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दो आंखें बारह हाथ - सामजिक सुधार का संदेश देती फ़िल्म

28 अक्टूबर 2019

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जेल एक ऐसी जगह, जहां इंसान अपने किए गए गुनाहों की सजा काटता है, लेकिन इस बात कि क्या गांरटी है कि वहां से बाहर आने के बाद उसे अपने किए का पछतावा हो और वो फिर अपराध ना करे और सुधर जाए। कोई किन परिस्थितियों में अपराधी बना और उसका मनोविज्ञान जानना भी बेहद ज़रुरी है ताकि समाज में अपराध होने से रोका जा सके। कुछ सालों पहले पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने तिहाड़ जेल में सुधार अभियान चलाया था, उनके कठिन परिश्रम के सकारात्मक परिणाम निकले थे।

यूं तो अपराधी और कैदी ये शब्द आम लोंगो के लिए किसी खौफ से कम नहीं होते है, क्योंकि वो अपराध का शिकार होने से डरते है जो कि स्वाभाविक भी है। इन्हें सही रास्ते पर लाना और सुधार करना हर किसी के बस की बात नहीं होती है।

इसी थीम पर साल 1957 में वी शांताराम ने दो आंखे बारह हाथ नाम नाम से फिल्म बनाई।

कहा जाता है कि महाराष्ट्र की खुली जेल के हुए प्रयोग से प्रेरणा लेते हुए ये फ़िल्म बनीं थी। इस फिल्म में ना तो कोई ग्लैमर था ना ऑयटम गीत, ना ही अपराध का महिमामंडन या कोई मसालेदार कहानी। एकदम सीधी सादी पटकथा के साथ ये फिल्म बनाई गई।

ये कहानी है एक जेलर (वी शांताराम) की जो छह अपराधियों को जो कि कत्ल के आरोप में जेल में बंद है को लेकर पुराने फार्म हाउस में लेकर जाते है। इन्हें सुधारना किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं होता है कि वो विल पॉवर के और मेहनत के दम पर इन्हें सही रास्ते पर लाने में कामयाब हो जाते है, इन कैदियों के अथक परिश्रम कारण खेत में फसलें लहलहाने लगती है।

इस फिल्म के अंत में जेलर को बैलों से मुकाबला करते हुए दिखाया गया है वो अपराधियों को सुधारने में तो कामयाब हो जाते है लेकिन ज़िंदगी की जंग हार जाते है।

एक तरह से ये फिल्म संदेश देती है कि कुछ काम मुश्किल हो सकते है लेकिन असंभव नहीं।

इस फिल्म में लता मंगेशकर का गाया हुआ गीत ए मालिक तेरे बंदे हम घर और स्कूल, कॉलेज में गाई जाने वाली प्रार्थना बन गया है। इस फ़िल्म ने संध्या पर फिल्माया गया गीत सैय्या झूठों का बड़ा सरताज निकला गीत गंभीर से विषय पर बनाई गई इस फिल्म को मनोरंज टच देता है। ये फिल्म नेशनल अवार्ड के साथ ही बर्लिन फिल्म फेस्टिवल और गोल्डन ग्लोब अवार्ड में भी अपनी छाप छोड़ चुकी है।

इमेज सोर्स-आयएमडीबी

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हुई सभा एक दिन गुड्डे गुड़ियों की.गुड़िया बोली,मैं सुंदरता की पुड़ियामुझसे ना कोई बढ़िया.इतने में आया गुड्डापहन के लाल चोला,कितनों का घमंड है मैंने तोड़ा.बीच में उचका काठी का घोड़ाअरे चुप हो जाओ तुम थोड़ा.मैंने ही हवा का रुख़ है मोड़ा.लट्टू घूमा, कुछ झूमा.बोला लड़ों

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नशामुक्ति

19 नवम्बर 2019
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नशा "नाश" का दूसरा नाम है.ये नाश करता है बुद्धि का.ये नाश करता है धन का.ये नाश करता है संबंधों का.ये नाश करता है नैतिक मूल्यों का.नाश नहीं निर्माण की तरफ बढ़ोयुवाओं तुम नशामुक्त समाज बनानेका संकल्प लो.शिल्पा रोंघे

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फिर होगा राजा महाराजाओं में मुकाबला-बॉलीवुड

20 नवम्बर 2019
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इतिहास भले ही गुजरा हुआ वक्त होता है इसका मतलब नहीं हैकि इसके बारे में जानकारी होना हमारे लिए उपयोगी नहीं होता है, ये हमारे देश की धरोहर होता है, मानवसभ्यता के विकास और इतिहास से मिले सबक ही सुनहरे भविष्य को गढ़ने में मदद करतेहै। आज अपने इस

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धरती करे पुकार - अब मुझे यूं ना सताओ

21 नवम्बर 2019
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कहीं कांप रही धरती. कहीं बेमौसम बारिश से बह रही धरती. कहीं ठंड के मौसम में बुखार से तप रही धरती. कभी जल से, तो कभी वायु प्रदूषण से ज़हरीली हो रही प्रकृति. विकास के नाम पर विनाश का दर्द झेलती प्रकृति अपनी ही संतति से अवहेलना प्

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कहीं आप अपने बच्चों को भेड़चाल का हिस्सा तो नहीं बनाना चाहते है।

22 नवम्बर 2019
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जनम जनम की बात है

23 नवम्बर 2019
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सुधार की कैसी चाह ?

