!"

दिव्या की आँखों से अश्रु ढु़लक गए और उसने बच्चों को बहलाने के लिए कहा -"अब तुम दोनों की बहन आ गई है ना तो इसे अपने खिलौने देने पडे़ंगे !!"

"हाँ तो हमारी बहन है ,वो जो माँगेगी वो उसे दूँगा ,मेरे सारे खिलौने वो ले ले फिर भी कोई बात नहीं ।" शिव प्रताप भानु ने कहा पर छोटा दिव्य प्रताप भानु चुपके से माँ के कक्ष से खिसक लिया और अपने कक्ष में जाकर अपने सारे खिलौने सुरक्षित जगह छुपाने लगा ताकि जब बहन खिलौने माँगने वाली हो तो उससे कह सके कि मेरे तो सारे खिलौने टूट गए सो मैंने फेंक दिए ,दादा से ले लो ।

शिव प्रताप भानु ,दिव्य प्रताप भानु के पीछे ही पीछे आया था और उसे अपने खिलौने छुपाते देख मुस्कुराकर ,ये सोचकर चला गया कि मेरा छोटा भाई कृपण है ।

सुरतिया को तीन महीने का गर्भ था और वो ईश्वर से बेटी ही माँग रही थी ।दिव्या के बेटी होने से वो बहुत निहाल थी और बेटी को नहलाना,धुलाना,वस्त्र बदलना, सब सुरतिया ही करती थी ,दिव्या को कमजोरी आने की वजह से वो पूरी हवेली के औरतों वाले कार्य करने के साथ ही नवजात कन्या की भी पूरी देखभाल करने लगी थी जिससे दिव्या  बहुत प्रसन्न थी ।
पर सूर्य प्रताप भानु ने दोबारा अपनी नवजात बेटी पर दृष्टि भी न डाली थी ............शेष अगले भाग में।

Kavyanshi Srivastava

Kavyanshi Srivastava

Bahut sundar likha hai aapne 👍

3 मार्च 2024

मीनू द्विवेदी वैदेही

मीनू द्विवेदी वैदेही

बहुत सुंदर लिखा है बहन आपने आप मेरी कहानी प्रतिउतर पर अपनी समीक्षा जरूर दें 🙏🙏

1 फरवरी 2024

brajmohan panday

brajmohan panday

बहुत बहुत सुन्दर कहानी है, नूतन जी। बधाइयाँ शुभकामनाएं भी।

30 जनवरी 2024

प्रभा मिश्रा 'नूतन'

प्रभा मिश्रा 'नूतन'

30 जनवरी 2024

धन्यवाद सर 🙏😊🙏

Laxmi Tyagi

Laxmi Tyagi

अच्छी रचना लिखी 👌👌👌मेरी रचना भी पढ़िये बेचारी

12 अक्टूबर 2023

लता सुमन 'नमन्'

लता सुमन 'नमन्'

हृदयस्पर्शी कहानी 👌👌

9 सितम्बर 2023

Papiya

Papiya

👏🏼👏🏼👏🏼

27 अगस्त 2023

प्रभा मिश्रा 'नूतन'

प्रभा मिश्रा 'नूतन'

27 अगस्त 2023

धन्यवाद बहन 😊🙏🙏

sayyeda khatoon

sayyeda khatoon

अति उत्तम 👌👌🙏🙏

9 अगस्त 2023

प्रभा मिश्रा 'नूतन'

प्रभा मिश्रा 'नूतन'

12 अगस्त 2023

धन्यवाद बहन 😊🙏

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रचनाएँ
कचोटती तनहाइयाँ
4.7
मैं आप सबके लिए एक नई कहानी लेकर आई हूँ ,जिसका शीर्षक है 'कचोटती तनहाइयाँ '। मेरी ये कहानी पूर्णतः काल्पनिक है ।मेरी ये कहानी है कहानी के नायक सूर्य प्रताप भानु व उसकी सहधर्मिणी दिव्या प्रताप भानु की । सूर्य प्रताप भानु जो अपने पूर्वजों द्वारा प्राप्त हजारों एकड़ भूमि का स्वामी है और दो बेटों शिव प्रताप भानु व दिव्य प्रताप भानु का पिता है । मेरी ये कहानी 'कचोटती तनहाइयाँ ' वृद्धावस्था में अपनी कचोटती तनहाइयों से जूझ रहे सूर्य प्रताप भानु व दिव्या प्रताप भानु की है,अपनी कचोटती तनहाइयों के लिए ये दोनों स्वयं जिम्मेदार हैं ।हर बार इंसान की औलाद ही दोषी न होती है ,कभी कभी माँ और बाप भी ऐसा कुछ कर जाते हैं जिसका परिणाम उन्हें अपनी वृद्धावस्था में भुगतना पड़ता है जैसे सूर्य प्रताप भानु व दिव्या प्रताप भानु भुगत रहे हैं । आखिर हुआ क्या !! ये जानने के लिए पढे़ं मेरी कहानी -'कचोटती तनहाइयाँ ' 😊🙏🙏
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कचोटती तनहाइयाँ-भाग 1

