ना कोई फ़ीस लगती है ना कोई
सिफारिश लगती है.
चाटुकारिता की शिक्षा बिल्कुल मुफ़्त में मिलती है.
शिल्पा रोंघे
3 दिसम्बर 2019
ना कोई फ़ीस लगती है ना कोई
सिफारिश लगती है.
चाटुकारिता की शिक्षा बिल्कुल मुफ़्त में मिलती है.
शिल्पा रोंघे
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पत्रकार, लेखक, ब्लॉगर, कवि,
विभिन्न न्यूज चैनल में सबएडिटर के तौर पर काम करने का अनुभव और वेबमीडिया में फीचर लेखक के तौर काम किया है । फ्रीलांस लेखक के तौर पर कार्यरत । विभिन्न समाचार पत्र और पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन हुआ है । मास्टर्स इन जर्नलिज़्म ( एमसीआरपीवी )
पत्रकार, लेखक, ब्लॉगर, कवि,
विभिन्न न्यूज चैनल में सबएडिटर के तौर पर काम करने का अनुभव और वेबमीडिया में फीचर लेखक के तौर काम किया है । फ्रीलांस लेखक के तौर पर कार्यरत । विभिन्न समाचार पत्र और पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन हुआ है । मास्टर्स इन जर्नलिज़्म ( एमसीआरपीवी )