27 नवम्बर 2019
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है जुटे हुए कुछ लोगसुधार में.है जुटे कुछ लोग आधुनिकताकी दुहाई देकर पंरपराओं कोप्राचीन बताने में.तो कुछ पंरपराओं की आड़ लेकरबदलाव को ठुकराने में.है जुटे हुए कुछ लोगअपनी ही बात सही मनवाने में.उनकी इच्छाओं का नहीं कोईअंत, सिर्फ इसलिए जुटे है व

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क्या आप भी है ओल्ड स्कूल लवर.....

29 नवम्बर 2019
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अब नारी सम्मान की बात कहां करे ?

30 नवम्बर 2019
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क्या अब नारी सिर्फ देव लोक में हीसम्मानित रह गई है ?मां की कोख में होतब भ्रूणहत्या की बात सोचकर सहम जाती है.गर दुनिया में आने का सौभाग्य पा जाए तोतब अस्मत को लेकर जाती है सहम.चढ़ती है डोली तबदहेज जैसे दानव को देखकर जाती है सहम.दुनिया मे

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काश

1 दिसम्बर 2019
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काश कोई आईना ऐसा भी होता.क्या मंजूर है दुनिया बनाने वाले को,पहले से ही बता देता, दिल की उलझन को चुटकियों में ही सुलझा देता.शिल्पा रोंघे

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सोशल प्राणी का सच

2 दिसम्बर 2019
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खुश है कुछ लोगइंस्टाग्राम, फ़ेसबुक, और ट्विटरपर अपनी फ़ैन फॉलोइंग को गिनकर.अपनी निज़ी जिंदगी को सार्वजनिककर.मगर भूल जाते है इस वर्चुअल दुनियामें खोकर उस पड़ोस को जो सबसेपहले पूछते है उनका हाल चाल.वो स्कूल कॉलेज और दफ़्तर केदोस्त जो बिना बताएं ही जान लेते हैदिल की बात.उंगल

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चाटुकारिता

3 दिसम्बर 2019
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ना कोई फ़ीस लगती है ना कोईसिफारिश लगती है.चाटुकारिता की शिक्षा बिल्कुल मुफ़्त में मिलती है.शिल्पा रोंघे

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सच - दो लफ़्जों की कहानी

4 दिसम्बर 2019
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सच को कड़वा ही रहने दो दोस्तो.गर वो मीठा होता तो तिजारत ही बन जाता.शिल्पा रोंघे

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सिड्रेंला और लैला जब मिली

5 दिसम्बर 2019
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सिड्रेंला और लैलामें बहस एक दिनजमकर हुई। लैला सिड्रेंलाकी किस्मत कोबेहतर बता गईसिड्रेंला को लैलाने कहा देखोफर्श से तू अर्शपर पहुंचगई। मैं महलों की रानीहोकर अकेली ही रह गई। कुछ इस तरह वो फ़कीरीको वो अमीरी से बेहतरबता गईऔर कह गई प्यार मेंउंच और नीचकी बात गलती से भी ना कर

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नौ रसों की गाथा

5 दिसम्बर 2019
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बिना मिठास के फल ही क्या ?बिना रस के काव्य की रचना ही कैसे हो भला.चलो रस भरते है जीवन में, काव्य रचते है रंग बिरंगे से हम.प्रेम रस के रूप अनेकश्रृंगार, वात्सल्य, भक्ति का का होता संचार.कभी मिलन है तो कभी विरह है, श्रृंगार रस.कभी कृष्ण तो कभी राधा है इसका दूसरा नाम.कभी ममत

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अब महिला सम्मान को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए ।

6 दिसम्बर 2019
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जीने की कला

7 दिसम्बर 2019
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हां दर्द सहना भी एक कला है। गम बर्दाश्त कर लेना भी एक कला है। खुद नाखुशी के दौर में रहकरदूसरों से ना जलना भी एक कला है। छिपकर रोना भी एक कला है । अंधेरे में भी जुगनू बनकर जीनाएक कला है। कहती है अगर खुदगर्ज़ दुनिया तोकहने तो कहने दो। क

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मीरा के वचन मोहन के लिए

8 दिसम्बर 2019
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भेजा था विष का प्याला अमृत बन गया। भेजा था विषैला सांपफूलों का हार बन गया। तेरी ही करामात है ये मोहनकि कलियुग में भी जी रही हूं। बिना डरे तेरी भक्ति के गीतगा रही हूं। शिल्पा रोंघे

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जोगी बनना कहां आसान है ?