26 जुलाई 2023
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गोधूलि बेला होने वाली है ।गोधूलि बेला में चरवाहे अपने गोवंशों को घर ले जाते हैं, भगवान भास्कर अपना उदास,क्लांत, मुख लिए पश्चिम में जाते हैं और विहग अपने नीड़ की तरफ लौटते हैं ,ऐसे ही गोधूलि बेला में ग

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कचोटती तनहाइयाँ-भाग 2

26 जुलाई 2023
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कथा सुनते मादा गौरैया सोने लगी थी और नर गौरैया भी ऊँघने लगा था ।"ऊँहहूँ , बडी़ आफत है !दिनभर मजदूरी करके आओ,रात में सोने को मिलता है तो ये बुढ़ऊ भक्क भक्क लगाकर सारी नींद बिगाड़ देते हैं !!"सत्य शरण न

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 3

28 जुलाई 2023
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उस दिवस जो, विहग ने सूर्य प्रताप भानु और दिव्या प्रताप भानु के कक्ष से निकलकर हवेली के प्रांगण में बने अपने कोठर में बैठकर अपना सिर अपनी गर्दन पर टिका लिया था , तो उस दिवस से उसने सूर्य प्रताप भानु के

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 4

28 जुलाई 2023
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दिव्य प्रताप भानु ,नंदिनी के साथ इसलिए न खेलता कि कहीं वो उससे उसके खिलौने न माँग ले और दूसरी बात अपनी बहन नंदिनी के जन्म पर जो उसके पिता ने कहा व व्यवहार किया था ,उसके कोमल मन पर उसकी छाप बन गई थी ,उ

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 5

28 जुलाई 2023
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नंदिनी हवेली के मुख्य दरवाजे की ओट से अपना मासूम मन लिए हुए बाहर बैठे पिता व दोनों दादा को देख रही थी।सूर्य प्रताप भानु ने तो नंदिनी का विद्यालय में दाखिला तक न करवाया था ,नंदिनी दिव्य प्रताप भानु को

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 6

29 जुलाई 2023
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सूर्य प्रताप भानु के तीनों बच्चे बडे़ हो रहे थे ।अपनी उम्र पूरी करके दिव्या का प्रिय विहग स्वर्ग सिधार गया था ,जिसकी वजह से दिव्या बहुत शोकाकुल रहने लगी थी। शिव प्रताप भानु पिता के कार्यों में हाथ बँट

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 7

29 जुलाई 2023
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"मेरी पीठ पीछे क्या होता रहता है !! स्पष्ट बताओ,पहेलियाँ न बुझाओ !!"सूर्य प्रताप भानु ने कहा।शिव प्रताप भानु हैरानी से छोटे भाई दिव्य को देखने लगा कि ये क्या कहने आया है यहाँ !!दिव्य प्रताप भानु ने कु

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 8

29 जुलाई 2023
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नर गौरैया ने आगे की कथा मादा गौरैया को पुनः सुनानी आरंभ कर दी --जहाँ एक तरफ शिव प्रताप के मन में अपने पिता सूर्य प्रताप के प्रति पर्याप्त खटास आ गई थी वहीं दिव्य प्रताप ने मन ही मन निश्चय किया था कि प

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 9

30 जुलाई 2023
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श्रीधन सूर्य प्रताप भानु के समीप खडे़ होकर बोला -"मालिक अपनी हवेली के दक्षिण तरफ जो मुख्य मार्ग गया है उस पर जाकर आगे चलकर जो थोडा़ वन क्षेत्र पड़ता है ,उसके आगे ही एक नदी पड़ती है ,,वो नदी पार करने क

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 10

30 जुलाई 2023
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सुरतिया पाकशाला का कार्य समेट रही थी और समेटते समेटते ही उसने मनिका व नंदिनी की बात सुनी थी तो उसका मन भी खिन्न हो गया था ,होता भी क्यों नहीं !! माना हवेली के भीतरी कार्यों में लगे रहने की वजह से उसे