13 दिसम्बर 2019
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आसान नहीं है ज़िंदगीजीने का तरीका सीखलाना.आसान नहीं किसी कोसही राह दिखाना.आसान नहीं है खुद को भी बदलना, कुछ ख़्वाहिशोंको छोड़ना, कुछ सुविधाओं को त्यागना.त्याग की अग्नी में तपना औरउम्मीद के दीपक जलाना.धूप, बारिश, और ठंडको सहना.होंठो पर शिकायत कम और समाधाननिकालना.हां सचम

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जनसंख्या विस्फोट

16 दिसम्बर 2019
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बढ़ती जनसंख्या परस्वास्थ्य सुविधाएं पड़ रही कम.महंगी हुई शिक्षा और अच्छे स्कूल हुए कम.ट्रेनों में बैठने को हुई जगह कम.महानगरों में रहने को मकान पड़ रहे कम.पेड़ और पौधे हुए कम.पीने का पानी हुआ कम.सिकुड़ रहे खेत खलिहान, अनाज हुआ कम.बढ़ रही गरीबी और महंगाई.किसी ने धर्म को तो किसी ने जातिको देश की बदहाल

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सच और झूठ

17 दिसम्बर 2019
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हर बार सच्चाई की सफाई देना जरुरी नहीं.कभी कभी सही वक्त सब कुछसाफ कर देता हैअपने आप ही.सूरज को ढकनेकी कोशिश करता हैबादल हर कभी, लेकिन उसे रोशनी देनेसे रोक सका हैक्या वो कभी.शिल्पा रोंघे

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अभिव्यक्ति की आजादी का अर्थ ये तो नहीं......

18 दिसम्बर 2019
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वक्त वक्त की बात

19 दिसम्बर 2019
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कहते है जो ये कि वक्त के पंजों से बचालेंगे तुम्हेंवहीं सबसे बड़ेशिकारी होते हैं.शिल्पा रोंघे

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स्वंयवर

20 दिसम्बर 2019
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सीता स्वंयवर पर .....कैसे मैं पहचानू उन्हें.कैसे मैं जानूं के वो बनें हैै वो मेरे लिए.होगी सैकड़ों की भीड़ वहां.तेजस्वी और वैभवशाली तो होंगेवहां कई और भी.लेकिन सुना है मैंनें शिव का धनुषउठा सकेंगे कुछ ऐसे प्र

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साथी

21 दिसम्बर 2019
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साथी उसे बनाओं जो सुख दुख में साथ दे.ना कि उसे जो सिर्फ तस्वीरों में आपकी शोभा बढ़ाएं.शिल्पा रोंघे

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चकाचौंध

24 दिसम्बर 2019
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“चकाचौंध” पत्रिका अपने प्रकाशन के चार साल पूरेकर चुकी थी, किसी को उम्मीद भी नहीं थी कि इस पत्रिका की बिक्री इतनी बढ़ जाएगी,अब ऐसे में सभी सदस्यों को मीटिंग में बुलाया गया और उनके योगदान के लिए बधाई दीगई। तभी मीटिंग में एक व्यक्ति ने पत्रिका

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अलविदा 2019

28 दिसम्बर 2019
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झड़ने दो पुराने पत्तों को.🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂गिरने दो फूलों को जमीं पर.🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼कि नए पत्ते फिर आएंगे शाखों पर.🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿कि नए फूल फिर उगेंगे डाली पर.🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹ताकेंगे आसमान की ओर.🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴गिरने से मत डरो, झड़ने से ना डरो.बीज भी जमीन में गिरकर ही पौधे

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नूतन वर्ष का अभिनंदन

30 दिसम्बर 2019
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वहीं खड़े है वृक्ष सभी तनकर.वहीं खिल रहे है फूल सुंगध फैलाकर.सदियों से वहीं खड़े पर्वत विशाल.उसी समुद्र में जाकर मिल रही तरंगिणी.उसी डाल पर बैठा है पक्षी घरौंदा बनाके,उसी नभ में उड़ रहा है पंख फैलाकर.कुछ नहीं बदलता नवीन वर्ष के साथ हां बस संकल्प निश्चित ही हो जाते है दृढ़.बीते वर्ष में मिली सीखें मा

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साल 2019 की अंतिम रात्रि और नवीन वर्ष का पहला कदम

31 दिसम्बर 2019
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चंद्र की शुभ्र किरणेंले रही विदा दुल्हन की तरह.रात्री की डोली मेंबैठकर उन्हें सूर्योदय के घर जाना है.तम तो प्रकाशतक जाने का प्रतिदिन का साधन है.किंतु आज पिछले बरस कोसबको नवीनवर्ष से मिलवानाहै.शिल्पा रोंघे

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मौन के रुप अनेक

7 जनवरी 2020
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एक ही मौन के देखो कितने रूप.कभी ध्यान है,कभी निद्रा है मौन,कभी उपासना है मौन,कभी भोरतो कभी रात का काला सन्नाटा है मौन,ना पूरा "हां" ना पूरा "ना"है मौन.ना पूरा है ना अधूरा हैसचमुच एक रहस्य ही है मौन.शिल्पा रोंघे

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रॉक गार्डन पर कविता

9 जनवरी 2020
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रॉक गार्डन पर कविता- फ़र्क बस नज़रिये का था.टूटी हुई चीज़ समझकर बेज़ान मान लिया गया.इक शख़्स ने जोड़ जोड़कर मुझे खूबसूरत बागीचा बना लिया.शिल्पा रोंघे

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खबरों से कहां गायब हो गया विकास ?

11 जनवरी 2020
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इन दिनों सखी शिव मेरे स्वप्न में आते है

13 जनवरी 2020
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इन दिनों सखी शिव मेरे स्वप्न में आते हैहै भभूत लगाए.कंठ में विषधारी सर्प है सजाएमस्तक पे चंद्र लगाए.वो त्रिशूलधारीइंद्रधनुषी दुनिया से दूरहिमालय में अ

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तिल गुड़ खाइए मीठा - मीठा बोलिए - मकर संक्राति

14 जनवरी 2020
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हल्दी और कुमकुम का टीकालगाकर हो शुभारंभ.तिल और गुड़ की मिठास वाणी में जाए घुल.सुगंधित सुमन से सुवासित हो मनमंदिर.अनंत आकाश में अपना अस्तित्व दर्ज कराए रंगबिरंगी पतंग.धनु राशि स

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इन बॉलीवुड एक्सट्रेसेस ने बोल्ड स्टाइल में साड़ी पहनकर बिखेरा जलवा।

27 फरवरी 2020
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साड़ी का नाम लेते हीभारतीय परिधान का नाम ज़हन में उभर आता है। बिकनी का नाम लेते ही स्वीमसूट की बातछिड़ जाती है। अपने इन दोनो तरह की ड्रेससमें बॉलीवुड डिवा को देखा होगा ही

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महिलाओं को सॉफ्ट टारगेट बनाना छोड़िए....

18 अप्रैल 2020
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खंडित मुस्कान

30 अप्रैल 2020
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प्रतिमा नाम था उसका, हमेशा मुस्कुराती रहती, ऐसा लगता कि मानों ज़िंदगी बहुत आसान है उसके लिए, ना पढ़ाई को गंभीरता से लेती ना जीवन को, उसकी हमेशा की ये आदत थी सभी क्लॉस में पढ़ने वाली सभी लड़कियों से कहना कि आज पार्टी दो ना, मजबूर कर देती थी उन लड़कियों को घर से पैसे मांगने के लिए, खुद भी देती थी, हाल

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करारा जवाब

2 मई 2020
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शीला देखने में काफी सुंदर है, बड़ी बड़ी आंखे,घुंघराले बाल और दूध सी दमकती त्वचा और साथ गुणवंती भी थी, उसके ससुर को वो देखतेही भा गई तो उसने अपनी बेटे मनोज का रिश्ता उसके साथ तय कर दिया, मनोज टॉप केकॉलेज से पढ़ा लिखा था और सिर्फ अंग्रेजी में ही बात करना पसंद करता था, तो वहीशीला संस्कृत में एम ए पास थ

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पुराने खंडहर का सच

3 मई 2020
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माधव और अजीत नाम केदो भाई अर्जुननगर नाम के गांव में रहते थे। दोनों भाईयों में काफी प्यार था वोदोनों गेंहू का व्यापार किया करते थे, उनके खेतों में उगाया गया गेंहू दूर दूर तकमशहूर था लेकिन अभी भी वो दोनों मध्यवर्गीय स्थिती में ही थे और सोचा करते थे किखेतों में दिन रात पसीना

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टूटी सौंगध

5 मई 2020
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“खाओ मेरी कसम ना शराब को हाथ लगाओगे ना किसी लड़की के चक्कर में पड़ोगे जब तक तुम्हारी पढ़ाई पूरी ना होगी और मुझसे कुछ भी ना छिपाओगे” अपूर्व को बार बार अपनी मां की सौगंध याद आ रही थी, जब वो नाशिक से पुणे पहुंचा था इकोनॉमिक्स की पढ़ाई करने, ग

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कोख का अधिकार

8 मई 2020
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संगीता के विवाह को 6 साल हो चुके थे उसकी 4 साल की एकबेटी थी, वो फिर एक बार मां बनने वाली थी।उसने ये खबर सबसे पहले अपने पति को सुनाई फिर अपनी सासको, जैसे ही उसकी सास ने ये खबर फोन पर सुनी वो बेहद ख़ुश हुई, संगीता गर्मियों कीछुट्टियों में अपनी बेटी को लेकर अपने मायके जबलपुर

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नशे से मुक्ति की ओर

10 मई 2020
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लकी ड्रेस - एक प्रेरणादायी कथा

12 मई 2020
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संजीवनी का आज कॉलेजमें प्रथम वर्ष का फायनल एग्ज़ाम है, उसकापेपर सुबह 8 बजे है, लेकिन ये क्या वो तो 6.30 बजने के बाद भी उठी ही नहीं। उसकीमां ने आवाज़ देकर उसे जगाया कहा “बेटा तुम्हारा आज इम्तिहान है और तुम सो हीरही हो, रोज तो सुबह 4 बजे उठ

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वफ़ा की सज़ा

14 मई 2020
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चंद्रपुर नाम के गांव में बिना किसी गुनाह केसभी पंचो के आगे सर झुकाकर खड़ी रही विनिता और उसे फ़रमान सुना दिया गया कि उसेअपने माता-पिता के घर वापस भेज जाए, उसी दोपहर उसका पति उसे अपनी कार में बिठाकरउसके मायके की तरफ़ निकल पड़ा। दोनों के बीच एक अजीब सी ख़ामोशी पसरी हुई है, तभीकार की खिड़की से खेतों की