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 11

30 जुलाई 2023
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"जानती हूँ मैडम जी ,, उसी संबंध में बात करने आई हूँ।"सुरतिया ने दिव्या के पैरों के पास भूमि पर पडी़ दरी पर बैठते हुए कहा ।"हाँ बोल क्या बात करनी है तुझे ?"दिव्या ने पूछा ।"वो मैडम जी ,कल रात से

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 12

30 जुलाई 2023
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दिव्या का बुझा और उदास मन याद करने लगा कि कब 'इन्होनें' मुझसे प्यार से बात की !! विवाह के बाद से अभी तक इन्होने उसपर अपनी व्यस्तता ही तो थोपी , अपना रौब ही तो झाडा़ और कुछ नहीं ,,, प्यार के दो बोल तो

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 13

31 जुलाई 2023
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नंदिनी के विवाह के दो दिन रह गए थे और दिव्या मन ही मन ये सोचकर कुढ़ रही थी कि इनको लोकलाज की भी परवाह नहीं है ,, ये नहीं सोचते कि सामने भले कोई न बोले मगर पीठ पीछे तो लोग हँसकर कहेंगे ही कि देखो

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 14

1 अगस्त 2023
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दिव्य प्रताप भानु प्रसन्न होता हुआ ,मन ही मन अपनी पीठ थपथपाता हुआ हवेली के बाहर जा रहा था कि मैं जैसा सोच रहा था सबकुछ वैसे ही हो रहा है अब मुझे अपना दाँव खेलना है ।गोपी हवेली के सामने वाले शिव मंदिर

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 15

1 अगस्त 2023
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पूरे विधि विधान से कुशलता पूर्वक नंदिनी का विवाह संपन्न हो गया था और विवाह संपन्न होते होते भोर हो गई थी ।भोर में कलेवा होने लगा ।सूर्य प्रताप भानु ने हवेली के बाहर बने बरामदे में कलेवा में ही नंदिनी

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 16

2 अगस्त 2023
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नंदिनी मनिका को लेकर विदा होकर नवीश के साथ चली गई ,तत्पश्चात श्रीधन हवेली की और उसके सामने शिव मंदिर की सारी सजावट कृषकों की मदद से हटवाने लगा ।शिव प्रताप भानु रात का बचा भोजन व मिठाइयाँ भीतर रखवाकर प

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 17

2 अगस्त 2023
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अब वो समय आ गया था जब शिव प्रताप भानु और दिव्य प्रताप भानु दोनों के विवाह के लिए रिश्ते आना प्रारंभ हो गए थे।सूर्य प्रताप लड़की वालों से वार्ता करते और उनके द्वारा लाई उनकी बेटी की फोटो हवेली के

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 18

2 अगस्त 2023
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" ओहो , एक तो सूर्य प्रताप का नंदिनी के प्रति ऐसा व्यवहार कि भाई शिव के द्वारा उसके संदूक में जेवर रख देने से आग बबूला हो जाना , अपनी हजारों एकड़ की जमीन में से शिव प्रताप को महज ढा़ई सौ एकड़ दे

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 19

2 अगस्त 2023
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जब से सूर्य प्रताप ने अपनी वसीयत कर अपनी हजारों एकड़ की भूमि में से शिव प्रताप को महज ढा़ई सौ एकड़ भूमि दी थी और दिव्या ने भी इस पक्षपात पर कुछ न कहा था तब से शिव प्रताप के मन से माँ दिव्या भी दूर हो

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 20

3 अगस्त 2023
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दिव्या व मानसी बात कर ही रही थीं कि दिव्या के कक्ष में दिव्य ने प्रवेश किया ।"अरे दिव्य ,मेरा लाड़ला बेटा ,आओ ,आओ ।"दिव्या ने उठकर आगे बढ़ते हुए दिव्य प्रताप भानु से स्नेह का गागर उडे़लते हुए कहा ।दिव

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 21

3 अगस्त 2023
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श्रीधन दिव्य से कुछ भी कहने की हिम्मत न कर सका और दिव्य की तरफ देखकर -"नहीं ,कुछ नहीं बेटा"कहकर वापस हवेली के पीछे बने अपने घर लौट गया ।श्रीधन के घर जाने के दो रास्ते थे ,एक हवेली के गलियारे से होते ह

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 22

7 अगस्त 2023
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।श्रीधन हवेली में दबे पाँव आ तो गया मगर चूंकि वो प्रथम बार हवेली के भीतर आया था तो उसे दिव्य प्रताप भानु का कक्ष कौन सा है ये न पता था अतः वो हर कक्ष के पास से दबे पाँव गुजरता हुआ हर कक्ष के अंदर झांक