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श्यामा की वापसी

16 मई 2020
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श्यामा नाम था उसका, ठीक उसके श्वेत रंग केविपरीत, हर दिन हमारे घर के सामने आ खड़ी होती। ऐसा उसने करीब 10 दिन तक किया,हमने कहा ये तो अब पराए घर जा चुकी है फिर यहां क्यों आती है तो घर वालों ने कहाकि ये गाय है इंसान नहीं जो किसी को इतनी जल्दी भूल जाए, भूलना तो इंसानी फ़ितरतहै

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प्रेम का आखिरी पड़ाव

16 मई 2020
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शशांक ने कहा “हैलो स्मिता मैं बैंगलुरु पहुंच गयाहूं। यहां की एक फ़ार्मा कपंनी में मैनेज़र के तौर पर मेरा प्रमोशन हो गया है,30 साल का हो गया हूं। कोई अच्छी सी लड़की बताओं ना बिल्कुल तुम्हारीतरह”। “मैं क्या को

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औरत का किरदार

17 मई 2020
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अपने स्टील के डब्बेमें रखे कुछ गुलाब जामुन में से एक को निकालकर प्रीति ने अनिमेष के हाथ मेंजबर्दस्ती थमा दिया। उसके बाद अपने दो साल के बच्चें को खिलाने के बाद अपने पति केजबरन मुंह में ठूंस दिया। ऐसी मिठाई खाकर भी ख़ुश नहीं महसूस कर रहा था अ

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संगत का असर

18 मई 2020
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आज मनोहर घरआया तो उसकी मां उसे देखकर हक्की बक्की रह गई, चेहरे की हवाईयां उड़ी हुई और कपड़ों पर मिट्टीऔर धूल के धब्बे ऐसे प्रतीत हो रहे थे किमानो मिट्टी में लोट कर आया हो।तब उसकी मांने पूछा बेटा “ये क्या हाल

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देवी का आभास

19 मई 2020
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35 साल की वोऔरत माथे पर बड़ा सा तिलक, आंखों में गहरा काजल लगाकर अपने लंबे केश लहराने लगी।“ हां मुझेमहसूस हो रही है, हां मेरे शरीर में उसका प्रवेश हो चुका है....हां उसकी उपस्थितीमुझे महसूस हो रही है...जय मां...जय मां...” मनोरमा ऐसाकहने लगी।अपने मिट्टीसे बने कमरें में लकड़ी

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मायानगरी के सपनें

20 मई 2020
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सचिन को सुबह-सुबह उसके दोस्त का फ़ोन आया वोकहने लगा “अरे वाह तूने तो सच में शहर का नाम रोशन कर दिया”सचिन ने कहा“ अरेक्या हुआ ऐसा”नवनीत ने कहा “तेरा इंटरव्यू छपा था जबलपुर केएक अखबार में”सचिन ने कहा “ओह उसकी बात कररहा है तू”हेडलाईन छपी “शहर

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औकात- एक प्रेरणादायी कथा

21 मई 2020
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सुरेखा की शहर के बीचों-बीच कपड़े कीबहुत बड़ी दुकान थी। हर तरह की महंगी साड़ियां और सलवार कमीज के कपड़े वहां मिलतेथे। अच्छी ख़ासी आमदानी होती थी उसकी। क्योंकि अकेले दुकान संभालना मुश्किल था तोउसने कांता को अपनी दुकान पर काम करने के लिए रख लि

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कड़वी हकीकत - बेस्टसेलर किताब

22 मई 2020
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सुरेश की उम्र करीब तीस साल और कद 5 फीट 4 इंचथा, सामने से सिर पर बाल थोड़े कम हो रखे थे, एक लंबा कुर्ता और खादी का झोला,हमेशा यही लुक था उसका। ज्यादातर उन विषयों पर लिखना पसंद करता था जिस पर लोगध्यान ही नहीं द

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भोला

23 मई 2020
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ठीक 30 बरस की उम्रमें हैजे से उसकी मौत हो गई, गांव से शहर ले जाया गया उसे। इससे पहले कि उसेअस्पताल ले जाया जाता, यमराज ने उसकी जीवन यात्रा को स्वर्ग तक मोड़ दिया, शायदवहीं गया

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दो बादाम एक- एक अनोखी प्रेम कहानी

26 मई 2020
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उसने उसके भिगोए हुएदो बादाम खा लिए, ये अब उसकी नियमित दिनचर्या का हिस्सा बन चुका था। वो हमेशाअस्वस्थ रहती थी, वो भी सिर्फ 23 साल की उम्र में जब उसका यौवन और सौंदर्य किसी कोभी प्रभावित कर सकता था लेकिन चांद में दाग की तरह कमजोरी के निशान उसके चेहरे परभी दिखाई देने लगे।उसके

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इंसानियत की परख़

27 मई 2020
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कुछ वर्षों पहले कीबात है सज्जनपुर में एक सेठ था जो करोड़ों कमाता था। उसने अपनी सहायता के लिए दीपकनाम के एक सचिव को नियुक्त किया था, क्योंकि सेठ की कोई संतान नहीं थी तो उन्होंने सोचा क्यों नासारी संपत्ति दीपक के नाम कर दी जाए। दीपक उनके बहीखातों का हिसाब तो अच्छी तरहर

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पवित्र जल

31 मई 2020
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“ओह कहां रह गई होगी आखिर वो? सारे कमरे में ढूंढनेके बाद सुधीर ने फिर कहा“अरे सुनती होतुमने कोशिश की ढूंढने की”?“हां बहुत ढूंढ ली नहीं मिली.” रमा ने कहा.थोड़ी देर बाद 17वर्षीय मनोहर जो कि उनका छोटा पुत्र था वो भी आ गया और कहने लगा “पिताजी धर्मशाला के आसपास की जिनती भी दु

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सदा सुहागन

2 जून 2020
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मनीषा औरविकास की ज़िंदगी यूं तो बहुत अच्छे से चल रही थी, घर में किसी सुविधा की कमी नहींथी। फिर भी मनीषा को एक अकेलापन हमेशा खाए जाता, विकास भी हाई सैलरी वाली जॉब कररहा था तो वहीं मनीषा एक प्राइमरी स्कूल में प

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मेरे अपने ?

8 जून 2020
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पुराने समय की बात हैनगर में सेठ ध्यानचंद रहते थे। वो अपने एक बेटे और पत्नी के साथ सुखमय जीवन व्यतीतकर रहे थे। उनकी दो बेटियां भी थी जिनका विवाह हो चुका था। उनके पुत्र का विवाह भीपड़ोसी शहर में रहने वाले कुलीन घर की कन्या से हुआ था। उनकी बेटे के भी दो छोटे –छोटे पुत्र थे।

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दहेज या प्यार ?

9 जून 2020
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श्याम गहरे सांवले रंग का लड़का था जिसका कद 5फीट 8 इंच था और उसकी काठी मध्यम थी, शायद उसके सांवले सलौने और मनोहर रुप के चलते ही उसके माता-पिताने उसका ये नाम रखा था। वो अपने पड़ोस में रहने वाली लड़की की तरफ काफी आकर्षित था,जो कि एक प्राइवेट अस्पताल में नर्स थी। मध्यम कद का

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सुनो जैसी हो वैसी ही रहना।

15 जून 2020
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“चलो यार ज़रा कैंची लाना मैं इसके सामने के थोड़े से बालकाट दूं.”“रेडीहो ना ? पीछे के बाल लंबे ही रहेंगे बस सामने से थोड़ा स्टाइलिशलुक आ जाएगा। क्या है आपका फ़ेस थोड़ा पतला है तो भरा भरा लगेगा.”“बहुत ज्यादा नहीं लेकिन थोड़ा बहुत ज़रुरी है मेक-अप भी,काजल की पतली धार, हल्क

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अवसाद से कैसे निपटे

17 जून 2020
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ऑनलाइन लव – प्यार या धोखा ?

19 जून 2020
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अचानक विजय के पास स्मृति का फोन आयाकहने लगी मुझे तुम एयरपोर्ट तक छोड़ दो ना।तब विजय चौंककर बोला “आजअचानक मुझे क्यों कॉल कर रही हो क्या तुम्हारे माता पिता नहीं छोड़ सकते हैतुम्ह

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ज़िंदगी कुछ ऐसे सिखाती है।

21 जून 2020
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जंगल सुंदरी

29 जून 2020
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ये कौन ? फिरंगी! हाय राम... जिन्होंने हमारे देश को गुलाम बनाया था। सतीश की 80साली दादी बोली।सतीश “अरे अंग्रेजों को भारत छोड़े हुए कई साल बीत चुके है वो तो बस घुमने फिरनेआते है हमारे देश में, जैसे कि हम उनके देशों की सैर करने जाते हैं." ये हमारेगांव में क्या कर रहा है ? "

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क्या सचमुच गलती फेयरनेस क्रीम की है ?

9 जुलाई 2020
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कुछ दिनों से क्रीम्स में जुड़े फेयरनेस शब्दको लेकर लोगों में एक नाराजगी देख रही हूं और कंपनी ने भी अपनी इस क्रीम से इस तरह के शब्द को हटाने काफैसला किया है, लेकिन कई क्रीम में सीधे सीधेफेयर शब्द नहीं जुड़ा है ग्लो या शाइन देने वाली बात कहकर भी अप्रत्यक्ष रुप सेगोरेपन को ही तव्वजोह दी जाती रही है।रह

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वीरान हवेली का राज

13 जुलाई 2020
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रात के 10 बजेथे। 18 साल की रज्जो अपनी साइकिल से खेतसे गुजरने वाले रास्ते से तेज-तेज गति में निकल रही थी। तभी धनिया वहां कुछ काम कररहा था, बोला “ अरे इतनी रात को क्या काम है तुझे ? क्या प्रेमी से मिलने जा रही है जो अंधेरे का वक्त चुना है तुने, कुछ डरहै कि नहीं तुझे, औरत ज