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 23

7 अगस्त 2023
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" उफ़ ! ये दिव्य तो बहुत ही बुरा इंसान है, अपने ही भाई को फंसा रहा है जबकि उसकी कोई ग़लती ही नहीं इस सब में !!" मादा गौरैया ने नर गौरैया से कहा ।" हां ,ये इंसान और इनकी प्रकृति ऐसी ही होती है ,ये अपने

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 24

7 अगस्त 2023
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सुरतिया श्रीधन को लेकर अस्पताल के बाहर पड़े परिसर के एक वृक्ष के नीचे बैठ गई और रोते हुए बोली - "ये आपने क्या कर दिया ! अब हम कहां रहेंगे ,क्या खाएंगे ! " " मैं भी जा रहा हूं दिव्य दादा , यहां कब

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 25

7 अगस्त 2023
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कनक बिना कुछ कहे ही चली गई, बडे़ और उदार ह्रदय वाली मानसी ने भी घर में शांति बनी रहे इस हेतु आगे कुछ न कहा और सारे कार्य स्वयं ही करती रही ।मानसी की चुप्पी से कनक और ज्यादा मनमानी करने लगी और मा

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 26

7 अगस्त 2023
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"क्या ! पिताजी ने हमारे साथ इतना पक्षपात किया और मां ने कुछ न कहा क्या !आप भी तो उनके बेटे हो और बडे बेटे हो कोई आपको कहीं से उठा कर तो न लाया गया !!"मानसी ने राज प्रताप भानु को सुलाते हुए कहा ।" एक त

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 27

8 अगस्त 2023
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"ये कैसा बंटवारा है पिताजी !! पूरी हवेली दिव्य प्रताप भानु की और जितना परिसर पड़ा वो सब मेरा !! मैं पहले अपने लिए घर बनवाऊं तब जा कर रह पाऊं !! "शिव प्रताप भानु ने हैरानी में भरकर पिता सूर्य प्रताप भा

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 28

8 अगस्त 2023
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हवेली के पीछे श्रीधन के लिए जो घर सूर्य प्रताप भानु ने दिया था वो बस दो कक्षों का एक छोटा सा घर था जिसमें एक कक्ष इतना छोटा था कि उसमें पाकशाला ही हो सकती थी , दूसरा कक्ष ही था जिसमें दो पलंग पड़ने के

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 29

8 अगस्त 2023
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जैसे जैसे बच्चे बडे़ हो रहे थे उन्हें चीजें समझ आ रही थीं । शिवन्या, शिवल्या और शिवाली को समझ आने लगा था कि बाबा उन्हें पसंद न‌ करते हैं तो वो अब हवेली न‌ जाकर अपने यहां शिव‌ मंदिर के सामने ही अपने गु

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 30

8 अगस्त 2023
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दिव्य प्रताप भानु के बच्चों की पढाई हो चुकी थी इसलिए वे अपनी मां कनक के साथ हवेली ही रुक गए थे मगर दिव्य प्रताप भानु की सरकारी नौकरी थी अत: वो वापस चला गया था ,कनक ने दिव्य प्रताप भानु से कह दिय

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 31

10 अगस्त 2023
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शिव प्रताप भानु को एक पिता का जो स्नेह सूर्य प्रताप भानु से न मिला था वो उसे श्रीधन से मिलता महसूस होता था ,यही कारण था कि वो श्रीधन से हर छोटी-बड़ी बात कहकर अपना मन हल्का कर लेता था ।आज भी वो अपने खे

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 32

10 अगस्त 2023
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मानसी शिव प्रताप भानु के पास बैठती हुई बोली ,-" राज और राग दोनों हवेली के बंटवारे की बात करने पिताजी के पास जाएंगे , मुझे तो यही लग रहा है कि पहले तो पिताजी ही उसके बाद दिव्य प्रताप और उनके दिवाकर व द

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 33

10 अगस्त 2023
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मानसी बोली -" उनके बाप का नहीं मगर उनके बाबा का तो घर है ,वो बाबा ,जिनका स्वास्थ्य इतना खराब हो गया था कि वे मरणासन्न हो गए थे तब तो तुम और देवर जी अपने -अपने मुंह छुपाए वहां पड़े हुए थे तब इनके बाप न

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10 अगस्त 2023
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पिता ससुर सूर्य प्रताप भानु के इस निर्णय को सुनकर कनक का मुंह उतर गया और दिवाकर प्रताप भानु और दिनकर प्रताप भानु के चेहरों पर भी बारह बज गए ।सूर्य प्रताप भानु ने आगे राज प्रताप भानु और राग प्रता