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तुलना खुद से ही।

15 जुलाई 2020
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कोई भी व्यक्तिप्रतिभावान हो सकता है चाहे वो किसी भी परिवेश या समाज से संबंध रखता हो। ये बातअलग है कि कहीं कहीं लोग अपने जान- पहचान वालों को ही मौका देना पसंद करते हैलेकिन इसका अर्थ ये नहीं कि आपको दूसरे इंसान को अपने से कमतर आंकने का अधिकार मिलगया है। कुछ इंसानों की बहुत बुरी आदत होती है कि वो हमेशा

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कोरोना संकट के वक्त हिलती आर्थिक स्थिती चिंताजनक।

17 जुलाई 2020
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मैं आर्थिक मामलों की विशेषज्ञ नहीं हूं केवलवर्तमान स्थिती पर अपना मत रख रही हूं। कोरोना ने कुछ दिनों लोगों को काफी डरायालेकिन ये डर कुछ ही दिन लोगों के मन में रहा, अब लोग सावधानी बरत रहे है लेकिनउन्हें संक्रमित होने से ज्यादा डर अपनी आजीविका खत्म होने का सता है। कई कं

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अतीत का सुख

19 जुलाई 2020
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एक बार कि बात है एक कस्बे में पति औरपत्नी रहते थे, दोनों की उम्र 25 साल थी वो दोनों ही विवाह के लिए मानसिक रुप सेतैयार नहीं थे हालांकि दोनों की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी। दोनों ही सजातीय थे औरदोनों के परिवार एक ही गांव में रहते थे तो उनके परिवा

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थोड़ी सी बेवफ़ाई

27 जुलाई 2020
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23साल की शालिनी अपनी नई जॉब को पाकर बेहद ख़ुश थी चलो कि अब उसे अपनी पॉकेट मनी केलिए अपने घरवालों के सामने हाथ तो नहीं फैलाना पड़ेगा। साथ ही वो अपने पैशन को भीफॉलो कर सकेगी।3महीने की इंटर्नशिप के बाद उसकी छोटे से युट्यूब चैनल में जॉब पक्की ह

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नीली जूती वाली लड़की

30 जुलाई 2020
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समुंदर की विशाल लहरें विशाखा के पैरों से टकरा रही थीवो समुंदर के और भीतर चली जा रही थी। जैसे कि अपना सारा दुख दर्द वो पानी से कहदेना चाहती हो। आज वो पूरी तरह भय मुक्त हो चुकी थी। तभी विष्णु की आवाज आई। येविशाल लहरें तुम्हें निगल जाएंगी क्या इसका आभास नहीं तुम्हें। कौन सा

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वीणावादक

6 अगस्त 2020
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काफी सालों पुरानी बातहै उत्कर्ष नगर में एक 20 वर्षीय वीणावादक के काफी चर्चे थे। वैसे तो वो एक मिट्टीसे बने छोटे घर में रहता था बहुत ज्यादा आय नहीं थी उसकी, लेकिन काफी प्रतिभाशालीथा, इसी वजह इसे कई धनाड्य घरों से वीणावादन के आमंत्रण मिला करते थे तो उसकागुजारा चल जाया करता

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चांद के पार चलो।

22 मार्च 2021
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आज नवीन की पेटिंग ने एक मशहूर कॉम्पीटिशन में पहला स्थान पाया था, आज मेल बॉक्स खोलकर देखा तो वो हैरान हो गया ऐसी तो किसी कॉम्पीटिशन में उसने भाग ही नहीं लिया था, तो फिर ऐसा कैसा हुआ। तभी उसने वहां फोन लगाया तो

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प्यार की अमर कहानी

3 अप्रैल 2021
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आज अदिती बेहद उदास थी तो सुमित ने उससे पूछा “क्या बात हैतुम्हारा मिज़ाज आज बदला-बदला सा क्यों है ?”“मैंने एक प्रेम कहानी पढ़ ली जिसमें नायिका नायकके चक्कर में अपनी जान से हाथ धो बैठती हैं।” अदिती ने कहा।“तो नहीं पढ़नी चाहिए थी।” सुमित ने कहा।“बहुत मशहूर थी और बेस्टसेलर भ

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असली मर्द

16 अप्रैल 2021
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सीमा और मनोज एक हीगांव में पले-बढ़े थे। आज पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर मनोज अपने दोस्त संग पंजालड़ा रहा था। तभी सीमा अपनी सहेली संग वहां आ पहुंची, बगल वाले पेड़ से बेरतोड़ने, एक-एक करके उसने बेर अपने दुप्पटे में लपेट कर बांध लिए।तभी पड़ोस की चंदाकाकी भी आ पहुंचीऔर बोली “अर

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जहां चाह वहां राह

21 अप्रैल 2021
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मानसीको दिल्ली आए हुए 6 महीने ही हुए थे, अभी उसके पति का मुंबई से दिल्ली ट्रांसफरहुआ था, जो कि एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर था। मानसी पूरा दिन घर पर अकेलामहसूस करती थी, हालांकी खाना वो खुद ही पकाती थी फिर भी बचे हुए वक्त में क्या करे? ये

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कोरोना काल में क्यों ज़रुरी है सकारात्मक रहना ?

23 अप्रैल 2021
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कोरोनाकाल के आंकड़े सचमुच चिंतित करने वाले है इसमें कोई दो राय नहीं लेकिन मेरा येमानना है कि अगर आप कमजोर इच्छाशक्ति वाले है तो दिन में 10 मिनिट से ज्यादान्यूज़ ना देखे अपन

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सुनैना

22 मई 2021
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वो देख नहीं सकती थी लेकिन अहसास पढ़ सकती थी, पांच साल तक उसकी आंखों की रोशनी ठीक ठाक थी, लेकिन एक बीमारी ने उसकी आंखों की रोशनी छीन ली। तभी उसका सार्थक सा नाम सुनैना उसके माता पिता को ना जाने क्यों अर्थहीन लगने लगा। कभी वो अपने भाग्य को कोसते तो कभी सुनैना की किस्मत को तो कभी कभी सुनैना को ही। सुन

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किताब का हक

9 जून 2021
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मनीषा का ब्याह स्कूल पास होते ही हो गया था,वो पढ़ने में बहुत तेज थी, लेकिन उसकी सुनता कौन?12 वीं पास होते हीउसके हाथ पीले कर दिये गए, वजह थी कि उसके गांव में कोई कॉलेजनहीं था, उसकी सभी दूर की बहनें शहर में रहती थी, तो उससे ज्यादा पढ़-लिखगई। अब उसकी उम्र 32 साल हो चुकी थी।

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सहमति

22 जून 2021
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दिशा की उम्र तीस साल हो चुकी थी, पीएचडी करते-करतेइतनी उम्र होना तो स्वाभाविक ही था, आज उसके घर के लोग बहुत खुश थे क्योंकि उनकेघर शहनाई बज रही थी। जल

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संस्कार कपड़े तय नहीं करते है।

4 जुलाई 2021
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रीमा आज अपने रिश्तेदार की शादी में पहुंची तभीवहां उसे कई महिलाओं ने घेर लिया।“अरेये क्या इतना चटखदार सलवार सूट पहनकर आ गई, अगर साड़ी पहन लेती तो कितना अच्छाहोता।’’“कई विवाह योग्य लड़के भी आते है यहां,तुम्हारा परिचय करा देते उनके माता पिता स

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लड़कियों को एक दायरे में सीमित करना बंद होना चाहिए।

14 जुलाई 2021
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अलग- अलग लड़कियों के अलग-अलग सपने होते है। कभी कभी हम यह कहकर उन्हें नकार देते है, कि येतो लड़कियों वाला काम नहीं है।जैसे कुछ लड़कियां पुलिस में या आर्मी में जानाचाहती है तो ये कहा जाता है कि ये तो लड़कों वाला काम है। लड़कियों की हमेशा सौम्यछवि हो ऐसा सभी चाहते है, लड़कियां भी बोल्ड हो सकती है।लड़क

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कागज पर लिखी बात ।

18 जुलाई 2021
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एक दिन रवि स्टेज पर खड़े होकर भाषण देरहा था।“इस देश में भाषा रीति-रिवाज सब की दीवारें गिर जानी चाहिए।क्यों हम ढो रहे है इनको ?घर की बेटी और बेटा बढ़ा रहे परिवार काअभिमान लेकिन भूल गए है क्या होता हैप्यार।दिलक

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घनी पलकें

21 जुलाई 2021
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राधिका और उसकी सहेली रसिका एक दिन किस्मतदेखने वाले एक इंसान के पास गए। वैसे राधिका का इन बातों पर ज्यादा यकीन नहीं था,क्योंकि रसिका जिद कर रही थ

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कयास

27 जुलाई 2021
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मधुमिता और स्मिताबहुत अच्छी सहेलियां थी। दोनों में खूब जमती थी।एक दिन मधुमिता ने स्मिताके को एक प्रोफेशनली क्वालिफाइ़ड, सुंदरऔर सुशील लड़के की तस्वीर दिखाई।तभी स्मिता के चेहरेपर उदासी आ गई वो कहने लगी “हां तु

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रूहानी प्यार

5 अगस्त 2021
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“कितने प्यारे इंसान हो आप, आपकी मुस्कान भीबहुत अच्छी है।’’“धन्यवाद” ये सुनकर सचिनकी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा।दिशा की कथक नृत्य केवीडियो उसके फेसबुक पेज पर डाले गए थे।कितनी सुंदर थी वो विशालनयन और चंद्रमा से भी

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पुनर्विवाह

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“क्या कर रही हो शैलजा ? ’’नानी ने पूछा।“मैंइस गुड्डें और गुड़ियां की शादी कर रही

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पसंद अपनी-अपनी

23 अगस्त 2021
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<h2><strong>सोमवार, 23 अगस्त 2021</strong></h2> <p><br></p> <p><br></p> <p><br></p> <h3><a href="htt

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व्यंग्य-आदर्श महिला बनने की ट्रेनिंग

8 जून 2022
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नीरज ने सोचा कि शहर की लड़कियों को आदर्श कैसे बनाया जाए, इसकी ट्रेनिंग दी जाए, तो कई लड़कियों की रुचि उसमें जगी। शहर की   कई लड़कियों ने उसमें दाखिला लिया। नीरज ने एक-एक करके सबकी पसंद पूछी “तुम कैसे

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