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 35

10 अगस्त 2023
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सबके पेट दुख रहे थे दिव्य प्रताप भानु और उसके बेटों को हवेली में रहते देखकर ,खाना न‌ हजम हो रहा था ,हवेली बंटवा ली तभी सबके कलेजे को ठंड़क पड़ी ।"दिव्या यूं भुनभुनाते हुए ये भी न सोच रही थी कि उ

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 36

11 अगस्त 2023
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"पिताजी , आपकी पोती का श्रावस्ती जिले में विवाह देख आया हूं , आपको विवाह की बातचीत तय करने चलना है ।" शिव प्रताप भानु ने कहा ।दिव्यांश प्रताप भानु को पता चला कि शिव प्रताप ताऊ जी आए हैं तो

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11 अगस्त 2023
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राज प्रताप की बात सुनकर शिव‌ प्रताप भानु समझ गया कि इसने मेरी और मानसी की विगत रात्रि की बात सुन ली है तभी इसने अपनी दादी के समक्ष प्रश्न उठाया है वहीं राज प्रताप भानु के मुंह से 'बाबा की तो पूरी तिजो

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11 अगस्त 2023
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बाबा सूर्य प्रताप भानु का उत्तर सुनकर राज प्रताप भानु और राग प्रताप भानु उठकर जाने लगे ।घर के अंदर से अपने ट्रांसपोर्ट के लिए जाते दिनकर प्रताप भानु ने बाबा और राज दादा व राग दादा की बात सुनी और वो व्

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 39

11 अगस्त 2023
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दिव्यांश प्रताप भानु , शिवन्या के विवाह में सम्मिलित हुआ था , ये राज प्रताप भानु को तो न बुरा लगा क्योंकि वो सुलझे दिमाग का और सह्रदय था मगर राग प्रताप भानु का उसको देखकर मुंह बना ही रहा ।अगले दिन जब

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 40

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सूर्य प्रताप भानु ने अपने दरवाजे पर राज प्रताप भानु और राग प्रताप भानु को आया देखकर उनसे कहा -" कहो शिव प्रताप के दूतों , आज शिव प्रताप की तरफ से क्या संदेश लेकर आए हो !!" " चरण स्पर्श बाबा , हम

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 41

13 अगस्त 2023
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शिवल्या भी अपने भाइयों , पिता व मां को परेशान‌ देखकर दुखित थी और दोपहर का भोजन‌‌ कर अपने कक्ष में लेटी हुई करवटें बदलती जा रही थी , जब चैन‌ न पडा़ तो सोचा कि चलकर कुछ क्षण शिव‌ मंदिर में ही बैठूं ! और

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 42

13 अगस्त 2023
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दिव्यांश प्रताप भानु का विवाह कुशलतापूर्वक निपट गया था और शिवन्या और शिवल्या अपने अपने पतियों के साथ अपने ससुराल वापस जाने के लिए सामान बांध‌ रही थीं ।सामान बांधने के बाद शिवन्या और शिवल्या दोनों मां

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 43

13 अगस्त 2023
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राज प्रताप भानु खेतों पर काम करते हुए पिता से बोला -" पिताजी ,आप चिंता न करें, शिवाली ने कह दिया है मगर वो एक दिन‌ भी भूख सह न पाएगी और भोजन कर लेगी , वो एक दिन भोजन न करे वो मैं सह सकता हूं मगर उसको

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 44

15 अगस्त 2023
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शिवाली के लिए इसके आगे एक शब्द भी कहा तो मैं तुम्हारी जुबान खींच लूंगा ,मुझे शिवाली के लिए ऐसे शब्द सुनना कदापि स्वीकार नहीं है , तुम्हें पूरी सौ एकड़ भूमि चाहिए ना , ठीक है तुम्हें पूरी सौ एकड़ भूमि

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 45

16 अगस्त 2023
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शिव प्रताप भानु का कोई समाचार न‌ मिलने के कारण श्रीधन का मन छटपटाता रहा ........... राज प्रताप भानु बहन शिवाली के विवाह की तिथि समीप आने के कारण विवाह की बची हुई तैयारियों में लगा था और उसी मध्य

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कचोटती तन्हाइयां -भाग 46अंतिम भाग

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दिव्या और सूर्य प्रताप भानु घर के मुख्य दरवाजे से पहले बने बरामदे के ऊपर बने कमरे में ले गए , और दिव्य प्रताप भानु और कनक , दिनकर प्रताप भानु और उसकी पत्नी सहित चले गए ।दिव्य प्रताप भानु ने चतुराई के

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